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उपन्यास - रात 11 बजे के बाद - भाग 3 - राजेश माहेश्वरी

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उपन्यास रात  11 बजे के बाद - राजेश माहेश्वरी भाग 1 || भाग 2 || भाग 3 दूसरे दिन सुबह नाश्ते पर सभी लोग मिलते हैं। सभी अपने आप को प्रसन्न और...

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उपन्यास

रात  11 बजे के बाद

- राजेश माहेश्वरी


भाग 1 || भाग 2 ||


भाग 3

दूसरे दिन सुबह नाश्ते पर सभी लोग मिलते हैं। सभी अपने आप को प्रसन्न और तरोताजा महसूस कर रहे थे। नाश्ते के दौरान पल्लवी ने आनंद से कहा कि आनंद आज मुझे कुछ खरीदारी करनी है। यह सुनते ही आनंद ने फौरन पचास हजार रूपये निकालकर पल्ल्वी को दे दिये और कहा कि डार्लिंग तुम्हारी जो इच्छा हो तुम खरीद सकती हो यदि कोई कमी हो तो मुझसे और मांग लेना। यह देखकर सभी भौंचक्के रह जाते हैं। पल्लवी प्रसन्न होकर आनंद की ओर मुस्कुराते हुये धन्यवाद कहकर मानसी को साथ लेकर खरीददारी करने चली जाती है। उनके जाने के बाद राकेश ने आनंद से कहा कि तुमने यह क्या किया ? अभी तुम्हारी मुलाकात हुये दो चार दिन ही तो हुये है इस प्रकार इतना रूपया लुटाना ठीक नहीं है। गौरव भी राकेश की बातों से सहमति व्यक्त करता हैं। यह सुनकर आनंद कहता है कि मुझे जीवन में जिसकी तलाश थी वह पल्लवी के रूप में पूरी हो रही है, मैं उसके ऊपर फिदा हूँ और उसे दिलोजान से चाहने लगा हूँ उसकी खुशी के लिये मैं कुछ भी कर सकता हूँ यह पचास हजार रूपये तो कुछ भी नहीं हैं। राकेश कहता है कि मेरा फर्ज था तुम्हें समझाना आगे जैसी तुम्हारी इच्छा हो। तुम अपनी मर्जी के खुद ही मालिक हो एक बात याद रखना, इश्क में अपने कदमों को संभालकर रखना कहीं यह बहक गये तो संभालना मुश्किल हो जाता है।

दो तीन दिन और बिताने के बाद सभी वापस अपने अपने घर आ जाते हैं। घर पहुँच कर आनंद पल्लवी को अपनी कंपनी में अच्छे वेतन पर नौकरी दिलवा देता हैं। पल्लवी नौकरी के लिये आ जाती है और आनंद उसे सारी सुविधाएँ उपलब्ध कराता है। आनंद का अधिकांश समय पल्लवी के साथ बीतने लगा। वह जब भी शहर के बाहर जाता पल्लवी को भी साथ ले जाता था। वह उसके ऊपर बेशुमार दौलत लुटाने लगा। यह सारी बातें राकेश को गौरव और मानसी के माध्यम से पता चलने लगी। राकेश ने गौरव से आनंद को समझाने के लिये कहा, गौरव ने कहा कि वह क्या दूध पीता बच्चा है जो मैं उसे समझाऊँ। तुमने भी तो समझाने का प्रयास किया था इसका नतीजा यह निकला कि तुम्हारे और आनंद के संबंधों के बीच में खटास पैदा होने लगी। यह सुनकर राकेश चुप हो जाता है।

