लोककथा // ईकटोमी और गिलहरियाँ // सुषमा गुप्ता

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देश विदेश की लोक कथाएँ — उत्तरी अमेरिका–ईकटोमी :

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चालाक ईकटोमी


संकलनकर्ता


सुषमा गुप्ता


3 ईकटोमी और गिलहरियॉ[1]

ईकटोमी हमेशा की तरह से आज भी बहुत भूखा था और खाने की खोज में इधर उधर भटक रहा था।

भटकते भटकते वह एक नदी के किनारे आ पहुँचा। वह सोचता जा रहा था कि कैसे उसको कुछ अच्छा सा खाना मिले। चलते चलते वह थक भी बहुत गया था सो वह एक जगह सुस्ताने के लिये बैठ गया।

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बैठे बैठे उसकी निगाह कुछ गिलहरियों पर पड़ी जो पास के एक टीले के पास बार बार आ जा रही थीं। वे वहाँ उस टीले को खोदतीं, उसके अन्दर कुछ रख देतीं और फिर उसको ऊपर से ढक देतीं। यह सब करके वे फिर पानी के पास वाली झाड़ियों के पास आ जातीं।

ईकटोमी यह सब देख रहा था और बड़ी धीरज से इन्तजार कर रहा था कि शायद वह कोई गिलहरी पकड़ सके और उससे अपना पेट भर सके।

उसने कई बार उनको पकड़ने की कोशिश की पर वह किसी एक को भी नहीं पकड़ सका सो उसने उनको पकड़ने की कोशिश छोड़ दी।

असल में वह बहुत थका हुआ और भूखा था सो वह ज़्यादा मेहनत नहीं कर पा रहा था। पर अचानक ही उसको एक विचार आया।

वह उठ कर उस टीले की तरफ चल दिया जिस टीले के वे गिलहरियॉ चक्कर लगा रही थीं। वहाँ जा कर उसने उस जगह को खोदा जिसको उन्होंने पत्तियों और डंडियों से ढक रखा था ताकि वह यह देख सके कि वहाँ इन्होंने अपना क्या खजाना दबाया हुआ था।

clip_image004उसने देखा कि वहाँ किसी तरह की बैरीज़[2] दबी हुई हैं। हालॉकि वे बैरीज़ वहाँ बहुत सारी थीं पर ईकटोमी क्योंकि बहुत भूखा था वह वे सारी बैरीज़ निकाल कर खा गया। जब उसका पेट भर गया तो वह नदी के किनारे चला गया और वहाँ जा कर जी भर कर पानी पिया।

पर कुछ देर में ही उसको बेचैनी होने लगी। पानी से वे बैरी फूल रही थीं और वे खुद फूल कर उसके पेट को भी फुला रही थीं।

ये बैरीज़ जंगली थी जो पानी के किनारे उगती थीं। ये उन बैरीज़ के जैसी ही थी जैसी बैरीज़ का लोग पानी में उबाल कर उनका सूप बनाते हैं। उस बेचैनी की वजह से वह धूल में इधर उधर लोटने लगा।

उधर से दो लड़ने वाले गुजर रहे थे तो उन्होंने ईकटोमी को इस तरह धूल में बेचैनी से लोटते हुए देखा। तो उसमें से छोटे लड़ने वाले ने बड़े लड़ने वाले से पूछा — “यह इतनी धूल कहाँ से उड़ रही है?”

बड़े लड़ने वाले ने जवाब दिया — “चिन्ता न करो यह तो ईकटोमी है जो किसी काम का नहीं। ”

तो यह थी ईकटोमी की कद्र।

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[1] Iktomi and the Squirrels – a Native American folktale from Lakota Tribe, North America.

Adapted from the Web Site : http://wiki.olc.edu/index.php/Iktomi_Stories .

[2] Berry is a wild fruit, small in size. They are of many types. In India we have Ber. In foreign vountries there are straw berrie, black berries, blue berries etc. See their picture above.

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,इथियोपिया व इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

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