क्या भारत में ऐसे पुस्तकालय नहीं हो सकते?

SHARE:

यात्रा वृत्तांत आंखन देखी (अमरीका मेरी निगाहों से) ( अनुक्रम यहाँ देखें ) - डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल 11 एक पुस्तकालय के भीत...


यात्रा वृत्तांत


आंखन देखी (अमरीका मेरी निगाहों से)


(अनुक्रम यहाँ देखें)


- डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल


11 एक पुस्तकालय के भीतर

भारत में अकादमिक मंचों पर प्रायः यह चर्चा और चिंता की जाती है कि नई तकनीक पुस्तकालयों को एकदम अप्रासंगिक कर देगी. वैसे तो पुस्तकों पर मण्डराने वाले खतरों की चर्चा इलेक्ट्रोनिक संचार माध्यमों के आगमन के साथ ही शुरू हो गई थी, क्योंकि इन माध्यमों ने पुस्तकों के अस्तित्व को कई तरह से चुनौती दी थी. पाठक के समय पर कब्ज़ा चुनौती का एक पहलू था, नए-नए आए छोटे पर्दे का आकर्षण दूसरा, चीज़ों की सजीव प्रस्तुति तीसरा..... . बारीक स्तर पर इन माध्यमों ने भोक्ता के सोच व ग्रहण में जो बदलाव किये उससे बहुत सारा लिखित व मुद्रित फीका लगने लगा. लेखक ने अपनी तरह से भी इस चुनौती से टकराने की चेष्टाएं कीं. उसने अपने लेखन का तरीका भी थोडा बदला. लेखन और पुस्तक इस चुनौती से जूझ ही रहे थे कि तकनीक का एक और बड़ा करिश्मा उससे भी बड़ी चुनौती के रूप में आ खड़ा हुआ. दुनिया का बहुत सारा ज्ञान इण्टरनेट पर आ गया. इसने तो भारी भरकम किताब और उसके विशाल संग्रहों यानि पुस्तकालयों को बेमानी सिद्ध करने में कोई कसर ही नहीं छोड़ी. कोई क्यों अपने घर में 24 ज़िल्दों वाला एनसाइक्लोपीडिया रखे? उसे देखने के लिये पुस्तकालय भी क्यों जाये? डिक्शनरी भी क्यों घर में रखे? माउस क्लिक करे और इच्छित जानकारी कम्प्यूटर के स्क्रीन पर पढ़ ले. अगर ज़रूरत हो, उसका प्रिण्टआउट भी निकाल ले. किताब और किताबघर की ज़रूरत ही खत्म!

लेकिन हर क़िताब केवल सूचना ही तो नहीं होती. और अगर कुछ के लिये हो भी तो क़िताब को हाथ में लेने का सुख, किसी शब्द, वाक्य या पंक्ति को पढ़ते हुए रुक कर सोचने का सुख, कागज़ की सतह को छूने का सुख, कागज़ और स्याही की गंध में खो जाने का सुख -- इन सबका विकल्प और कुछ हो ही कैसे सकता है? छोड़िये ये सब. भावुकता की बातें हैं. आज की ज़मीनी हक़ीक़त के सामने इनकी कोई अर्थवत्ता नहीं है.

इस तरह की ऊहापोह चलती रहती है. व्यावहारिक लोग कहते हैं, किताब और लाइब्रेरी खत्म भी हो जाए तो क्या हर्ज़ है! और पुस्तक प्रेमी इस कल्पना पर ही मुंह लटका लेते हैं. अतीत का मोह कम प्रबल नहीं होता.

