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देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–8 : 5 दो समुद्री सौदागर // सुषमा गुप्ता

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5 दो समुद्री सौदागर [1] एक बार की बात है कि दो दोस्त थे। वे दोनों ही समुद्री सौदागर थे और बहुत बड़े सौदागर थे जिन्होंने सातों समुद्रों में अप...

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5 दो समुद्री सौदागर[1]

एक बार की बात है कि दो दोस्त थे। वे दोनों ही समुद्री सौदागर थे और बहुत बड़े सौदागर थे जिन्होंने सातों समुद्रों में अपने जहाज़ चला रखे थे।

उनमें से एक सौदागर के एक बेटा था पर दूसरे के कोई बच्चा नहीं था पर वे दोनों ही उस लड़के को बहुत प्यार करते थे।

एक दिन बिना बच्चे वाले सौदागर को अपना सामान बेचने के लिये जहाज. पर जाना था। जब वह जाने के लिये तैयार हुआ तो उसके दोस्त के बेटे ने उससे बहुत जिद की कि वह उसको भी साथ ले ले। क्योंकि इस तरह उसको भी जहाज़ चलाने और सामान बेचने का कुछ अनुभव हो जायेगा।

फिर उसने अपने पिता से भी बहुत कहा कि वह उसको उसके गौडफादर के साथ जहाज़ पर भेज दे। पर न तो उसका पिता और न ही उसका गौडफादर यह चाहता था कि वह अभी समुद्री यात्रा पर जाये।

पर जब वह लड़का नहीं माना तो दोनों को उसकी बात मानने के लिये राजी होना पड़ा सो वह अपने गौडफादर के जहाज़ के साथ वाले जहाज़ पर चल पड़ा।

चलते चलते वे गहरे समुद्र में आ गये। समय की बात कि वहाँ एक तूफान आ गया। वह तूफान इतना भयानक था कि दोनों जहाज़ एक दूसरे से अलग हो गये।

गौडफादर का जहाज़ तो उस तूफान में से बच कर बाहर आ गया पर उस नौजवान का जहाज़ समुद्र की तली में बैठ गया। जहाज़ पर जितने भी लोग थे सब डूब गये।

किस्मत से इस नौजवान को एक तख्ता मिल गया तो वह उसके सहारे तैर कर एक टापू के किनारे लग गया।

वहाँ वह नाउम्मीद सा इधर उधर घूमता रहा। घूमते घूमते वह एक ऐसे जंगल में आ गया जहाँ जंगली जानवर घूम रहे थे। उन जानवरों से डर कर उसने रात एक ओक के पेड़ के ऊपर गुजारी।

सुबह को जब उसने देख लिया कि उसके आस पास कोई जंगली जानवर नहीं है तो वह पेड़ से नीचे उतरा और उसने फिर उसी जंगल में घूमना शुरू कर दिया।

घूमते घूमते वह एक ऐसी ऊँची दीवार के पास आ गया जिसका तो उसको कोई ओर छोर ही दिखायी नहीं दे रहा था। वह पास के एक पेड़ पर चढ़ गया और फिर वहाँ से उस दीवार पर कूद गया।

वहाँ से उसने अन्दर झाँक कर देखा तो देखा कि उस दीवार के दूसरी तरफ तो पूरा का पूरा एक शहर बसा हुआ था। ऐसा लगता था कि जैसे वह दीवार उस शहर को जंगली जानवरों से बचाने के लिये बनायी गयी थी।

किसी तरह से वह नौजवान उस दीवार से शहर की तरफ नीचे की तरफ उतर गया और शहर में घुसा। उसने सोचा कि सबसे पहले वह कुछ खाने के लिये खरीदेगा फिर वह कुछ और करेगा सो वह एक सड़क पर चला जिसके दोनों तरफ दूकानें थीं।

clip_image002वहाँ वह एक बेकरी[2] की दूकान में घुस गया और उससे डबल रोटी माँगी पर दूकान वाले ने उसको कोई जवाब ही नहीं दिया।

clip_image004फिर वह एक सूअर का माँस बेचने वाले की दूकान पर गया और वहाँ पर उसने उससे सलामी माँगी पर उस दूकान वाले ने भी उसको कोई जवाब नहीं दिया।

