देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–9 : 1 दो बहिनें // सुषमा गुप्ता

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देश विदेश की लोक कथाएं — यूरोप–इटली–9 :

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इटली की लोक कथाएं–9

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संकलनकर्ता

सुषमा गुप्ता

Cover Page picture: Colosseum, Rome, Italy

Published Under the Auspices of Akhil Bhartiya Sahityalok

E-Mail: sushmajee@yahoo.com

Website: http://sushmajee.com/folktales/index-folktales.htm

Read More such stories at: www.scribd.com/sushma_gupta_1

Copyrighted by Sushma Gupta 2014

No portion of this book may be reproduced or stored in a retrieval system or transmitted in any form, by any means, mechanical, electronic, photocopying, recording, or otherwise, without written permission from the author.

Map of Italy

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विंडसर, कैनेडा

मार्च 2017

Contents

सीरीज़ की भूमिका 4

इटली की लोक कथार्ऐं9 5

1 दो बहिनें 7

2 दो खच्चर हॉकने वाले 15

3 जियोवानूज़ा लोमड़ी 23

4 एक बच्चा जिसने क्रास को खाना खिलाया 39

5 सींगों वाली राजकुमारी 45

6 जियूफ़ा 60

7 फ्रा इगनैज़ियो 82

8 सोलोमन की सलाह 85

9 एक आदमी जिसने डाकुओं को लूटा 94

10 शेरों की घास 100

11 ननों की कौनवैन्ट और साधुओं की मोनैस्टरी 117

12 सेन्ट ऐन्थोनी की भेंट 129

13 मार्च और चरवाहा 134

14 जौन बालेन्टो 137

15 आजा मेरे थैले में कूद जा 149

सीरीज़ की भूमिका

लोक कथाएं किसी भी समाज की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा होती हैं। ये संसार को उस समाज के बारे में बताती हैं जिसकी वे लोक कथाएं हैं। आज से बहुत साल पहले, करीब 100 साल पहले, ये लोक कथाएं केवल ज़बानी ही कही जातीं थीं और कह सुन कर ही एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को दी जाती थीं इसलिये किसी भी लोक कथा का मूल रूप क्या रहा होगा यह कहना मुश्किल है।

आज हम ऐसी ही कुछ अंग्रेजी और कुछ दूसरी भाषा बोलने वाले देशों की लोक कथाएं अपने हिन्दी भाषा बोलने वाले समाज तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। इनमें से बहुत सारी लोक कथाएं हमने अंग्रेजी की किताबों से, कुछ विश्वविद्यालयों में दी गयी थीसेज़ से, और कुछ पत्रिकाओं से ली हैं और कुछ लोगों से सुन कर भी लिखी हैं। अब तक 1200 से अधिक लोक कथाएं हिन्दी में लिखी जा चुकी हैं। इनमें से 400 से भी अधिक लोक कथाएं तो केवल अफ्रीका के देशों की ही हैं।

इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि ये सब लोक कथाएं हर वह आदमी पढ़ सके जो थोड़ी सी भी हिन्दी पढ़ना जानता हो और उसे समझता हो। ये कथाएं यहाँ तो सरल भाषा में लिखी गयी है पर इनको हिन्दी में लिखने में कई समस्याएं आयी है जिनमें से दो समस्याएं मुख्य हैं।

एक तो यह कि करीब करीब 95 प्रतिशत विदेशी नामों को हिन्दी में लिखना बहुत मुश्किल है. चाहे वे आदमियों के हों या फिर जगहों के। दूसरे उनका उच्चारण भी बहुत ही अलग तरीके का होता है। कोई कुछ बोलता है तो कोई कुछ। इसको साफ करने के लिये इस सीरीज़ की सब किताबों में फुटनोट्स में उनको अंग्रेजी में लिख दिया गया हैं ताकि कोई भी उनको अंग्रेजी के शब्दों की सहायता से कहीं भी खोज सके। इसके अलावा और भी बहुत सारे शब्द जो हमारे भारत के लोगों के लिये नये हैं उनको भी फुटनोट्स और चित्रों द्वारा समझाया गया है।