मानसी भी पल्लवी की शानों शौकत देखकर जलने लगी थी और उसकी भी इच्छाएँ बढ़ती जा रही थी जिसकी पूर्ति के लिये वह राकेश के ऊपर दबाव बनाने लगी और प्रायः आनंद की दरियादिली के उदाहरण देने लगी। मानसी की रोज रोज की मांग और आनंद से तुलना करने पर राकेश को चिड़ होने लगी और एक दिन राकेश ने उसे स्पष्ट कह दिया कि मैं जो कुछ तुम्हारे लिये कर सकता था मैनें कर दिया है इससे अधिक किसी प्रकार की आशा मत करो। इन्हीं कारणों से राकेश और मानसी के संबंधों की मधुरता खत्म हो गयी थी। आनंद पल्लवी में इतना अधिक आसक्त हो चुका था कि उसने सारी जायदाद पल्लवी के नाम वसीयत लिखकर और उसे बताकर गौरव के पास रखवा दी थी। वसीयत की बात सुनकर पल्लवी अत्यंत प्रसन्न थी और खुशी के मारे पागल हुयी जा रही थी।

इसी समय अचानक चौकीदार ने राकेश को नींद से जगाया। वह हडबडाकर उठ बैठा और पूछा क्या बात है चौकीदार ने बताया साहब दिन का 1 बज गया है आपको आनंद साहब के अंतिम संस्कार में जाना है। राकेश बडबडाया मैं तो बीती हुयी जिंदगी का पूरा सपना देख रहा था अच्छा हुआ तुमने मुझे उठा दिया। राकेश के पास गौरव का फोन आता है कि राकेश तुम वहाँ क्या कर रहे हो तुम्हें तो आनंद के घर पर होना चाहिये था मैं पोस्टमार्टम के लिये गया था। सभी औपचारिकताएँ पूरी करवाकर एक घंटे के अंदर वापस आ रहा हूँ।

राकेश तैयार होकर आनंद के घर चला जाता है। आनंद के घर पहुँचने पर वो देखता हैं कि काफी पुलिस लगी हुयी थी एवं उसका बेडरूम पुलिस द्वारा सील कर दिया गया था। आनंद के यहाँ काफी भीड़ इकट्ठी थी उसका मृत शरीर पोस्टमार्टम होकर आने वाला था। वहाँ पर उपस्थित लोग तरह तरह की बात कर रहे थे और राकेश व परिवारजनों से वस्तुस्थिति पूछ रहे थे। उन्होंने भी यही कहा कि हमें भी उतना ही मालूम है जितनी खबर आपको है। हमारी जानकारी भी वहीं तक सीमित है। पुलिस के द्वारा खोजबीन के उपरांत ही सच सामने आ सकेगा। आनंद के परिवारजन शोक में डूबे हुये थे। कुछ समय के उपरांत आनंद का शव आ गया और अंतिम यात्रा प्रारंभ होने के पूर्व उनके परिजनों को पोस्टमार्टम रिर्पोट में शरीर में जहर का पाया जाना एवं इसी कारण मृत्यु होना बता दिया गया। अब अंतिम यात्रा प्रारंभ हो गयी। अंतिम संस्कार के उपरांत राकेश और गौरव अपनी अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुये अपने घर वापस आ जाते है।

पुलिस, जाँच अधिकारी विक्रम सरकार के नेतृत्व में सबसे पहले सील किये हुये बेडरूम की जाँच उसके परिवारजनों को साथ लेकर करती है। उसके कमरे की एक एक चीज की गहराई से जाँच होती है जिसमें फारेंसिक विभाग के अधिकारी भी अपना सहयोग देते हैं। उसी समय पुलिस का खोजी कुत्ता आनंद के कपडे सूंघने के उपरांत घर से बगीचे की ओर भागकर एक स्थान पर रूक जाता है इसके बाद वह कुछ खोजता हुआ बगीचे के दूसरे किनारे तक जाकर जमीन के आसपास सूंघने लगता है। पुलिस के कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वह दो स्थानों पर क्यों जा रहा है ? उसी समय चौकीदार ने बताया कि रात 10ः15 बजे के आसपास मैंने किसी को भागकर दीवार फाँदते हुये देखा वह वह बिल्कुल आनंद साहब के जैसा ही दिख रहा था परंतु आनंद साहब की मृत्यु की खबर सुनकर मैने इस बात को महत्व ना देते हुये सीधे उनके कमरे की और दौड़ लगायी। विक्रम सरकार ने उससे पूछा कि तुम्हें यह कैसे पता हुआ कि तुम्हारे साहब की मृत्यु हो गयी। वह बोला कि रमेश उपर की मंजिल से चिल्ला रहा था कि जल्दी दोडकर आओ साहब को पता नहीं क्या हो गया है ?

