विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका -  नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.
रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -

पिछले अंक

अश्विनी केशरवानी का आलेख - छत्तीसगढ़ के विस्मृत साहित्यकार: पंडित हीराराम त्रिपाठी

साझा करें:

छत्तीसगढ़ के विस्मृत साहित्यकार: पंडित हीराराम त्रिपाठी प्रो. अश्विनी केशरवानी छत्तीसगढ़ में अनेक स्वनामधन्य साहित्यकार हुए जो महानदी की अजस्...

छत्तीसगढ़ के विस्मृत साहित्यकार: पंडित हीराराम त्रिपाठी

प्रो. अश्विनी केशरवानी

छत्तीसगढ़ में अनेक स्वनामधन्य साहित्यकार हुए जो महानदी की अजस्र धारा से पल्लवित और पुष्पित हुए और काल के गर्त में समाकर गुमनाम बने रहे। ऐसे बहत से साहित्यकार हैं जिनका आज कोई नाम लेने वाला नहीं है। हालांकि साहित्य के क्षेत्र में उनके अवदान को भुलाना संभव नहीं है। उन्हीं साहित्यकारों में एक पंडित हीराराम त्रिपाठी भी हैं। मैं स्वयं महानदी से संस्कारित हूं। जब भी मैं छत्तीसगढ़ के गुमनाम साहित्यकारों पर विचार करता हूं तो पाता हूं कि वे किसी न किसी रूप में महानदी से जुड़े हुये हैं। महानदी छत्तीसगढ़ की पुण्यतोया नदी है। इस नदी के संस्कार मोक्षदायी होने के कारण इसके तटवर्ती ग्राम सांस्कृतिक तीर्थ के रूप में जाने गये। मगर महानदी के तट पर बसा नगर शिवरीनारायण सांस्कृतिक और साहित्यिक दोनों तीर्थ है। सन् 1861 में जब बिलासपुर को जिला बनाया गया तो प्रशासनिक सुविधा के लिए बिलासपुर के अलावा शिवरीनारायण और मुंगेली को तहसील बनाया गया। सन् 1880 में सुप्रसिद्ध साहित्यकार भारतेन्दु हरिश्चंद्र के मित्र और सहपाठी ठाकुर जगमोहनसिंह जो एक बहुत अच्छे कवि और आलोचक थे, छत्तीसगढ़ के धमतरी में तहसीलदार होकर आये। दो वर्ष वे यहां रहे और स्थानान्तरित होकर शिवरीनारायण आ गये। यहां के नदी-नाले और पहाड़ी का प्राकृतिक सौंदर्य उन्हें बहुत भाया और यहां रहते हुए उन्होंने कई ग्रंथों की रचना कर डाली। शिवरीनारायण को उनकी कार्यस्थली कहा जाये तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। यहां उन्होंने काशी के ‘‘भारतेन्दु मंडल‘‘ की तर्ज में ‘‘जगमोहन मंडल‘‘ बनाकर छत्तीसगढ़ के बिखरे साहित्यकारों को समेटने का सद्प्रयास किया जिसमें वे सफल भी हुए। कदाचित् यही कारण है कि शिवरीनारायण एक ‘‘साहित्यिक तीर्थ‘‘ के रूप में भी प्रसिद्धि पा सका। पंडित हीरराम त्रिपाठी जगमोहन मंडल के एक जगमगाते नक्षत्र थे।

