रचनाकार.ऑर्ग की विशाल लाइब्रेरी में खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

दस तक गिनने के दो तरीके // पश्चिमी अफ्रीका की लोककथाएँ // सुषमा गुप्ता

साझा करें:

   देश विदेश की लोक कथाएँ — पश्चिमी अफ्रीका–1 : पश्चिमी अफ्रीका की लोक कथाएँ–1 बिनीन, बुरकीना फासो, केप वरडे, गाम्बिया, गिनी, गिनी बिसाऔ, आइ...

   देश विदेश की लोक कथाएँ — पश्चिमी अफ्रीका–1 :

clip_image004

पश्चिमी अफ्रीका की लोक कथाएँ–1

बिनीन, बुरकीना फासो, केप वरडे, गाम्बिया, गिनी, गिनी बिसाऔ, आइवरी कोस्ट, लाइबेरिया,


संकलनकर्ता

सुषमा गुप्ता

13 दस तक गिनने के दो तरीके[1]

यह लोक कथा पश्चिमी अफ्रीका के लाइबेरिया देश की लोक कथाओं से ली गयी है। गणित की यह एक अच्छी लोक कथा है।

बहुत पुरानी बात है कि लाइबेरिया के एक घने जंगल में उस जंगल के राजा चीते ने अपने आने वाले जीवन के बारे में सोचना शुरू किया।

उसने सोचा कि जब वह सचमुच बूढ़ा हो जायेगा तो बीमार पड़ जायेगा और मर जायेगा। फिर उसके बाद उसका राज्य कौन सँभालेगा।

अगर कोई राजा अक्लमन्द है तो वह अपना वारिस चुनने के लिये अपने बूढ़े होने का इन्तजार तो नहीं करेगा न। वारिस वह होता है जो किसी के मर जाने पर उसकी जगह ले सके।

सो किसी अक्लमन्द को तो अपना वारिस तभी चुन लेना चाहिये जब वह तन्दुरुस्त हो और जवान हो। पर वह अपना वारिस कैसे चुने जब कि वह अपनी जानवरों की दुनिया के सभी जानवरों को एक सा चाहता हो। पर वह सबको तो वारिस नहीं चुन सकता न।

सो राजा चीता एक पेड़ के नीचे बैठ गया और सोचने लगा कि वह अपना वारिस कैसे चुने। कुछ देर बाद उसको एक तरकीब सूझी। उसने अपने दूतों को बुलाया और उनको सारे लाइबेरिया के जंगलों में भेजा और उनसे कहा कि वे सारे जानवरों से कहें कि वे सब राजा चीते के महल में आयें।

उस दिन वह सबको एक बहुत बड़ी दावत देगा और एक बहुत ही खास घोषणा भी करेगा। सो उसके सारे दूत लाइबेरिया के सब जंगलों में चारों तरफ दौड़ गये। उन्होंने सब जानवरों को यह खबर दे दी और दावत वाले दिन सभी जानवर राजा के महल में इकठ्ठा होगये।

राजा के महल में तो मेला लग गया। सारा जंगल जैसे ज़िन्दा हो उठा हो। ऐसा लगता था कि जैसे पूरे लाइबेरिया के सभी जंगलों के सारे जानवर वहाँ आ कर इकठ्ठा हो गये हों। उन सबने वहाँ खूब गाना गाया, खूब नाचा और बहुत अच्छा समय बिताया।

जब रात को चाँद पेड़ों के पीछे से ऊपर आ गया तब राजा चीता अपने महल में से निकल कर बाहर आया और उन सब जानवरों के बीच में आ कर खड़ा हो गया।

जब जानवरों ने राजा को देखा तो उसकी इज़्ज़त में उन्होंने गाना नाचना बन्द कर दिया और चुपचाप खड़े हो गये।

राजा बोला — “मैं कुछ दिनों से सोच रहा हूँ कि अपना वारिस चुन लूँ पर क्योंकि मैं तुम सब लोगों को एक सा प्यार करता हूँ इसलिये मैं यह तय नहीं कर पा रहा हूँ कि मेरा वारिस बनने के लिये तुम सबमें से सबसे ज़्यादा लायक कौन है। इसलिये मैंने एक मुकाबला रखा है। ”

कह कर चीता जंगल के पेड़ों के पीछे की तरफ गया और वहाँ से एक भाला लिये हुए लौटा और बोला — “तुम लोगों में से सबसे पहला जानवर जो इस भाले को आसमान में फेंकेगा और इसके जमीन पर गिरने से पहले दस तक गिन सकेगा वही मेरा वारिस होगा। ”

