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पानी की कहानी - संजय कुमार श्रीवास्तव

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एक अमीर घराने का युवक था । वह अपने परिवार सहित शहर में रह रहा था उसकी ससुराल गांव में थी। वह पानी हमेशा मोटर से निकला हुआ और फ्रीज में लगा हुआ पीता था। पर गांव में उसके ससुराल थी। और वह गांव में लगे नल के पानी से बहुत नफरत करता था यहां तक कि वह अपनी बारात भी पानी की वजह से गांव नहीं ले गया। शहर के एक पैलेस में ससुराल वालों को बुलवाकर वही अपनी शादी करवा ली। और वहीं से तुरंत अपने शहर वापस चला गया। उसके बाद वह कभी गांव आने का नाम ही नहीं लेता था। ना तो खुद आता था और न ही अपनी पत्नी और बच्चों को ही आने देता था।

एक दिन उसका बच्चा पिंटू अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था। अचानक उसके दोस्त पप्पू को बुलाने उसकी मां आ गई। और बोली बेटा घर जल्दी चल तुझे नानी के वहां ले जाना है। पप्पू चला गया । और पिंटू वहां से सोचता हुआ घर आया और मम्मी से कहने लगा माँ मैं पप्पू के साथ खेल रहा था तभी उसकी माँ आई और - बोली बेटा घर जल्दी चल तुझे नानी के वहाँ चलना है। पापा तेरे तैयार हो चुके हैं मां नानी किसे कहते हैं इतनी बात बेटे की सुनते ही मां की आंखों में आंसू आ गए क्योंकि मां को 15 साल हुए थे वह गांव नहीं गई थी और बोली बेटा नानी उसे कहते हैं जो मां की मां हो।

पिंटू समझ नहीं पाया और मां से कहता है कि मां की मां कौन है कहां है क्योंकि पिंटू समझ रहा था कि मां की मां तो यही है जिन्हें हम दादी मां कहते हैं बेटा ओ मां तुम्हारे पिता की मां है पिंटू बोला मां आपकी मां कहां है मां कहती है बेटा मेरी मां गांव में है पिंटू मां से कहता है कि मुझे भी गांव जाकर अपनी नानी से मिलना है और जिद करने लगता है तभी मां समझाती है वहां तुम्हारे पिताजी जाने नहीं देंगे मां क्यों नहीं जाने देंगे तब तक पिंटू के पापा आ जाते हैं पिंटू क्या हो रहा है। क्यों परेशान हो पिताजी मुझे अपनी नानी के वहां जाना है। नहीं वहां तुम नहीं रुक पाओगे वहां सब पानी कुँए और तालाब का पीते हैं तुम बीमार हो जाओगे इतनी बात सुनी तो पिंटू शांत हो गया और शाम को सोते समय पप्पू की याद आई तो वह सोचने लगा कि पप्पू नानी के वहां जाता है तो बीमार नहीं होता है क्यों नहीं उसके मम्मी पापा मना करते हैं कि गांव नहीं जाना है।

पर उसकी तो माँ बुलाकर गांव ले गई है उसने सुबह होते ही फिर जिद कर दी और बोला पिताजी पप्पू तो बीमार नहीं होता इतनी बात पिंटू की सुनकर पिंटू के पापा ने पिंटू को डांटते हुए कहा अबे शांत रह नहीं जाना है कहीं नहीं जाना है पिंटू ने दो दिन से खाना नहीं खाया बस वही जिद कि मैं नानी के वहां जाऊंगा । मैं नानी के वहां जाऊंगा । वही पप्पू के साथ खेलूंगा बेटे को माता-पिता समझा ही रहे थे तब तक गांव से पत्र लेकर डाकिया पहुंचता है उस पत्र को ज्यो ही कहा कि पत्र गांव से आया है पिंटू की मां ने तुरंत ले लिया और पत्र को बड़ी खुशी के साथ खोला ही था कि पत्र की पहली लाइन पढ़कर ही जमीन पर गिर गई और रोने लगी मां तूने यह क्या किया कहां चली गई मां ।

