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कृष्ण जन्माष्टमी विशेष - सर्वकालिक कृष्ण // सुशील शर्मा

भारत के मथुरा में 3228 ईसा पूर्व में, एक बच्चा पैदा हुआ था, जिसे मानव जाति-आध्यात्मिक कृष्ण के आध्यात्मिक और लौकिक भाग्य को दोबारा बदलने के लिए नियत किया गया था। अपने 125 वर्षों के जीवन में, श्री कृष्ण ने मानव जाति की सामूहिक चेतना पर भरोसा किया- भक्ति और धर्म के साथ-साथ परम वास्तविकता के बारे में दुनिया को फिर से शिक्षित किया।

आज भी कृष्ण अपनी प्रासंगिकता को पूर्ण प्रभाव में बरकरार रखने में सक्षम हैं। गीता भगवान कृष्ण का दिव्य गीत है और इसे एक ऐसी किताब के रूप में माना जा सकता है जिस पर  सभी भक्त  निर्भर करते हैं !! शास्त्र के रूप में सर्वोच्च ज्ञान।

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युथानम् अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।

परित्राणाय साधुनाम विनाशाय च: दुष्कृताम, धर्मं संस्थापनार्थाय सम्भावामी युगे युगे॥"

           यह श्लोक सदा उद्घृत किया जाता है क्योंकि कृष्ण धर्म के सुदृढ़ीकरण के लिये अवतरित हुए थे. न कि किसी पंथ की प्राण-प्रतिष्ठा के लिये. धर्म जो सनातन हैं धर्म जो जनोन्मुखी है जनोत्कर्षी होता है.. पंथों को आप एक ज़मात मान सकते हैं. जो समकालीन एवम स्थानीय परिस्थिति सृजित होते हैं। आप ईश्वर के साकार स्वरूप पर विश्वास  करें न करें पर एक चिंतन अवश्य कीजिये जो जनोन्मुखी है जो सदाचारी है जो सर्वग्य है जो व्यष्टि से समष्टि की ओर जाने के लिये हमें सहयोग करता है वो ईश्वर है.. श्रीकृष्ण में यही सब तो विद्यमान है। कृष्ण क्या हैं आज तक कोई नहीं बता सका। आप उन्हें पुकारने की स्वतंत्रता  ले सकते हैं और एक ही समय में आप उन्हें  एक शरारती बच्चा, एक भाई, एक सारथी, एक योद्धा, एक शिष्य, एक गुरु, एक गौपालक  एक दूत, गोपियों के प्यारे ... पंथ-प्रवर्तक , आदर्श प्रेमी, एक दैवीय नायक या सर्वोच्च व्यक्ति  बुला सकते हैं।  अपने पूरे जीवन में, कृष्णा ने इतनी सारी भूमिकाएं निभाई- लेकिन पूरे समय कभी नहीं भूलते कि वे बस सिर्फ कृष्ण थे , उनकी भूमिकाएं, और उनकी असली प्रकृति शाश्वत, आनंदमय चेतना थी।,  एक ईश्वरीय व्यक्तित्व , जो  खुद को एक नेता, नायक, संरक्षक, दार्शनिक, शिक्षक और मित्र के रूप में बदल देता है। भगवान राम आदर्श पुत्र, आदर्श पति है; आदर्श राजा और मरियादा पुरुषोत्तम। इसके विपरीत, भगवान कृष्ण एक खुश-भाग्यशाली भगवान हैं जिनके जीवन में रंगीन अनुभव हमें सिखाते हैं कि जीवन के कठिन चौराहे पर क्या करना है।

आज दुनिया दुःख के सागर में डूब गई है और इससे बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रही  है। आज मनुष्य विभिन्न सांसारिक वस्तुओं की तलाश करने में लगा है  जो खुशी दे सकती हैं। आज सांसारिक वस्तु की इच्छा केवल भोजन और आश्रय तक सीमित नहीं है, बल्कि मन अधिक सनसनीखेज खुशी के लिए प्रयासरत रहता है !! आज मानवता की समस्या सिर्फ अस्तित्व ही नहीं है बल्कि  शारीरिक, भावनात्मक और बौद्धिक स्तर पर इंद्रियों से जुड़े सुखों की लालसा की खोज है।

मानव जाति के सभी पीड़ाओं और दुखों का स्रोत "अटैचमेंट" और "भय" है। मनुष्य अपने नजदीक और प्यारे लोगों से जुड़ा हुआ है और अपने कार्यों के चक्र का विस्तार करने में असमर्थ है !! उसके कार्य केवल अपने परिवार के कल्याण और उसके अधिकांश मित्रों और रिश्तेदारों तक ही सीमित हैं। जिसके कारण व्यक्तिगत जीवन में और पेशेवर जीवन में उसके कार्य पक्षपातपूर्ण हैं और वह अनिश्चितताओं से भी डरता है जो उसके और उसके नजदीकी और प्रियजनों के साथ हो सकते हैं। कृष्ण हर मोर्चे पर क्रांतिकारी विचारों के धनी रहे हैं. उनका सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि वह किसी बंधी-बंधाई लीक पर नहीं चले. मौके की जरूरत के हिसाब से उन्होंने अपनी भूमिका बदली और अर्जुन के सारथी तक बने.