जैसे ही राजा चीते ने अपनी यह घोषणा खत्म की सारे जानवर आपस में कानफूसी करने लगे कि यह कैसे होगा। पर अचानक ही उनके पीछे से एक ज़ोर की आवाज आयी।

clip_image002सारे जानवरों ने तुरन्त ही पीछे मुड़ कर देखा तो एक तरफ को हट गये क्योंकि एक हाथी अपने पैर पटकते हुए वहाँ चला आ रहा था। असल में हाथी उस मुकाबले में हिस्सा लेने के लिये आ रहा था।

जैसे जैसे वह आगे बढ़ता आ रहा था वह कहता चला आ रहा था — “मेरे रास्ते से हटो, मेरे रास्ते से हटो। मैं राजा बनूँगा। मैं सबसे बड़ा हूँ इसलिये मैं ही राजा बनूँगा। ”

राजा चीते ने कहा — ठीक है ठीक है। तुम सबसे पहले इस मुकाबले हिस्सा ले सकते हो। पर इससे पहले कि तुम भाला आसमान में फेंको तुमको जीत का नाच करना पड़ेगा। ”

हाथी ने उस खाली जगह में घूम घूम कर अपनी सूँड़ और पैर पटक पटक कर नाच किया। नाचने के कुछ मिनट बाद ही उसने भाला उठाया, उसको अपनी सूँड़ में लपेटा और अपना सिर थोड़ा सा पीछे करते हुए उस भाले को आसमान में फेंक दिया।

फिर उसने गिनती गिनना शुरू किया — “एक, दो, तीन, चार। ” और उसका भाला उसके चार कहते ही जमीन पर गिर गया। इस तरह हाथी यह मुकाबला हार गया। अपनी इस हार पर वह इतना गुस्सा था कि कि वह बहुत देर तक अपने पैर पटकता रहा।

राजा चीता बोला — “हाथी, तुमको एक मौका मिलना था सो वह तुमको मिल गया। अब दूसरे जानवरों को इस मुकाबले में हिस्सा लेने का मौका दिया जायेगा। ” यह सुन कर हाथी वहाँ से चला गया।

हाथी के जाने के बाद जानवरों में फिर से कानाफूसी होने लगी कि फिर उन्होंने अपने पीछे से आती एक ज़ोर की आवाज सुनी। पीछे मुड़ कर देखा तो अब की बार एक सूअर पैर पटकता चला आ रहा था।

आते आते सूअर कहता आ रहा था — “मेरे रास्ते से हटो। मैं राजा बनूँगा क्योंकि मैं बहुत ताकतवर हूँ। ”


राजा चीता बोला — “ठीक है ठीक है। तुमको मुकाबले के नियम तो मालूम हैं सो भाला फेंकने से पहले तुम जीत का नाच नाचो उसके बाद भाला फेंकना। ”

सो सूअर ने भी जीत का नाच नाचा। पहले वह जमीन पर गिर गया और फिर एक पैर पर खड़ा हो कर उस सारी खाली जगह में ऊपर नीचे कूदता रहा।

कुछ देर बाद उसने अपने तेज़ पंजों से जमीन में गड्ढा खोदा। वह गड्ढा इतना ज़्यादा गहरा था कि जब वह उसके अन्दर खड़ा हो गया तो केवल उसका सिर ही दिखायी दे रहा था।

उसने वह भाला अपने दाँतों में दबाया और ऊपर आसमान की तरफ फेंक दिया। फिर उसने गिनती गिननी शुरू की — “एक, दो, तीन, चार, पाँच, छह। ” और उसके छह कहते ही भाला नीचे जमीन पर गिर गया।

इस तरह सूअर भी वह मुकाबला हार गया। वह भी अपनी इस हार पर इतना ज़्यादा दुखी हुआ कि उसने अपने नथुनों से बहुत सारी हवा निकाली और बहुत सारी धूल उड़ायी।

राजा चीते ने कहा — “सूअर, तुमको भी एक मौका मिलना था सो मिल गया और तुम हार गये। ” सो सूअर को भी वहाँ से जाना पड़ा।

सूअर के जाने के बाद जानवरों में फिर से फुसफुसाहट शुरू हुई — “यह तो बड़ा मुश्किल मुकाबला है। इस मुकाबले को तो हाथी भी नहीं जीत सका जो कि बहुत बड़ा है और सूअर भी नहीं जीत सका। वह तो बहुत ताकतवर है। लगता है इस मुकाबले को कोई जीत ही नहीं सकेगा। ”

clip_image006

तभी उन्होंने पीछे से आती हुई फिर से एक ज़ोर की आवाज सुनी। उन्होंने फिर पीछे मुड़ कर देखा तो उन्हें अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हुआ। एक बन्दर उछलता कूदता चला आ रहा था।

