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देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–10 : 8 गौडमदर लोमड़ी // सुषमा गुप्ता

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8 गौडमदर लोमड़ी [1] एक बार की बात है कि एक गौडमदर [2] लोमड़ी थी और एक गौडमदर बकरी थी। गौडमदर लोमड़ी के पास एक छोटा सा घर था जिसमें छोटी छोटी क...

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8 गौडमदर लोमड़ी[1]

एक बार की बात है कि एक गौडमदर[2] लोमड़ी थी और एक गौडमदर बकरी थी। गौडमदर लोमड़ी के पास एक छोटा सा घर था जिसमें छोटी छोटी कुरसियाँ थीं, छोटे छोटे प्याले थे, छोटी छोटी प्लेटें थीं। थोड़े में कहो तो उसका घर बहुत अच्छा सजा हुआ था।

एक दिन गौडमदर बकरी कहीं बाहर गयी तो वह गौडमदर लोमड़ी का घर साथ ले गयी। यह देख कर गौडमदर लोमड़ी रोने लगी कि तभी वहाँ पर एक कुत्ता भौंकता हुआ आया और गौडमदर लोमड़ी से पूछा — “तुम क्यों रो रही हो गौडमदर लोमड़ी?”

गौडमदर लोमड़ी रोते हुए बोली — “गौडमदर बकरी मेरा घर ले गयी है अब मैं क्या करूँ।”

कुत्ता बोला — “चुप हो जाओ गौडमदर लोमड़ी। तुम रोओ नहीं। मैं उससे तुम्हारा घर तुम्हें वापस दिलवा दूँगा।”

सो कुत्ता गौडमदर बकरी के पास गया और उससे कहा — “तुम गौडमदर लोमड़ी का घर क्यों ले कर आयीं तुम उसका घर वापस कर दो।”

गौडमदर बकरी बोली — “मैं गौडमदर बकरी हूँ। मेरे पास एक तलवार है और अपने सींगों से मैं तुमको फाड़ कर रख दूँगी।” जब कुत्ते ने यह सुना तो वह वहाँ से चला गया।

फिर एक भेड़ गौडमदर लोमड़ी के पास से गुजरी तो उसने भी गौडमदर लोमड़ी को रोते देखा तो उससे पूछा — “तुम क्यों रो रही हो गौडमदर लोमड़ी?”

गौडमदर लोमड़ी ने उससे भी वही कहा जो उसने कुत्ते से कहा था कि “गौडमदर बकरी मेरा घर ले गयी है अब मैं क्या करूँ।”

सुन कर भेड़ ने भी गौडमदर लोमड़ी को तसल्ली दी और वह भी गौडमदर बकरी के पास गयी और उससे गौडमदर लोमड़ी का घर वापस करने के लिये कहा तो गौडमदर बकरी ने उसको भी वही जवाब दिया जो उसने कुत्ते को दिया था।

“मैं गौडमदर बकरी हूँ। मेरे पास एक तलवार है और अपने सींगों से मैं तुमको फाड़ कर रख दूँगी।”

वह जवाब सुन कर भेड़ भी उससे डर कर वहाँ से वापस चली आयी।

इस तरह कई जानवर गौडमदर लोमड़ी से यह पूछने आये कि वह क्यों रो रही थी और लोमड़ी ने सबसे यही कहा कि गौडमदर बकरी उसका घर ले गयी है वह इसलिये रो रही है।

सबने गौडमदर लोमड़ी से उसका घर वापस दिलवाने का वायदा किया पर गौडमदर बकरी का जवाब सुन कर किसी की हिम्मत नहीं हुई कि वह गौडमदर लोमड़ी का घर गौडमदर बकरी से वापस ला सके।

गौडमदर लोमड़ी के पास आने वालों जानवरों में एक चूहा भी था। उसने भी गौडमदर लोमड़ी से पूछा — “तुम क्यों रो रही हो गौडमदर लोमड़ी?”

गौडमदर लोमड़ी रोते हुए बोली — “गौडमदर बकरी मेरा घर ले गयी है अब मैं क्या करूँ?”

