---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

व्यंग्य: हांका और आखेट

साझा करें:

*-*-* - चार्वाक आजकल लोक में बहुत संभावनाएँ हैं. हमेशा ही रही हैं. मड़ई और चौमासा जैसी पत्रिकाओं को देखकर उत्तर प्रदेश के एक विश्वविद्यालय...


*-*-*
- चार्वाक

आजकल लोक में बहुत संभावनाएँ हैं. हमेशा ही रही हैं. मड़ई और चौमासा जैसी पत्रिकाओं को देखकर उत्तर प्रदेश के एक विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में चार व्यक्तियों को उस संभावना ने गुदगुदाया. कुछ दिन बाद ये व्यक्ति अध्यापक कक्ष में खिलखिला रहे थे. कायदे से इस समय इन्हें कक्षाओं में होना चाहिए था, पर परम्परा के अनुसार ये खिलखिलाते हुए समय बिता रहे थे. तभी इन्होंने तय किया कि लोकसाहित्य में कुछ हस्तक्षेप करना चाहिए. एक विद्वान जो विवाह से पूर्व हस्तक्षेप के कारण परम हस्तक्षेपी हो गए थे, बोले, ‘इसमें क्या है, कर देंगे. जब कहो तब कर दें.’ चार व्यक्तियों में तीन महापुरुष थे और एक महास्त्री. अंक महापुरूष ऋषि दुर्वासा के दत्तक पुत्र माने जाते थे. उन्होंने घोषणा की कि अगले हफ़्ते चलकर हांका लगाएंगे और लोकसाहित्य के किसी रूप का आखेट कर के लाएंगे. महास्त्री महाशांति के साथ मुस्कुराई.

एक सप्ताह बाद... दिन रविवार. चार विद्वान जीप पर जनादेश की भांति लदे हुए थे. जीप लोकतंत्र की तरह किसी गांव की ओर भागी जा रही थी. मिशन लोकसाहित्य. लोक काल के गुलगुले गाल में समा जायं इससे पहले उसे पकड़ कर प्रोजेक्ट के पिंजरे में डाल देना था. विद्वान एक तो उसका सिर अपने ड्राइंग रूम में लगाने के इच्छुक थे. आखेटक भागे जा रहे थे. लक्ष्य था दुर्वासा का गांव. जहाँ माल मिलेगा. दुर्वासा ने शिक्षिका को सखीभाव से देखकर छटपटाते हुए कहा, ‘अहा, क्या नहीं है लोकगीतों में. गोरिया सोवै उतान हो जोबना दूनो हालै.’ विषय प्रवर्तन न कर पाने की पीड़ा से ग्रस्त विद्वान एक ने टोका, ‘इसमें तो मर्यादा रूपी कंचुकी के बंद खुलते लग रहे हैं अर्थात् यह अश्लील है.’ दुर्वासा के वश में होता तो विद्वान एक को लील लेते, फिर भी बोले, ‘आपको विश्वविद्यालय में भर्ती किसने कर लिया भाई. यह तो अध्यात्म का उदाहरण है. गोरी यानी जीव, उतान यानी मोहनिद्रा में अचेत सो रहा है. परमात्मा या गुरु की कृपा सगुण और निर्गुण रूपी दो जोबनों की भांति उसे हिला हिला कर जगा रही है. यार, कभी तो देह के पीछे बैठे विदेह को देखा करो.’ शिक्षिका ने अपने सगुण और निर्गुण पर गड़ी दुर्वासा की दृष्टि को भांप कर उन्हें माया अर्थात् आँचल से आच्छादित कर दिया. जीप किसी कामुक की इच्छाओं की भांति लहराती हुई जा रही थी. विद्वान एक ने और सबने देखा कि बाईं ओर एक सांड़ निहित उद्देश्य के तहत एक गाय का अनुधावन कर रहा था. विद्वान एक बोले, ‘अहा, मानो गुरु योग्य शिष्य के भीतर ज्ञान प्रविष्ट कराने के लिए आतुर है. अहा.’ दुर्वासा ने रक्त का एक संक्षिप्त घूँट पिया.