अभी पिछले दिनों आकाशवाणी की एक परिचर्चा में हम इसी मुद्दे पर बहस कर रहे थे कि क्या इण्टरनेट और इसी तरह की अन्य तकनीकें पुस्तकालय को पूरी तरह खत्म कर देंगी? भारत में पुस्तकालयों की दशा वैसे भी ज़्यादा अच्छी नहीं है. दशा तो पुस्तकों की भी कहां अच्छी है? छोटे शहरों की तो छोड़िये, बड़े शहरों में भी आपको ऐसी दुकान नहीं मिलेगी जहां आप मनपसन्द किताब ढूंढ़ सकें. दरअसल किताब की या किसी भी अन्य वस्तु की दुकान आपको खरीदने का ही नहीं, देखने का भी सुख देती है. आप सब्ज़ी बाज़ार जाएं और खरीदें भले ही ज़्यादा न, पर हरी-भरी, ताज़ी, रंग-बिरंगी सब्ज़ियों के रंग-रूप-गंध का साहचर्य आपको एक खास तरह का सुख प्रदान करता है. किताब की दुकान में भी ऐसा ही होता है. खरीदें आप भले एक ही क़िताब(या एक भी नहीं) पर सैकड़ों-हज़ारों किताबों के बीच होने का, उन्हें देखने-छूने का सुख अवर्णनीय होता है. बशर्ते ऐसी दुकान हो! दुकान न सही, पुस्तकालय ही सही. बल्कि वहां तो यह अपराध बोध भी नहीं होता कि इतनी देर में कुछ भी नहीं खरीदा. लोकलाज में खरीदने की विवशता भी नहीं होती. पर भारत में आर्थिक कटौती की गाज़ सबसे पहले पुस्तकालय पर ही गिरा करती है. बार-बार पुस्तकालयों के बजट में कटौती कर हमने उन्हें लगभग निष्प्राण ही बना डाला है. जन चेतना के अभाव की वजह से इसका कोई प्रतिरोध भी नहीं हुआ है. सार्वजनिक पुस्तकालय ही नहीं, शिक्षण संस्थाओं के पुस्तकालय भी इस नासमझी भरी कटौती के शिकार हुए हैं. राजस्थान के महाविद्यालयों में, जहां मैंने अपनी लगभग पूरी ज़िन्दगी बिताई, आज पुस्तकालयों की जो दशा है, उसे देख सिर्फ सर ही धुना जा सकता है. बिना पुस्तकालय किसी उच्च शिक्षण संस्थान की कल्पना भी नहीं की जा सकती, पर मेरे राज्य में यह अजूबा भी चल रहा है.

बहरहाल.

जब अमरीका आया तो मन में यह भी था कि देखूं यहां पुस्तकालयों का क्या हाल है?

इस देश में तो इण्टरनेट का खासा प्रचलन है. अगर इण्टरनेट ही कारण हो तो यहां पुस्तकालय मर ही चुका होगा. कम्प्यूटर आम है, इण्टरनेट की स्पीड बहुत उम्दा है, लोगों के पास फुरसत नहीं है, भाग-दौड़ की और चमक-दमक भरी और थोड़ी विलासितापूर्ण ज़िन्दगी है. ये सब बातें पुस्तकालय को खत्म कर देने के लिये काफी हैं.

कुछ ऐसे ही खयालात मन में थे, जब मैं यहां अमरीका में एक पुस्तकालय में गया.

रेडमण्ड रीजनल लाइब्रेरी नामक यह पुस्तकालय किंग काउण्टी लाइब्रेरी सिस्टम (KCLS) की 43 शाखाओं में से एक है. ये शाखाएं पूरे इलाके में फैली हैं तथा सूचना तकनीक के माध्यम से आपस में जुड़ी हैं. इस केसीएलएस के पास 40 लाख आइटम्स (किताबें,पत्रिकाएं,समाचार पत्र,पैम्फलेट्स,ऑडियो-वीडियो टेप्स, सीडी,वीसीडी,डीवीडी,एलपी आदि-आदि) का वृहद संग्रह है. संग्रह की सम्पूर्ण सूची इण्टरनेट पर उपलब्ध है और स्वभावतः कई तरह से वर्गीकृत है.