आनंद का बेटा कमरे की जाँच के दौरान बताता है कि एक घडी जो कि आनंद के शव से निकाली गयी थी वह पुलिस अधिकारियों को देकर कहता है कि वह पापा की नहीं हैं। पापा ऐसी घडी कभी नहीं पहनते थे उनकी घडी बहुत महँगी थी। पापा के हाथ में हमेशा हीरे की अंगूठी रहती थी जो कि नहीं पाई गई। पुलिस को जाँच के दौरान उनका रिवाल्वर, मोबाइल एवं पेन भी नहीं मिला परंतु उनके लॉकर में रखे रूपये एवं मूल्यवान आभूषण सुरक्षित रखे हुये थे एवं कमरे में रखा हुआ सारा सामान सुव्यवस्थित था इससे प्रतीत हो रहा था कि कमरे में किसी प्रकार की कोई झडप भी नहीं हुयी।

टेबल पर दो कप चाय रखी हुयी थी जिसमें चाय वैसी की वैसी ही रखी हुयी थी जैसे किसी ने पी नहीं हो। पुलिस ने नौकरों से पूछताछ के दौरान यह जानना चाहा कि चाय कौन लेकर आया था। यह जानकर सब हैरान रह गये कि सभी नौकरों ने कहा कि वे चाय लेकर नहीं आये। अब चाय किसके लिये आयी थी और कौन व्यक्ति ऊपर पहुँचा इसकी जानकारी भी किसी नौकर को नहीं थी।

विक्रम सरकार को पूछताछ के दौरान वह डाक्टर कौन था एवं किसके बुलाने पर आया यह भी पता नहीं हो पा रहा था जिसने आनंद की मृत्यु की हृदयाघात के कारण होना बताया था। आनंद के केयर टेकर रवि ने बताया कि एक डाक्टर आया था जिसे वह नहीं जानता था उसने कार से उतरकर मुझसे पूछा कि सेठ जी को क्या हो गया है मैं उसे तुरंत लिफ्ट से ऊपर लेकर आया जहाँ पर डाक्टर ने उनकी जाँच करके उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद डाक्टर तुरंत वापस चले गये। साहब की मृत्यु की खबर से हम विचलित हो गये जिससे हम उस डॉक्टर का नाम एवं कार का नंबर भी नहीं देख सके।

पुलिस के सामने एक और प्रश्न था कि बेडरूम से जुडे हुये ड्राइंग रूम में सोफा सेट के पास चाय रखी हुयी थी चाय को बिना पिये ही आनंद अपने बेडरूम में राइटिंग टेबल पर आकर क्यों बैठ गये। उनकी मृत्यु यदि यहाँ पर बैठे बैठे हो गयी तो दूसरा व्यक्ति क्या उस समय वहाँ उपस्थित था या पहले ही बिना चाय पिये जा चुका था। परंतु कोई भी यह जानकारी नहीं दे पा रहा था कि वह दूसरा व्यक्ति था कौन ? अब यह पूरा मामला काफी संदिग्ध नजर आने लगा था।

इसके बाद जाँच अधिकारियों ने विचार विमर्श करके खोजी कुत्ते को वापस बुलाया और एक बार पुनः उसे परीक्षण करने का मौका दिया। इस बार वह जहाँ पर सोफे के पास चाय रखी हुयी थी वहाँ पर जाकर वह सीधे दो तीन कमरों से होता हुआ एक कचरे के ढेर के पास पहुँचता है और वहाँ पर रूक कर वह भौंकता है। यह देखकर उस स्थान की बारीकी से सफाई कराई जाती है। सफाई के दौरान एक टूटा हुआ कप और प्लेट मिलता है जिसे वह बार बार सूंघता है। उस कप प्लेट को फॉरेंसिक विभाग दस्ते पहनकर सावधानी पूर्वक उठाकर जप्त कर लेते हैं।

