लघु कथाः बस अब और नहीं // गिरधारी राम

सुमन माँ से झूठ बोल रही थी! माँ ने पूछा था कि आखिर तुम झूठ क्यों बोल रही हो? आखिर बताती क्यों नहीं क्यों नहीं कि हुआ क्या? क्या आज नीरज ने तुम्हें आज फिर परेशान किया, मारा-पीटा! सुमन की माँ गौर से देख रही थी, सुमन का मुंह सुजा हुआ था। वह सुमन के नजदीक जाकर उसकी साड़ी का पल्ला के पीछे की तरफ, ब्लाऊज हटाकर देखा…., सुमन की पूरी पीठ पर लाल-लाल चकते उभर आये थे। शायद नीरज नें आज फिर सुमन को अपने बेल्ट से मारा था।

सुमन ने माँ की तरफ घूर कर कहा- माँ.. प्लीज.. प्लीज... नीरज से कुछ भी न कहना। तुमसे हाथ जोड़कर विनती करती हूँ। माँ तुम जानती हो नीरज मुझे बहुत प्यार भी तो करता है। बस थोड़ी सी शराब पी लेता है तभी वह मार-पीट करता है पर मैं इसका बुरा नहीं मानती हूँ। यह शब्द बोलते-बोलते सुमन का गला भर आया था और आँखों से आँसू के दो बूँदे उसकी गालों पर छलक आयी थी।

नीरज की सारी गलतियों को छुपाकर सुमन आज माँ के सामने महान बन गयी थी। यही वो औरत है जो हजारों मुसीबत सहने के उपरांत भी अपना परिवार तोड़ना नहीं चाहती। वह तो किसी भी हाल में अपना परिवार को बचाये रखना चाहती है। सुमन की माँ को अपनी बेटी का दुख देखा न जाता पर अपने बेटी की विनती के आगे नतमस्तक हो गयी थी।

सुमन, नीरज की सब यातनाएँ सह रही थी बस इसीलिए कि दो मासूम बच्चे बड़े हो जाय। नीरज को तो बस नौकरी से मतलब था इसके बाद शराब। और पुरूष को चाहिए क्या? यह क्या नीरज सोच पायेगा कि उसकी बुरी आदतों की वजह से पूरा का पूरा परिवार नष्ट हो रहा था।

इधर नीरज कुछ सालों से वह हमेशा शराब पीने की जुगत में रहता। घर का राशन हो या न हो पर उसको शराब चाहिए। बच्चों की क्या जरूरतें होती है, बच्चे कौन स्कूल में पढ़ेंगे, बच्चों को क्या नाश्ता चाहिए, क्या खाना चाहिए इन सारी समस्याओं से नीरज कोसों दूर था।

दरअसल गलती नीरज की नहीं है वह तो हमारा समाज का आईना भर है। इस पुरूष प्रधान समाज में स्त्री को कानूनन बराबरी का तो दर्जा है परंतु हमारे आम जनजीवन में स्त्री को पुरूष, पैरों की जूती समझता है। और हमेशा दबा कर रखना चाहता है। यही तो गंदी मानसिकता है।

किसी तरह दो-चार साल और बीते होंगे, एक दिन नीरज शराब के नशे में घर रात को दस बजे आया और खाना मांग रहा था। जैसे ही सुमन ने बोला कि आज आटा खत्म हो गया था इसीलिए रोटी बना नहीं पायी... ,तुरंत एक बार फिर सुमन को मारने के लिए नीरज ने अपना बेल्ट उतार लिया था । आज सुमन का स्वाभिमान जाग उठा। नीरज ज्योंही सुमन को मारने के लिए बेल्ट चलाया उसने बेल्ट को पकड़ लिया। नीरज एक से सन्न रह गया। उसका शराब का नशा एक दम से उतर गया था।

30.12.2017, सिलीगुड़ी

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