नारनौल में अंतर्राष्ट्रीय नागरी लिपि व बाल साहित्य सम्मेलन आयोजित

नारनोल, दिनांक 31 मार्च 2018 ।
नागरी विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक लिपि है यह निष्कर्ष है स्थानीय सेक्टर स्थित मानव भवन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय नागरी लिपि सम्मेलन का। नागरी लिपि परिषद नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ परमानंद पांचाल की अध्यक्षता तथा सिंघानिया विश्वविद्यालय पचेरी बड़ी राजस्थान के कुलपति डॉ उमाशंकर यादव के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस सम्मेलन में बांग्लादेश के एक, नेपाल के 3 विद्वानों के अतिरिक्त भारत के 7 राज्यों के 3 दर्जन विद्वानों ने सहभागिता की । ढाका बांग्लादेश से डॉ योगेश वाशिष्ठ ने नागरी लिपि को भारत की सर्वोच्च उपलब्धि बताते हुए कहा इसकी वैज्ञानिकता अक्षरों की बनावट तथा सार्थकता सभी को अभिभूत कर लेती है ।उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार में हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ दिनेश चमोला ने कहा कि देवनागरी का मूल स्रोत ब्राह्मी लिपि है तथा यह बहुत समृद्ध लिपि है। कंचनपुर नेपाल से पधारे लक्ष्मी दत्त भट्ट ने नागरी को अंतरराष्ट्रीय लिपि बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की तथा बताया कि नेपाल की राजभाषा नेपाली और द्वितीय भाषा राजभाषा मैथिली दोनों की लिपि देवनागरी है । खटीमा उत्तराखंड के सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त डॉ राज किशोर सक्सेना ने नागरिक को विश्व की सर्वाधिक संपन्न और शास्त्रीय लिपि बताया, वही भीलवाड़ा राजस्थान से पधारे बाल वाटिका पत्रिका के संपादक भैरूलाल गर्ग ने कहा कि टंकण, मुद्रण और लेखन तीनों ही दृष्टियों से देवनागरी की वैज्ञानिकता इसकी लोकप्रियता और सर्व स्वीकार्यता का मूल आधार है ।

कलाडी केरल के डॉ एच बालासुब्रमण्यम ने कहा की भाषाई सामंजस्य और राष्ट्रीय एकता के लिए लिपि की एकरूपता अत्यंत आवश्यक है । आर आर बी एम यूनिवर्सिटी अलवर राजस्थान के रजिस्ट्रार डॉ अनूप सिंह ने कहा कि देवनागरी विश्व की एकमात्र ऐसी लिपि है जिसके लिखित और उच्चारित रूप में कोई अंतर नहीं है । मुख्य अतिथि डॉ उमाशंकर यादव ने स्पष्ट किया कि देवनागरी लिपि के सभी दोषों से मुक्त है। अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ परमानंद पांचाल देवनागरी को राष्ट्रीय एकता का सूत्र बताते हुए इसकी मजबूती पर बल दिया तथा कहा कि भारत की लिपि विभिन्न भाषाओं और बोलियों के लिए देवनागरी सर्वोत्तम लिपि सिद्ध हो सकती है। नागरी लिपि परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ हरिसिंह पाल ने कहा कि देश की राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दृष्टि से हिंदी को संपर्क भाषा तथा देवनागरी को संपर्क लिपि बनाना आवश्यक है। सम्मेलन को चीफ ट्रस्टी डॉ रामनिवास मानव के अतिरिक्त भीमदत्त नेपाल के गोविंद सिंह बिष्ट, महेंद्र नगर के रामचंद्र नेपाल, नोएडा उत्तर प्रदेश के संतोष कुमार शर्मा खेतड़ी राजस्थान के डॉ आनंद, रायपुर छत्तीसगढ़ के डॉ सत्यनारायण सत्य, जयपुर राजस्थान के हरिश्चंद्र, कोसली की डॉ लाज कौशल आदि विद्वानों ने भी संबोधित किया।

डॉ जितेंद्र भारद्वाज के कुशल संचालन में नारनौल में संपन्न हुई अपने ढंग के इस पहले समारोह में अलवर के संजय पाठक बाबा कानपुरी ने काव्य पाठ भी किया। इस अवसर पर नागरी लिपि परिषद की मुख पत्रिका नागरी संगम के नए अंक का विमोचन किया गया तथा लक्ष्मीदत भट्ट कंचनपुर नेपाल, गोबिन्द सिंह बिष्ट भीमदतनगर नेपाल, रामचंद्र नेपाल महेन्द्र नगर नेपाल, डॉ योगेश वासिष्ठ ढाका, डॉ परमानन्द पांचाल व डॉ हरीसिंह पाल नई दिल्ली, डॉ एच बालसुब्रमण्यम कलाड़ी केरल, डॉ दिनेश चमोला हरिद्वार उत्तराखंड, डॉ अनूप सिंह अलवर राजस्थान सहित लगभग 1 दर्जन हिंदी सेवी विद्वानों को डॉ मनुमुक्त मानव नागरी सम्मान भी प्रदान किया गया। हिसार के हैड्रोलॉजिस्ट राकेश कुमार , सूचना अधिकार मंच के अध्यक्ष संजय शर्मा, परमानन्द दीवान, जिला बाल कल्याण अधिकारी विपिन शर्मा, दुलीचन्द शर्मा, डॉ शिवताज सिंह, देवेंद्र शर्मा, डॉ पंकज गौड़ ,दुलीचंद शर्मा गजानंद कौशिक कृष्ण कुमार शर्मा एडवोकेट, किशन लाल शर्मा सतनारायण वर्मा, हरगोविंद अग्रवाल रामशरण लांबा गीता शर्मा, नंदलाल खानपुरा डॉ कांता भारती,  पुष्प लता शर्मा आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही

डॉ कांता भारती
571 हुडा सेक्टर 1 पार्ट 2
नारनौल 123001
हरियाणा
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नारनौल में इंडो नेपाल बाल साहित्य सम्मेलन आयोजित

नारनौल, स्थानीय हुडा सेक्टर-1  पार्ट 2 स्थित मनमुक्त भवन में बाल साहित्य और नैतिकता विषय पर केंद्रित इंडो-नेपाल बाल साहित्य सम्मेलन रविवार 1 अप्रैल को दो सत्रों में संपन्न हुआ । हरियाणा संस्कृत अकादमी पंचकूला के उपाध्यक्ष डॉ श्रेयांश द्विवेदी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित बाल साहित्य विमर्श सत्र की अध्यक्षता खटीमा उत्तराखंड से पधारे पूर्व सहायक आयुक्त डॉ राज किशोर सक्सेना ने की । इस सत्र में उत्तराखंड संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार में हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ दिनेश चमोला, संगरिया राजस्थान के वरिष्ठ बाल साहित्यकार गोविंद शर्मा, रायपुर राजस्थान के डॉ सत्यनारायण सत्य, गुरुग्राम हरियाणा के घमंडी लाल अग्रवाल, पूर्व प्राचार्य डॉ शिवताज सिंह, जिला बाल कल्याण अधिकारी विपिन शर्मा, महेंद्रनगर नेपाल के रामचंद्र नेपाल, सीतापुर उत्तर प्रदेश क डॉ शैलेन्द्र सिंह तथा कंचनपुर नेपाल के ही लक्ष्मीदत्त भट्ट आदि विद्वानों और बाल साहित्यकारों ने बाल साहित्य में नैतिकता के महत्व और नैतिक शिक्षा की आवश्यकता पर विस्तृत विचार विमर्श किया। यह निष्कर्ष बार-बार उभरकर सामने आया कि नैतिक शिक्षा से ही बच्चों को अच्छे संस्कार दिए जा सकते हैं । अतः नैतिक शिक्षा के बिना बाल साहित्य अधूरा और अप्रासंगिक है ।

भीलवाड़ा राजस्थान से प्रकाशित बाल वाटिका पत्रिका के संपादक डॉ भैरूलाल गर्ग की अध्यक्षता तथा डॉ श्रेयांश द्विवेदी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित द्वितीय सत्र में भीम दत्त नगर नेपाल के पूर्व प्राचार्य गोविंद सिंह बिष्ट, आर आर बी एम विश्वविद्यालय अलवर राजस्थान के कुलसचिव डॉ अनूप सिंह ,जिला बाल कल्याण परिषद् की चेयर पर्सन मंजू कौशिक, नीति आयोग भारत सरकार की हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य घमण्डी लाल अग्रवाल, हरियाणा स्कूली पाठ्यक्रम समिति के सदस्य डॉ पंकज गौड़ आदि विद्वानों ने बाल साहित्य के स्वरूप स्थिति और महत्व पर प्रकाश डालते हुए उसमें नैतिकता के महत्व को प्रतिपादित किया। निष्कर्ष रूप में संस्कृत अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ श्रेयांश द्विवेदी ने कहा कि अपसंस्कृति के कारण बच्चों में आ रही विकृतियां चिंताजनक है तथा इन्हें नैतिक शिक्षा द्वारा ही समाप्त किया जा सकता है। चीफ ट्रस्टी डॉ रामनिवास मानव के प्रेरक सानिध्य में संपन्न हुए इस सम्मेलन में बाल वाटिका पत्रिका के नए अंक का विमोचन मुख्य अतिथि द्वारा किया गया तथा डॉ भैरू लाल गर्ग, भादरा राजस्थान के प्राचार्य डॉ भीमसिंह , राज किशोर सक्सेना, डॉ गोविंद शर्मा ,डॉ दिनेश चमोला, डॉ जितेंद्र भारद्वाज, डॉ छतर सिंह वर्मा ,डॉ पंकज गोड और घमंडीलाल अग्रवाल सहित एक दर्जन बाल साहित्यकारों का सम्मान मनुमुक्त मानव मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा किया गया।

उल्लेखनीय है कि महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा निर्मित डॉटर ऑफ महेंद्रगढ़ फ़िल्म का प्रदर्शन भी समारोह भी किया गया। इस अवसर पर हिसार के हाइड्रोलॉजिस्टि राकेश कुमार जनता कॉलेज दादरी के पूर्व प्राचार्य डॉ आर एन यादव, हरियाणा शिक्षा बोर्ड के पूर्व उप सचिव दुली चंद शर्मा नर नारायण सेवा समिति के अध्यक्ष परमानंद दीवान पूर्व प्राचार्य गजानंद कोशिक किशन लाल शर्मा अलवर के संजय पाठक और प्रेम प्रकाश शर्मा ,सरदार बलदेव सिंह चहल सरदार संतोख सिंह जय प्रकाश शर्मा ,नंदलाल खामपुरा रामस्वरूप लांबा अजीत सिंह सतवीर चौधरी मुन्नीलाल रामपत चौहान ट्रस्टी कांता भारती अंजू निमहोरिया सुनीता शर्मा की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही

डॉ कांता भारती
हुडा सेक्टर 1 पार्ट 2
नारनोल 123001
हरियाणा

फ़ोटो केप्शन

1. सम्मेलन को सम्बोधित करते मुख्य अतिथि डॉ श्रेयांश द्विवेदी
2. बालसाहित्यकार डॉ राजकिशोर सक्सेना को सम्मानित करते मुख्य अतिथि व ट्रस्ट के चीफ ट्रस्टी

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