---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

कहानी - दरिंदगी - वन्दना पुणतांबेकर "वंदन"

साझा करें:

मेरी जिंदगी की वह काली रात आज भी मुझे अच्छे से याद है। जब हम इस शहर में नये, नये आये थे। हम लोग तब कितने खुश थे। विशाल और संयम दोनों को मान...

मेरी जिंदगी की वह काली रात आज भी मुझे अच्छे से याद है।

जब हम इस शहर में नये, नये आये थे। हम लोग तब कितने खुश थे। विशाल और संयम दोनों को मानो यह शहर सपनों की तरह लगता था। हम कभी महानगर में नहीं रहे थे। छोटे शहर से अचानक महानगर की चकाचौंध हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। बड़े-बड़े मॉल, रेस्टोरेंट, भव्य इमारतें न जाने क्या,क्या ।

हम तीनों काफी खुश थे। विशाल का कम्पनी में प्रमोशन हुआ था। महानगर की बड़ी कम्पनी में आना उसे भी सुखद अनुभूति दे रहा था। संयम का अभी फोर्थ क्लास में एडमिशन करवाया था। अब कुछ किसी सपने की तरह लग रहा था। हम तीनों बहुत खुश थे।

वीनी उस रात के ख्यालों में ऐसे खो गई। जैसे सब कुछ अभी अभी हुआ हो।

हेलो.....,हेलो विशाल आज आप घर जल्दी आ जाना...?

"क्यों क्या बात है। मुझे तो शाम की फ्लाइट से पूना जाना है। आज सम्भव नहीं है। देर हो जाएगी।

"नहीं..."नहीं आज संयम का बर्थडे है। और हमारी यहाँ किसी से पहचान भी नहीं है। हम आज की शाम संयम के साथ किसी बड़े मॉल में जाकर मनायेंगे । वह खुश हो जायेगा। प्लीज़ मना मत करना।

"नहीं विनी आज पॉसिबल नहीं हैं। तुम्ही मैनेज कर लेना,एक अर्जेन्ट मीटिंग है । में अकेले इस शहर में संयम को लेकर नहीं जाऊँगी। आप कल चले जाना,में कुछ नहीं जानती कहकर विनी ने फोन रख दिया।

आज कैसा रहा ,बर्थडे स्पेशल डे तुम्हारा संयम के घर आते ही विनी ने पूछा...,"मॉम बड़ा मजा आया...,"ओके आज हम मॉल जायेंगे वहाँ खूब एन्जॉय करेगे..,

"रियली मॉम..,"यस रियली।

दो बज चुके थे। विनी आज बहुत खुश थी। तभी फोन की घंटी बजी, विशाल का फोन था।

हेलो ,"आज नहीं हो पायेगा,हम इस विकेंड संयम का बर्थडे सेलिब्रेट करेंगे,काम जरूरी है ,वीनी यदि यह मीटिंग अटेन्ड कर ली,और कंपनी को ये, प्रोजेक्ट फाइल पसंद आ गई तो, तुम्हारे पति देव का प्रमोशन पक्का है, डियर ऐसे मौके जिन्दगीं में बार-बार नहीं आते....,प्लीज़ मैनेज यू। ,

"नो,मैंने संयम को बोल दिया है, वह भी आपका इंतजार कर रहा है,कहते हुए विनी ने फोन पटक दिया।

ठीक पांच बजे डोर बेल बजी। विनी ने गेट खोला तो, विशाल हाथ में केक लिये खडा था।

विनी की खुशी का ठिकाना ना रहा। "आज आप हमारी फिरकी ले रहे थे क्या...?

" यह बात नहीं है। आज तुम्हारे दिल की मुराद पूरी हो गई,अब यह मीटिंग मंडे को है। किसी कारण से निरस्त हो गई हैं।

चलो केक काट लो। आज की शाम आपके ओर संयम के नाम कहकर हँसते हुए। संयम को गोद

में उठा लिया। तीनों ने मिलकर केक काटा ,सारे पिक्स फेसबुक, व्हाट्सएप पर सेंड की, अपनी जिंदगी की खुशियां विनी ने सब के साथ शेयर की। हजारों ब्लेसिंग आने लगे। आज विनी को मानो पंख लग गए थे।

तीनों इस रंगीन दुनियॉ की चकाचोंध देखने निकल पड़े।

आज उनके इकलौते बेटे का जन्मदिन था। विनी ने पहली बार इतना बड़ा भव्य मॉल देखा था।

उन्होंने मॉल घुमा, शॉपिंग की आज दुनियॉ की सारी खुशी उनके दामन मे थी।

गेम झोन में काफी शोरगुल था। तभी विशाल ने देखा कि उसका फ़ोन बज रहा था। उसने विनी को कहा..,"मेरा अर्जेन्ट कॉल है..,में बाहर जाकर बात करता हूं।

। वह बाहर बात कर रहा था। तभी संयम को वॉशरूम जाना था। विनी उसे लेकर वॉशरूम गई। कि अचानक बाहर गोलियों की आवाजें सुनाई देने लगी। चीख पुकार सुनकर विनी घबरा गई। वह वॉशरूम से बाहर आना चाह रही थी। लेकिन वह खुल नहीं रहा था।

वह काफी घबरा गई थी। उसने पहले कभी ऐसी आवाजें नहीं सुनी थी। अचानक लाईट चली गई। वह संयम को लेकर बाहर आना चाह रही थी। लेकिन दरवाजा नहीं खुल रहा था। तभी दरवाजा खुला ,एक आदमी अंदर आया। बोला,"मैडम मॉल में आतंकी हमला हुआ है। अभी बाहर मत जाओ यही पर छुपी रहो,नहीं तो बेमौत मारी जाओगी। विनी कुछ समझ पाती इसके पहले ही संयम उसका हाथ छूटकर बाहर निकल गया। विनी भी उसके पीछे भागना चाह रही थी। कि उस आदमी ने विनी का हाथ पकड़कर उसे रोक लिया।

बोला, बाहर मारी जाओगी । "लेकिन मेरा बेटा और पति बाहर है ,में यहाँ नहीं रुक सकती,छोड़ो मेरा हाथ घबराते हुए उसने उस आदमी से कहां। अपना हाथ छुटाकर जैसे ही विनी बाहर आई तो उसकी रूह कांप गई बाहर लाशें बिखरी पड़ी थी। विशाल और संयम उसे कहीं दिखाई नहीं दे रहे थे। चारों ओर घना अंधेरा था। समझ नहीं आ रहा था। कि वह किधर जाय। तभी गोलियों की आवाजें आने लगी। किसी के कदमों की आहट उसे अपनी ओर आते सुनाई दी। दो बड़े साये उसी की ओर आ रहे थे। हाथों में बड़ी सी बंदूकें थी। वह घबराकर उसी वॉशरूम में धुस गई। जहाँ वह आदमी बंद था। घबराहट से उसकी साँसे तेज होती जा रही थी। जुबा खामोश थी। आँखों से अश्रुधारा बह रही थी। तभी उन दो सायों ने वॉशरूम का दरवाजा खोला। और चेक किया उन्हें कोई दिखाई नहीं दिया। वह दोनों वापस चले गए। शायद अंधेरे की वजह से कुछ देख नहीं सके। विनी को समझ नहीं आया कि वह उन्हें क्यों नहीं देख सके। उसका मन जोर-जोर से रोने को कर रहा था। मगर वह रो भी नहीं पा रही थी। अभी,अभी पूरा मॉल लोगों की चहल-पहल से भरा था। वहाँ लाखों बल्बों की रोशनी ओर अब अचानक अंधेरा उसने फिर से दरवाजा खोलने की कोशिश की मगर नाकाम रही।

घबराहट की वजह से विनी को चक्कर आ गए वह वही बैठे,बैठे बेहोश हो गई। इस काली रात के सन्नाटे में सिर्फ गोलियों की आवाजें ओर चीख पुकार ही सुनाई दे रही थी। वह शख्स भी वही मौजूद था। जहाँ विनी बेहोश पड़ी थी। अलसुबह हो चुकी थी। चारों ओर पुलिस की गाड़ी के हार्न ओर शोर सुनाई दे रहा था। विनी को होश आया वह बदहवास सी चीख पड़ी,"मेरा संयम ओर विशाल कहा है..?,। देखा तो वॉशरूम में कोई नहीं था। वह आदमी जा चुका था। विनी डरते ,लड़खड़ाते कदमों से बाहर निकली । चारों ओर हजारों पुलिस वाले ओर एम्बुलेंस की आवाजों से विनी का सर चकराने लगा । बाहर चारों तरफ लाशें बिखरी पड़ी थी। अचानक उसका पैर किसी लाश से टकराया तो वह अपना संतुलन खोकर गिर गई । देखा तो संयम का शरीर खून से लथपथ पड़ा हुआ था। वह फिर से बेहोश हो गई। करीब आघे घण्टे बाद महिला पुलिस ने विनी को चेक किया। विनी को फिर से होश आया। वह संयम को देखकर अपना संयम खो चुकी थी। वही दहाड़े मार कर रोने लगी। पलक झपकते ही उसकी खुशियां बेनूर हो गई थी। महिला पुलिस ने पूछा आप यहाँ कैसे ? यहाँ बहुत ही कम लोग जीवित बचे हैं। वह उठी और सभी लाशों में विशाल को खोजने लगी। इतना मातम भरा माहौल उसके रोंगटे खड़े कर रहा था। रात में चमक रही फ्लोरिंग अब अपना रंग बदल चुकी थी,खून से सन गई थी। तभी एक कम्पाउंडर पास आया।

