“धर्म का मूल्यांकन करता है धर्मावलंबियों का आचरण”

SHARE:

तथा ''गुरु के मूल्यांकन की कसौटी है उसके शिष्यों का आचरण'' -सीताराम गुप्ता साधु-संत त्याग, तपस्या और सहनशीलता तथा क्षमा क...

तथा
''गुरु के मूल्यांकन की कसौटी है उसके शिष्यों का आचरण''

-सीताराम गुप्ता

sitaram gupta साधु-संत त्याग, तपस्या और सहनशीलता तथा क्षमा की प्रतिमूर्ति होते हैं इसमें संदेह नहीं। इसी से संत की जीवन अनुकरणीय तथ प्रेरणास्पद होता है। एक शिष्य अथवा अनुयायी की चरितार्थता इसी में है कि वह अपने गुरु के आचरण को जीवन में उतारे। यही बात धर्म के संबंध में भी कही जा सकती है। धर्म वह है जो हमें व्यवस्थित करे, हममें सकारात्मक गुणों का विकास करे। हमें राग-द्वेष, हिंसा, क्रोध, अहंकार, अविद्या, असत्य, असहिष्णुता आदि नकारात्मक भावों से बचाए। एक धार्मिक व्यक्ति की चरितार्थता भी इसी में है कि वह अपने धर्म पर की गई किसी भी टिप्पणी पर उत्तेजित न हो और अपने धर्म के विरोध में बोलने वाले को भी क्षमा कर धैर्य का परिचय दे। यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है अपितु धर्म का अनिवार्य तत्व है। यदि कोई व्यक्ति ऐसा नहीं कर पाता है तो वह धार्मिक होने का ढोंग तो कर रहा है लेकिन सही अर्थों में धार्मिक नहीं है क्योंकि किसी भी धर्म में धर्म की रक्षा के लिए उत्तेजना, अधैर्य, असहिष्णुता अथवा हिंसा का कोई स्थान नहीं है अपितु इनकी निंदा की गई है। प्राय: धर्म की रक्षा के दंभ में हम पूर्णत: अधार्मिक या धर्महीन हो जाते हैं।

 

कई बार ऐसा होता है कि किसी साधु-संत का जाने-अनजाने में अपमान हो जाता है या उसे सामान्य लोगों के मुकाबले विशिष्ट सम्मान या छूट नहीं मिल पाती तो उसके शिष्य आपे से बाहर हो जाते हैं। हंगामे और हिंसा पर उतारू हो जाते हैं। नारेबाजी और अभद्र आचरण का प्रदर्शन तो सामान्य बात है कई बड़े नाम वाले गुरुओं के शिष्यों के लिए। इस प्रकार की घटनाएँ शिष्यों या अनुयायियों की पात्रता पर ही प्रश्नचिह्न लगा देती हैं और शिष्यों या अनुयायियों का आचरण गुरु की पात्रता पर।

साधु-संत सदैव न केवल नकारात्मक वृत्तियों और भावों के त्याग का उपदेश देते हैं अपितु अपने आचरण से भी उसे सिद्ध करते हैं। उनका आचरण ही उनका संदेश होता है और होना भी चाहिये। श्रीमद्भगवद्गीता में लिखा है :-

 

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तादेवेतरो जन:।

स: यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥ 3:21

 

