देखने लायक है मास्को में तोलस्तोय संग्रहालय

SHARE:

- महेश दर्पण मास्को स्थित तोलस्तोय संग्रहालय दरअसल एक लॉज हुआ करता था। यहां तब एक कोचवान और सहन की देखभाल करने ...



- महेश दर्पण

मास्को स्थित तोलस्तोय संग्रहालय दरअसल एक लॉज हुआ करता था। यहां तब एक कोचवान और सहन की देखभाल करने वाले रहा करते थे। तोलस्तोय संग्रहालय देख कर लेखक के उन दिनों की कल्पना बखूबी की जा सकती है। मैं और अनिल अचानक ही यहां पहुंचे थे।

इसका डाइनिंग रूम देखने लायक है। कहते हैं, यहां सिर्फ मेहमानों को ही वाइन पेश की जाती थी। तात्याना ने बेटी मारिया का जो चित्र बनाया था, वह यहीं रखा हुआ है। उस वक्त की एक जर्मन घड़ी भी सजी हुई है। ठीक सामने एक बड़ी खिड़की है। इसके साथ ही लगे दूसरे कमरे में रहने वाले, परिवार के लोग, बदलते रहते थे। उसी वक्त का खास सामान यहां रखा गया है। लेखक के बेटे सर्गेई की पत्नी का चित्र, तोल्सतोय की पत्नी का पलंग, पियानो और तमाम दूसरी चीजें यहां देखी जा सकती हैं।

म्यूजियम के बहाने अंतरंग जीवन-कथा भी खुलती है लेखक की। समय से पति-पत्नी का शयन कक्ष तीसरा कमरा हो गया। आखिरी बेटे के जन्म के बाद पलंग अलग कर लिए गए थे। यहीं मेज पर सोफिया पति की रचनाओं के प्रूफ और घर का हिसाब देखा करती थीं। वह कहानियां भी लिखती थीं। संगीत में तो उनकी दिलचस्पी थी ही, वह फोटोग्राफी भी किया करती थीं। ज्यादातर कामकाज उन्हीं के निर्देशन में हुआ करता था। यही वजह है कि यहां मेहमानों की लिस्ट, हिसाब-किताब और बिल आदि भी सहेज कर रखे गए हैं।

तोल्सतोय के पलंग पर रखा हुआ कंबल कभी खुद पत्नी ने बुना था। किसी खास अवसर के लिए तैयार कराया गया आमंत्रण पत्र भी रखा हुआ है। अपने सबसे छोटे बेटे के साथ सोफिया आंद्रेवना का चित्र भी देखा जा सकता है जो कलाकार गे ने बनाया था।

चौथा कमरा बच्चों का है। पहले तीन बच्चे यहीं रहते थे। दो बेटे और एक बेटी। बाद में अलेक्सांद्रा बड़ी होकर इस कमरे से चली गई। इस कमरे में बच्चों का सारा सामान सुरक्षित रखा हुआ है।

वान्या को लेखक खूब प्यार करते थे। उन्हें यकीन था कि छोटा बेटा ही उनका प्रभु सेवा का काम पूरा करेगा। यह कमरा उसकी स्मृतियों को संजोए है। यहां आप सर्गेई की लिखी एक कहानी का संपादित रूप देख सकते हैं। यहां रखे दस्तावेज बताते हैं कि वान्या सात साल का होकर मर गया। दो पलंग हैं जिनमें से एक पर आया और एक पर बच्चा सोया करता था। दरवाजे पर ही झूले के कांटे लगे हुए हैं। एक पक्षी का पिंजरा रखा हुआ है। कई हस्तशिल्प और खिलौने उस समय की कला से परिचित कराते हैं।

एक कमरा बच्चों की पढ़ाई का है। इसे देख कर पता लगता है कि सामान्य पढ़ाई के अलावा यहां विदेशी भाषाएं भी सीखी जाती थीं। अलेक्सांद्रा के अलावा यहां गवर्नेस हमेशा रहा करती थी। वह आमतौर पर जर्मन या फ्रेंच में बोला करती थी। जर्मन सोफिया भी पढ़ा देती थी। कुर्सी की गद्दियों पर कढ़ाई तोलस्तोय की पत्नी ने की है। यहां उस वक्त इस्तेमाल होने वाला लकड़ी का संदूक और कुछ बर्तन भी रखे हुए हैं।