इस तरह वह कई दूकानों पर गया पर किसी ने उसको कोई जवाब नहीं दिया।

नौजवान ने सोचा कि उसको उस जगह के राजा के पास जाना चाहिये और उससे बात करनी चाहिये कि यह सब क्या मामला है सो वह सीधे राजा के महल की तरफ चल दिया।

महल के दरवाजे पर पहुँच कर उसने चौकीदार से कहा कि वह राजा से बात करना चाहता था वह उसको राजा के पास ले चले पर चौकीदार भी कुछ नहीं बोला वह भी चुप ही रहा।

यह सब देख कर वह नौजवान बहुत परेशान हुआ क्योंकि वह किसी से बात ही नहीं कर पा रहा था। फिर वह खुद ही महल में चला गया और वहाँ के कमरों में घूमने लगा।

clip_image006घूमते घूमते वह एक बहुत ही सुन्दर कमरे में आ गया जिसमें एक शाही पलंग पड़ा हुआ था। उसके पास ही एक शाही मेज रखी थी जिसके ऊपर एक शाही हाथ धोने का बरतन रखा हुआ था।

उसने सोचा कि यहाँ तो मुझसे कोई कुछ कह ही नहीं रहा है सो मैं इस पलंग पर थोड़ी देर के लिये सो जाता हूँ। तभी दो नौजवान लड़कियाँ वहाँ आयीं और बिना कुछ बोले उन्होंने एक मेज पर रात का खाना लगाया। उसने पेट भर कर खाना खाया और फिर उसी पलंग पर सो गया।

इस तरह से उसने इस शान्त शहर से अपनी नयी ज़िन्दगी शुरू की। एक रात जब वह अपने इस शाही बिस्तर में सो रहा था तो वहाँ एक स्त्री अपनी दो दासियों के साथ आयी।

वह सिर से पाँव तक ढकी हुई थी। उसने उस नौजवान से पूछा — “क्या तुम साहसी हो?”

“हाँ हूँ।”

“अगर ऐसा है तो मैं तुमको अपना भेद बताती हूँ। मैं सम्राट स्कौरज़ोन[3] की बेटी हूँ। उन्होंने मरने से पहले एक जादूगर[4] से इस सारे शहर पर जादू डलवा दिया था। उस जादू में इस शहर में सारे रहने वाले, नौकर, सेना और मैं खुद भी शामिल थे।

पर अगर तुम मेरे साथ मुझको बिना देखे एक साल तक यहाँ रहोगे और मेरा यह भेद भी किसी के ऊपर भी नहीं खोलोगे तभी यह जादू टूटेगा। फिर तुम यहाँ के सम्राट हो जाओगे और मैं रानी और फिर सभी तुम्हारी तारीफ करेंगे।

नौजवान बोला — “मैं साहसी भी हूँ और ताकतवर भी।”

पर कुछ दिन बाद ही उसने उस लड़की से कहा कि वहाँ उसके साथ सारे साल शान्ति से रहने के लिये उसको अपने पिता के पास जा कर उनसे, अपनी माँ से और अपने गौडफादर सबसे इजाज़त लेनी पड़ेगी। लेकिन उन सबसे इजाज़त ले कर वह जल्दी ही वहाँ वापस लौट आयेगा।

हालँकि उस लड़की को उस पर पूरा यकीन नहीं था कि वह वहाँ से जा कर फिर वापस आ जायेगा पर फिर भी जब उस नौजवान ने उससे बार बार यही कहा तो उसने उसके लिये एक जहाज़ तैयार करा दिया और अपनी कुछ कीमती चीज़ें भी उसके जहाज़ पर रखवा दीं।

फिर उसने उसको एक छड़ी दी और कहा — “तुम यह छड़ी रखो। तुम जहाँ भी जाना चाहो इसको बोल देना यह तुमको उसी पल वहाँ पहुँचा देगी। पर एक बात तुम हमेशा याद रखना कि तुम मेरा यह भेद किसी पर खोलना नहीं।”

“ठीक है” कह कर वह नौजवान जहाज़ पर चढ़ा और उस छड़ी पर हाथ मारा तो उसने अपने आपको अपने पिता के शहर के बन्दरगाह पर पाया। उसने वे कीमती चीज़ें वहाँ की सबसे अच्छी सराय में ले जाने का हुकुम दिया और वह भी उसी सराय में जा कर ठहर गया।

उसने वहाँ के लोगों से पूछा — “क्या तुम लोग यहाँ किसी समुद्री सौदागर को जानते हो?”