भूले बिसरे रचनाकारों को याद करना अपनी परम्परा की पहचान के साथ ऋण शोध भी है। वर्तमान की सही पहचान के लिए अतीत की साझेदारी आवश्यक है। अतीत को उलटने पलटने का मकसद उन भूली बिसरी कड़ियों से अपने को जोड़ना है जिनसे हमारा वर्तमान समूर्तित हुआ है। जातीय स्मृतियों से जुड़कर ही साहित्य युगबोध की सही पहचान कर सकता है। बहुआयामी और बहुरंगी रचनाधर्मिता की पहचान हिन्दी में पहली बार भारतेन्दु युग में मिलती है। कविता के प्रवाह के समानान्तर नाटक, निबंध, उपन्यास और समालोचना का प्रवाह इसी काल में दिखाई देता है। भारतेन्दु यंग का महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय तथ्य है- हिन्दी कविता का केंद्र संक्रमण। इस युग में हिन्दी कविता व्यक्तिगत और दरबारी रूचियों से हटकर नगर रूचियों में संक्रमित होती है। इनसे काव्य संचेतना के सामूहिक विकास के नये केंद्रों को जन्म दिया। काशी ऐसा ही एक प्रमुख केंद्र था और इस केंद्र के न्यूक्लियस थे- बाबू भारतेन्दु हरिश्चंद्र। आलोचकों और इतिहासकारों ने बड़ी शिद्दत के बाद इस तथ्य को स्वीकार किया है कि उस समय की साहित्यिक गतिविधियां भारतेन्दु हरिश्चंद्र की परिष्कृत साहित्यिक सुरूचि एवं जागरूकता के फलस्वरूप केंद्रित होकर नये वातावरण नियोजित करने में प्रतिफलित हुई थी। उस युग की साहित्यिक गतिविधियों की एक झलक हमें छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिलती है। इन साहित्यिक गतिविधियों का केंद्र महानदी का तटवर्ती ग्राम शिवरीनारायण था और ठाकुर जगमोहनसिंह उसके नाभिकेंद्र थे। उन्होंने यहां के आठ सज्जन व्यक्तियों का परिचय अपनी कृति ‘‘सज्जनाष्टक‘‘ में दिया है जिनमें पंडित यदुनाथ भोगहा, महंत अर्जुनदास, महंत गौतमदास, माखन साव, पंडित हीरराम त्रिपाठी, मोहन पुजारी, ऋषिराम और रमानाथ प्रमुख हैं। सज्जनाष्टक के बारे में वे लिखते हैं:-

रहत ग्राम एहि विधि सबै सज्जन सब गुन खान

महानदी सेवहिं सकल जननि सब पय पान ।

यौ जगमोहन सिंह रचि तीरथ चरित पवित्र

सावन सुदि आठै बहुरि मंगलवार विचित्र ।

संवत् विक्रम जानिए इन्दु वेद ग्रह एक

शबरीनारायण सुभग जहां जन बहुत विवेक ।

सज्जनाष्टक में पंडित हीराराम त्रिपाठी के बारे में वे लिखते हैं:-

अपर एक पंडित गुनखानी मानी हीरारामा ।

हीरा सो अति विमल जासुजस छहरत चहुं छवि धामा।

यह पुरान मनु भयो वांचि कै दस अरू आठ पुराना

जीति सकल इंद्रिन अब बैठ्यो शिव सरूप अभिरामा।

पंडित हीराराम त्रिपाठी महंत गौतमदास के अत्यंत प्रिय थे। उन्हीं की आज्ञानुसार उन्होंने पंडित ऋषिराम द्विवेदी और पंडित विश्वेश्वरप्रसाद त्रिपाठी के सहयोग से ‘‘श्री शिवरीनारायण महात्म्य‘‘ को संस्कृत से हिन्दी भाषा में अनुवाद करके संशोधित किया। यह पुस्तक संवत् 1944 में बलराम प्रेस राजनांदगांव से प्रकाशित हुई। इसकी भूमिका प्रजाहितैषी के संपादक श्री भगवानदत्त शर्मा ने लिखी है। श्री शिवरीनारायण महात्म्य के बारे में त्रिपाठी जी लिखते हैं:-

शिवरीनारायण कथा गौतमदास महंत

लखि इच्छा रच्यौ द्विज हीरा यह ग्रंथ।

वे यह भी लिखते हैं कि यह क्षेत्र आदिकाल से सिद्धपीठ रहा है और इसी कारण हर युग में इस क्षेत्र की अपनी विशेषता रही है। कदाचित् यही कारण है कि ऋषि मुनियों ने इसे अपनी साधना का क्षेत्र बनाया। सतयुग के उत्तरार्द्ध में यहां मतंग ऋषि का गुरूकुल आश्रम था, जिसे विश्व का प्राचीनतम् गुरूकुल विश्व विद्यालय माना जाता है। शबरी यहां की परिचारिका थी जिसके जूठे बेर खाने श्रीराम और लक्ष्मण यहां आये थे। बाल्मिकी रामायण में भी उल्लेखित है:-