कृष्ण ने अर्जुन को समझाया था कि , मानव आत्मा एक वृत की तरह शाश्वत है। कोई भी वास्तव में उसे मार नहीं सकता है, और इसलिए, उसे जीवन में युद्ध के मैदान की तरह  चिंतित या भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। आप निडर और बहादुर बनना सीख सकते हैं, तो अपने जीवन को सम्मान से जी सकते हैं,आप आप की देह नाशवान हैं लेकिन आपका  विवेक, आपकी आत्मा नहीं है।

अर्जुन को भगवान कृष्ण ने शिक्षित किया था कि वह एक नश्वर प्राणी है; एक व्यक्ति जो खाली हाथ पैदा हुआ है, और अंत में मरने पर खाली हाथ होगा। इससे, आप समझ सकते हैं कि आपके पास जो कुछ भी है वह ईश्वर से है और जो कुछ भी आप खो देते हैं, या देते हैं, वह स्वयं भगवान के पास जाता है। यह आपको निःस्वार्थ होना सिखाता है। कृष्‍ण से जुड़ी किसी भी कहानी को पढ़ें तो आपको ये बात साफतौर पर देखने को मिलेगी कि इंसान को दूरदर्शी होना चाहिए और उसे परिस्थि‍ति का आकलन करना आना चाहिए.

कृष्‍ण हमें यह भी सिखाते हैं कि मुसीबत के समय या सफलता न मिलने पर हिम्मत नहीं हारनी चाहिए. इसकी बजाय हार की वजहों को जानकर आगे बढ़ना चाहिए. समस्याओं का सामना करें. एक बार डर को पार कर लिया तो फि‍र जीत आपके कदमों में होगी.

भगवान कृष्ण की एक महत्वपूर्ण सलाह यह भी थी कि कुछ भी असंभव नहीं है अगर मन संकल्पित और निडर है तो, आसान मार्ग ,आसान लक्ष्य तक पहुंचते हैं और दुरूह मार्ग असाध्य लक्ष्य की प्राप्ति कराते हैं।  इससे, हम सीख सकते हैं कि हमारी नियति तक पहुंचने के लिए कोई शॉर्टकट नहीं हैं, और नियति  तक  पहुंचने के लिए, यदि आप  संघर्ष करना चाहते हैं तो कोई बाधा आपको कभी नहीं रोक सकती है।

भगवान कृष्ण की सभी शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी द्वापर या कहें उनके काल में थीं।  आप उनमें से अधिकतर को काफी अंतर्दृष्टिपूर्ण पाएंगे, और जो आप दिन-प्रतिदिन जिन समस्याओं का सामना करते हैं उनके लिए अत्यधिक प्रासंगिक हैं। इन शिक्षाओं के साथ, आप जीवन के अर्थ, परम सत्य और अपने दिमाग और आत्मा के ऐसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने में सक्षम हो सकते हैं।

सही या अच्छी चीज करना हमेशा आसान या आरामदायक नहीं है-खासकर आज के समय में। यदि आप कृष्ण की सलाह का पालन करना चाहते हैं और 'धर्म' द्वारा निर्धारित सिद्धांतों पर अपना जीवन जीना चाहते हैं, तो आपको जीवन में अनुसरण करने के मार्ग के बारे में मजबूत, स्वतंत्र और स्पष्ट होना होगा।

भगवान कृष्ण की शिक्षाएं हर किसी के लिए उपयुक्त हैं। "वह सिर्फ समाज के किसी विशेष वर्ग के लिए नहीं आये थे । उन्होंने सभी को दिखाया-यहां तक कि वेश्याओं, लुटेरों और हत्यारों को भी  आध्यात्मिक प्रगति की राह बताई । वह हमें अपने सच्चे धर्म के अनुसार जीने का आग्रह  , इसमें दृढ़ बने रहने के लिए, और जीवन के अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं। कृष्ण का जीवन पिछले युगों के लिए , आधुनिक दुनिया के लिए  और निश्चित रूप से आने वाले लोगों के लिए एक आदर्श है। 

अपने दृष्टिकोण और कर्म में सकारात्मक से अपना 'धर्म' का पालन करना ही कृष्ण का अनुसरण है।

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