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कान्ति प्रकाश त्यागी की कविता : इन्टरनेट

इन्टरनेट
डा० कान्ति प्रकाश त्यागी

पड़ोसी श्याम लाल की लड़की ने दरवाज़ा खटखटाया,
अन्दर आओ, कैसी हो ! बिटिया रानी, मैंने फ़रमाया ।
शर्मिला धीरे से अन्दर आई ,
नमस्ते की ,ओर थोड़ा मुसकाई ।
फिर बोली अंकल!, क्या आपका इन्टरनेट चल रहा है ?.
हां बेटा,अंकल कल से हमारा सरवर नहीं मिल रहा है ।
अंकल आज़ मेरी शादी है ओर इन्टरनेट फैल हो गया ,
मैंने बहुत कोशिश की, पर सब कुछ बे मेल हो गया ।
पर बिटिया ! अचानक, यह सब कैसे हो गया ,
ई मेल के ज़रिये, एक लड़की से मेल हो गया ।
अंकल बहुत दिनों से, लंदन में एक लड़की से ई मेल चल रही थी ,
घर पर कभी कभी बिना सरवर के, यह ई मेल बेमेल चल रही थी ।
मालूम था, आपका सरवर जाता नही है ,
आपको इस कदर सताता नहीं है ।
ई मेल के ही ज़रिये , हैरी से मेल हुआ,
चैट से रोमांस बढ़ा, यू दिल फ़ैल हुआ ।
मेरे कोल्ड मेल से , उसके हाट मेल का मेल हो गया ,
पता ही नहीं चला, कब दो दिलों का मेल हो गया ।
न बाज़े गाज़ों का शोर शराबा , न रिश्तेदारों का ज़मघट ,
न शहनाई, न हलवाई ,न हल्दी न उबटन,न घुंघरू की थिरकन ।
क्या तुम्हारे मां बाप की , रज़ामंदी से है यह शादी ?.
नहीं अंकल !, दोनों हैं बड़े दकियानूस ओर रुढीवादी ।
चांद के दर पर जा पहुंचा है आज़ ज़माना ,
अंकल क्या ले बैठे ,अब तुम यह राग पुराना ।
आज़ पुरानी ज़ंज़ीरों को तोड़ चुकी हूँ ,
क्या देखूं उस घर को, जो छोड़ चुकी हूँ ।
आओ इन्टरनेट को अपना ईमान बनायें ,
जो हम से प्यार करे, हम उसके हो जायें ।
श्यामलाल की लड़की हो, समझाना मेरा धर्म ,
कुछ दाल में काला है,मैं समझा ना इसका मर्म ।
मुझे तो इन्टरनेट अर्थात अन्तर जाल, कुछ ज़ालसाज़ी जैसा लगता है ,
अंकल आप भी बाबा आदम के ज़माने के ऎसा मुझे लगता है ।
ई मेल में वायरस आते हैं , लगा तो सारा रोमांस धरा रह जायेगा ,
वह बोली अंकल परवाह नहीं, मैं हूँ ना ,सब कुछ ठीक हो जायेगा ।
समझाना बेकार था, बोल ! मुझे क्या करना है ?
अंकल बस आपको, इन्टरनेट तो खुला रखना है ।
आप मुझे हैरी के साथ इन्टर नेट पर फेरे लेते देखेंगे ,
पंडित को मंत्र पढ़ते, आपको कन्यादान देते देखेंगे ।
एक वर्ष के बाद वह लड़की फिर आई ,
मुझे देख कर ज़रा सा मुसकराई ।
अंकल ! आप ही ठीक कह रहे थे ,
मेरे प्यार की डिस्क क्रेश हो गई ,
एक छोटी से ई मेल से ही
पूरी शादी ही ट्रेस हो गई ।
आप ही के इन्टरनेट से शादी की थी ,
आप ही के इन्टरनेट से तलाक लेने आई हूँ ।
पहले भी आपने आशीर्वाद दिया था ,
आज़ भी आप से आशीर्वाद लेने आई हूँ ।
आप ने अपना धर्म निभाया, मैं अपना धर्म निभाने आई हूँ ,
शादी पर मिठाई लाई थी, तलाक पर मिर्च पकोड़े लाई हूँ ।

 

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