मतंगशिष्यातस्त त्रासन्नृषसः सुसमाहिताः

तेषां भाराभितप्रानां वन्यमाहरतां गुरो ।

इस क्षेत्र को सिद्धिपीठ कहे जाने की पुष्टि यहां के मंदिरों में देवताओं की माला लिए साधनारत मूर्तियों से होती है। कहना न होगा कि यहां ऋषि-मुनियों को सिद्धि प्राप्त होती थी। कदाचित् इसी कारण अलग अलग युगों में यहां की महिमा का बखान करते हुए पंडित हीराराम त्रिपाठी लिखते हैं- ‘‘सौनकादिक ऋषियों के श्री नारायण क्षेत्र के बारे में पूछने पर सूत जी भगवत् ध्यानकर इस महा उत्ाम महात्म्य कहते भये कि हे मुनिगण एकाग्रचित्ा होकर सुनिये। नारायण क्षेत्र को साक्षात् भगवत्धाम जानिये। वह नारायण का कला रूप है। इस क्षेत्र का आदि नाम विष्णुपुरी, द्वितीय नाम रामपुर, तृतीय नाम बैकुण्ठपुर और चतुर्थ नाम नारायणपुर युगानुक्रम से जानिये। वहां चित्रोत्पला-गंगा के तट पर पुण्यरूपी कानन मंडित सिंदूरगिरि पर्वत के निकट साक्षात् अविनाशी श्री नारायण विराजमान हैं। उनकी चरण को स्पर्श करती हुई पवित्र ‘‘रोहिणी कुंड‘‘ स्थित है। सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री बटुसिंह चैहान ने राहिणी कुंड को एक धाम बताया है:- ‘‘रोहिणी कुंड एक धाम है, है अमृत का नीर‘‘ जबकि पंडित मालिकराम भोगहा ने उसे मोक्षदायी बताया है:-

रोहिणि कुंडहि स्पर्श करि चित्रोत्पल जल न्हाय।

योग भ्रश्ट योगी मुकति पावत पाप बहाय ।।

तब त्रिपाठी जी की यह कल्पना कि यहां बसने वाले संत, सज्जन और भगवत भक्त हैं, अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं है। देखिये उनका एक भाव:-

चित्रउतपला के निकट श्री नारायण धाम।

बसत संत सज्जन सदा शिवरीनारायण धाम।।

श्री शिवरीनारायण महात्म्य के अलावा त्रिपाठी जी ने दो पुस्तकें और लिखीं हैं जिनमें भक्ति विषयक पदावलियां हैं। हस्तलिखित उनकी ये पुस्तकें अप्रकाशित ही रहीं और काल के गर्त में समा गई। उनकी भक्ति विषयक पदावलियां छत्तीसगढ़ी रहस में खूब प्रचलित थी। आज भी यत्र तत्र उनके द्वारा लिखित पौराणिक कथाओं का वाचन पंडित लोग करते हैं। उनके काव्य तो लोगों को कंठस्थ थे। देखिए उनका एक काव्य:-

समरस गोपी एक कन्हैया तामे देखे तामे है।

एक से एक बनी सखियां सब दामिनि जनु मेघा में है।

नील मनि मनि बीच कनकके जनुग्रंथित बलमा में है।

कोई बामा कह गये स्थान के कोई लपटात हिया में है।

है अविनासी घट घट वासी सुद्ध असुद्ध घिया में है।

जानत उनके भाव भुवनपति जाके ज्यों न जिया में है।

पंडित हीराराम त्रिपाठी निहायत सज्जन पुरूष थे। वे गहरे आस्थावान व्यक्ति थे। भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनमें गहरी भक्ति थी। जन कल्याण चेतना से उनका व्यक्तित्व सम्पन्न था। वे अहं चैतन्य से शून्य भोले भाले उदार मनुष्य थे। सहृदयता तो उनमें कूट कूटकर भरी थी। श्री शिवरीनारायण महात्म्य को उन्होंने महंत गौतमदास जी की प्रेरणा से संशोधित और अनुवादित किया था। इस बात को वे स्वयं कहते हैं:-