लोगों ने बताया कि उस शहर में दो यात्री समुद्री सौदागर थे। वे दोनों आपस में बहुत अच्छे दोस्त थे और वहाँ के बहुत ही जाने माने सौदागर थे पर हाल ही में वे दोनों ही बहुत गरीब हो गये हैं।

उनमें से एक सौदागर के एक बेटा था जो एक बार दूसरे सौदागर के साथ उसके जहाज़ पर गया और वहाँ समुद्र में खो गया।

लोगों ने उसको बताया कि वह एक ऐक्सीडैन्ट था पर उसके पिता ने यह मानने से इनकार कर दिया कि वह एक ऐक्सीडैन्ट था।

पर उसने इसके लिये अपने दोस्त को जिम्मेदार ठहराया और उस पर मुकदमा चला दिया। उसी मुकदमे में दोनों अपना अपना पैसा गँवा बैठे।

यह सुन कर उस नौजवान ने अपने पिता को बुलवाया तो उसके पिता ने उसको पहचाना ही नहीं।

लड़का बोला — “मैं आपके और आपके साथी के साथ एक व्यापारिक रिश्ता जोड़ना चाहता हूँ क्योंकि आपको समुद्री सौदागर होने का अच्छा अनुभव है।”

पिता बोला — “यह नामुमकिन है। मैं और मेरा साथी दोनों ही दिवालिया हो चुके हैं क्योंकि हम लोग अपने बेटे के ऊपर मुकदमा लड़ रहे थे और उसी में हमारा सारा पैसा खत्म हो गया है। ऐसा इस लिये हुआ क्योंकि मेरे साथी की वजह से मेरा बेटा मर गया।”

नौजवान बोला — “इस बात का इससे कोई मतलब नहीं है कि आपके पास पैसा है या नहीं है। व्यापार के लिये पैसा मैं लगाऊँगा।”

फिर उसने अपने पिता के लिये बहुत बढ़िया खाना लाने का आर्डर दिया और पिता के दोस्त को भी बुलवा लिया। उन दोनों की पत्नियों को भी बुलवा लिया गया। किसी ने भी उसको नहीं पहचाना।

जब उस सराय में सबने एक दूसरे को देखा तो दोनों आदमी और उनकी पत्नियाँ एक दूसरे पर चिल्ला पड़े और लड़ने लगे क्योंकि अब तो वे एक दूसरे के दुश्मन थे।

उन्होंने साथ खाने की कोशिश तो की पर क्योंकि अब वे एक दूसरे के दुश्मन हो चुके थे इसलिये उनके गले से खाना नीचे ही नहीं उतर पा रहा था।

तब उस नौजवान ने अपनी प्लेट से एक चम्मच भर कर खाना उठाया और अपने पिता की तरफ यह कहते हुए बढ़ाया — “पिता जी, अपने बेटे के हाथ से यह कौर स्वीकार कीजिये। आपका बेटा ज़िन्दा है सुरक्षित है और आपके सामने बैठा है।”

यह सुन कर वे सब खुशी से उछल पड़े। खुशी से पागल हो कर सब एक दूसरे से गले मिले और रो पड़े। लड़के ने अपनी लायी कीमती चीज़ें अपने पिता और गौडफादर में बाँट दीं ताकि वे फिर से अपना काम शुरू कर सकें।

फिर वह बोला — “पिता जी, अभी मुझे जाना है इसलिये अभी तो मैं चलूँगा। फिर मिलते हैं, अच्छा विदा।”

माँ ने पूछा — “पर तू जा कहाँ रहा है बेटा?”

