व्यंग्य // शून्यकाल में सांड़ विमर्श // दिनेश बैस

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यहां वहां की

व्यंग्य

शून्यकाल में सांड़ विमर्श

दिनेश बैस

नता दरबार में सांड़ों का शिष्ट मंडल बैठा जुगाली कर रहा था। पॉवर पूजा-गृह में सियासत के अनुष्ठान में ध्यानस्थ थी। पॉवर-प्रतिनिधि आदमियों को बता चुका था कि अनुष्ठान में कितना समय लगेगा, भगवान भी नहीं जानता है। अपनी-अपनी अर्जियां यहाँ भगवान के सामने चढ़ा जाओ और निकल लो। भगवान चाहेगा तो काम हो जाएगा। नहीं होगा तो तुम्हारे भाग्य का दोष मान कर घर बैठ जाना।

एक बूढ़ी गऊ-दादी ने लम्बी सी उबासी ली। हम कहाँ निकल लें। अपन को तो घर से पहले ही निकाल दिया है। सड़कों पर धक्के खाने से अच्छा है कि यहीं बैठ कर जुगाली करें।

भूखे पेट तो जुगाली भी नहीं होती है. बगल में पसरा सांड़ हताश था।

धीरे बोल और बी पॉजिटिव। चर्चा है कि अपन को राष्ट्र-पशु का दर्जा दिया जाना है। कल सड़क पर अखबार की रद्दी ढोते समय मेरी नजर इस समाचार पर पड़ी थी। गौ-वंश के ठेकेदार और साधू-संत भी यह मांग कर रहे हैं। कौन जाने हम में से किसी को राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त हो जाए। मैंने तो अपना प्रोफाइल पॉवर के पास पहुँचा दिया है। लम्पट से दिखने वाले, नेतानुमा एक सांड़ की आंखों में पॉजिटिवपन की चमक थी।

क्या खाक पॉजिटव रहें। हाल ही में दिव्यांग हुआ एक सांड़ बुझा-बुझा सा बुदबुदा रहा था। तीन दिन से कुछ खाया नहीं है। परसों सब्जी मंडी में घुसा था। मुँह ही मुँह में ऐसे डंडे पड़े कि मुँह खाने लायक ही नहीं रहा। किसी तरह भाग कर जान बचाई। शाम को तुम लोग यहाँ घसीट लाए। उसका मुँह अभी भी सूजा हुआ था। दुर्भाग्य देख। वह बता रहा था। यह दुर्गति विधर्मियों के नहीं, गौ-सेवकों के बाजार में हुई।

आखिर हम लोग यहाँ लाए क्यों गए हैं। एक नवोदित सांड़ ने अंगड़ाते हुए पूछा। वह स्मार्ट फोन पर किसी काऊ-फ्रैंड से चैट में उलझा था। ईयर-फोन का माइक दांतों से दबाए हुए। बड़े सेक्सी लुक वाला फोटो उस टीन काऊ-फ्रैंड ने अपलोड किया था अभी-अभी। वह उसी पर लार टपका रहा था। इसलिए सांड़ों की बातचीत का नेटवर्क उसके कवरेज एरिया से बाहर हो गया था।

अबे, आफत पड़ी है। नगर निगम हमें पकड़वा रहा है। हमें पकड़ा जा रहा है। ओरछा के जंगलों में छोड़ने के लिए। कभी सांड़-हित के समाचार भी पढ़ लिया कर। हमेशा काऊ-फ्रैंड्स को ही सूंघता मत घूमा कर। कितनियों की तो लातें और सींग खा चुका है। न माँ देखता है न बेटी देखता है। किसी के भी पीछे लग लेता है। बिल्कुल आदमियों जैसा चरित्र होता जा रहा है तेरा। नेता नुमा लम्पट सांड़ ने धिक्कारा।