जीप गांव में दाखिल हुई. जानवर चराने वाले लड़के, खेतों से आती औरतें और खैनी ठोकते फालतू बूढ़े आकर्षित हुए. कुछ उत्साहित लड़कों ने जीप में लटकने की फुर्ती दिखा ही दी. दुर्वासा दहाड़े, ‘अबे हट! गधे को तनिक भी तमीज़ नहीं. उठिबो चलिबो बोलिबो लिहिन विधाता छीन. जीप में खरोंच लग गई तो पैसा कौन भरेगा, तेरा बाप. अहा, लोक साहित्य में सच कहा गया है... इनसे बातें तब करो जब हाथ में डंडा होय. हट नहीं तो दूंगा लात.’ लड़के जीप छोड़कर पीछे पीछे चल रहे थे. दुर्वासा की गालियाँ विद्वान एक (मधुप जी), विद्वान दो (पपीहा जी), विद्वान ती (चकोरी जी) को ललित निबंध का लाइव टेलीकास्ट लग रही थीं. वे रहस्यवादी ढंग से खीसें प्रसारित कर रहे थे. जीप धूल और गालियां उड़ाती दुर्वासा के दरवाजे पर पहुँची. स्वागत में कुछ लोग खड़े थे. चारपाइयाँ बिछी थीं. दो बाल्टियों में पानी था. शुद्ध.

शिकारी जीप से उतरे. दुर्वासा घर के भीतर चले गए. मधुप पास खड़े नीम के पेड़ पर मुग्ध होने लगे. पपीहा कपड़े झाड़ रहे थे. चकोरी चारपाई पर यथा संभव बैठ गई. कन्धे पर अंगौछा डाले एक अर्द्ध आधुनिक युवक तेजी से करीब आ रहा था. आ गया तो पूछा, ‘का लेंगे आप लोग. ठंडा या गरम.’ मधुप बोले, ‘ठंडा यानी.’ युवक अदा के साथ ठठ्ठाया, ‘ठंडा मतलब कोका कोला. अरे अंकल, हियां सब मिलेगा.’ चकोरी यूटोपिया से बोली, ‘दही हो तो लस्सी बनवा लो... या नींबू का शरबत. ताजे नीबुओं की तो क्या खुशबू... और क्या स्वाद.’ युवक लहालेट हो गया, ‘क्या अंटी जी. हियाँ दूधै नहीं बचता, सब सप्लाई हो जाता है और निम्बू से बढ़िया है लिम्का. परधान के यहां जब अफसरान आवति हैं तौ लिम्कै पीते हैं और फिरि अंटी जी, बोतल क्यार मजै कुछ दूसर है.’ वाक्य पूरा करते-करते स्वाभाविक रूप से उसकी दूसरी आँख दब गई. चकोरी कुछ कहती कि मधुप बोले, ‘यार लिम्का ही मंगवा लो, हम तो भाई तुम्हारे मेहमान हैं. चाहे जैसी खातिरदारी करो.’ युवक के जाते ही पपीहा ने कहा, ‘देखा साले को. एक नम्बर का हरामी पीस है. गुरु हम लोग बिना मतलब दुःखी रहते हैं कि गांव वाले कष्ट में हैं. सब साले चकाचक हैं.’ मधुप गुनगुनाए, ‘भाड़ में जाएं इनके कष्ट. तुम प्रोजेक्ट का खयाल रखो बस. दुर्वासा बहुत नेता बनने की कोशिश कर रहा है.’ चकोरी चकित हुई, ‘मैं तो मान रही थी कि वे हमारे नेता हैं. आप लोग...’ पपीहा पुकार उठा, ‘उनके झांसे में मत आना मैडम चकोरी. सारी औरतों को बिटिया बिटिया करता रहता है, मगर मन में क्या है, भगवान जानें. आप को भी तो एक बार बिटिया कहा है.’ तब तक मधुप ने कुछ दूर खड़े एक लड़के को इशारे से पास बुलाया. लड़का सहमा फिर आगे बढ़ा. मधुप ने कहा, ‘एक लोटा पानी ला दो जरा धूल से भरा चेहरा ठीक कर लूं. ऐसी तैसी हो गई. तुम लोग यहाँ कैसे रहते हो यार.’ यार शब्द का प्रयोग आत्मीयता बढ़ाने के लिए किया गया था, जिसका उचित प्रभाव भी पड़ा. लड़का बोला, ‘अब्बै लाइति है.’ सहसा दुर्वासा प्रकट हुए और फट पड़े, ‘क्या लाएगा बे. अब ये बाहर से आए हैं, नहीं जानते, मगर तू तो जानता है अपनी जाति. सरऊ दिमाग खराब है. ये तेरे हाथ का पानी पिएंगे ठाकुर होकर. कभी तेरे बाप गजोधर ने ऐसी हिम्मत की थी.’ दुर्वासा अब लोकवीणा के ढीले तार कस रहे थे... यानी लड़के के कान उमेठ रहे थे. वीणा कस गई तो ध्वनि निकली. लड़का किसी तरह छूटा और चीखता हुआ भागा. युवक ठंडी बोतलें लिए पास आ रहा था. शिकारी खटिया पर पसर गए.