विक्रम सरकार ने नौकरों से बात करके घटनाक्रम का एक खाका बनाया जो इस प्रकार था। शाम 7 बजे आनंद का गौरव के घर जाना लगभग 8 बजे वापस आ जाना इसके बाद 8ः30 बजे गौरव का आनंद के पास आना 9 बजे उसका वापस चले जाना, आनंद का अपने कर्मचारी के यहाँ जाना और लगभग 10ः15 बजे वापिस आकर अपने बेडरूम की ओर प्रस्थान करना इसी समय के आसपास चौकीदार का आनंद की छाया के समान घर के पिछवाडे से बाऊंड्री वाल को कूदकर पार करते हुये देखना उसी समय रमेश नाम के नौकर का ऊपर की मंजिल से चिल्लाकर कहना कि साहब को क्या हो गया है वे बेहोश हो गये हैं। 10ः30 बजे रात में आनंद के नजदीकी दोस्तों को फोन पर उसकी मृत्यु होने की सूचना प्राप्त होना। लगभग 10ः45 बजे रमेश का आनंद का बेडरूम में आना उसके पूछने पर कि साहब क्या दूध लेंगे का कोई जवाब प्राप्त नहीं होना उसकी अवस्था देखकर उसका सशंकित होना और डॉक्टर को फोन करना। डॉक्टर की अनुपलब्धता का मालूम होना इसके एक लगभग दो तीन मिनिट बाद ही एक नये डॉक्टर का केयर टेकर के साथ आना रात 11 बजे के लगभग उसका आनंद की मृत्यु का हृदयाघात से होना बताना और तुरंत वापस चले जाना। रात 11ः15 बजे तक रवि के द्वारा बैंकाक और दुबई में उसके परिवारजनों को इसकी सूचना देना। रात 11ः30 बजे सबसे पहले राकेश और गौरव का पहुँचना और उनके द्वारा नौकरों से आनंद की मृत्यु के संबंध में पूछताछ करना और जानकारी प्राप्त करना। सुबह उसके परिवारजनों के आने के बाद गौरव और राकेश का उनसे वार्तालाप करना और प्रातः 9 बजे रिपोर्ट दर्ज कराना। पुलिस द्वारा शव को पोस्ट मार्टम के लिये ले जाना और रिपोर्ट में जहर के कारण मृत्य होना।

सभी कर्मचारियों से गहन पूछताछ शुरू की गयी परंतु उन्हें कोई खास जानकारी प्राप्त नहीं हुयी। आनंद की मृत्यु के समय उसके घर में सिर्फ तीन लोग थे पहला केयर टेकर रवि दूसरा चौकीदार रामसिंह और तीसरा उसका विश्वसनीय नौकर रमेश। बाकी सभी कर्मचारी विवाह में शामिल होने गये हुये थे। अब पुलिस ने रवि के संबंध में पूछताछ करके जो जानकारी प्राप्त की उसके अनुसार वह आनंद का एक विश्वसनीय व्यक्ति था। वह आनंद के मसूरी के बंगले में विगत दो वर्ष से कार्यरत था उसके अच्छे व्यवहार व होशियार होने के कारण आनंद ने उसे अपने पास बुला लिया था। उसका बेरेकटोक पूरे घर में आना जाना था। वह आनंद की मृत्यु से दुखी होकर लगातार रो रहा था। उससे गहराई से पूछा गया कि तुमने उस डॉक्टर को जिसे तुम ऊपर लेकर आये, क्या तुम जानते थे? उसने कहा नहीं। डॉक्टर को बुलाने की बात ऊपर हो रही थी तो मैनें सोचा इसी डॉक्टर को बुलाया गया होगा मैं तो बिना समय गंवाए, लिफ्ट से उसे ऊपर ले गया। उसने जाँच के उपरांत आनंद साहब के दुखद निधन की बात बताकर तुरंत ही वापस जाने की इच्छा व्यक्त की और मैं उनका बैग लेकर उन्हें नीचे तक छोड़ आया।

जाँच अधिकारियों ने चौकीदार से पूछा कि तुमने कार का नंबर नोट किया था या नहीं । वह बोला कि साहब वैसे तो सभी आने जाने वालों का नंबर नोट किया जाता है परंतु साहब कि तबीयत की खबर सुनकर हम सभी बहुत घबडा गये थे और हमारी समझ में नहीं आ रहा था कि हम क्या करें। गेट पर सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है उसमें जरूर ये सब बातें दर्ज होंगी और पूरी जानकारी मिल जायेगी। यह सुनकर जाँच अधिकारी तुरंत सीसीटीवी कैमरे को अपने कब्जे में ले लेता है। उन्हें उस समय घोर निराश होती है कि किसी शातिर व्यक्ति ने रात 9 बजे ही कैमरे को स्विच ऑफ कर दिया था। अब यह स्पष्ट हो गया था कि घटनाएँ पूर्व नियोजित थीं एवं आनंद की हत्या, लगभग तय मानी जा रही थी। अब पुलिस विभाग को टूटे हुये कप प्लेटों की फोरेंसिक रिर्पोटों प्राप्त हो जाती है जिसमें जहर का होना पाया गया।

पुलिस की टीम अब निश्चित निष्कर्ष पर पहुँच गई थी कि आनंद की मृत्यु स्वाभाविक ना होकर प्रायोजित थी। उन्होने अपने एक बहुत ही वरिष्ठ एवं होशियार ऑफिसर श्री हरीश रावत को बुलाया और यह जाँच उनके जिम्मे सौंपी गई। उन्होंने आनंद के बेडरूम, ड्राइंगरूम एवं घर की पुनः जाँच की उन्हें बगीचे के एक कोने में पिस्टल से चली गोली प्राप्त हुयी परंतु वहाँ खोजने पर भी रिवाल्वर नहीं मिल पाया और ना ही इसका उद्देश्य पता हो पाया। बेडरूम में जाँच करने पर एक ड्र्राज में किसी रजिस्ट्री के असली कागजात एवं उनकी फोटोकॉपी रखी हुयी थी। उसने जब इसके पन्नों की संख्या गिनी तो फोटोकॉपी में एक पन्ना ज्यादा पाया गया जिसमें सबसे नीचे आनंद के हस्ताक्षर थे। इससे यह मालूम हुआ कि असली कागजात से वह पन्ना जिसमें आनंद के हस्ताक्षर थे और उसके ऊपर शायद धोखे से क्रास करना भूल गया होगा जिससे इस पन्ने का उपयोग आनंद के हस्ताक्षर होने के कारण कही भी किया जा सकता है इसे पन्ने को प्राप्त करने में जिसका भी हाथ होगा वह बहुत ही चतुर और चालाक व्यक्ति होगा। उसने पोस्टमार्टम रिर्पोट बुलाकर गहराई से अध्ययन किया और यह पाया कि मृतक का अपेंडिसाइटिस एवं प्रोस्टेट का आपरेशन हो चुका है उसने आनंद के परिवार वालों से इस संबंध में पूछा तो मालूम हुआ कि आनंद का ऐसा कोई भी आपरेशन नहीं हुआ था यह जानकर तो हडकंप की स्थिति निर्मित हो गई गौरव से पूछा गया कि तुम्हें पोस्टमार्टम रिर्पोट पढी थी या नहीं उसने कहा मैंने रिपोर्ट नहीं पढी। मेरे दिमाग में तो सिर्फ जहर के विषय में जानकारी प्राप्त करना था और वह सही पाया गया। अब आनंद के परिजन, वरिष्ठ अधिकारीगण एवं मित्रगण सकते में आ गये क्या आनंद की जगह किसी दूसरे व्यक्ति का दाहसंस्कार हो गया है।

अब जाँच अधिकारीगण गौरव से चर्चा करते हैं वे उसको बुलाकर उससे पूछते हैं कि उस दिन आनंद ने आपके घर पर क्या बातचीत की थी ? आप रात में वापस आनंद के पास क्यों गये थे ?

