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नेता जी की षष्ठ्यब्दि पर हिंदी व्यंग्यकारों की बधाइयाँ

-शंकर पुणतांबेकर

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एक नेताजी के हाल ही में साठ वर्ष पूर्ण हुए. काफी ऊँची किस्म के राष्ट्रीय नेता थे वे. अतः जब साठ साल जी लेने के उपलक्ष्य में समारोह मनाया गया, तो उसमें देश के और लोगों की तरह व्यंग्यकारों को भी निमंत्रित किया गया. हमारे हिन्दी के व्यंग्यकारों ने हरिशंकर परसाईं से लेकर बृजेश परसाईं तक बधाइयों के जो तार भेजे थे नीचे दिए जा रहे हैं -

 

 

  • आप बिना संसद के प्रधानमंत्री बनें. – हरिशंकर परसाईं
  • आपके दल-बदल नित्य सफल रहें. –शरद जोशी
  • आपके बेटे खोटे काम करें फिर भी उनका बाल बांका न हो. - रवीन्द्रनाथ त्यागी
  • सुसंग से बचें और जीवन में नित्य सफल रहें. - श्रीलाल शुक्ल
  • वर्तमान स्थिति के विपरीत चेहरे से कम उम्र के और मस्तिष्क से अधिक उम्र के लगें. – नरेन्द्र कोहली
  • सिर सलामत बना रहे पगड़ियाँ हजार हैं . – केशवचन्द्र वर्मा, श्रीनारायण चतुर्वेदी
  • आपके कानों के परदे नित्य मोटे बने रहें. – बरसानेलाल चतुर्वेदी
  • बांधने के लिए भविष्य में मुट्ठी हमेशा खुली रहे. – आत्मानंद मिश्र, संसारचन्द्र
  • बहती सत्ता में हाथ धोते रहें. – प्रभाकर माचवे, अमृतलाल नागर
  • जेलों में जाने से बचे रहकर जेलों के उद्घाटन करते रहें. – अजातशत्रु
  • आपको लोग चरित्र की थैली भेंट करें – के. पी. सक्सेना
  • आपका स्वास्थ्य लोगों की आहें पचाने लायक आगे भी बना रहे. – लतीफ घोंघी
  • राजनीति में आप नित्य राज पर ही नजर रखे रहें. – रामनारायण उपाध्याय
  • आपकी टोपी के ले सिर चलती-फिरती खूंटी न लगे. -लक्ष्मीकांत वैष्णव, हरिजोशी
  • सत्ता के बाजार में आपके दाम नित्य ऊँचे रहें. – अशोक शुक्ल
  • कुरसी आपके बिना विधवा लगे. – असीम चेतन, रामावतार चेतन
  • आपकी टोपी आपके सिर को ही नहीं, पूरे कुनबे को ढंके. - श्यामसुन्दर घोष, हनुमंत मनगटे
  • विमोचन को छोड़कर पुस्तकों से भविष्य में भी कोई सम्बन्ध न आए. – संतोष खरे
  • आपको अधिक से अधिक पार्टियों से निकाह के अवसर मिलें. -श्रीकांत चौधरी
  • हवा का रूख सूंघने की शक्ति बढ़े. – सुबोध कुमार श्रीवास्तव, विष्णुदेव पांडेय
  • आपको जनता की उम्र लगे. – प्रेम जनमेजय
  • अख़बार पचाने की शक्ति बरकरार रहे. – विश्वम्भर मोदी, यशवंत कोठारी
  • नित्य ऊँची कलम से ही नहीं, ऊँची तराजू से तौले जाएँ. – मुकुल उपाध्याय, शंकर पुणतांबेकर
  • आपको इलाज की बीमारी के सिवा कोई बीमारी न हो. – अंजनी चौहान, ज्ञान चतुर्वेदी
  • भविष्य में भी देश के मुकाबले चरित्र को टूटने दें. –सूर्यबाला
  • ग्रेशम के नए नियम का ध्यान रखें. बुरी कुरसी अच्छी कुरसी को बाजार से निकाल फेंकती है. – सरोजिनी प्रीतम
  • ख्याल रखें आदमी कर्म से नहीं कुरसी से बड़ा बनता है. – बालकवि बैरागी
  • मानद उपाधियाँ पाएँ और विश्वविद्यालय धन्य हो उठें. – रोशनलाल सुरीरवाला, श्रीबाल पांडे
  • स्मरण रहे बखत पड़े बांका तो गधे को भी कहे काका. – कमल गुप्त, श्याम गोइन्का
  • धर्मनिरपेक्षता बनी रहे धर्म-अधर्म में भेद न रहे. – विद्रोही, बटुक चतुर्वेदी
  • नयी पीढ़ी आपके सामने बूढ़ी हो और सत्ता की वरमाला नित्य आपके ही गले में शोभा पाती रहे. – कैलाशचन्द्र, यज्ञ शर्मा
  • हमेशा सरकार में रहें, असरकार में नहीं. – श्रीराम ठाकुर दादा, रासबिहारी पांडेय
  • अनेक – अनेक लोग आपके अनुगामी बने रहें. – महेश अनघ, धनराज चौधरी
  • आपको सौ-सौ राजनारायण प्राप्त हों. – रमेश शर्मा निशिकर, श्रीराम आयंगार
  • नित्य छत का खयाल रखें फर्श का नहीं. –मनीषराय यादव, जगदीश किंजल्क
  • आपके सांप मरें और कुरसी भी न टूटे. – हरीश नवल, सुरेश कांत
  • याद रहे सिर के आदमी से पद का आदमी बड़ा होता है. – व्यंगानन्द, महेश अग्रवाल
  • नित्य मुख में नारे, बगल में कुरसी रहे. – बालेन्दुशेखर तिवारी, किट्टू
  • सत्ता आपको लज्जा, नैतिकता, ईमानदारी से नित्य मुक्त रखे. – प्रदीप मेहता, नरेशचन्द्र
  • आपका इतिहास नहीं अभिनंदन ग्रन्थ लिखा जाए. – सनत मिश्र, बृजेश परसाईं

विशेष सूचना – इधर तार विभाग ने इन बधाइयों के नम्बर निर्धारित किए हैं जो तार-ऑफिस से पूछकर प्राप्त किए जा सकते हैं और पैसे बचाए जा सकते हैं. इन नेताओं ने ही अपने ये तार इस विभाग को भेजकर यह कार्य बड़ी खटपट के बाद करा लिया है. ... ये बधाइयाँ सबको खुली हैं, केवल व्यंग्यकारों को नहीं.

साभार – व्यंग्य संग्रह – विजिट यमराज की, व्यंग्यकार – शंकर पुणतांबेकर, प्रकाशक – पंचशील प्रकाशन, फिल्म कॉलोनी , जयपुर 302003

(नेताजी का चित्र – साभार अभिव्यक्ति हिन्दी.ऑर्ग)

2 टिप्पणियाँ

  1. बेनामी3:07 pm

    ये तो पढ़ा हुआ था.

    नया कलेवर पसंद आया.

    जवाब देंहटाएं
  2. बधाई सन्देश बहुत अर्थ पूर्ण हैं, व्यंग्य चुभता है, और उसे चुभना ही चाहिए.
    लेकिन और अच्छा होता अगर पुणताम्बेकर जी इस बात का ध्यान रखते कि किस व्यंग्यकार की क्या शैली है. मसलन परसाई और त्यागी एक ही लहज़े में बात नहीं कर सकते.
    फिर भी, व्यंग्य है मारक.
    बधाई.

    जवाब देंहटाएं

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