इस कमरे को पार कर के आप नौकरानियों के कमरे तक जा पहुंचेंगे। इनका काम हुआ करता था कपड़े धोना, प्रेस करना और जरूरी मरम्मत। खाली समय में ये मेज के पास आकर चाय पिया करती थीं। इनमें से एक नौकरानी मारिया ने रसोइए से शादी कर ली थी। इस कमरे की विशेषता यह है कि यहां से आप बाहर भी जा सकते हैं और ऊपर भी। यहीं से खाना लाया जाता था।

सातवें कमरे में दो बेटे आंद्रेई और मिखाइल रहा करते थे। इनके लोहे के पलंग अब भी यहीं रखे हैं। ये वॉयलिन और हारमोनियम बजाया करते थे। उनकी मेज भी यहीं रखी हुई है। आठवां कमरा बेटी तात्याना का है। कमरे की खूबसूरती उसके बताए गए मिजाज के अनुरूप ही है। उसने चित्रकारी और कढ़ाई बाकायदा सीखी थी। उसके बारे में कहा जाता है कि वह काफी मिलनसार, दयालु और खुशमिजाज थी। उसे छोटे बच्चों की बड़ी चिंता रहती थी। यही नहीं, जब कभी मां-बाप में तनातनी हो जाती, समझौता भी यही कराती थी। वह गे, रोपिन और कसातकिन जैसे चित्रकारों की मित्र थी। इस कमरे में रखे तात्याना के कई पोट्रेट इन्हीं चित्रकारों के बनाए हैं। इस कमरे की एक मेज पर काला मेजपोश बिछा है। इस पर मेहमानों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। उन पर कढ़ाईदार काम भी है।

इसके बाद खाना सर्व करने वाला कमरा आता है। यहां उस जमाने का मिट्टी के तेल का एक लैंप रखा हुआ है। यहां दून्या रोज आमलेट बनाया करती थी। घर के लोग उससे कॉफी और खिचड़ी भी बनवा लिया करते थे। शेल्फों में बर्तन सजे हैं। यहीं पास में एक अलमारी में तोल्सतोय का कोट रखा है। इसका साइज बताता है कि वह कितने लंबे-तगड़े थे।

नीचे की मंजिल में तोल्सतोय खुद रहते थे और ऊपर मेहमानों को टिकाते थे। आप जरूर जानना चाहेंगे कि मेहमानों में अक्सर आने वालों में कौन लोग होते थे। इनमें थे : चेखव, लेस्कोव, बुनिन, अस्त्रोवस्की और गोर्की।

ऊपर जाने के लिए, पहले नकली भालू के हाथ में विजिटिंग कार्ड रखते थे लोग। ये वे दिन थे जब बिजली नहीं हुआ करती थी। इसीलिए गैलरी में चित्रों के मॉडल रखे हैं। यही थी चित्र बनाने की जगह। यहां घोड़ों के दो चित्र आज भी आप देख सकते हैं। ये हैं : ताकत का अंदाजा बुढ़ापे मेंऔर ताकत का अंदाजा जवानी में ये दोनें चित्र स्वेर्चकोव के हैं। ये उन्होंने तोल्सतोय को भेंट किए थे।

हॉल में संगमरमर इंप्रेशन का वॉल पेपर लगा है। यहां गोष्ठी और पारिवारिक समारोह हुआ करते थे। इन समारोहों में स्क्रियाबिन, रहमानिनब, रिम्स्कीकोर्साक, तानेमेव और शाल्यापिन जैसे संगीतकार आया करते थे। यहां आप तोलस्तोय की वह मूर्ति भी देख सकते हैं जो गे ने खुद बना कर उन्हें भेंट की थी। एक रीछ की खाल भी यहां रखी हुई है। कहते हैं, इस रीछ ने लेखक पर हमला कर दिया था।

तोलस्तोय मेहमानों का जमकर स्वागत करते थे। खासकर ईस्टर के मौके पर। ईस्टर पर्व मनाते हुए कई चित्र यहां उनके साथ विशेष लोगों के देखे जा सकते हैं। एक बड़ी शतरंज भी यहां रखी है। आप चाहें तो यहां रिकार्ड की गई तोलस्तोय की आवाज भी सुन सकते हैं। इसमें वे गांव के स्कूली बच्चों को संबोधित कर रहे हैं। जो कुछ मैं सुन पाया, उसका अभिप्राय लीना ने मुझे यह बताया :शुक्रिया बच्चो कि आप मेरे पास आते हैं। मैं खुश हूं। मुझे मालूम है कि आप में ऐसे बच्चे भी हैं जो पढ़ाई नहीं करते। वे शैतानी करते हैं। बड़े होने पर आप लोग मुझे याद करेंगे।