लड़का बोला — “यह मैं आपको अभी नहीं बता सकता।”

पर जब उसकी माँ उससे बार बार पूछती ही रही तो आखिर उसे सम्राट स्कोरज़ोन की बेटी के बारे में बताना ही पड़ा जिसको उसने किसी भी हालत में किसी को भी बताने से मना कर रखा था। और अगर उसने बता दिया तो फिर वह उसको कभी नहीं देख पायेगा – और वह तो बहुत सुन्दर थी।

यह सुन कर माँ बोली — “सुन, मैं तुझे एक टैनब्रे[5] मोमबत्ती देती हूँ। जब वह लड़की सो जाये तो इस मोमबत्ती को जला देना। तब तू इस मोमबत्ती की रोशनी में उसे देखना कि वह कैसी लगती है।”

लड़के ने माँ से वह मोमबत्ती ले ली और अपने जहाज़ पर चढ़ गया। उसने अपनी छड़ी पर फिर हाथ मारा तो वह सम्राट स्कोरज़ोन के शहर के बन्दरगाह पर था। वहाँ से वह शाही महल गया जहाँ सम्राट की बेटी उसका इन्तजार कर रही थी। रात को वे लोग सोने चले गये।

वह लड़का तो रात होने का और उस राजकुमारी के सोने का ही इन्तजार कर रहा था कि कब वह सोये और कब वह मोमबत्ती जला कर उसकी सुन्दरता को देखे।

सो जब वह सो गयी तो उसने अपनी माँ की दी हुई मोमबत्ती उठायी, उसको जलाया और उसके चेहरे से उसका परदा उठाना शुरू किया।

पर तभी मोमबत्ती के पिघलते हुए मोम की एक बूँद उस लड़की के चेहरे के ऊपर गिर पड़ी जिससे वह जाग गयी और चिल्लायी — “दगाबाज, तुमने मेरा भेद खोल दिया अब तुम मुझे कभी आजाद नहीं करा पाओगे। उफ़ बहुत मुश्किल है।”

लड़का बोला — “मुझे बहुत अफसोस है पर फिर भी मैं तुमको आजाद कराने की पूरी कोशिश करूँगा। क्या कोई और रास्ता नहीं है?”

राजकुमारी बोली — “है, मगर बहुत कठिन है। तुम जंगल जाओ और उस जादूगर से जा कर लड़ो जिसने हम सबके ऊपर यह जादू कर रखा है और उसे मार दो। तभी हम सब आजाद हो सकते हैं।”

“और उसको मारने के बाद?”

“उसको मारने के बाद तुम उस जादूगर का पेट खोलोगे तो उसमें तुमको एक खरगोश मिलेगा। उस खरगोश को भी काट दोगे तो उसमें तुमको एक फाख्ता[6] मिलेगी।

फाख्ता को भी काट दोगे तो उसके अन्दर तुमको तीन अंडे मिलेंगे। उन अंडों की तुम अपनी जान की तरह से हिफाजत करना और उनको यहाँ ले आना। बस ध्यान रखना कि वे टूटें नहीं।

तभी सारा शहर और हम सब इस जादू से आजाद हो पायेंगे नहीं तो हम सब इस जादू के असर में हमेशा के लिये पड़े सड़ते रहेंगे और हमारे साथ साथ तुम भी। यह छड़ी लो और जा कर उससे लड़ो।”

लड़के ने उससे वह छड़ी ली और वहाँ से चल दिया। रास्ते में उसको गायों का एक झुंड मिला। वह उन गायों के मालिक से मिला और बोला — “जनाब क्या आप मुझे थोड़ी सी डबल रोटी देंगे? मैं यहाँ खो गया हूँ और बहुत भूखा हूँ।”

गायों के मालिक ने उसे खाना खिलाया और उसको अपने पास गाय चराने के लिये चरवाहा रख लिया। उसके पास कई और चरवाहे भी थे।

एक दिन गायों के मालिक ने उन सब चरवाहों से कहा — “इन गायों को घास के मैदान में चराने के लिये ले जाओ पर जो कुछ भी तुम करो सो करो पर तुम उनको जंगल में भटकने मत देना। क्योंकि वहाँ एक जादूगर रहता है जो आदमियों को ही नहीं मारता बल्कि गायों को भी मार देता है।”

वह लड़का गायों का एक झुंड ले कर चला गया और जब गायें जंगल के पास पहुँचीं तो उसने उनको चिल्ला कर उसी जंगल में भेज दिया जिसमें गायों के मालिक ने उनको भेजने के लिये मना किया था।

मालिक को जब यह पता चला तो उसने पूछा कि अब उनको उस जंगल में से निकाल कर लायेगा कौन। उधर कोई भी चरवाहा जाने के लिये तैयार नहीं था सो मालिक ने उसी नये चरवाहे को उस जंगल में उन गायों को लाने के लिये भेज दिया।

साथ में उसने उसके साथ एक लड़का और भी भेज दिया। वे जंगल में घुसे तो उस साथ में गये लड़के को बहुत डर लगा।

उधर जादूगर ने जब गायों को अपने जंगल में देखा तो वह गुस्से के मारे आग बबूला हो गया। उसने लोहे की एक छड़ निकाली और उसको ले कर बाहर आया। उस छड़ में छह काँटे लगे हुए थे।

वह लड़का तो उस जादूगर को देख कर इतना डर गया कि वह एक बड़ी सी झाड़ी में छिप गया। पर वह नया चरवाहा वहीं खड़ा रहा और उस जादूगर के अपने पास तक आने का इन्तजार करता रहा।

वह जादूगर उस लड़के के पास आ कर बोला — “ओ गद्दार, तेरी यह हिम्मत कैसे हुई कि यहाँ आ कर तू मेरा जंगल बरबाद करे?”

नया चरवाहा बोला — “मैं यहाँ तुम्हारा केवल जंगल ही बरबाद करने नहीं आया बल्कि उसको बरबाद करने के साथ साथ तुमको भी मारने आया हूँ।”

और फिर दोनों में लड़ाई शुरू हो गयी। वे दोनों काफी देर तक लड़ते रहे। सारा दिन लड़ते लड़ते वे थक तो गये पर इस लड़ाई में किसी को खरोंच तक नहीं आयी।

तब वह जादूगर बोला — “अगर मैंने डबल रोटी के साथ सूप और शराब पी ली होती तो मैंने तुझे सूअर की तरह काट डाला होता।”

इस पर नये चरवाहे ने जवाब दिया — “अगर मैंने दूध और डबल रोटी खा ली होती तो मैंने तो तेरा सिर ही काट डाला होता।”

फिर दोनों ने एक दूसरे को विदा कहा और अगले दिन अपनी लड़ाई फिर से जारी रखने का वायदा करके वहाँ से चले गये।

अगले दिन नये चरवाहे ने अपनी गायें इकठ्ठी कीं, अपने साथ आये लड़के को लिया और बाड़े में आ गया। उन सबको ज़िन्दा देख कर किसी के मुँह से एक शब्द भी नहीं निकला।

लड़के ने उन सबको नये चरवाहे और जादूगर के बीच हुई लड़ाई का पूरा हाल सुनाया। उसने उन लोगों के सामने उनमें आपस में कहे गये शब्द भी बार बार दोहराये।

उसने जादूगर की इच्छा भी बतायी कि अगर उसने डबल रोटी का सूप और शराब पी ली होती तो वह नये चरवाहे को सूअर की तरह काट डालता। और नये चरवाहे की इच्छा भी बतायी कि अगर नये चरवाहे ने दूध और डबल रोटी खा ली होती तो वह उसका सिर काट डालता।

यह सुन कर गायों के मालिक ने अपने एक नौकर को नये चरवाहे के लिये डबल रोटी और दूध लाने का हुकुम दिया और उसको उनको अपने साथ जंगल ले जाने के लिये कहा।

सो अगले दिन उस नये चरवाहे ने डबल रोटी और दूध लिया और अपनी गायें चराने जंगल चल दिया। उधर वह जादूगर भी आ गया। दोनों की लड़ाई फिर से शुरू हो गयी।

जब उनकी लड़ाई अपने पूरे ज़ोर पर थी तो जादूगर बोला — “अगर मैंने डबल रोटी के साथ सूप और शराब पी ली होती तो मैं तुमको सूअर की तरह काट डालता।” पर वहाँ डबल रोटी सूप और शराब तो थी ही नहीं।

इस पर नया चरवाहा बोला — “अगर मैंने दूध और डबल रोटी खा ली होती तो मैं तेरा सिर काट डालता।”

और उसी समय उसके साथ आये लड़के ने उसको एक बालटी भर दूध और डबल रोटी दे दी। नये चरवाहे ने एक डबल रोटी खायी और उस बालटी में से एक बड़ा सा घूँट दूध पिया और फिर तुरन्त ही उस जादूगर के सिर पर एक ज़ोर का घूँसा मारा। घूँसा खा कर जादूगर नीचे गिर पड़ा और मर गया।

clip_image010उसने तुरन्त ही जादूगर का पेट खोला तो उसमें उसे एक खरगोश मिला। खरगोश को काटा तो फाख्ता मिली और फाख्ता को खोला तो उसमें उसके तीन अंडे मिले।

उसने वे तीनों अंडे निकाले और उनको सँभाल कर दूर रख दिया। अपनी गायों को हाँक कर वह बाड़े में ले गया। वहाँ उसका खूब ज़ोर शोर से स्वागत हुआ।

गायों का मालिक उसको अपने खेत पर रखना चाहता था पर उस नौजवान ने मना कर दिया। उसने जादूगर का जंगल गायों के मालिक को भेंट कर दिया और खुद उसको विदा कह कर वहाँ से चला गया।

उसने जंगल में रखे फाख्ता के वे तीनों अंडे उठाये और अपने शहर चल दिया। जब वह अपने शान्त शहर में वापस आया तो वह तुरन्त ही शाही महल में गया।

वह राजकुमारी उससे मिलने के लिये बाहर तक दौड़ी आयी और उसका हाथ पकड़ कर उसको अन्दर ले गयी। वह उसको सम्राट के छिपे हुए कमरे में ले गयी।

वहाँ उसने अपने पिता का ताज उठाया और उस नौजवान के सिर पर रख दिया और बोली — “आज से तुम इस शहर के बादशाह हो और मैं तुम्हारी रानी।”

फिर वह उसको महल के छज्जे पर ले गयी वहाँ जा कर उसने वे तीनों अंडे अपने हाथ में लिये और बोली — “लो, इसमें से एक अंडा अपने दाँये हाथ की तरफ फेंक दो, दूसरा अंडा अपने बाँये हाथ की तरफ फेंक दो और तीसरा अंडा बिल्कुल अपने सामने की तरफ फेंक दो।”

जैसे ही उसने वे तीनों अंडे फेंके शहर के सारे लोगों ने बात करना शुरू कर दिया। सारा शहर शोर शराबे से गूँज उठा। लगता था जैसे सोया शहर जाग गया हो। बच्चे शोर मचाने लगे, गाड़ियाँ सड़क पर दौड़ने लगीं, सेना अपने आपको सँभालने लगी, चौकीदार बदलने लगे और सब एक साथ चिल्लाये “सम्राट की जय हो। सम्राट ज़िन्दाबाद”।

राजकुमारी ने उस नौजवान से शादी कर ली और वे ज़िन्दगी भर राजा और रानी रहे – पर हम लोग तो अभी भी गरीब हैं।

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[1] The Two Sea Merchants (Story No 171) – a folktale from Italy from its Palermo area.

Adapted from the book : “Italian Folktales”, by Italo Calvino. Translated by George Martin in 1980.

[2] Bakery is a place where the things are made by the process of baking, such as bread, biscuits, cakes, buns etc.

[3] Scorzone

[4] Translated for the word “Sorcerer”.

[5] Tanbrae

[6] Translated for the word “Dove”. See its picture above.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,348,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी 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कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,865,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,24,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1932,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,659,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,703,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,61,साहित्यम्,2,साहित्यिक गतिविधियाँ,186,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,69,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
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रचनाकार: देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–8 : 5 दो समुद्री सौदागर // सुषमा गुप्ता
देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–8 : 5 दो समुद्री सौदागर // सुषमा गुप्ता
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रचनाकार
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