ये सब कथाएं “देश विदेश की लोक कथाएं” नाम की सीरीज के अन्तर्गत छापी जा रही हैं। ये लोक कथाएं आप सबका मनोरंजन तो करेंगी ही साथ में दूसरे देशों की संस्कृति के बारे में भी जानकारी देंगी। आशा है कि हिन्दी साहित्य जगत में इनका भव्य स्वागत होगा।

सुषमा गुप्ता

मई 2016

इटली की लोक कथाएं–9

इटली देश यूरोप महाद्वीप के दक्षिण पश्चिम की तरफ स्थित है। पुराने समय में यह एक बहुत ही शक्तिशाली राज्य था। रोमन साम्राज्य अपने समय का एक बहुत ही मशहूर राज्य रहा है। उसकी सभ्यता भी बहुत पुरानी है – करीब 3000 साल पुरानी। इसका रोम शहर 753 बीसी में बसाया हुआ बताया जाता है पर यह इटली की राजधानी 1871 में बना था। इटली में कुछ शहर बहुत मशहूर हैं – रोम, पिसा, फ्लोरैन्स, वेनिस आदि। यहाँ की टाइबर नदी बहुत मशहूर है। यूरोप में लोग केवल लन्दन, पेरिस और रोम शहर ही घूमने जाते हैं।

रोम में कोलोज़ियम और वैटिकन अजायबघर सबसे ज़्यादा देखे जाते हैं। पिसा में पिसा की झुकती हुई मीनार संसार का आदमी द्वारा बनाये गये आठ आश्चर्यों में से एक है। इटली का वेनिस शहर नहरों में बसा हुआ एक शहर[1] है। इस शहर में अधिकतर लोग इधर से उधर केवल नावों से ही आते जाते हैं। यहाँ कोई कार नहीं है कोई सड़क पर चलने वाला यातायात का साधन नहीं है, केवल नावें हैं और नहरें हैं। शायद तुम्हें मालूम नहीं होगा कि असल में वेनिस शहर कोई शहर नहीं है बल्कि 118 द्वीपों को पुलों से जोड़ कर बनाया गया है इसलिये ये नहरें भी नहरें नहीं हैं बल्कि समुद्र का पानी है और वह समुद्र का पानी नहर में बहता जैसा लगता है।

इटली का रोम कैसे बसा? कहते हैं कि रोम को बसाने वाला वहाँ का पहला राजा रोमुलस था। रोमुलस और रेमस दो जुड़वाँ भाई थे जो एक मादा भेड़िया का दूध पी कर बड़े हुए थे। दोनों ने मिल कर एक शहर बसाने का विचार किया पर बाद में एक बहस में रोमुलस ने रेमस को मार दिया और उसने खुद राजा बन कर 7 अप्रैल 753 बीसी को रोम की स्थापना की। इटली के रोम शहर में संसार का मशहूर सबसे बड़ा कोलोज़ियम[2] है जहाँ 5000 लोग बैठ सकते हैं। पुराने समय में यहाँ लोगों को सजाएं दी जाती थीं।

इटली में ही वैटीकन सिटी है जो ईसाई धर्म के कैथोलिक लोगों का घर है पर यह एक अपना अलग ही देश है। वहाँ इसके अपने सिक्के और नोट हैं। इसकी अपनी सेना है। पोप इस देश का राजा है। इसका अजायबघर बहुत मशहूर है। यह संसार का सबसे छोटा देश है क्षेत्र में भी और जनसंख्या में भी – 842 आदमी .4 वर्ग मील के क्षेत्र में बसे हुए।