वैसे रिकार्ड तो उस म्यूजिक का भी रखा है जो तोलस्तोय की पोती बजाया करती थी। गैस्ट रूम में कलाकार सिरोव का बनाया सोफिया का खूबसूरत चित्र रखा है। दूसरा चित्र तात्याना का रेपिन का बनाया सजा है। गे का बनाया मारिया का चित्र भी यहां मौजूद है। देखने वाला सोच सकता है कि ये मूल चित्र हैं, लेकिन आप इस भ्रम में रहें, दरअसल ये सभी उनकी अनुकृतियां हैं। हां, यहां आप तोलस्तोय की पत्नी के हाथ का बुना कालीन भी देख सकते हैं। दीवार के आकार का एक शीशा, कुर्सी, मेज और उस वक्त का बहुतेरा बेशकीमती सामान यहां नजर आता है। लेकिन आप इसे देख कर जब खुश हो रहे हों तो यह भी याद रखिएगा कि तोलस्तोय खुद इसे बोर मेहमानों का कमरा कहा करते थे।

यहां वह कभी कभी ही मिलने आया करते थे। यहां अक्सर घर की मालकिन की सहेलियां आकर बैठा करती थीं। यहीं वह छोटी-सी मेज भी है जिस पर बैठ कर सोफिया पति की रचनाओं के प्रूफ देखा करती थी। आखिरी कमरे में यहीं वह पलंग भी रखा हुआ है जिस पर लेखक सोए थे। यहां आपको परिवार के तमाम सदस्यों की तस्वीरें नजर आएंगी। वे उपहार भी बाकायदा सजे हैं जो बच्चों ने लेखक को शादी की सालगिर के मौके पर भेंट किए थे।

इस म्यूजियम में यह गौर करने लायक बात है कि मारिया के कमरे की छत सबसे नीची है। वही पिता की रचनाओं का पुनर्लेखन, उनके पत्रों के उत्तर देने का काम करती और बच्चों को पढ़ाया करती थी। पिता उससे खूब खुश रहते थे। वह अनुवाद भी किया करती थी। इनमें प्राय: लेखक की रचनाएं और फ्रांसीसी से अनुवाद होता था। यहां मेज पर बिछे मेजपोश पर परिवार के लोगों के हस्ताक्षर नजर आते हैं। वह कंबल भी रखा हुआ है जिसे सोफिया ने बनाया था। घर की मैनेजर अवरोतिया थी। जो कई सालों तक सेवा में रही। कुल दस नौकर थे।

एक कमरे में तोल्सतोय परिवार की महिलाओं के वस्त्र रखे हुए हैं।

वह कमरा, जहां मुख्य नौकर इल्या सिदोरको खाना लगाता था, उसी तरह से सहेज कर रखने की कोशिश की गई है। उसे लेखक द्वारा बाकायदा मेहमानों की सूचना दी जाती थी। लैंप में तेल वही डाला करता था। वही बच्चों और सोफिया को शहर ले जाता था। सच पूछें, तो यह लेखक का सबसे विश्वस्त नौकर था। शायद इसीलिए अपनी कई किताबें, प्रिय सामान और तस्वीरें लेखक ने उसे भेंट की थीं। यहां मौजूद दस्तावेज बताते हैं कि बीमारी के दिनों में तोलस्तोय की सबसे ज्यादा सेवा इसी ने की थी। हालांकि सच यह भी था कि लेखक को किसी की मदद लेना कतई पसंद नहीं था। इसके पीछे उनकी वह धारणा सबसे ज्यादा काम करती थी कि किसी को नौकर मानना नैतिक रूप से खराब करता है। इस कमरे में एक फ्रेंच कलाकार का बनाया इसी नौकर का चित्र सजा हुआ है।