आते समय वह गा रहा था — “मैं यह कर सकता हूँ। मैं यह कर सकता हूँ। मुझे मालूम है कि मैं यह कर सकता हूँ। ”

राजा चीता बोला — “ठीक है ठीक है बन्दर। आओ और आ कर पहले अपना जीत वाला नाच शुरू करो। ”

बन्दर बोला — “यकीनन राजा जी, यकीनन। मुझे नाचना बहुत अच्छा लगता है। सब लोग पीछे हो जाओ ओर मुझे नाचने के लिये जगह दो। ”

सारे जानवर थोड़ा थोड़ा पीछे हट गये ताकि बन्दर को नाचने के लिये थोड़ी और जगह मिल जाये और बन्दर ने नाचना शुरू कर दिया।

वह ऊपर नीचे, इधर उधर सब जगह कूद कूद कर उछलता रहा। फिर उसने जमीन पर पड़ी पेड़ की एक शाख उठा ली और उसको हिला हिला कर कूदता रहा।

राजा चीता बोला — “ठीक है बन्दर। अब यह लो यह रहा तुम्हारा भाला। फेंको इसको और गिनो दस तक। ”


बन्दर ने भाला लिया, कुछ दूर पीछे हटा, फिर उसने अपनी बाँह पीछे की और हवा में कूद कर भाला आसमान में फेंक दिया।

उसने गिनना शुरू किया — “एक, दो, तीन, चार, पाँच, छह, सात, आठ। ” और आठ कहते न कहते उसका भाला भी जमीन पर आ गिरा। इस तरह बन्दर भी वह मुकाबला न जीत सका।

यह देख कर बन्दर बहुत परेशान हो गया। वह अपनी इस हार पर इतना गुस्सा हुआ कि चारों तरफ लोटने लगा और कई तरह की सफाई देने लगा।

उसने राजा से एक मौका और देने की प्रार्थना की पर राजा चीते ने कहा — “नहीं बन्दर नहीं। सभी जानवरों को केवल एक एक मौका ही दिया जा रहा है। तुमको भी एक मौका मिलना था सो तुम्हें मिल गया। अब तुम जा सकते हो। ” सो बन्दर को भी वहाँ से जाना पड़ा।

बन्दर की हार के बाद तो जानवरों को विश्वास सा हो गया कि यह मुकाबला जीतना तो बहुत ही मुश्किल है।

एक जानवर बोला — “हे भगवान, यह मुकाबला कितना मुश्किल है। हम तो सोचते थे कि हमारा राजा कितना अक्लमन्द है पर वह तो अपनी अक्लमन्दी हमारे ही ऊपर दिखा रहा है।

यह भी हो सकता है कि वह जानता हो कि कोई भी यह भाला आसमान में इतना ऊँचा न फेंक सकता हो जो वह उसके गिरने से पहले दस तक गिनती गिन सके।

यह राजा हम सबको बेवकूफ साबित करना क्यों चाह रहा है। मैं यहाँ बेवकूफ बनने के लिये नहीं खड़ा मैं तो घर जा रहा हूँ। ”

सो कुछ जानवरों ने अपने अपने घरों को जाना शुरू कर दिया पर जैसे ही वे अपने अपने घरों की तरफ जाने के लिये पलटे उन्होंने पीछे से आती हुई एक और आवाज सुनी।

clip_image008

उन्होंने फिर पीछे मुड़ कर देखा तो उनकी आँखें तो फटी की फटी रह गयीं। एक बहुत ही छोटा सा बारहसिंगा भीड़ में से चला आ रहा था। आगे आ कर वह बोला — “अभी रुको, मुझे भी कोशिश कर लेने दो। शायद मैं इसे कर सकता हूँ। ”

यह सुन कर सारे जानवर हँस पड़े। हाथी बारहसिंगे से बोला — “क्या मतलब? क्या तुम सोचते हो कि तुम यह काम कर सकते हो? जब मैं यह काम नहीं कर सका तो तुम कैसे कर सकते हो। जाओ जाओ अपने घर वापस जाओ। ”

इस पर तो जानवर और बहुत ज़ोर से हँस पड़े। जानवरों को हँसता देख कर राजा चीता चिल्लाया — “हँसो नहीं। मैं तुम लोगों को इस तरह से बारहसिंगे की हँसी उड़ाने की इजाज़त नहीं दे सकता। यह कौन कहता है कि जो काम बड़े जानवर नहीं कर सकते वह कोई छोटा जानवर भी नहीं कर सकता।