यार गुरू, अपने गरेबान में भी झाँक कर देखो। पास ही बैठा एक सांड़ तनिक आवेश में आ कर खड़ा हो गया। पहले उसने पूंछ उठा कर, देह के पिछले भाग को संकुचित-विस्तारित किया। इस प्रक्रिया में धरती-माता को गोबर का अर्ध्य अर्पित हो गया। इस प्रकार यथा पर्याप्त आत्म-विश्वास संचित कर, आश्वस्त हुआ कि उसने अपनी इंसाफ पसंद सांड़ की छवि पूरी तरह प्राप्त कर ली है। फिर प्रारम्भ हुआ। यह बताएं सज्जनों कि नगर निगम कितनी छूट दे हमें। हम दिन भर सड़कों पर संड़ियाते घूमते हैं। रात में पूरी सड़क घेर कर पसर जाते हैं। ट्रैफिक हमारे कारण जैम हो तो हो। हम जानते हैं कि हमें गौ सेवक पॉवर का आशीर्वाद प्राप्त है। कोई हमें हाथ भी लगाएगा तो गौ चौकीदार हमें भूसे के बिना भले ही मर जाने दें, मगर उसमें भूसा भर देंगे मार-मार कर। कितने तो ठुकते हैं हमारे कारण। कितने दूसरी दुनिया में भेज दिये गये। जबकि जीना मुश्किल हम किए हैं उनका। उन्हें सता कर एक तरह से हम आदमी बिरादरी को सबक सिखा रहे हैं कि तुमने हमें सड़कों पर भूखा भटकने के लिए छोड़ा है, हम तुम्हारा सड़कों पर चलना हराम कर देंगे।

आप लोग ही बताओ कि नगर निगम ने कभी कुछ कहा हमसे। हमारी हर मनमानी की ओर से यह सोच कर आंखें बंद किए रहा कि गाय हमारी माता है सांड़ पिताश्री हैं। माता-पिता का सम्मान करना हमारी संस्कृति है। तनिक ठहरा इंसाफ पसंद सांड़। फूलती हुई सांसों को संयत किया। क्षण भर ठहर कर इंपैक्ट परखा अपनी ललकार का। पिन ड्रॉप सायलेंस था सांड़-सभा के मध्य। कुछ तो भाषण को लोरी समझ कर सो भी चुके थे। लम्पट नेतानुमा सांड़ भी एक ओर टांगों के बीच पूंछ दबाये, सकपकाया सा खड़ा था। उसे ऐसी किसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी।

पर्याप्त अनुकूल वातावरण देख कर इंसाफ पसंद सांड़ ने इंसाफ के दूसरे पटाखे की सुर्री को भी चिंगारी दिखाई। लेकिन, शराफत की भी हद होती है। उस दिन हमारे एक गैरजिम्मेदार सांड़ भाई ने तो अति ही कर दी। नगर निगम के पोर्च में ऐन मेयर साहब की गाड़ी के बगल में खड़ा था। वहीं हरे रंग के गाढ़े से पदार्थ की लम्बी सी पिचकारी मार दी। जैसे फायर ब्रिगेड के फायर टेंडर से वाटर केनन पानी की धार छूट रही हो। मेयर साहब की गाड़ी की एक ओर की बॉडी डिजायनर हो गई। मेयर साहब भी तभी स्वच्छ भारत अभियान रैली का फीता काटने जाने के लिए गाड़ी का दरवाजा खोल रहे थे। छींटों की बौछार से वे भी बच नहीं सके। बेचारे पिटैली गऊ समान मेयर साहब में भी अचानक एक मरखनी गाय प्रविष्ट हो गई। बस चीख ही तो पड़े। पकड़ो हरामियों को। ओरछा के जंगल में छोड़ दो। मेयर साहब को क्या मालूम था कि वह सांड़ भाई डायरिया का शिकार हो गया था। मेयर साहब के पास फरियाद ले कर आया था कि हमारे डॉक्टर को आपके कुत्तों से फुर्सत मिल जाये तो हमारा पंक्चर भी चिपकावा देना साहिब।

तो पकड़ लेने दो। यूथ सांड़ फिर सोशल मीडिया के मकड़ जाल में फंस गया था। उसकी समझ में सिर्फ पकड़ो ही आया था। अनायास ही बोल पड़ा। जैसे सोशल मीडिया के जंगल से उसकी आवाज आ रही हो। यहाँ कौन से हमारे लिए महल बने हैं। यूथोचित आक्रोश था उसमें। यहाँ कौन सी पत्नियां डायनिंग टेबिलों पर हमारा इंतजार करती रहती हैं। वे कहीं गलियों में मुंह मारती घूमती रहती हैं। जाने कैसी-कैसी नजरों का सामना करते हुए। हम कहीं सड़कों पर लट्टò झेलते गालियां खाते भटकते रहते हैं। जैसे यहाँ की सड़कों पर भटकते हैं, वैसे वहाँ जंगल में भटक लेंगे। वहाँ कम से कम लट्ठ मारने वाले तो नहीं होंगे। ताजी हवा होगी। भूसा नहीं तो हवा खा कर ही जी लेंगे। एक साहसी नवजवान की तरह वह हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार लग रहा था। जैसे परिस्थितियों को चुनौती दे रहा हो।