मां के मुख से आवाज सुनते ही पिंटू रोने लगा और पत्र को पढ़ने लगा और उसमें लिखा था कि मेरी प्यारी बिटिया तुम्हारी माँ अब इस दुनिया में नहीं रही जब पिंटू की मां को होश आया तो गांव आने के लिए तैयार होने लगी लेकिन पिंटू के पिताजी का मन नहीं था कि मैं गांव जाऊं लेकिन चलते समय उन्होंने फ्रिज से पानी की चार बोतलें बैग में डाल ली और शहर से निकल पड़े लेकिन गांव इतनी दूर था कि वहां तक पहुंचने में चार दिन लग जाते थे और पिंटू के पिता ने पानी की सिर्फ चार बोतल ही रखी थी फिर वह गांव के नजदीक पहुंचते हैं और पानी खत्म हो जाता है गाँव वहां से चार मील दूरी पर था ।

पानी की बोतल एक भी नहीं बची सब खाली हो गई और पिंटू के पिता को प्यास बहुत जोर से लगी थी उन से चला नहीं जाता था । और गांव जाने के लिए वहां कोई भी साधन नहीं थे पैदल ही जाना पड़ता था और पिंटू के माता-पिता कुछ दूर पैदल चलते हैं जब वहां से गांव की दूरी दो मील बचती है । तो उन्हें बहुत प्यास लगती है। रास्ते में एक छोटा सा नाला पड़ा और गर्मी बहुत जोर से हो रही थी पिंटू के पिता का गला सूख रहा था। तभी गांव का एक बुजुर्ग युवक वहीं से गुजरता है उसने देखा प्यास से तड़प रहे युवक को तो उसने कहा बाबूजी पानी पियो तो ला दूं तो उसने बुजुर्ग बूढ़े व्यक्ति को जवाब दिया कहता है कि मैं तालाब और कुएं का पानी नहीं पीता हूँ।

वह चला गया बीस मिनट बाद पिंटू के पापा पिंटू की मां से कहते हैं कि पिंटू की मां मैं इसीलिए गांव नहीं आ रहा था । मेरा गला सूखा जा रहा है । मैं मर जाऊंगा तभी पिंटू की मां ने कहा मोटर वाला पानी यहां नहीं मिलेगा । इस नाले का पियो तो लाऊं प्यास जोर स लगी थी । वह करे तो क्या करें पिंटू के पिता ने बोतल दी और कहा कि इस बोतल में भर लो पिंटू की मां गांव की थी उसे पता था कि यहां के लोग खेत में भरा पानी भी छानकर पी लेते हैं ।

उसने भी यही किया उसने साड़ी के पल्लू को उस बोतल के ऊपर ढक बोतल को पानी में डुबो देती है और बोतल लेकर आई लो जी पानी पियो पिंटू की मां पिंटू के पापा को पानी पिलाती है और फिर चल देते हैं मैथिलीशरण गुप्त ने सही ही कहा है :- "निष्फल था जल यदि तृषा न हम में होती" धीरे-धीरे वह गांव के पास पहुँचता है। तभी एक व्यक्ति के पानी को सड़क पर डाल रहा था। तभी पिंटू के पिता की नजर उस पर पड़ी तो पिंटू के पिता ने कहा अरे भाई पानी को क्यों बर्बाद कर रहे हो तो उस व्यक्ति ने कहा बाबूजी यह पानी गंदा है पिंटू के पिता ने जवाब दिया कि वक्त पर गंदा पानी भी काम आ जाता है।
दोस्तों जिसके ऊपर बीतती है। वही जानता है पिंटू के पिता ने वही समझ लिया । कि पानी की कीमत क्या होती है । और किस तरह पानी को खर्च करना चाहिए कभी भी पानी के प्रति भेदभाव नहीं करना चाहिए ।

नाम  -     संजय कुमार श्रीवास्तव
ग्राम  -    मंगरौली
पोस्ट  -   भटपुरवा कलां
जिला  -  लखीमपुर खीरी
राज्य   -  उ o प्रo

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