अब अगर बारहसिंगा इस मुकाबले में हिस्सा लेना चाहता है तो उसको भी दूसरे जानवरों की तरह इस मुकाबले में हिस्सा लेने का मौका दिया जायेगा। सब शान्ति से खड़े रहो। अब बारहसिंगा अपना जीत का नाच नाचेगा। ”

सो लाइबेरिया के जंगलों की उस मुकाबले की रात बारहसिंगा अपनी जीत का नाच नाचा। पर उसका नाच दूसरे जानवरों से काफी अलग था।

वह पहले तो कुछ देर तक अपने पैर बाहर निकाल कर और अपना सिर आसमान की तरफ उठा कर गोले में घूमता रहा जैसे वह भगवान को अपने ज़िन्दा रहने के लिये धन्यवाद दे रहा हो।

फिर वह जानवरों की तरफ घूमा जैसे कि वह उन जानवरों से कह रहा हो कि वह उनको बहुत प्यार करता है और उनके साथ इस समय बैठ कर उसे बहुत अच्छा लग रहा है।

आखीर में बारहसिंगे ने घूम कर राजा की तरफ देखा जैसे वह कह रहा हो कि वह अपने राजा को भी बहुत प्यार करता था जो अक्लमन्द होने के साथ साथ मेहरबान भी था।

फिर वह थोड़ा पीछे हटा, उसने अपने दाँतों में भाला दबाया और अपनी सारी ताकत के साथ भागना शुरू किया। जब वह उस साफ जगह के बीच में पहुँचा जहाँ से उसको भाला फेंकना था तो वह ऊपर कूदा और भाला आसमान में फेंक दिया।


फिर वह चिल्लाया — “पाँच और पाँच दस। ”

यह सुन कर सारे जानवर चुपचाप खड़े रह गये पर हाथी बोला — “यह क्या है?”

बन्दर ने भी सिर खुजलाते हुए कहा — “पाँच और पाँच दस?”

तब राजा चीता आगे आया और उसने सबको समझाया। वह बारहसिंगे से बोला — “बारहसिंगे, तुम ठीक कहते हो। पाँच और पाँच दस होते हैं और इसी तरह से तीन और सात भी दस होते हैं। और भी कई तरह से हम दस तक गिन सकते हैं।

दस तक गिनने का केवल एक ही तरीका नहीं होता – एक, दो, तीन, चार, पाँच, छह, सात, आठ , , ,। ”

यह मुकाबला यह पता करने के लिये नहीं था कि कौन सबसे बड़ा जानवर है या कौन सबसे ज़्यादा ताकतवर जानवर है यह मुकाबला तो यह जानने के लिये था कि कौन सबसे ज़्यादा अक्लमन्द जानवर है। ”

और इस तरह से राजा चीते के मरने के बाद जंगल का सबसे छोटा जानवर बारहसिंगा राजा बन गया। इसलिये नहीं कि वह सब से बड़ा जानवर था या सबसे ज्यादा ताकतवर जानवर था बल्कि इस लिये कि वह सबसे ज़्यादा अक्लमन्द जानवर था।

clip_image010


[1] Two Ways to Count to Ten – a tale from Liberia, West Africa. Adapted from the Web Site :

http://www.calacademy.org/exhibits/africa/exhibit/count.htm

Written by Nailah Malik of California, USA.

---

सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से सैकड़ों लोककथाओं के पठन-पाठन का आनंद आप यहाँ रचनाकार के  लोककथा खंड में जाकर उठा सकते हैं.

***

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधाएँ ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|नई रचनाएँ_$type=complex$count=8$page=1$va=0$au=0

|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=blogging$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3830,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,335,ईबुक,191,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2771,कहानी,2097,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,485,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,329,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,49,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,820,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,307,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1908,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,644,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,685,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,54,साहित्यिक गतिविधियाँ,183,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,68,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: दस तक गिनने के दो तरीके // पश्चिमी अफ्रीका की लोककथाएँ // सुषमा गुप्ता
दस तक गिनने के दो तरीके // पश्चिमी अफ्रीका की लोककथाएँ // सुषमा गुप्ता
https://lh3.googleusercontent.com/-TmAc-KAXY9I/Wx0SlA144zI/AAAAAAABCbw/lvdchTsjAvUgtOQfQUXlYPvbLatb2W3xgCHMYCw/clip_image004_thumb%255B1%255D?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-TmAc-KAXY9I/Wx0SlA144zI/AAAAAAABCbw/lvdchTsjAvUgtOQfQUXlYPvbLatb2W3xgCHMYCw/s72-c/clip_image004_thumb%255B1%255D?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2018/06/blog-post_11.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2018/06/blog-post_11.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