गौरव ने कहा कि आनंद एक भावुक व्यक्ति था वह छोटी छोटी बातों में भावावेश में आकर अपने पर नियंत्रण खो देता था और ऐसी अवस्था में मुझसे या राकेश से संपर्क करके सलाह लेता था। वह पल्लवी से काफी अंतरमन से जुडा हुआ था। उसने उस पर दिल खोल कर खर्च किया था एवं अपनी संपत्ति की एक बहुत बडे हिस्से को अपनी मृत्यु के उपरांत वसीयत के माध्यम से उसे देना चाहता था। उसने इस प्रकार की वसीयत लिखकर पल्लवी को बताकर मेरे पास रख दी थी। पल्लवी का व्यवहार दिन प्रतिदिन कठोर होता जा रहा था। वह अपने पुराने परिचित रिजवी से विवाह करके अपनी जिंदगी बसाना चाहती थी। यह बात आनंद को मालूम होने पर उसे गहरा सदमा पहुँचा उस रात वह मुझे यह बताने के लिये आया था उसने वसीयत भी निरस्त कर दी है। और उसके कागजात मुझे देकर वापस चला गया था। उसके जाने के कुछ मिनिट पहले उसके मोबाइल पर फोन आया था पर यह किसका फोन था यह जानकारी मुझे नहीं हैं। जाँच अधिकारी ने कहा कि हमने आनंद के द्वारा पिछले एक माह में उसके द्वारा किये गये सभी फोन कालों का विवरण संबंधित विभाग से निकलवाने का निर्देश दे दिया है और हमें अगले दो दिनों के अंदर ही यह प्राप्त हो जायेगा। अब आप हमें आपके आनंद के घर जाने का मकसद बताइये ?

गौरव बोला आनंद के फोन करने पर मैं वापस उसके पास गया था। आनंद उसी वसीयत के संबंध में मुझसे सलाह लेना चाहता था कि उसे क्या करना चाहिये ? मैंने उसे समझाया कि इतनी जल्दबाजी की क्या जरूरत है आराम से सोच समझ कर काम कीजिये परंतु पता नहीं क्या बात थी आनंद बहुत घबडाया हुआ था। मैंने उसको सलाह दी थी कि तुम अपनी मूल्यवान संपत्ति अपने बेटों के नाम पर ही कर दो। अपने परिवार के अलावा किसी और को देने से क्या फायदा है। तुमने उसका वैसे ही बहुत कुछ देकर भला कर दिया हैं। उसे मेरी बात सही लगी और तुरंत ही नयी वसीयत अपने हाथ से बनाकर मुझे दे दी। गौरव ने वसीयत के सभी कागजात पुलिस के सामने रख दिये। और कहा कि मुझे इस बात का बहुत आश्चर्य है कि गोपनीय कागजातों की जानकारी पल्लवी को कैसे हो गयी । उसका फोन मेरे पास इस बात की सच्चाई जानने के लिये आ गया। मैंने उसे स्पष्ट रूप से कुछ भी ना बताकर गोलमोल ढंग से बात खत्म कर दी। वह दो दिन बाद वापिस आ रही है। और व्यक्तिगत रूप से मुझसे मिलेगी ऐसा उसने फोन पर कहा था। क्या इन बातों की जानकारी राकेश को भी है?