बोला,"आप का कोई मर गया है क्या ? उसकी इस अभद्र भाषा से वह चिड़चिड़ा उठी। तभी वहां माईक पर बताया गया। कि घायलों को पास के अस्पताल ले जाया गया है।

नया शहर था। विनी इस शहर के बारे में कुछ भी नहीं जानती थी। वह अस्पताल का पता पूछने लगी। क्योंकि उसे वहां विशाल कही दिखाई नहीं दिया। वह उस कम्पाउंडर के पीछे, पीछे भागी ओर एम्बुलेंस में चढ़ने लगी। तो वह बोला,"मैडम यह घायलों के ले जाने के लिये है, आपके लिए नहीं। वह बदहवास सी खड़ी रही, समझ नहीं आ रहा था। कि क्या करे। जोरों से रोने का मन कर रहा था । पर वह रो भी ना सकी।

तभी सामने एक कार आकर रुकी, खिड़की के शीशे नीचे का वह व्यक्ति बोला,"चलिये मैडम मैं भी वही जा रहा हूँ। देखा तो वही व्यक्ति था। जो पूरी रात विनी के साथ वॉशरूम में था। विनी बिना विचार किये उसकी गाड़ी में बैठ गई। अस्पताल आकर उसने हर एक शख्स को ध्यान से देखा। तो उसे विशाल घायल अवस्था में पलंग पर पड़ा था। उसके पास जाकर वह जोर,जोर से रोने लगी। वह शख्स बोला,"शुक्र है, आपके पति जिंदा हैं। मैं तो अपना पूरा परिवार खो चुका हूं। पत्नी और दोनों बेटियां खो चुका हूं।

ओर फफक कर रोने लगा। विनी ने अपने आप को सम्भाल वह आदमी बोला में आपकी हर तरह से मदद करने को तैयार हूं। अब मेरा इस दुनियॉ में कोई नहीं है।

अंजान शहर में विनी को थोड़ी राहत महसूस हुई। वह अजनबी अब विनी का विश्वास जीत चुका था। उसने पूरी तरह विनी की मदद की ,विशाल अपना एक पैर गवा चुका था। विकलांगता के साथ घर आ गया था। वह आदमी उसका हालचाल पूछने अक्सर आ जाया करता।

अचानक हुई इन परिस्थितियों ने वीनी को भी विकलांग बना दिया था। संयम छोड़कर जा चुका था।

विशाल की विकलांगता के चलते हमेशा विनी को उस शक्स से मदद लेनी पड़ती। वह शख्स अब विनी का हमदर्द बन चुका था।

विनी उस पर पूरी तरह भरोसा करने लगी थी।

एक दिन अचानक विशाल की हालत बिगड़ गई और वह चल बसा। इस हादसे को विनी बर्दाश्त ना कर सकी।

इस शहर में अब उस शख्स के अलावा विनी का कोई नहीं था। उसने इस शहर को छोड़ने का निर्णय लिया। सब कुछ बेचकर वह पुनः अपने पुराने शहर जाना चाह रही थी। इस काम में वह उस शख्स की मदद लेना चाह रही थी। उसने भी उसकी पूरी मदद की। जिस रात विनी अपने पुराने शहर आने वाली थी। उस शाम वह शख्स सारे रुपये लेकर उसके पास आया और बोला,"क्या में आपको आपके नाम से बुला सकता हु।

विनी को उस शख्स का इस कदर पास आना अच्छा नहीं लगा। वह विनी के अकेलापन का फायदा उठाना चाह रहा था। विनी ने सारे रुपयों का हिसाब मांगा तो कहने लगा।