महापुरुष जो-जो आचरण करता है, सामान्य व्यक्ति उसी का अनुसरण करते हैं। वह अपने अनुसरणीय कार्यों से जो आदर्श प्रस्तुत करता है, संपूर्ण विश्व उसका अनुसरण करता है। सभी संत, सभी महापुरुष राग-द्वेष, घृणा, वैमनस्य, क्रोध, उपेक्षा, ईर्षा, अहंकार, असहिष्णुता, हिंसा आदि के सर्वथा त्याग का उपदेश देते हैं। समता में स्थापित होने की बात होती है। मानापमान, सुख-दुख, लाभालाभ आदि परस्पर विरोधी भावों से ऊपर उठने की बात की जाती है। पर क्या ये बातें मात्र सुनने-सुनाने के लिए हैं आचरण में उतारने के लिए नहीं? गुरु का दर्जा भगवान से भी ऊँचा माना गया है। गुरु महत्वपूर्ण है। ज्ञान का स्रोत और संवाहक है गुरु। ज्ञान से तात्पर्य सूचनाओं के आदान-प्रदान अथवा भौतिक जगत की वस्तुओं की जानकारी से नहीं है। शास्त्रों का पठन-पाठन या स्वाध्याय अथवा सत्संग भी ज्ञान नहीं है। ज्ञान है स्वयं की जानकारी। आत्मज्ञान ही सही अर्थों में ज्ञान है। गुरु शास्त्रों के माध्यम से अपने आचरण में रूपांतरण द्वारा ज्ञान का संवाहक बनता है। ज्ञान अर्थात् रूपांतरण का माध्यम है गुरु एक शिष्य के लिए। यदि गुरु अपने आचरण द्वारा शिष्य के रूपांतरण में असफल रहता है तो इसका सीधा-सा अर्थ है कि गुरु स्वयं आत्मज्ञान को प्राप्त नहीं हुआ है और जिसने आत्मज्ञान नहीं प्राप्त किया, स्वयं का रूपांतरण नहीं किया, वह दूसरों को इसका आभास कैसे करा सकेगा। यदि रूपांतरण की प्रक्रिया सम्पन्न नहीं होती है तो बाह्य ज्ञान भार के समान है जो मिथ्या अहंकार का कारण बनता है जिसके फलस्वरूप द्वंद्व की उत्पत्ति होती है।

 

आज किसी ने किसी के धर्म या धर्मगुरु पर टिप्पणी कर दी तो ख़ून की नदियाँ बहने लगती हैं। धर्म की रक्षा के लिए सरफरोशी की तमन्ना लिए लोग सरों पर कफन बाँध के निकल पड़ते हैं। सरफरोशी तो होती है पर धर्म की रक्षा नहीं। क्या धर्म इतना कमजोर, इतना क्षणभंगुर होता है कि कोई दो शब्द कहे और वो मिट्टी में मिल जाए। धर्म न हुआ काँच का खिलौना हो गया। शीशे की अलमारी में बंद करके रखो। कोई छू देगा तो अपवित्र हो जाएगा या टूटकर बिखर जाएगा। धर्म न हुआ कच्ची मिट्टी का कसोरा हो गया जो पानी लगते ही घुलने लगेगा और हमेशा के लिए अदृश्य हो जाएगा। यदि आपका धर्म, आपका मत या संप्रदाय इतना ही नाजुक, इतना ही कमजोर और क्षणभंगुर है तो उसे टूट जाने दीजिए। ऐसा धर्म आपको क्या संभालेगा? आपकी क्या रक्षा करेगा? जो अपनी ही रक्षा नहीं कर सकता वह दूसरों की क्या रक्षा करेगा? किसी मजबूत धर्म की शरण में चले जाइये या नये धर्म का आविष्कार कर लीजिए या बिना धर्म के ही रह जाइये लेकिन एक धर्म को मत छोड़िये और वह है मनुष्य धर्म। मनुष्यता है तो सभी धर्म हैं नहीं तो बाहरी धर्म को ढोकर ही क्या होगा?

 

हम कभी धर्म की रक्षा के लिए आगे आते हैं तो कभी संतों के बचाव में आगे आते हैं पर क्या धर्म या संत इतने कमजोर होते हैं कि उनकी रक्षा के लिए धर्मावलंबियों या अनुयायियों अथवा शिष्यों को आगे आना पड़े। धर्म की रक्षा या स्थापना के लिए संत हैं और संतों की रक्षा के लिए धर्म है। जहाँ तक मानापमान या बेइज्जती की बात है किसी को भी ये अधिकार नहीं कि बेवजह किसी का अपमान करे। एक संत के अपमान का तो प्रश्न ही नहीं उठता क्योंकि संत तो वही है जो मानापमान से ऊपर उठ चुका है। यदि मानापमान की बात करें तो क्या नियम पालन में ही किसी का अपमान हो गया? कदापि नहीं। विषम परिस्थितियाँ या अपमानजनक स्थितियाँ मनुष्य को ऊँचा उठाने के लिए आती हैं। कहा गया है कि ''असम्मानात् तपोवृद्धि: सम्मानात्तु तप: क्षय:'' अर्थात् असम्मान से तपस्या में वृद्धि होती है और सम्मान से तपस्या का क्षय होता है। अपमान की अवस्था धैर्य और सहिष्णुता की परीक्षा ही तो है साथ ही अधिक धैर्य और सहिष्णुता के विकास का अवसर भी। कबीर ने भी कहा है कि 'निदंक नियरे राखिये'। कहीं निंदा या सही आलोचना के अभाव में अथवा अधिक सम्मान के कारण ही तो ये गड़बड़ नहीं हो गई?

