रचनाकार.ऑर्ग की विशाल लाइब्रेरी में मनपसंद रचनाकार अथवा रचनाएँ खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

देवी नागरानी की एक रपट : अंतर्राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी, मुंबई 12 जनवरी 08


रिपोर्ताज

भारत के महानगर मुंबई में अंतर्राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी

-देवी नागरानी

नए साल में १२ तारीख, २००८ अणुशक्ति नगर , मुम्बई में हिंदयुग्म के सहयोग से कवि कुलवंत जी द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठी सफलता संपन्न हुई. इस दौर को सफल बनाने में जो सहकार देने वाले हाथ रहे श्री कुलवंत सिंह, श्री अवनीश तिवारी और श्री आर. पी. हंस जिनके संयुक्त प्रयासों से स्कूल न॰१ के प्रांगण में संभव हुआ.
यह सम्मेलन अपने आप में एक सफल प्रयास रहा.

अपने विचारों से अवगत कराते हुए कवियों ने अपने मत के अनुसार इसे विश्व हिंदी सम्मेलन का दर्जा दिया, शायद इसलिये कि पूरब और पश्चिम के कवियों का उस सुअवसर पर अनोखा संगम रहा जिसमें शामिल रहे कनाडा की अति प्रभावशाली लेखक समीर लाल जी जिन्हें नेट पर आजकल उड़न तश्तरी के नाम से जाना जा रहा है. वे इस गोष्ठी के मुख्य मेहमान रहे, और संचालन में भी अपनी दक्षता को दर्शाते रहे. अध्यक्षता का स्थान लिया देवी नागरानी जी ने, और विशेष नाम जिसका जि़क्र है वो है ऑस्ट्रेलिया से पधारे श्री हरिहर उपाध्याय जी का, जो एक अच्छे रचनाकार होने के साथ साथ अपनी कविता की छाप भी छोड़ गए. संचालन की बागडोर बड़ी ही दक्षता के साथ श्री कुलवंत जी ने संभाली. एक टीम स्पिरिट का जलवा जो वहां मैंने पाया उसमें एक ख़ास बात थी वह थी उनकी आदमीयत और आपनाइयत जो बख़ूबी घुली मिली नज़र आ रही थी.

काव्य गोष्ठी का आग़ाज़ दीप को प्रज्वलित करने के पश्चात सरस्वती वंदना के साथ हुआ जिसकी प्रस्तुतकर्ता रहीं गौरी एवं सिमरन. कवि गण जिन्होंने काव्य पाठ से महफिल को सजाया और अपनी रस भरी कविताओं से उल्लास भरा माहौल पैदा किया ,उसमें कई मुक्तक, गीत, ग़ज़ल शामिल थे. महफ़िल को मौसिकी का आलम बनाये रखने के लिये काफ़ी मददगार सिद्ध हुए.

मंच की शान बने, हिंदुस्तान की आन बने
सब के सब कवि यहां, इक दूजे के मेहमान बने.

तस्वीर में मौजूद सप्तरंगी कवि एवं कवियत्रियों जिन्होंने रचनाओं का पाठ कियाः

, समीरलाल- कनाडा से, डा. हरिहर झा- ऑस्ट्रेलिया से, देवी नागरानी-न्यू जर्सी से, मरियम गजाला, नीरज गोस्वामी, राजीव सारस्वत, अरविंद राही, भरत शब्द वर्मा, हरनाम सिंह यादव, प्रमिला शर्मा, ऋषि कुमार मिश्र, रवि दत्त गौड़, शकुंतला शर्मा, मधुपेश मुंतजिर इंदौरी, डा. वफा, त्रिलोचन अरोड़ा, शीतल नागपुरी, मंजू गुप्ता, नंदलाल थापर, शैली, शारदा गोस्वामी, शुभकीर्ति माहेश्वरी, रमेश श्रीवास्तव, विजय कुमार भटनागर, सुरिंदर रत्ती, वी डी तिवारी और रवि यादव.


इस कार्यक्रम की एक विशेष बात यह भी रही कि बहुत से कवियों ने देश के विभिन्न हिस्सों से और विदेशों से भी कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं भेजीं और गोष्ठी से जुड़ने का प्रयास भी किया - अपने संदेश भेज कर, रचनाएं भेज कर, और कार्यक्रम के दौरान फोन कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर. अमेरिका से प्रसिद्ध गीतकार राकेश खंडेलवाल और अभिनव शुक्ला से बात करते हुए एक सुखद आभास हुआ, यही कि हम सब एक है. देश और विदेश की सीमाएं अब मिलजुल रही हैं. दुबई से पूर्णिमा वर्मन (अभिव्यक्ति) ,कोयंबतूर से राजश्री, आंध्र प्रदेश से रमा द्विवेदी, औरंगाबाद से सुनीता यादव, मध्य प्रदेश से गिरीश बिलौरी, पाकिस्तान से गुल देहलवी. इन सभी का अभिनंदन.

नागरानी जी ने अंत में संबोधित करते हुए कहा " अब देश और परदेस के बीच अंतर करना मुश्किल है. जहां एक हिंदुस्तानी ख,डा हो जाता है वहीं हिंदुस्तान का दिल धड़कने लगता है" अंत की ओर बढ़ते हुए एक सुर होकर सभी मौजूदा कवि गण ने "जन गन मन" गाया. सभी का साभार व आभार मानते हुए कवि कुलवंत जी ने धन्यवाद अता किया, जिसके पूर्व खाने की व्यवस्था रही जहां कवि एक दूसरे से मेल मिलाप में व्यस्त रहे.


-------
देवी नागरानी
१२.जनवरी २००८
dnangrani@gmail.com

0 टिप्पणियाँ

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.