इटली की बहुत सारी लोक कथाएं हैं। इटली की सबसे पहली लोक कथाएं 1550 में लिखी गयी थीं। इतालो कैलवीनो[3] का लोक कथाओं का यह संग्रह इटैलियन भाषा में 1956 में संकलित करके प्रकाशित किया गया था। इनका सबसे पहला अंग्रेजी अनुवाद 1962 में छापा गया। उसके बाद सिलविया मल्कही[4] ने इनका अंग्रेजी अनुवाद 1975 में प्रकाशित किया। फिर मार्टिन ने इनका अंग्रेजी अनुवाद 1980 में किया। ये लोक कथाएं हम मार्टिन की पुस्तक से ले कर अपने हिन्दी भाषा भाषियों के लिये यहाँ हन्दी भाषा में प्रस्तुत कर रहे हैं। आशा है कि ये लोक कथाएं तुम लोगों को पसन्द आयेंगी।

इतालो ने इस पुस्तक में 200 लोक कथाएं संकलित की हैं। हमने उन 200 लोक कथाओं में से 125 लोक कथाएं चुनी हैं। फिर भी क्योंकि वे बहुत सारी लोक कथाएं हैं इसलिये वे सब पढ़ने की आसानी के लिये एक ही पुस्तक में नहीं दी जा रही हैं। इससे पहले हम इटली की लोक कथाओं के आठ संकलन[5] प्रकाशित कर चुके हैं जिनमें हमने वहाँ की क्रमशः 15, 17, 10, 11, 18, 13, 12 और 14, यानी अब तक 110 लोक कथाएं, प्रकाशित कर चुके हैं। तुम सब लोगों को यह जान कर प्रसन्नता होगी कि वे सभी पुस्तकें बहुत पसन्द की गयीं।

तो अब यह प्रस्तुत है तुम्हारे हाथों में इटली की लोक कथाओं का नवाँ संकलन – “इटली की लोक कथाएं–9”। इसमें हम वहाँ की इतालो की पुस्तक से ली गयी नम्बर 183 से 200 तक की 15 लोक कथाएं प्रस्तुत कर रहे हैं। हमें आशा ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि यह नवाँ संकलन भी तुम लोगों को पहले आठ संकलनों की तरह ही बहुत पसन्द आयेगा और मजेदार लगेगा।

1 दो बहिनें

[6]

एक बार की बात है कि दो बहिनें थीं – एक बहिन मारकीज़[7] थी और दूसरी बहिन बहुत गरीब थी।

मारकीज़ की एक बहुत बदसूरत सी बेटी थी और उस गरीब बहिन के तीन बेटियाँ थीं। वे तीनों अपनी रोजी रोटी कमाने के लिये सूत कातने का काम करती थीं।

एक दिन उनके पास मकान का किराया देने के लिये पैसे नहीं थे तो उनके मकान मालिक ने उनको घर से बाहर निकाल दिया और वे सड़क पर आ गयीं।

मारकीज़ का नौकर उधर से गुजर रहा था तो उसने मारकीज़ की बहिन और उसकी बेटियों को सड़क पर खड़ा देखा तो मारकीज़ को जा कर उनके बारे में बताया।

उसने मारकीज़ से उनको शरण देने की प्रार्थना की और वह तब तक उससे प्रार्थना करता रहा जब तक वह उनको अपने सामने वाले दरवाजे के ऊपर वाले कमरे में रखने के लिये तैयार नहीं हो गयी।

शाम को लड़कियाँ बैठीं और रोज की तरह वे लालटेन की रोशनी में अपना काम करने लगीं ताकि वे अपने लैम्प का तेल बचा सकें। पर यह मारकीज़ को अच्छा नहीं लगा।

उसने सोचा कि वे चीज़ें बरबाद कर रही हैं इसलिये उसने लालटेन बुझा दी। वे लड़कियाँ फिर चाँदनी में अपना सूत कातने लगीं।

एक शाम सबसे छोटी लड़की ने निश्चय किया कि वह तब तक जाग कर काम करेगी जब तक चाँद छिपेगा। सो जब चाँद उतरने लगा तो वह भी सूत कातती हुई उसके पीछे पीछे चल दी।

इस तरह वह जब वह उसके साथ चलते और सूत कातते हुए उसके पीछे पीछे चली जा रही थी तो एक तूफान में फँस गयी। वहीं पास में उसको एक मौनेस्टरी[8] दिखायी दी तो वह शरण लेने के लिये उस मौनेस्टरी में चली गयी।

मौनेस्टरी में उसको 12 साधु[9] मिले। उन्होंने उस लड़की से पूछा — “बेटी तुम इस तूफान में यहाँ क्या कर रही हो?”