 

संत का मूल स्वभाव है क्षमा करना। बार-बार और बिना माँगे क्षमा करना। धर्म इसमें सहायक होता है। धर्म ही मानापमान सहना तथा विषम परिस्थितियों में आगे बढ़ना सिखाता है। सहिष्णुता का विकास करता है धर्म। एक कथा है सबने सुनी होगी। एक संत नदी में स्नान कर रहे थे। एक बिच्छू पानी की तेज धार में बहता हुआ जा रहा था। संत ने उसकी प्राणरक्षा के निमित्त उसे अपनी हथेली पर उठा लिया। जल से बाहर आते ही बिच्छू ने संत की हथेली पर डंक मारा। संत पीड़ा से तिलमिला उठे और झटके के कारण बिच्छू फिर पानी में जा गिरा और बहने लगा। दयालु संत ने बिच्छू के प्राणों की रक्षा के निमित्त पुन: उसे हथेली पर उठा लिया। बिच्छू ने फिर डंक मारा। संत बिच्छू को बचाने के उपक्रम में लगे रहे और बिच्छू उन्हें डंक मारता रहा। यह सब देखकर एक शिष्य ने पूछा, ''गुरुजी जब यह कृतघ्न जीव आपको बार-बार पीड़ा पहुँचा रहा है तो आप क्यों व्यर्थ इसकी प्राणरक्षा में अपने को संकट में डाल रहे हो?'' संत ने कहा कि वत्स अपना-अपना स्वभाव है। अपना-अपना धर्म है। जब यह अपना स्वभाव नहीं त्यागता तो मैं अपना स्वभाव क्यों त्यागूँ? बिच्छू का स्वभाव है डंक मारना और साधु का स्वभाव है क्षमा करना। उसकी ग़लती के लिए क्षमा नहीं किया जाएगा तो उसके प्राणों की रक्षा कैसे होगी? उसके प्राणों की रक्षा नहीं होगी तो धर्म का पालन कैसे होगा? धर्म की रक्षा बदले की भावना या हिंसा से नहीं अपितु स्वयं के त्याग और उत्सर्ग द्वारा ही संभव है। जब धर्म की रक्षा के लिए हिंसा का सहारा लिया जाता है तब धर्म की प्रासंगिकता पर ही प्रश्नचिह्न लग जाता है। धर्मावलंबियों के आचरण से धर्म का ही मूल्यांकन हो जाता है और गुरु का मूल्यांकन करता है उसके शिष्यों का आचरण।

 

'आज का धर्म'

 

- सीताराम गुप्ता

 

'धर्म' वो

बेड़ियाँ अज्ञान की

जो काट दे,

आज का जो धर्म है

धर्मसंकट में वो डाल दे

न जीने दे

न मरने दे

न मुक्त होने दे

मुक्त करने की बजाए

बेड़ियाँ कुछ और घट में डाल दे।

-----------

संपर्क:

 

सीताराम गुप्ता

ए.डी.-106-सी, पीतमपुरा,

दिल्ली-110034

फोन नं. 011-27313954

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: “धर्म का मूल्यांकन करता है धर्मावलंबियों का आचरण”
“धर्म का मूल्यांकन करता है धर्मावलंबियों का आचरण”
http://lh6.google.com/raviratlami/Rvnzv_1ZB4I/AAAAAAAABeY/LZDq6SwPrRQ/sitaram%20gupta_thumb%5B2%5D.jpg
http://lh6.google.com/raviratlami/Rvnzv_1ZB4I/AAAAAAAABeY/LZDq6SwPrRQ/s72-c/sitaram%20gupta_thumb%5B2%5D.jpg
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2007/09/blog-post_6615.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2007/09/blog-post_6615.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content