मैं बात रेडमण्ड रीजनल लाइब्रेरी की कर रहा था. एक बहुत भव्य, सुरुचिपूर्ण और सुविधाजनक इमारत में स्थित यह पुस्तकालय मानो आपको अपनी तरफ खींचता है. हरियाली, खुलापन और टॉनी एंजेल का प्रतीकात्मक मूर्ति-शिल्प-'विज़डम सीकर्स' (जिज्ञासु!) आपका स्वागत करते हैं. इस मूर्ति-शिल्प में एक विशालकाय ग्रेनाइट शिला पर चार कौए विराजमान हैं. पाश्चात्य मिथक में कौए को जिज्ञासु और बुद्धिमान पक्षी माना जाता है. इस प्रस्तर शिल्प में तीन कौए एक धरातल पर हैं - अलग-अलग दिशाओं में देखते हुए, और चौथा कौआ उनसे नीचे है, उन्हें देखता हुआ. तीन कौए कहीं से भी ज्ञान प्राप्त करने को तत्पर हैं और चौथा कौआ इस बात का सूचक कि हमें ज्ञानियों से ज्ञान प्राप्त करने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिये.

कोई भी नागरिक अपनी पहचान का प्रमाण देकर पुस्तकालय की सदस्यता ले सकता है. सदस्य बन जाने पर उसे एक कार्ड मिल जाता है जो क्रेडिट कार्ड जैसा होता है. इस कार्ड पर अनगिनत सामग्री प्राप्त की जा सकती है. पुस्तकें 28 दिन के लिये, पत्रिकाएं 7 दिन के लिये. शेष सामग्री की भी अलग-अलग समय सीमा है. यहीं यह बता दूं कि पुस्तकालय से सीडी,वीसीडी,टेप-कुछ भी ले जाया जा सकता है. विलम्ब होने पर जुर्माना अदा करना होता है. जुर्माना राशि आपके खाते में लिख दी जाती है, आप सुविधानुसार कभी भी जमा करा सकते हैं, यानि तुरंत जमा कराना ज़रूरी नहीं है. पुस्तकालय में लगभग 50 कम्प्यूटर हैं जिन पर अपनी पसन्द की किताब/पत्रिका/अन्य सामग्री की तलाश की जा सकती है. यह काम इण्टरनेट के ज़रिये अपने घर से भी किया जा सकता है. घर से ही आप किसी भी किताब या सामग्री को(और ज़रूरी नहीं कि वह सामग्री इसी रेडमण्ड पुस्तकालय की हो, वह केसीएलएस की 43 शाखाओं में से किसी की भी हो सकती है) आरक्षित (Hold) करा सकते हैं. जब वह सामग्री रेडमण्ड पुस्तकालय में आ जाती है तो आपको ई-मेल या फोन से सूचित कर दिया जाता है तथा पुस्तकालय में वह सामग्री आपके नाम की पर्ची के साथ अलग रख दी जाती है. इसी तरह की सुविधा केसीएलएस की तमाम शाखाओं में सुलभ है. पुस्तकालय में बैठ कर तो पढ़ा ही जा सकता है. अत्यधिक सुविधाजनक टेबल कुर्सियां तथा समुचित प्रकाश व्यवस्था है. अगर ज़्यादा किताबें वगैरह ले जानी हों तो वहीं उपलब्ध हाथ-ठेले(Cart) का इस्तेमाल किया जा सकता है. सामग्री घर ले जाने के लिये पॉलीथिन की थैलियां सुलभ रहती हैं.