वह बोली — “बाहर तूफान आया हुआ है सो मैं उस तूफान से बचने के लिये यहाँ आ गयी हूँ।”

उनमें से जो सबसे बड़ा साधु था वह बोला — “भगवान करे तुम और भी ज़्यादा प्यारी होती जाओ।”

दूसरा साधु बोला — “जब तुम अपने बालों में कंघी करो तो तुम्हारे बालों में से हीरे और मोती झड़ें।”

clip_image007तीसरा साधु बोला — “जब तुम अपने हाथ धोओ तो तुम्हारे हाथों से कई प्रकार की मछलियाँ और ईल मछली[10] गिरें।

चौथा साधु बोला — “जब तुम बोलो तो तुम्हारे मुँह से गुलाब और चमेली के फूलों की बारिश हो।”

पाँचवे साधु ने कहा — “तुम्हारे गाल दो सेबों की तरह से हो जायें।”

छठे साधु ने कहा — “जब तुम काम करो तो जैसे ही तुम उसे शुरू करो तो वह उसी समय खत्म हो जाये।”

तब तक तूफान थम चुका था सो उन्होंने उसको जाने का रास्ता दिखाया और कहा कि जब वह आधे रास्ते पहुँच जाये तो पीछे मुड़ कर देखे।

इसके बाद वह लड़की वहाँ से चली गयी। उसने उन साधुओं के कहे अनुसार आधे रास्ते जा कर पीछे मुड़ कर देखा तो वह तो इतनी चमकीली हो गयी जैसे कि तारा।

जब वह घर पहुँची तो उसने पहला काम तो यह किया कि उसने एक बरतन में पानी भरा और उसमें अपने हाथ डुबो दिये। तुरन्त ही उस बरतन में दो ताजा र्ईल मछली आ गयीं जैसे उनको अभी अभी पकड़ कर लाया गया हो।

उसकी माँ और बहिनों को यह देख कर बड़ा आश्चर्य हुआ तो उन्होंने उससे कहा कि वह उनको सब बात बताये कि यह सब कैसे हुआ।

फिर उन्होंने उसके बालों में कंघी की तो उनमें से बहुत सारे हीरे और मोती निकल पड़े। उसकी माँ और बहिनों ने उन सबको इकठ्ठा कर लिया और वे उनको अपनी मारकीज़ मौसी के पास ले गयीं।

मारकीज़ ने तुरन्त ही उनसे उसका सारा हाल पूछा और अपनी बेटी को वहाँ भेजने का निश्चय किया क्योंकि उसकी लड़की को तो सुन्दरता की बहुत ज़्यादा जरूरत थी।

उसने अपनी बेटी को छज्जे पर खड़े हो कर पूरी शाम इन्तजार करने के लिये कहा। और जब चाँद ढलने लगा तो उसने उसको भी सूत कातते हुए चाँद के पीछे पीछे भेजा।

उसको वह मौनेस्टरी भी मिल गयी और वहाँ वे 12 साधु भी मिल गये जो उसकी मौसी की लड़की को मिले थे। उन साधुओं ने उस लड़की को तुरन्त पहचान लिया कि वह मारकीज़ की बेटी थी और साथ में यह भी जान लिया कि वह वहाँ क्यों आयी थी।

वहाँ बैठे सबसे बड़े साधु ने कहा — “भगवान करे तुम और ज़्यादा बदसूरत हो जाओ।”

