देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–9 : 12 सेन्ट ऐन्थोनी की भेंट // सुषमा गुप्ता

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12 सेन्ट ऐन्थोनी की भेंट[1]

यह बहुत पहले की बात है जब दुनियाँ में आग नहीं हुआ करती थी। लोग बहुत ठंड में रहा करते थे। क्योंकि वे उस ठंड को सहन नहीं कर पा रहे थे सो एक दिन वे सेन्ट ऐन्थोनी के पास गये। सेन्ट ऐन्थोनी खुद उस समय सहायता माँगने के लिये रेगिस्तान में गये हुए थे।

सेन्ट ऐन्थोनी को लोगों पर दया आ गयी। पर आग तो क्योंकि नरक में रहती थी इसलिये उन्होंने नीचे जाने का विचार किया और वहाँ से आग लाने का प्लान बनाया।

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सेन्ट बनने से पहले सेन्ट ऐन्थोनी सूअरों के झुंड चराया करते थे। उनके सूअरों के झुंड में से एक सूअर का बच्चा उनका बड़ा वफादार था। वह कभी उनका साथ नहीं छोड़ता था। वह जहाँ भी जाते थे वह भी वहीं उनके पीछे पीछे जाता था।

सेन्ट ऐन्थोनी के पास एक सौंफ की डंडा[2] भी था सो सेन्ट ऐन्थोनी अपने उस सूअर के बच्चे और सौंफ के डंडे को ले कर नरक की सीढ़ियों पर पहुँचे और जा कर नरक का दरवाजा खटखटाया।

“दरवाजा खोलो। दरवाजा खोलो। मुझे बहुत ठंड लग रही है। मुझे थोड़ी गरमी चाहिये।”

नरक के दरवाजे पर खड़े शैतानों ने देखा कि यह तो कोई पापी नहीं है बल्कि यह तो एक सेन्ट है सो वे बोले — “नहीं नहीं। तुम अन्दर नहीं आ सकते। तुम तो एक सेन्ट हो। हम तुमको जानते हैं। तुम पापी नहीं हो। तुम यहाँ नहीं आ सकते।”

सेन्ट ऐन्थोनी ने उनसे प्रार्थना की — “पर मुझे अन्दर तो आने दो। मुझे बहुत ठंड लग रही है।” उनका सूअर भी वहीं दरवाजे पर अपना पैर अड़ाये खड़ा रहा।

शैतानों ने कहा — “यह सूअर तो अन्दर आ सकता है पर तुम नहीं।” कह कर उन्होंने बस इतना थोड़ा सा ही दरवाजा खोला जिसमें से केवल वह सूअर ही अन्दर आ सकता था। जैसे ही सूअर अन्दर आ गया उन्होंने दरवाजा बन्द कर दिया।

अब जैसे ही सेन्ट ऐन्थोनी का सूअर नरक के अन्दर गया वह तो सारे नरक में इधर से उधर घूमने लगा, चीज़ें फेंकने लगा, शोर मचाने लगा।

शैतान उसके पीछे जलती हुई डंडियाँ ले कर भागने लगे। वे उसको कुछ कुछ चीजें. उठा कर मारते भी थे पर वे उसको किसी तरह भी काबू में नहीं कर पा रहे थे।

सब शैतानों को उसने पागल कर रखा था और वे शैतान भी न तो उसको पकड़ ही पा रहे थे और न ही उसको नरक से बाहर निकाल पा रहे थे।

आखिर वे सेन्ट के पास आये जो अभी भी नरक की सीढ़ियों पर खड़ा था। वे उससे बोले — “तुम्हारा वह सूअर नरक में बहुत शोर शराबा मचा रहा है। अन्दर आ कर उसको बाहर ले जाओ।”

सो सेन्ट ऐन्थोनी नरक के अन्दर गये और अपने डंडे से सूअर को छुआ। सूअर उसी समय शान्त हो गया।

सेन्ट ऐन्थोनी बोले — “जब तक मैं यहाँ हूँ क्या मैं कुछ देर के लिये यहाँ बैठ सकता हूँ. और यहाँ की गरमी ले सकता हूँ?” और वह आग की तरफ अपने हाथ बढ़ा कर एक कौर्क[3] के थैले के ऊपर बैठ गये।