नहीं उसे वसीयत के बदले जाने के संबंध में कुछ भी नहीं मालुम मैंने आनंद के निर्देशानुसार इसकी जानकारी किसी को भी नहीं दी यहाँ तक कि मेरी पत्नी भी इससे अनभिज्ञ है। आपके और आनंद की मित्रता कैसे और कब हुयी? आपके ऊपर उनका इतना विश्वास क्यों और कैसे था। गौरव बोला मुझे राकेश ने आनंद से मिलाया था मुझे उसने कहा था कि आनंद बहुत अकेलापन महसूस करता हैं उसे एक विश्वसनीय दोस्त के रूप में सहायक की भी आवश्यकता है। वह जब शहर से बाहर जाता है तब भी वब उसे अपने साथ बाहर ले जाएगा। मुझे घूमने फिरने का शौक बचपन से ही रहा है मैं अपनी मेहनत के बल पर धन कमामकर यहाँ तक पहुँचा हूँ मेरे दोनो बेटे अमेरिका में उच्च पदों पर कार्यरत हैं तथा मैं दिनभर खाली रहता हूँ इसलिये मैंने राकेश को सहर्ष इस बात की स्वीकृति दे दी थी। इसके बाद आनंद से परिचय धीरे धीरे प्रगाढ़ मित्रता में बदल गया। मैं उसका बहुत ही विश्वसनीय मित्र हो गया जिससे वह अपने मन की बातें खुलकर बतलाता था।

हरीश रावत ने पल्लवी और आनंद की मित्रता के विषय में जब प्रश्न किये तो गौरव ने विनम्रतापूर्वक कहा कि वह इतना ही जानता है कि पल्लवी आनंद के ऑफिस में उच्च पद पर कार्यरत है वह किसी के भी निजी जीवन में ना ही दखल देता है और ना ही जानने की इच्छा रखता है वह जाँच अधिकारी के प्रश्नों को टाल गया और कुछ भी कहने से उसने इंकार कर दिया।

शहर के पत्रकारों ने वहाँ पहुँच कर इस विषय पर विस्तृत जानकारी माँगना प्रारंभ कर दिया। इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुये पुलिस अधिकारियों ने प्रेस कांफ्रेंस करके पत्रकारों से धैर्य रखने की प्रार्थना की और उन्हें बताया गया कि जाँच प्रक्रिया अभी प्रारंभिक अवस्था में है और हमें संदेह है कि आनंद की मृत्यु स्वाभाविक ना होकर के हत्या है। हमारी जाँच जैसे जैसे आगे बढेगी वैसे वैसे हम आपको समय पर सूचित करते रहेंगे। यह बात पत्रकारों को नहीं बताई गई कि पोस्टमार्टम रिर्पोट से संदेह हो गया है कि आनंद के स्थान पर उसके किसी हमशक्ल का अंतिम संस्कार कर दिया गया है ताकि जाँच प्रक्रिया प्रभावित ना हो सके।

अब आनंद के परिवारजन दिवंगत शरीर के आगे के संस्कार करने से मना कर देते है इससे एक विचित्र स्थिति सबके सामने निर्मित हो गयी थी और अब आगे क्या किया जाए यह सभी सोच रहे थे। सभी लोग हरीश रावत की होशियारी की तारीफ कर रहे थे कि उसने जाँच प्रक्रिया को एक नयी दिशा दे दी। अब यह प्रश्न उठ रहा था कि आनंद यदि जीवित है तो वह कहाँ हैं, वह दीवार कूदने के बाद सीधे पुलिस के पास क्यों नहीं गया, वह जीवित है भी या नहीं, उसने अपने परिजनों या मित्रजनों को संपर्क क्यों नहीं किया यह गुत्थी किसी के भी समझ में नहीं आ रही थी और इससे पुलिस के अधिकारी भी आश्चर्यचकित थे।