*-*-*

दिव्य नाश्ते के बाद भव्य भोजन की व्यवस्था. नाश्ते में अंकल चिप्स थे तो भोजन में मटर पनीर की सब्जी. भोजनोपरांत दुर्वासा, पपीहा, मधुप और चकोरी एक-एक व्यक्ति को लेकर बैठ गए और उनसे कुछ नोट करने लगे. दुर्वासा के भाई ने लोक गायकों की टोली को बुलौवा भेज दिया था. उनके आने से पहले शिकारी ऋतु गीत, जाति गीत, श्रम गीत, संस्कार गीत आदि के नमूने नोट कर रहे थे. मधुप परम पुलकित थे. उनके हिस्से में गौने से ताजा ताजा लाभान्वित होकर लौटी युवती आई थी. मधुप पहले चिन्तित हुए फिर अधीर, फिर आशान्वित होने लगे. युवती ब्रह्मज्ञान को उपलब्ध हो चुकी थी. वह समझ रही थी और गौनान्वित गरिमा का निर्वाह कर रही थी. लिखते लिखते मधुप पेचिश सदृश मार्मिक मरोड़ के साथ बोले, ‘अभी अभी तो रेल चलाय दूंगी - इसका मतलब क्या है. कोठरी में रेल कैसे चला दोगी’ युवती रेल यात्रा के संस्मरणों में खो गई फिर सावधानी से मुसकराई, ‘हमारी चाची ने याद करवाया है. उनसे पूछ कर बताती हूँ.’ मधुप हड़बड़ाए, ‘रहने दो, मैं दुर्वासा सर से पूछ लूंगा.’ युवती मूड में थी, ‘कौन, बड़कऊ चाचा. वो लखनऊ में रहते हैं, चाची यहाँ. अकेले कहीं रेल चलती है. वो क्या बताएंगे मतलब. भौजी को बुलाऊं.’ मधुप ने कहा, ‘बस हो गया, तुम जाओ.’ तब तक युवती को बुलाने एक अन्य अविवाहित युवती आ गई. दोनों चली गईं. पपीहा के कान शायद इसी ओर थे. उठ कर आए और धीरे से कहा, ‘मधुप डियर ये जाहिल लोग हैं. लक्षणा व्यंजना नहीं समझते. जरा होशियारी से. बिच्छू का मंत्र नहीं जानते तो सांप की बांबी में हाथ क्यों घुसेड़ रहे हो.’ मधुप उत्तेजित और उत्साहित थे. इस बार लूजमोशनोचित लालित्य के साथ बोले, ‘सीईई! आह! ह हा! डियर पपीहा, लोकसाहित्य में क्या गंध है, क्या भराव है, क्या कसाव है. अभी भी बहुत कुछ अछूता है. मन करता है लोकसाहित्य के साथ ही सोऊं उसी के साथ जागूं. काश मैं रहूँ और रहे लोक. लोकसाहित्य को लेकर मेरे अरमान भड़क उठे हैं.’ पपीहा मुसकराया, ‘भगवन मुझसे न उड़ो. मैं न कहता हूँ कि दुर्वासा के चिरयौवन का रहस्य यही लोकसाधना है.’