दूसरे साधु ने कहा — “जब तुम अपने बालों में कंघी करो तो तुम्हारे बालों से बहुत सारे साँप निकलें।”

clip_image009तीसरा साधु बोला — “जब तुम अपने हाथ धोओ तो तुम्हारे हाथों से बहुत सारे हरे गिरगिट निकलें।”

चौथा साधु बोला — “जब तुम बोलो तो तुम्हारे मुँह से बहुत सारी गन्दगी निकले।”

इसके बाद उन्होंने उसको वहाँ से भेज दिया। मारकीज़ तो अपनी बेटी के वापस आने का बहुत बेचैनी से इन्तजार कर रही थी पर जब उसकी बेटी घर वापस लौटी तो उसने देखा कि वह तो पहले से भी ज़्यादा बदसूरत हो गयी थी।

यह देख कर उसकी माँ को तो इतना धक्का लगा कि वह तो बस मरते मरते ही बची।

उसने उससे पूछा कि उसके साथ क्या हुआ था तो जैसे ही उसने बोलने के लिये मुँह खोला तो उसके मुँह से बहुत सारी गन्दगी निकलते देख कर तो वह बेहोश ही हो गयी।

इस बीच वह सुन्दर लड़की एक बार दरवाजे के पास बैठी थी कि एक राजा उधर से गुजरा। राजा ने उसको देखा तो उसको उस लड़की से प्रेम हो गया। उसने शादी के लिये उसका हाथ माँगा तो उसकी मारकीज़ मौसी ने हाँ कर दी।

वह लड़की अपनी मारकीज़ मौसी के साथ जो उसकी सबसे ज़्यादा करीब की रिश्तेदार थी उस राजा के साथ उसके देश चली गयी।

थोड़ी दूर जाने के बाद राजा आगे आगे चला गया ताकि वह अपने महल में अपनी पत्नी का ठीक से स्वागत कर सके। जैसे ही राजा आँखों से ओझल हुआ तो मारकीज़ ने दुलहिन को पकड़ कर उसकी आँखें निकाल कर उसको एक गुफा में फेंक दिया और अपनी बेटी को राजा की गाड़ी में बैठा दिया।

जब राजा ने अपनी रानी की बदसूरत बहिन को गाड़ी से उतरते देखा तो वह डर गया।

उसने धीरे से पूछा — “इसका क्या मतलब है?”

लड़की ने इसका जवाब देने के लिये अपना मुँह खोला ही था कि उसकी साँस की बू से राजा वहीं बेहोश सा गिर पड़ा।

तब मारकीज़ ने राजा को एक कहानी बना कर सुनायी कि उस लड़की पर किसी ने जादू कर दिया है उस जादू की वजह से वह वैसी हो गयी है।

पर राजा को इस कहानी पर विश्वास नहीं हुआ और उसने उन दोनों माँ बेटी को जेल में डलवा दिया।

उधर वह अन्धी लड़की उस गुफा में पड़ी पड़ी रोती रही और सहायता के लिये पुकारती रही। तभी वहाँ से एक बूढ़ा गुजर रहा था। उसने उसका रोना और चिल्लाना सुना तो उसके पास आया। उसको उस बुरी दशा में देख कर वह उसको उठा कर अपने घर ले गया।

अब उसका घर तो हीरे और मोतियों से, गुलाब और चमेली के फूलों से और ईल और मछलियों से भर गया। उसने उन सबसे दो टोकरियाँ भर लीं और उनको ले कर राजा की खिड़की के नीचे उनको बेचने के लिये खड़ा हो गया।

लड़की ने उससे कहा था कि वह राजा को वे हीरे जवाहरात आँखों के बदले में बेचे सो जब मारकीज़ ने उस बूढ़े को जवाहरात खरीदने के लिये बुलाया तो उसने उससे उनकी वही कीमत माँगी।

मारकीज़ ने अपनी बहिन की लड़की की एक आँख दे कर उन सब सुन्दर चीज़ों को खरीद लिया। उसने सोचा कि वह राजा से यह कहेगी कि यह सब उसकी बेटी ने पैदा किया है।

