370010869858007
Loading...

क्यों ना हर दिन मनाया जाए फादर्स डे - जयति जैन "नूतन"


क्या सिर्फ एक दिन ही किसी अपने को खास होने का एहसास दिलाना चाहिए। हर दिन को भी कुछ स्पेशल बना सकते हैं।

फादर्स डे हो, मदर्स डे हो, डॉटर डे हो या फिर कोई सा भी डे हो जरूरी तो नहीं कि किसी एक दिन ही इनको मनाया जाए। जब हम पूरा समय इन खास रिश्तो के बीच में बिताते हैं तो यह हमारी जिम्मेदारी भी बनती है कि हम उन रिश्तो को हमेशा संजोकर रखे और मौका दें कि वह हमेशा अपने आप को खास महसूस करें।

सिर्फ एक दिन साल में किसी को ग्रीटिंग कार्ड दे दिया, फूलों का गुलदस्ता दे दिया और एक केक कटवा दिया तो क्या सिर्फ इतने सबसे वह व्यक्ति हमारे लिए खास हो जाता है, नहीं। खास उसे हमारे रिश्ते बनाते हैं वह रिश्ता जो बच्चों का पिता के साथ होता है, वह रिश्ता जो बच्चों का मां के साथ होता है, वह रिश्ता जो भाई बहनों का होता है। ऐसे रिश्ते किसी गिफ्ट के मोहताज नहीं होते बल्कि वह स्वयं ही एक अनमोल गिफ्ट होते हैं जिनका कोई मोल नहीं होता। इसलिए जब चाहे तब उन्हें उपहार स्वरूप कोई ना कोई गिफ्ट दे सकते हैं।

फिर यह दिन क्यों मनाए जाते हैं? आप पूंछ सकते हैं, शायद लोगों ने यह सोचा होगा कि हर दिन तो हम गिफ्ट दे नहीं सकते, हर दिन हम किसी खास के साथ पूरा समय बिता नहीं सकते, हर समय हम किसी को यह अहसास नहीं दिला सकते कि वह कितना अनमोल है हमारे लिए। शायद यही सोच कर एक-एक दिन को चुन लिया गया और उनको नाम दे दिया। अगर दिन भर में थोड़ा भी समय हम अपने खास रिश्तो के लिए निकालें तो किसी एक दिन की हमें जरूरत नहीं होगी। हमारे पिता हमेशा से हमारे लिए हीरो रहे हैं और हमेशा रहेंगे भी। वह घर की नीव है जिसने परिवार को जोड़ कर रखा है। मां का योगदान अतुल्य होता है पर पिता के द्वारा किए समझौतों का कोई मोल नहीं होता।

पिता वह होता है जो स्वयं की ख्वाहिशों को भूल कर अपने बच्चे के लिए सब कुछ करने को तैयार हो जाता है इसलिए पिता के लिए एक दिन देना बेईमानी होगी। वह पिता जो हमारे जन्म से लेकर जब तक हम अपने पैरों पर नहीं खड़े हो जाते तब तक हमारी हर जरूरतों को हर ख्वाहिशों को शौक को पूरा करता है। अपने बचपन को हममें जीता है, जो खुद हासिल नहीं कर सके वह अपने बाल बच्चों को हासिल करता हुआ देखना चाहता है। पिता कभी स्वार्थी नहीं होता व सिर्फ दुनियादारी के हिसाब से चलता है ताकि उसके बच्चे दुनियादारी को समझ सके।

पिता भगवान की दी हुई एक अनमोल गिफ्ट होती है, जो हमें इस दुनिया में लाते हैं और बच्चे के जन्म के साथ पिता का दर्जा पाते हैं।

---- जयति जैन "नूतन" -----

पता- जयति मोहित जैन , 441, सेक्टर 3 , शक्तिनगर भोपाल.

आलेख 8632604831782442315

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव