धारा के विपरीत बहना

SHARE:

आलेख -मनोज सिंह विगत सप्ताह एक चर्चित हस्ती का साक्षात्कार छपा था। व्यक्ति का नाम यहां महत्वपूर्ण नहीं। किसी के व्यक्तित्व की आलोचना...

आलेख

-मनोज सिंह

विगत सप्ताह एक चर्चित हस्ती का साक्षात्कार छपा था। व्यक्ति का नाम यहां महत्वपूर्ण नहीं। किसी के व्यक्तित्व की आलोचना करना लेखक का उद्देश्य नहीं। साथ ही, न तो उनके गुण-दोष की विवेचना करना और न ही पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर दुर्भावना फैलाना इस लेख का मकसद है। हां, मगर किसी क्षेत्र के शीर्ष पर बैठे पुरुष के कथन पर चर्चा करने में कोई हर्ज नहीं दिखाई देता। शीर्ष पुरुष सदा अग्रिम पंक्ति में होते हैं, आगे चलते हैं, अप्रत्यक्ष तौर पर समाज को नेतृत्व प्रदान करते हैं। और चूंकि नायक के पीछे अवाम चलता है इसलिए उस पर चिंतन किया जाना आवश्यक है। अब जो सफलता की ऊंची पायदान पर बैठा है उसकी क्षमता पर प्रश्नचिह्न तो लगाया नहीं जा सकता, अन्यथा हमारी खुद की व्यवस्था पर सवालिया निशान लग जाएगा, और जब वे सफल हैं तो उनके नेतृत्व पर भी सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता, मगर उनके दिशा व मार्गदर्शन की जांच-परख तो की ही जा सकती है। वैसे भी व्यक्तिगत जीवन के विश्लेषण का कोई अर्थ नहीं, मगर सार्वजनिक जीवन और विचारों पर सार्थक बहस जरूर होनी चाहिए। और वो भी सिर्फ इसलिए कि बड़ों की बातें अकसर छोटे सही मानकर उसकी कॉपी करते हैं। वे समाज के लिए आदर्श होते हैं। और इसी संदर्भ को ध्यान में रखकर कहे गये इस कथन पर गौर किया जाना आवश्यक है, वक्तव्य था कि 'धारा के साथ बहना चरित्र की कमजोरी है, एक मर्द की तरह धारा के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।`

उपरोक्त कथन बेहद ऊर्जा प्रदान करने वाला है। महत्वाकांक्षी, जुझारू और संघर्षरत युवावर्ग की सफलता के लिए यह एक मूल मंत्र की तरह काम कर सकता है। यह नवयुवकों में जोश भर सकता है। सुनने में अच्छा लगता है, कर्णप्रिय है। इसे आकर्षक 'नारा` भी कह सकते हैं। यह कुछ नया करने के लिए, आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। बोलने में प्रभावशाली लगता है। यह भी सत्य है कि यही कुछ शब्द अधिकांश चर्चित लोगों की लोकप्रियता के मूल आधार रहे हैं। वैसे भी पहचान बनाने के लिए भीड़ से हटकर रहना पड़ता है। लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए कुछ अलग होना चाहिए। तैरने वाले जानते हैं धारा के साथ बहना आसान होता है। हवा के विपरीत दिशा में चलने के लिए अधिक जोर लगाना आवश्यक है तो आंधी में खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है। और यही कारण है जो व्यवस्था के खिलाफ लड़ना आसान नहीं। हार जाने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता तो बर्बाद हो जाने पर मिट्टी में मिल जाने का खतरा मंडराता रहता है। लोगों की आलोचनाएं सुननी पड़ती हैं। जीत कर आगे बढ़ने पर तो सिकंदर और रुकने पर भीड़ के पैरों तले रौंद दिया जाता है।

इस सत्य के बावजूद अगर सफल होना है तो इन जोखिम भरे रास्तों पर चलने का खतरा तो मोल लेना ही होगा और साथ ही अगर चर्चित भी होना है तो यही काम थोड़ा हटकर करना होगा। मगर सवाल उठता है कि धारा में अगर कोई आरोप नहीं, दोष नहीं, तो उसके विरोध में चलना क्यूं? क्या सिर्फ अपनी पहचान बनाने के लिए या फिर आज के युग में इस तरह के लोगों की ही चर्चा होती है इसलिए? लेकिन फिर सभी हटकर कार्य करने लगें, सभी धारा के विरुद्ध चलने लगें तो कैसे काम चलेगा? सभी मर्द बन जाये और कमजोर कोई न हो तो यकीनन शुरू होगी मर्दानगी की लड़ाई, एक ऐसी महाभारत जिसमें सब कुछ नष्ट हो सकता है। अव्यवस्था फैल सकती है जो फिर समाज की शांति व्यवस्था के लिए हानिकारक हो सकती है, सभ्यता का विनाश हो सकता है।