"मैडम आपकी इतनी मदद की है,मेहनताना तो बनता ही हैं। विनी घबरा गई और अपनी आबरू बचाने के चक्कर में उस शख्स को ताला खींच कर मार दिया। वह वही गिर पड़ा। वह घबरा गई, क्योंकि उस शख्स को लोगों ने अक्सर आते देखा था।

उसने सारे रुपये पर्स में डाले और टैक्सी पकड़ कर स्टेशन पहुंची।

उसे पता ही नहीं चला कि वह शख्स मर गया या जिंदा था।

वह ट्रेन में बैठ गई और ट्रेन चल पड़ी। इस महानगर की वह काली रात उसकी जिंदगी के उजियारे को हमेशा के लिए लील चुकी है। अब उसके पास कुछ भी नहीं बचा था। शहर की दरिंदगी पर उसे नफरत हो रही थी। इंसानियत तो कही खो सी गई थी। हर व्यक्ति अपने जरुरत के मुताबिक इंसान से रिश्ता जोड़ता है।

उसका इंसानियत से विश्वास उठ चुका था। समझ नहीं आ रहा था। कि वह कहाँ जाय क्या करे। इसी विचार में उसे कब नींद लग गई उसे पता ही नहीं चला। वह जब सुबह उठी तो उसका रुपयों वाला बेग गायब हो चुका था। वह उसका एक आखरी सहारा थोड़ा पैसा था। अब वह भी खो चुकी थी।

कल जो अपने नसीब पर गर्व करती थी। आज वह उसी नसीब को कोस रही थी।

स्टेशन से बाहर आकर अपने पुराने घर की ओर वह पैदल ही चल पड़ी। पैसे चोरी हो गए थे। सब कुछ उस महानगर ने छीन लिया था।

तभी सामने से एक बाइक सवार युवा लड़का जो उम्र में उससे छोटा था। पास आकर बोला,"आपको कहा जाना है। में छोड़ देता हूं, इस कदर पैदल मत चलिये। अब बचा ही क्या था। जो लूट ले। यही सोचकर विनी उसकी बाइक पर बैठ अपने पुराने घर की चल पड़ी। थके कदमों से वह अपनी गली में चल पड़ी। उसने पड़ोसियों को सारे हालत के बारे में बताया। तो उन सबका नजरिया उसके प्रति बदल चुका था।

लेकिन वक़्त बदलते देर नहीं लगती। वह लड़का राहुल हमेशा उसकी मदद करता। राहुल ने उसे अपनी ही कम्पनी में नौकरी दिलवा दी। वह अपना जीवन यापन करने लगी।

राहुल उसकी जिंदगी में एक सच्चा हमदर्द बनकर आया था।

उन दोनों का रिश्ता एक सच्चा ओर पवित्र दोस्ती का था। मगर समाज उनके इस रिश्ते को बुरी नजर से देखता था। वह समाज की इतनी क्रूर और घिनौनी तसवीर देख चुकी थी। उसने समाज की परवाह किये बिना राहुल से दोस्ती निभाती रही। क्योंकि कि वह इस समाज की दरिंदगी को अच्छी तरह समझ चुकी थी। अब वह उस काली रात को याद कर दुखी नहीं होना चाहती थी। क्योंकि अब उसकी जिंदगी में एक नई सुबह की रोशनी उसे राहुल के रूप में मिल चुकी थी।

वन्दना पुणतांबेकर "वंदन"

इंदौर

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच करें : ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3911,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,337,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,258,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2870,कहानी,2166,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,495,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,91,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,330,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,54,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,23,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,1136,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,240,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1954,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,684,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,719,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,72,साहित्यम्,4,साहित्यिक गतिविधियाँ,193,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,73,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: कहानी - दरिंदगी - वन्दना पुणतांबेकर "वंदन"
कहानी - दरिंदगी - वन्दना पुणतांबेकर "वंदन"
https://4.bp.blogspot.com/-HF8tZ0Oae2o/XFfQ6NojehI/AAAAAAABG6s/aIRvOWYrnR8o2FBMdxy1Qbyyy2qzbJV1gCLcBGAs/s200/vandana.jpg
https://4.bp.blogspot.com/-HF8tZ0Oae2o/XFfQ6NojehI/AAAAAAABG6s/aIRvOWYrnR8o2FBMdxy1Qbyyy2qzbJV1gCLcBGAs/s72-c/vandana.jpg
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2019/02/blog-post_91.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2019/02/blog-post_91.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