हर कुछ मिनट बाद कोई न कोई शैतान उनके पास से गुजर जाता जो लूसीफ़र[4] को जा कर धरती पर की किसी न किसी आत्मा की खबर ले जा कर उसको देता कि फलाँ शैतान ने फलाँ आत्मा को पाप में लगा दिया। और हर बार सेन्ट ऐन्थोनी उसकी पीठ पर अपना सोंफ का डंडा मारते।

शैतान बोले — “हमें इस तरह की हँसी अच्छी नहीं लगती। अपना यह डंडा अपने पास ही रखो।”

यह सुन कर सेन्ट ऐन्थोनी ने अपना डंडा ऊपर उठाया और उसकी नोक को जमीन की तरफ करते हुए अपने सहारे खड़ा कर लिया।

इतने में एक शैतान चिल्लाता हुआ आया और बोला — “लूसीफ़र लूसीफ़र। एक आत्मा और।” और वह जल्दी में सेन्ट ऐन्थोनी के डंडे से ठोकर खा कर मुँह के बल गिर पड़ा।

शैतान बोले — “यह ठीक है। तुमने इस डंडे से हमको काफी परेशान किया है अब हम इस डंडे को जला देंगे।” कह कर उन्होंने उस डंडे को उठाया और आग में फेंक दिया।

उसी समय सेन्ट ऐन्थोनी के सूअर ने फिर से नरक में शोर शराबा मचाना शुरू कर दिया। वह लकड़ी के टुकड़ों को आग में से निकाल कर और वहाँ पड़ी दूसरी चीज़ों को इधर उधर फेंकने लगा।

सेन्ट ऐन्थोनी बोले — “अगर तुम चाहते हो कि मैं इस सूअर को शान्त रखूँ तो तुमको मेरा डंडा वापस देना पड़ेगा।”

यह सुन कर उन्होंने उनको उनका डंडा वापस कर दिया और इसके बाद उनका वह सूअर भी शान्त हो गया।

अब वह डंडा तो सोंफ़ का था और सोंफ़ की लकड़ी का गूदा थोड़ा सा मुलायम होता है। अगर राख का कोई जलता हुआ कण भी उस पर आ गिरे तो वह उसमें चुपचाप सुलगता रहता है। वह आग बाहर से नहीं देखी जा सकती।

इसलिये शैतानों को यह पता ही नहीं चला कि सेन्ट ऐन्थोनी की उस सौंफ़ के डंडे में आग थी। शैतानों को उपदेश दे कर सेन्ट ऐन्थोनी ने अपना डंडा उठाया अपने सूअर को लिया और नरक से चल दिये। सेन्ट ऐन्थोनी के वहाँ से चले जाने पर शैतानों ने चैन की साँस ली।

सेन्ट ऐन्थोनी नरक से धरती पर आये। उन्होंने अपना डंडा उठाया और आग की तरफ के सिरे की तरफ से उसको चारों तरफ घुमाते हुए लोगों को आशीर्वाद देते हुए उसमें भरी हुई चिनगारियाँ चारों तरफ बिखेर दीं। फिर उन्होंने गाया —

आग ओ आग, हर जगह के लिये

मैं सारी दुनियाँ को यह आग देता हूँ ताकि तुम लोग कभी काँपो नहीं

उस समय के बाद से आदमी को आराम देने के लिये आग धरती पर आ गयी। सेन्ट एन्थोनी अपना ध्यान करने के लिये फिर से रेगिस्तान चले गये।


[1] St Anthony’s Gift (Story No 197) – a folktale from Italy from its Logudoro area.

Adapted from the book : “Italian Folktales”, by Italo Calvino. Translated by George Martin in 1980.

[2] Translated for the words “Fennel staff” – see Fennel’s plant picture above.

[3] Cork is a very light material made of a tree bark grown for commercial use. It can float over water. It is mostly used to make a stopper to bottles but can be used to make many things.

[4] Lucifer word has been mentioned in KJV of Bible only once, but otherwise has appeared in several Christian religious books – all meaning a good man. Otherwise as a proper noun it refers to Devil.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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