बूढ़ा वह एक आँख ले कर वहाँ से चल दिया और वह एक आँख ला कर उस लड़की को दे दी। उस लड़की ने अपनी वह आँख अपनी आँख की जगह लगा ली।

अगले दिन वह फिर वैसी ही टोकरियाँ ले कर महल गया और उनको भी उसने एक आँख के बदले में बेचने के लिये कहा।

मारकीज़ जो राजा को इस बात का विश्वास दिलाने के लिये बहुत उत्सुक थी कि वह हीरे मोती फूल मछलियाँ आदि सब उसकी बेटी ने पैदा किये थे उसने उस बूढ़े से वे दोनों टोकरियाँ भी अपनी बहिन की बेटी की दूसरी आँख दे कर खरीद लीं।

पर राजा को इस बात का विश्वास नहीं दिलाया जा सका कि वह सब उस लड़की ने ही पैदा किया है क्योंकि वह जब भी उस लड़की के पास जाता तो उसकी साँसों से अभी भी वैसी ही बू आती जैसी कि पहली बार आयी थी।

अब उस गरीब बहिन की लड़की को तो अपनी आँखें मिल गयीं थीं सो एक दिन उसने एक कपड़े पर कढ़ाई करके अपनी तस्वीर बनायी और उस तस्वीर को बूढ़े को दे कर बेचने के लिये उसी सड़क पर रखवा दिया जिस पर राजा का महल था।

राजा उधर से निकला तो उसने वह तस्वीर देखी तो उसने बूढ़े से पूछा — “यह तस्वीर किसने बनायी है?”

बूढ़े ने उसको सारी कहानी सुना दी। तो राजा बोला कि वह उस लड़की से मिलना चाहता है। बूढ़ा राजा को अपने घर ले गया। राजा ने उस लड़की को पहचान लिया और वह उसको अपने महल ले आया।

मारकीज़ को उसने गरम तेल में डाल कर उबाल कर मार दिया और अपनी रानी के साथ खुशी से रहने लगा। बाद में उसने अपनी रानी के परिवार को भी अपने महल में बुलवा लिया।

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[1] City of Canals

[2] Colosseum

[3] “Italian Folktales: collected and retold by Italo Calvino. Translated by George Martin. San Diego, Harcourt Brace Jovanovich, Publishers. 1980. 300 p.

[4] Sylvia Mulcahy

[5] “Italy Ki Lok Kathayen-1” – 15 folktales (No 1-18), by Sushma Gupta in Hindi languge

“Italy Ki Lok Kathayen-2” – 17 folktales (No 19-40), by Sushma Gupta in Hindi language

“Italy Ki Lok Kathayen-3” – 10 folktales (No 41-61), by Sushma Gupta in Hindi language

“Italy Ki Lok Kathayen-4” – 11 folktales (No 62-84), by Sushma Gupta in Hindi language

“Italy Ki Lok Kathayen-5” – 18 folktales (No 85-126), by Sushma Gupta in Hindi language

“Italy Ki Lok Kathayen-6” – 13 folktales (No 129-150), by Sushma Gupta in Hindi language

“Italy Ki Lok Kathayen-7” – 12 folktales (No 151-164), by Sushma Gupta in Hindi language

“Italy Ki Lok Kathayen-8” – 14 folktales (No 165-182), by Sushma Gupta in Hindi language

[6] The Two Cousins (Story No 183) – a folktale from Italy from its Province of Regusa area.

Adapted from the book : “Italian Folktales”. Translated by George Martin in 1980.

[7] Marquise – the wife of a Marquis (Noble Man)

[8] A monastery is the building or complex of buildings comprising the domestic quarters and workplace(s) of monastics, whether monks or nuns, and whether living in communities or alone (hermits). The monastery generally includes a place reserved for prayer which may be a chapel, church or temple, and may also serve as an oratory.

[9] Translated for the word “Monk”

[10] Eel fish – see its picture above

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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