सारी सामग्री आप खुद ही इश्यू करते हैं. पहले ऑप्टीकल रीडर के सामने अपने सदस्यता कार्ड को लायें, इससे आपका खाता खुल जाता है. फिर एक-एक कर इश्यू करने वाली सामग्री के बार कोड को इस ऑप्टीकल रीडर के सामने लाते जाएं. बस! कोई चौकीदार नहीं, कोई गिनती नहीं. अमरीकी समाज में वैसे भी आपकी ईमानदारी पर पूरा विश्वास किया जाता है. सामग्री का लौटाना तो और भी आसान है. पुस्तकालय के बाहर लैटर बॉक्स नुमा बक्से बने हैं. उनमें आप सामग्री डाल दें और हो गया काम.

मैंने पहले भी कहा, यहां से पुस्तकें, पत्रिकाएं, कैसेट्स,सीडी,वीसीडी,डीवीडी कुछ भी घर ले जाया जा सकता है. मैंने महज़ जिज्ञासा से देखा तो पाया कि कोई 200 हिन्दी फिल्मों की डीवीडी यहां मौज़ूद हैं. कई ऐसी हिन्दी फिल्में मैं यहां देख पाया जिनके लिये भारत में तरसता ही रहा था, जैसे श्याम बेनेगल की ‘अंतर्नाद’ या सत्यजित रे की अनेक फिल्में. पण्डित रविशंकर वगैरह का संगीत भी यहां भरपूर मात्रा में है. मुझे यहां अपने राजस्थान का लोक संगीत तक मिल गया : लंगा और मांगणियार. पाश्चात्य फिल्मों और संगीत वगैरह का तो मानों खज़ाना ही भरा पडा है. भारतवंशी ज़ुबीन मेहता की संगीत रचना भी मैं यहां से लेकर सुन पाया. बीथोवन वगैरह का भी बहुत सारा कृतित्व यहां सुनने को मिला.

पुस्तकालय आपको अपनी ई-मेल चैक करने की सुविधा भी देता है. यह कतई ज़रूरी नहीं है कि आप पुस्तकालय के सदस्य हों तभी इस सुविधा का उपयोग कर सकते हैं. गैर सदस्य, मसलन प्रवासी/यात्री भी पूरे अधिकार के साथ इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं. यहां पुस्तकालय को एक सामाजिक सेवा प्रदाता के रूप में भी चलाया जाता है. यह भी सोच है कि इस तरह की सेवा से और अधिक लोग पुस्तकालय की ओर आकृष्ट होंगे.

पुस्तकालय में रिप्रोग्राफी की पर्याप्त और समुचित सुविधा है. जो भी सामग्री आपको चाहिये, उसकी फोटोकॉपी करलें. कम्प्यूटर पर कोई सामग्री आपके काम की है तो उसका प्रिण्ट आउट निकाल लें.

इस लाइब्रेरी को देख कर लगा कि कम्प्यूटर और इंटरनेट पुस्तकालय के शत्रु नहीं, सहायक हैं. इन्होंने तो पुस्तकालय सेवा का विस्तार ही किया है. इनके माध्यम से तो ज्ञान के विशाल भण्डार में से अपने काम की चीज़ ढूंढना बेहद आसान हो गया है. इण्टरनेट ने पुस्तकालयों की आपसी और आपसे उनकी दूरी भी समाप्त कर दी है. तकनीक ने यह भी सम्भव बनाया है कि यदि आप पुस्तकालय तक न जा सकें तो अपने घर बैठे ही पुस्तकालय की सेवाओं का लाभ उठा लें. समय की भी बन्दिश खत्म. आपको रात के बारह बज़े फुरसत मिली है तो उस वक़्त भी आप पुस्तकालय से जुड़ सकते हैं. अब आप ही बतायें, अगर ऐसी लाइब्रेरी हो तो भला कौन उसका बार-बार उपयोग न करना चाहेगा?

इतना ही नहीं, लाइब्रेरी के एक कोने में एक वेण्डिंग मशीन भी लगी है जिसमें सिक्के डाल कर कॉफी या शीतल पेय वगैरह खरीदे जा सकते हैं, और उसकी चुस्की लेते-लेते पढा जा सकता है. कॉफी या कोक पीते हुए पढ़ना अमरीकी जीवन पद्धति का अंग है. उसकी सुविधा पुस्तकालय जुटाता है.