लिखने-पढ़ने के कमरे में दीवारें रंगी हुई हैं। जमीन पर चटाई बिछी है। फर्नीचर कम, लेकिन भारी है। तोलस्तोय नौ से दस बजे के बीच यहीं बैठ कर लिखा करते थे और फिर अंतराल होता था। इसके बाद तीन से चार बजे के बीच लेखन होता था। इसके बाद वह पत्र लिखते थे। यहीं उन्होंने पुनरुत्थान, फादर सर्गेई, इवान इलिच..., जीवित शव और मुझे क्या करना चाहिए जैसी किताबें लिखीं। धर्म से मोह टूटने के बाद धर्म सभा को उत्तर भी उन्होंने यहीं से लिखा। लेखक को कुर्सी की ऊंची टांगें पसंद नहीं थीं। कुर्सी के पैर उन्होंने खुद काट कर छोटे किए थे। ये वे दिन थे जब लेखक की नजर कमजोर हो गई थी। कुर्सी को कम ऊंचा रखने का कारण यही था कि तोलस्तोय उन दिनों ज्यादा झुकना नहीं चाहते थे। काम करते-करते थक जाते तो खड़े होकर स्टैंड पर लिखने लगते थे। काम के बाद जिन चौड़ी कुर्सियों पर लेखक आराम करते थे, वे भी यहीं रखी हैं। यहीं वह घर आए लेखकों से मुलाकात किया करते थे।

इस कमरे के बाहर लेखक के जूते रखे हुए हैं। उनके कपड़े, साइकिल और खेत में काम करने का जरूरी सामान भी रखा है।

सात बजे उठ कर तोलस्तोय बाहर के कमरे में नहाया करते थे। कमरों की सफाई वह खुद किया करते थे। सर्दियों में लकड़ी काटना और फिर उन्हें उठा कर लाना उनके लिए रोजमर्रा के कामों में शुमार था। अपने कमरे में भट्टी भी वह खुद ही जलाते थे। दूर से पानी लाने के लिए वह बर्फगाड़ी का इस्तेमाल किया करते थे। इन तमाम कामों से संबद्ध उनकी कई चीजें आज भी वहां रखी हैं।

घूमने के बाद अक्सर तोलस्तोय जूते बनाया करते थे। जूते बनाना उन्होंने मास्को में रहकर ही सीखा था। इस काम में आने वाली चीजें यहीं सहेज कर रखी गई हैं। तात्याना के पति के लिए लेखक ने यहीं जूता बनाया। यहीं फेथ नाम के कवि के लिए भी उन्होंने जूता बनाया। उनका बनाया एक जूता यहां रखा हुआ है। आप चाहें, तो यहीं वह साइकिल भी देख सकते हैं जो तोलस्तोय चलाया करते थे। उन्हें मुगदर चलाने का शौक तो था ही, कहते हैं लेखक ने बुढ़ापे की उम्र में भी साइकिल चलाई। ये तमाम चीजें साहित्यप्रेमियों के लिए प्रदर्शित हैं।

कहते हैं, यह सब लेखक की पत्नी ने सरकार को बेच दिया था। बाद में सरकार ने यहां म्यूजियम बना दिया। दुनिया भर से आए लोग इसे देखने का मोह नहीं छोड़ पाते। इसके रख-रखाव में अब अच्छा-खासा खर्च होता है। शायद यही वजह है कि इस म्यूजियम में प्रवेश के लिए हमें बहुत से रूबल खर्च कर टिकट लेना पड़ा। फोटो खींचने के लिए कुछ रूबल अलग से। हां, आप पिछले दरवाजे के पास या बाहर वाले कमरे का फोटो खींचना चाहें तो बगैर कुछ दिए खींच सकते हैं।

म्यूजियम से, हमारे बाहर पहुंचते ही आइसक्रीम वाले लड़के ने कहा : गुड मॉर्निंग। अनिल ने उससे ज्द्रास्तुइचेकहा तो वह शर्मा गया। उसके साथ की सुंदरी भी हंस पड़ी।

**-**

रचनाकार महेश दर्पण की अन्य रचनाएँ यहाँ पढ़ें

http://rachanakar.blogspot.com/2006/06/blog-post_115080611943719228.html

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: देखने लायक है मास्को में तोलस्तोय संग्रहालय
देखने लायक है मास्को में तोलस्तोय संग्रहालय
http://photos1.blogger.com/blogger/4284/450/320/tolstoy-museum.0.jpg
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2006/06/blog-post_22.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2006/06/blog-post_22.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content