जंगल अब बचे कहाँ हैं। आप देख सकते हैं कि जंगल अब कहीं नहीं हैं। एक मीडिया कर्मी बछिया रिपोर्टर ने ताजा अपडेट दिया। उसके चिकने सींगों से एक मायक्रोफोन बंधा था। साथ के कैमरा पर्सन बछड़े की पीठ पर फिट कैमरा उसे फोकस कर रहा था। मीडियाकर्मी बछिया किकिया रही थी। हम लगातार ओरछा स्थित अपने जंगल मीडिया पर्सन सांड़ के सम्पर्क में हैं। एक्सक्ल्यूसिव न्यूज यह है कि ओरछा में सागौन के जंगल तस्करों के काम आ चुके हैं। गौ-शालाओं के नाम पर सरकार से मिली जमीनों पर नर-शालाएं चल रही हैं। जंगलों में रहने वाले जानवर शिकारियों की गोलियां खा कर गहरी नींद में सो चुके हैं। ओरछा अब धर्म नगरी नहीं रही है। सियासत नगरी बन चुकी है। जैसी कि परम्परा है कि जन-जंगल-जमीन से खिलवाड़ करके हड़प लेने के समाचारों को गम्भीरता से नहीं लेना चाहिए, इस समाचार को भी सांड़ों ने बकवास मान लिया। मीडिया कर्मी बछिया को सींग कौंच-कौंच कर चुप होने के लिए मजबूर कर दिया।

एक अधेड़ सा सांड़ बहुत देर से खड़े-खड़े थक सा गया था। अचानक अगले पांव सिकोड़ कर धम्म से धरती पर जा टिका। उसके बैठते-बैठते आवाज सुनाई दी। अकेले हमने तौ सुनी हती कैं पर्यटकों को बुंदेलखंड में हिलगावे कैं लाने ओरछा को विकास होयगे। जैसे यह आवाज उसके बैठने की प्रतिक्रिया से हुई हो।

तू ठीक कह रहा है। एक अन्य मसखरे सांड़ ने उसका समर्थन किया। गाइड पर्यटकों को पहले राम-राजा के दर्शन कराएंगे। फिर बेतवा के पार लाएंगे हमें दिखाने। लुक सर, काउंट दैम ईच एण्ड एवरी ह्यस्त्री। सांड़ों के लाइव एक्स रे की यह नस्ल हमने काफी परिश्रम के बाद विकसित की है। इन्हें भूखे रहने की हॉवी है। देखिए कितना मेंटेन किया है इन सांड़ों ने खुद को।

पर्यटन विकास ही तो हो रहा है। एक हंसोड़ सा सांड़ लघु शंका निवारण के अंतिम चरण में परम आश्वस्ति महसूस कर खुद को अभिव्यक्त्त कर रहा था। हम सब को पकड़-पकड़ कर ओरछा में बेतवा के उस पार हांक दिया जाएगा।

कोलाहल से पॉवर के पूजा-गृह में, सियासत के अनुष्ठान में विघ्न पड़ रहा था। सियासत का धर्म चिंतन बार-बार भंग हो रहा था। पॉवर ने पी ए को श्राप देने वाली दृष्टि से घूरा। पी ए ने सस्पैंड करने की धमकी के स्वर में सुरक्षा को हड़काया। हरामखोरो, बैठे-बैठे क्या देख रहे हो। जनता का मतलब यह थोड़े ही है कि हमेशा हल्ला मचाती रहे। हाँक दो ससुरों को इलाइट या माणिक चौक की तरफ। पॉवर को काम नहीं करने दे रहे हैं।

सांड़ों पर यहाँ भी लट्ठ बरसने शुरू हो गए। सुखद यह था कि यह लट्ठ सांड़-आतंक से पीड़ित आम आदमी के नहीं थे। पॉवर के आशीर्वाद के रूप में थे।


संपर्क : 3- गुरूद्वारा, नगरा, झांसी-284 003


ई-मेल : dineshbais3@rediffmail.com

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