पुस्तकालय में घुसते ही आपका सामना नई आई पुस्तकों के रैक से होता है. इस रैक की किताबों को हर दूसरे-तीसरे दिन बदला जाता है. इण्टरनेट पर भी नई आई किताबों की सूचना अलग से उपलब्ध होती है. पुस्तकालय में नई फिल्में और नया संगीत भी लगातार आता है और यहां के न्यूज़ लैटर में तथा इण्टरनेट पर बाकायदा उसकी सूचना दी जाती है.

पुस्तकालय का काम इतना ही नहीं है. यहां रचना पाठ, लेखक से मिलिये, पुस्तक चर्चा, पुस्तक/चित्र/कलाकृति प्रदर्शनी आदि के कार्यक्रम लगातार चलते रहते हैं. ये कार्यक्रम इतने ज़्यादा और इतनी नियमितता से होते हैं कि इनकी सूचना के लिये एक मासिक न्यूज़ लैटर प्रकाशित किया जाता है. पुस्तकालय एक उम्दा कार्यक्रम और चलाता है. इसका नाम है 'रीडिंग रिवार्डस’ (Reading Rewards) यानि पढने का पुरस्कार. 18 वर्ष से अधिक की वय का कोई भी पाठक एक छोटा-सा फॉर्म भरकर और अपनी ताज़ा पढी किताब पर अपनी छोटी-सी टिप्पणी लिखकर इस कार्यक्रम का सदस्य बन सकता है. फिर पूरे एक साल में उसे 50 किताबें पढकर उन पर अपनी टिप्पणियां देनी होती हैं. इतना कर देने पर उस पाठक को पुरस्कृत किया जाता है. उसकी लिखी टिप्पणियों को मुद्रण तथा इण्टरनेट के माध्यम से प्रकाशित भी किया जाता है. पुस्तकालय एक और उम्दा सेवा करता है. कोई भी पाठक या नागरिक अपनी पढ़ी हुई पुस्तक या पुस्तकें पुस्तकालय को भेंट कर सकता है. पुस्तकालय उन्हें रियायती दामों पर बेचकर अपनी आय में वृद्धि कर लेता है. इस प्रयास में आय से ज़्यादा महत्व इस बात का है कि आप पुस्तकालय से संलग्नता महसूस करते हैं, साथ ही जो पढ़ने के शौकीन हैं उन्हें कम दाम पर पुस्तक मिल जाती है. अगर यह सुविधा न होती तो पुस्तक वैसे भी कचरे के मोल ही जाती. इस तरह की सेवाएं देकर पुस्तकालय अपने को नागरिकों के निकट लाता है.

मुझे यह देखकर बहुत सुखद आश्चर्य हुआ कि यह पुस्तकालय दिन के हर वक़्त पाठक-पाठिकाओं से लगभग भरा रहता है. और भी ज़्यादा खुशी इस बात से हुई कि इन पाठक-पाठिकाओं में भारतीय भी खूब होते थे.

क्या हमारे देश में ऐसे पुस्तकालय नहीं हो सकते?

*************

(शेष अगले अंक में...)

-----------


नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: क्या भारत में ऐसे पुस्तकालय नहीं हो सकते?
क्या भारत में ऐसे पुस्तकालय नहीं हो सकते?
http://bp3.blogger.com/_t-eJZb6SGWU/RriTLQ6Yy0I/AAAAAAAABMo/kDQPAzJbqJA/s200/durga+prasad+agrwal.JPG
http://bp3.blogger.com/_t-eJZb6SGWU/RriTLQ6Yy0I/AAAAAAAABMo/kDQPAzJbqJA/s72-c/durga+prasad+agrwal.JPG
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2007/08/blog-post_13.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2007/08/blog-post_13.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content