चूहा बोला — “चुप हो जाओ गौडमदर लोमड़ी। रोओ नहीं। मैं उससे तुम्हारा घर तुम्हें वापस दिलवा दूँगा।”

गौडमदर लोमड़ी ने सोचा इतने बड़े बड़े जानवर तो मेरा घर वापस कराने का वायदा करके गये पर कोई मेरा घर मुझे वापस नहीं दिला सका यह छोटा सा चूहा बेचारा क्या कर पायेगा। पर उसके पास तो और कोई चारा ही नहीं था।

सो चूहा भी गौडमदर बकरी के पास गया और उससे कहा — “देखो गौडमदर बकरी, तुम गौडमदर लोमड़ी का घर तुरन्त वापस कर दो नहीं तो तुम्हारी खैर नहीं।”

गौडमदर बकरी बोली — “क्या? तुम देख नहीं रहे कि मैं गौडमदर बकरी हूँ। मेरे पास एक तलवार है और अपने सींगों से मैं तुमको फाड़ कर रख दूँगी।”

यह सुन कर चूहा एकदम बोला — “और तुम देख नहीं रहीं कि मैं गौडफादर चूहा हूँ। मेरे पास लोहे का एक डंडा है जिसको मैं आग में गरम करके तुम्हारी पूँछ पर चिपका दूँगा।”

यह सुन कर तो गौडमदर बकरी बहुत डर गयी और उसने तुरन्त ही गौडमदर लोमड़ी का घर वापस कर दिया। गौडमदर लोमड़ी अपना घर वापस पा कर बहुत खुश हुई।

सो जो काम इतने बड़े बड़े जानवर नहीं कर पाये वह काम एक छोटे से चूहे ने कर दिया।

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नोट :—

इस कहानी के एक और रूप में एक बकरी एक नन के बिस्तर के नीचे फँस जाती है।

सो वहाँ से बाहर निकलने के लिये वह अपने पड़ोसियों को अपनी सहायता के लिये पुकारती है – एक कुत्ता, एक सूअर, एक मकड़ा ताकि वे उसको वहाँ से बाहर निकाल सकें पर केवल मकड़ा ही इस काम को कर पाता है। वह भी नन को ऐसी ही धमकी देता है जैसी इस कहानी में चूहे ने गौडमदर बकरी को दी थी।

यह कहानी नपोली में

यह कहानी इटली के नपोली शहर में भी कही सुनी जाती है। इस कहानी में एक बुढ़िया को चर्च में झाड़ू लगाते समय एक पैनी मिल जाती है जैसे “सैक्सटन की नाक” कहानी में सैक्सटन को मिलती है। वह यह नही समझ पाती कि वह उससे क्या खरीदे।

अन्त में वह उसका आटा खरीद लेती है ओर उसकी पुडिंग बनाती है। पुडिंग बना कर वह उसको मेज पर रख देती है और फिर से चर्च चली जाती है पर चर्च जाते समय घर की खिड़की बन्द करना भूल जाती है।

उसके जाने के बाद बकरियों का एक झुंड उधर से गुजरता है तो उस झुंड में से एक बकरी को पुडिंग की खुशबू आती है। वह खिड़की पर चढ़ जाती है ओर उस बुढ़िया की सारी पुडिंग खा जाती है।

जब वह बुढ़िया घर वापस आती है और अपने घर का दरवाजा खोलने की कोशिश करती है तो वह उसे खोल नहीं पाती क्योंकि एक बड़ी बकरी उस दरवाजे के पीछे खड़ी है। यह देख कर बुढ़िया रोने लगती है। उसको रोता देख कर बहुत सारे जानवर उसके पास रुक कर उसके रोने की वजह जानना चाहते हैं। वे भी उसके घर में घुसने की कोशिश करते हैं पर बकरी उन सबको यही जवाब देती है कि “अगर तुम यहाँ से नहीं गये तो मैं तुमको खा जाऊँगी।”

यह सुन कर सारे जानवर डर जाते हैं और वहाँ से भाग जाते हैं पर चूहा कहता है — “मैं गौडफादर चूहा हूँ। मेरे पास एक बहुत बड़ा डंडा है अगर तुम यहाँ से नहीं भागीं तो में उससे तुम्हारी ऑखें निकाल लूँगा।”