मधुप ने मानों भीष्मप्रतिज्ञा की, ‘दाँत किटकिटा कर कहता हूँ कि अब लोकसाधना ही करूंगा. धीरे-धीरे ही सही, करूंगा. पत्नी छूटे, छूट जाय. करूंगा. धीरे धीरे ही सही. बूंद बूंद से सागर भर जाता है. एक एक रोंया मिलकर बालों का गुच्छा बन जाता है.’ इधर चकोरी जी तड़ातड़ लोकगीत गिरा रही थीं.

दुर्वासा अपने बड़े भाई मतंग के साथ दुआरे खटिया पर बैठे थे. दुर्वासा पूछ रहे थे कि तमाम जातियों में गाए जाने वाले गीत कैसे इकट्ठा होंगे. मतंग बमक पड़े, ‘छोटकन्ने सिंह सच्ची कहते हैं बड़कऊ कि सालों को मोटाई सवार है. किसी को परवाह है अपनी संस्कृति की. घर की परम्परा का किसी को ध्यान नहीं. इसके बाप दादा कितने नेक और देशभक्त थे. सौ सौ जूते खाए मगर घर की परम्परा नहीं त्यागी. अब कहारों धोबियों पासियों के गीत कहाँ मिलेंगे. सब सौखीन हो गए. कोई पैर दबाने वाला तो मिलता नहीं. पहले निकलो तो पैलग्गी करने वालों की लाइन लग जाती थी. अब कहीं मरजाद का खयाल नहीं. बहुत हुआ तो नमस्ते. कलियुग है. लोकसाहित्य और लोकगीत का तो राम ही मालिक है. जब तक हमारा बस चला जूतों के जोर पर इसे बचाए रखा. अब क्या होगा.’ दुर्वासा मारे क्रोध के कांपने लगे. बस चलता तो अभी नरसंहार प्रारंभ कर देते.

*--*

लोकगायकों ने समां बाँध दिया. शिकार पूरा हुआ. दुर्वासा भाई से बोले, ‘मैटर मिल गया. अब चलने की तैयारी की जाए. अगले महीने फिर आएंगे. लोक साहित्य खतरे में है.’ मधुप के मन में कुछ रेलगाड़ी सा धड़धड़ाया, ‘मेरे होते हुए उसे कोई छू भी नहीं सकता. तुम घबराना नहीं लोकसंस्कृति मैं फिर आउंगा.’ दुर्वासा धीरे से बोले, ‘पगलैटी मत झाड़ो, चलकर जीप में बैठो.’ जीप चली और गांव से बाहर आई. सहसा सामने एक बूढ़ा और बुढ़िया आ गए. दुर्वासा बुदबुदाए, ‘आ गए साले लतमरुए. ये दोनों अपने को लोकसंस्कृति का जानकार बताते हैं.... स्साले. अथवा एक साला एक साली.’ मधुप खिलखिलाया, ‘भूखी नंगी लोकसंस्कृति, चिथड़ा लपेटे लोक साहित्य.’ दुर्वासा का भाई मतंग दौड़ता आया और बूढ़ों को परे ढकेला. जीप बढ़ी. धूल में सब गुम हो गए. पपीहा गुनगुना रहा थाः
‘नई झुलनिया की छइयां
बलम दुपहरिया बिताय दा हो.’

शिकारियों से लदी जीप भाग रही थी.

*--*
साभारः कथाक्रम, जुलाई-सितम्बर 2005 अंक.
कथाक्रम – कथा साहित्य, कला एवं संस्कृति की त्रैमासिक पत्रिका है, जिसके संपादक शैलेन्द्र सागर हैं. 20 रुपए मूल्य की यह पत्रिका पिछले सात वर्षों से प्रकाशित हो रही है. संपर्कः 4, ट्रांजिट हॉस्टल, वायरलेस चौराहे के पास, महानगर, लखनऊ – 226006
ईमेल – kathakrama AT rediffmail DOT com

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4040,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3005,कहानी,2255,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,541,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,96,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,345,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,67,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,242,लघुकथा,1249,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2005,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,709,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,794,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,84,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,205,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: व्यंग्य: हांका और आखेट
व्यंग्य: हांका और आखेट
http://photos1.blogger.com/blogger/4284/450/320/madai%20001.jpg
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2005/08/blog-post_22.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2005/08/blog-post_22.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