सामान्यत: हरेक व्यक्ति को अपनी बातें सही लगती हैं। अमूमन अपने विचारों को प्रमाणित करने के लिए तर्क भी दिए जाते हैं। बुद्धिमान तो स्वयं को गलत मानता ही नहीं। ऐसे में सफल व्यक्ति का क्या कहना। वे तो अपने आप को सदा सही ठहराते भी हैं और सामने वाले से यही बात मनवाते भी हैं। लेकिन मानो अगर सभी अपने हिसाब से रहने लगें तो समाज की व्यवस्था कैसे चलेगी। सभी रास्ते में अपने मन से चलने लगें तो सड़क पर दुर्घटना की संभावना बढ़ जाएगी। परिवार में सब अपनी मनमर्जी का करने लगें तो घर, घर नहीं, होटल कहलाएगा, और फिर होटल के भी अपने कायदे-कानून हैं। यहां तक कि बाजार के भी अपने सिद्धांत हैं नहीं तो वहां भी लूट-खसोट मच जाएगी। लयबद्ध सुर-ताल से संगीत उत्पन्न होता है, अपनी ढपली अपना राग शोर उत्पन्न करता है। संक्षिप्त में अस्तव्यस्तता अस्तित्व के लिए चुनौती बन कर उभरती है। परिवार, समाज, राष्ट्र तब तक सुरक्षित हैं जब तक सब व्यवस्थित ढंग से आपस में गुंथे हुए एक दिशा में एक उद्देश्य के साथ रहते हुए आगे बढ़ रहे हैं। प्रकृति स्वयं सुनियोजित ढंग से विचरण करती है। सब कुछ संतुलित, सामंजस्यपूर्ण व सुचारु रूप से संचालित। तो क्या फिर विपरीत दिशा में चलना अप्राकृतिक नहीं है?

उपरोक्त धनी, ऊर्जावान व होशियार बुजुर्ग का यह भी कहना था कि आज भी उनकी कई महिला मित्र हैं जो उनकी बेटी से भी कम उम्र की हैं। इस पर सर्वप्रथम प्रतिक्रिया यही आयेगी कि समाज में ताकतवर को कुछ भी करने व कहने की सदा से छूट रही है। दूसरे यह उनके अंदर बैठे पुरुष की नैसर्गिक मगर अतृप्त प्यास को दर्शाता है। इसमें कोई विशेष बात नहीं, और न ही किसी भी तरह का आश्चर्य किया जाना चाहिए। यह जानवर से लेकर प्रत्येक पुरुष का प्राकृतिक गुण है कि जब तक सांस है तब तक शारीरिक चाहत बनी रहती है। कुछ इसे दबा लेते हैं और कोई विभिन्न कारणों से मजबूर, कई को मौका नहीं मिलता तो कुछ मौके की तलाश में लगे रहते है। अर्थात विपरीत लिंग का आकर्षण जीवनपर्यंत बना रहता है। मगर यहां पुन: सवाल उठता है कि सभी अपनी इस नैसर्गिक जरूरत को पूरा करने लगें तो बड़ी विकट समस्या खड़ी हो जाएगी। और अगर किसी और को पसंद आ रही महिला हमसे संबंधित निकले तो हम पर क्या गुजरेगी और ऐसे में हमें कैसा व्यवहार करना चाहिए? कैसी प्रतिक्रिया होनी चाहिए? क्या हम इसे भी उतना ही सहर्ष स्वीकार कर पायेंगे? क्या यह एक बार फिर नारी के विकासक्रम को बाधित नहीं करेगी? उपरोक्त सार्वजनिक टिप्पणी कितनी सामाजिक है प्रश्नचिह्न लगना चाहिए। जहां तक रही बात उन महिलाओं की तो उन पर टिप्पणी करना नारी विरोधी कहलाएगा। लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि अकसर पैसे और किसी चाहत पूर्ति के लिए प्रेम का दिखावा किया जाता है।

सवाल उठता है कि मर्द की परिभाषा क्या है? क्या सिर्फ औरतों को पसंद करना ही इसकी निशानी है? क्या धारा के विरोध में खड़ा होना ही इसकी पहचान है? और इस तरह से सभी मर्द बनने लगें तो महिला वर्ग क्या होगा? सबके इंसान बनने से तो हम सब बच सकते हैं मगर सब के मर्द बनने से शायद ही कोई बचे। हां, इस बात पर सहमति हो सकती है कि धारा की उपयोगिता, सार्थकता, उद्देश्य व शुद्धता को देखा जाना चाहिए। इसका मूल्यांकन किया जा सकता है। गलत, हानिकारक, असामाजिक, अनैतिक, अमानवीय धारा के विपरीत चलना समाज, संस्कृति, सभ्यता व समय के हित में होता है और यह यकीनन मर्दानगी है। मगर इसको सुनिश्चित कौन करेगा कि यह धारा मनुष्य के लिए लाभकारी नहीं? स्वयं तोड़ने वाला? या भूत-भविष्य में विभाजित कालखंड? कोई और हो न हो मगर प्रतियोगी प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल का सदस्य नहीं हो सकता। सच तो यह है कि धारा के साथ बहना अगर कमजोर व्यक्तित्व की निशानी है तो समाज को ऐसे कमजोर की भी आवश्यकता होती है।

------------------.

संपर्क:

मनोज सिंह

४२५/३, सेक्टर ३०-ए, चंडीगढ़

http://www.manojsingh.com

---------------.

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: धारा के विपरीत बहना
धारा के विपरीत बहना
http://bp1.blogger.com/_t-eJZb6SGWU/RrMRgA6YysI/AAAAAAAABLo/vWkb4KQcdMA/s400/manojkumar.jpg
http://bp1.blogger.com/_t-eJZb6SGWU/RrMRgA6YysI/AAAAAAAABLo/vWkb4KQcdMA/s72-c/manojkumar.jpg
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2007/08/blog-post_03.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2007/08/blog-post_03.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content