यह सुन कर बकरी वहाँ से भाग जाती है। वह बुढ़िया गौडफादर चूहे के साथ अपने घर में घुसती है फिर बाद में उससे शादी कर लेती है। उसके बाद वे दोनों बहुत दिनों तक खुशी खुशी रहते हैं।

ऐसी ही एक कहानी फ्लोरैन्स में

ऐसी ही एक कहानी इटली के फ्लोरैन्स शहर में भी कही सुनी जाती है। वहाँ इसका टाइटिल है “लोहे की बकरी”[3]। उसमें एक विधवा नहाने के लिये बाहर जाती है और अपने बेटे को घर छोड़ जाती है। और उससे कह जाती है कि वह घर का दरवाजा खुला न छोड़े ताकि वह लोहे के मुँह और लोहे की जीभ वाली लोहे की बकरी घर में न आ जाये।

कुछ समय बाद वह लड़का अपनी माँ के पीछे पीछे चल देता है। जब वह आधे रास्ते पहुँचता है तो उसको ध्यान आता है कि वह तो घर का दरवाजा खुला ही छोड़ आया है। वह वापस घर जाता है। घर पहुँच कर वह देखता है कि उसके घर में तो लोहे की बकरी घुस आयी है।

वह पूछता है “यहाँ कौन है?”

“यह मैं हूँ लोहे के मुँह और लोहे की जीभ वाली लोहे की बकरी। अगर तुम घर के अन्दर घुसोगे तो में तुम्हें शलगम[4] की तरह से काट दूँगी।” यह सुन कर बेचारा लड़का घर की सीढ़ियों पर ही बैठ गया और रोने लगा।

clip_image006एक और बड़ी उम्र की स्त्री उधर से गुजरी तो उसने उस लड़के को रोते हुए देख कर पूछा कि वह क्यों रो रहा था। लड़के ने उसे बताया कि वह क्यों रो रहा था। वह स्त्री बोली कि वह उस बकरी को तीन बुशैल[5] अनाज के बदले में बाहर निकाल देगी। पर वह बकरी नहीं मानी।

तो उसने लड़के से कहा — “मुझे तीन बुशैल अनाज की तो परवाह नहीं थी पर अफसोस मैं इस बकरी को तुम्हारे घर से बाहर नहीं निकाल सकी।”

उसके बाद एक बूढ़े ने भी अपनी कोशिश की पर वह भी उसको उस लड़के के घर से बाहर नहीं निकाल सका।

आखीर में एक छोटी सी चिड़िया आती है और तीन बुशैल बाजरे के बदले में उस बकरी को बाहर निकालने का वायदा करती है। पर जब बकरी अपनी पुरानी बात दोहराती है तो वह छोटी चिड़िया उससे कहती है “मेरे पास बहुत तेज़ चोंच है जिससे मैं तेरा दिमाग बाहर निकाल दूँगी।” यह सुन कर लोहे की बकरी डर जाती है और उस लड़के का घर छोड़ कर चली जाती है। लड़का उस चिड़िया को तीन बुशैल बाजरा दे देता है।


[1] The Godmother Fox (Story No 81)– a folktale from Italy from its Sicily Island.

Adapted from the book: “Italian Popular Tales”. By Thomas Frederick Crane. London, 1885.

Available free on :

https://books.google.ca/books?id=RALaAAAAMAAJ&pg=PR1&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false

[This story reminds us of several stories. There are other versions also of this story from Florence, Bologna and Venice.]

[2] A godmother is a female godparent in the Christian tradition. A Godmother may also refer to: a female arranged to be legal guardian of a child if an untimely demise is met by the parents.

[3] The Iron Goat

[4] Translated or the word “Turnip” – see its picture above.

[5] Bushel is a unit of dry measure containing 4 pecks, equivalent in the US for 35.24 liters and in Great Britain for 36.38 liters (Imperial bushel).

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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रचनाकार: देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–10 : 8 गौडमदर लोमड़ी // सुषमा गुप्ता
देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–10 : 8 गौडमदर लोमड़ी // सुषमा गुप्ता
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रचनाकार
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