वे आनंद और पल्लवी के बीच के संबंधों की समीक्षा कर रहे थे। राकेश ने उनको कहा कि आपको इन विषयों पर जानकारी प्राप्त हो चुकी होगी अब आप मेरे से क्या जानना चाहते है ? जाँच अधिकारी बोला कि आपसे जो जानकारी प्राप्त होगी वह निश्चित रूप से पूर्णतया सत्य होगी। राकेश बोला मैं और आनंद बचपन के मित्र रहे हैं हम दोनों ने ग्रेजुएशन तक एक ही साथ पढाई की है। हम लोगों के आपस में व्यापारिक संबंध भी बहुत मधुर रहे हैं। उसने पल्लवी के बारे में बताते हुये कहा कि उसीके कारण मेरे और आनंद के बीच में कभी कभी तनाव हो जाता था। आनंद भावुक होने के कारण उसके कहने पर ना जाने क्यों उस पर धन लुटाने के लिये मजबूर हो जाता था। मैंने उसे ऐसा करने से रोकने का प्रयास किया जिसके कारण पल्लवी ने आनंद के कान भरना चालू कर दिये यह उसकी कमजोरी थी कि वह कान का बहुत कच्चा था। पल्लवी अब चाहती थी कि मेरे आनंद से मतभेद हो जाये ताकि उसका आनंद के ऊपर पूर्ण नियंत्रण हो सके।

वह अपनी बहन मानसी को भी मेरे से दूर करने के लिये प्रयासरत रहती थी। गौरव से मित्रता मैंने ही करायी थी और वह इससे बहुत खुश था क्योंकि वह एक कंजूस प्रवृत्ति का व्यक्ति है उसे आनंद के साथ बिना किसी खर्च के आने जाने के मिलता था। आनंद मुझे कहा करता था कि कुछ वर्ष पूर्व तक मसूरी की किसी लड़की के साथ उसकी मित्रता थी परंतु उसका विवाह हो जाने के बाद उसकी मुलाकात बंद हो गयी थी। इस विषय पर मैंने कभी विस्तार से नहीं जानना चाहा। हरीश रावत यह सुनकर चौंका और मन में उसने निश्चय कर लिया था कि वह पुलिस की एक टीम मसूरी भेजकर उसकी विस्तृत जानकारी प्राप्त करेगा।

उसी चर्चा के दौरान राकेश के पास फोन आता है कि वह कल अमेरिका के वीसा के लिये दिल्ली जा रहा है और उसे वीजा मिलते ही दूसरे दिन अमेरिका चला जाएगा। वह कहता है कि वह बहुत तनाव में है और उससे ऐसी पूछताछ की जा रही है जैसे वह शक के दायरे में हो उसे पल्लवी भी परेशान कर रही है इसलिये वह कुछ समय अपने बेटे के साथ अमेरिका में बिताना चाहता है यह जानकार कि गौरव विदेश जाने का प्रयास कर रहा हैं। जाँच अधिकारी इसकी सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दे देता है। वे आपस में विचार विमर्श करके गौरव को कहते हैं कि जब तक जाँच प्रक्रिया चल रही है तब तक वह कही बाहर नहीं जा सकता है। यह सुनकर गौरव भड़क जाता है और उसकी बहस उन अधिकारियों से हो जाती है। उनके यह कहने पर कि यदि गौरव उनकी बात नहीं मानेगा तो उसका पासपोर्ट हमें मजबूरन जप्त करना पडेगा।

राकेश पूछताछ के दौरान मानसी के साथ उसके संबंधों को स्वीकार कर लेता है। वह कहता है कि मानसी उसकी बहुत ही नजदीकी मित्र है जो कि उसके लिये समर्पित है परंतु इन बातों का आनंद की मृत्यु से कोई संबंध नहीं है। यह उसका निजी मामला है अतः इसमें मेरे व्यक्तिगत मामलों के पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है। जाँच अधिकारी के यह पूछने पर कि आपकी नजर में कौन संदिग्ध हो सकता है ?

(क्रमशः अगले भाग में जारी)

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नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3844,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,336,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2788,कहानी,2116,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,486,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी 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कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,838,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,8,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,315,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1923,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,649,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,688,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,56,साहित्यिक गतिविधियाँ,184,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,68,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
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रचनाकार: उपन्यास - रात 11 बजे के बाद - भाग 3 - राजेश माहेश्वरी
उपन्यास - रात 11 बजे के बाद - भाग 3 - राजेश माहेश्वरी
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रचनाकार
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