गौतमदास महंत को प्रेम पुनीत विचार,

द्विजहीरा अल्था कियो पंडित लेहु सुधार।

हरिदासन की दास्यता सदा बसै मनमोर,

मांगत हीराराम द्विज संतन सो कर जोर।

ऐसे सत्पुरूष का जन्म सन् 1826 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के दुर्बन नामक ग्राम में हुआ था। वे किसी कार्य के सिलसिले में छत्तीसगढ़ के बेमेतरा ग्राम आये। वहां से वे रतनपुर आये। यहां उनकी मुलाकात कसडोल के मालगुजार मिसिर जी से हुई। वे उन्हें कसडोल ले आये। कसडोल में त्रिपाठी जी मालगुजारी की देखरेख आम मुख्तियार के रूप में करने लगे। आम मुख्तियार के रूप में उन्होंने मालगुजारी को बहुत अच्छे ढंग से चलाया। यहां की प्रकृति प्रदत्त सुषमा उनके कवि मन को जगा दिया और वे यहां काव्य रचना करने लगे। तभी शिवरीनारायण के तत्कालीन तहसीलदार और सुप्रसिद्ध साहित्यकार ठाकुर जगमोहनसिंह कासडोल आये और हीराराम त्रिपाठी की काव्य धारा से बहुत प्रभावित हुये। उन्होंने त्रिपाठी जी को शिवरीनारायण आने का निमंत्रण दिया। बाद में उनकी नियुक्ति यहां तहसील के खजांची के पद पर कर दी। सन् 1891 में तहसील मुख्यालय शिवरीनारायण से जांजगीर आ गया और इसी के साथ त्रिपाठी जी सपरिवार जांजगीर आ गये। यहां वे अर्जीनवीसी करने लगे। जीवन की अंतिम यात्रा भी उन्होंने यहीं पूरी की। उनके मृत्योपरांत उनका परिवार कहां चला गया, इसकी सही जानकारी नहीं मिलती।

त्रिपाठी जी की रचनाएं एक आस्थावान व्यक्ति की भावानुभूति है। एक सीमित सरोकार को लेकर उनका रचना संसार हमारे सामने आता है। यह सीमित सरोकार धर्म और आस्था का है। उनमें आस्था के नाम पर वैष्णववादिता है। उनकी वैष्णववादिता मध्य युगीन वैष्णववादिता से अलग है। उनके काव्य में जो भक्ति निरूपण है, उसका स्वरूप व्यापक आंदोलन या सामाजिक व्याप्ति में न होकर सीमित तथा संकीर्ण व्यक्तिगत निष्ठा पर है। त्रिपाठी जी की भक्ति भावना में आस्था का संप्रदायिक रूप नहीं है। उनकी भक्ति भावना में सगुन निर्गुण सभी एकाकार है। उनके जीवन की राममय झांकी प्रस्तुत है:-

रामनाम जपत अनेक धर्म सिद्ध होत, रामनाम जपत यमन तर जात है।

रामनाम जपत खपत कलिमल सब, रामनाम जपत कीर तिफरात है।

रामनाम श्रवण करत युक्ति मुक्ति होत, रामनाम सुनत कलुष महरत है।

रामप्रताप शिव नपित है आपु रामनाम लेत द्विजहीरा हर्षित है।

----

रचना, आलेख एवं प्रस्तुति,

प्रो. अश्विनी केशरवानी

राघव, डागा कालोनी

चांपा-495671 (छत्तीसगढ़)

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * || * उपन्यास *|| * हास्य-व्यंग्य * || * कविता  *|| * आलेख * || * लोककथा * || * लघुकथा * || * ग़ज़ल  *|| * संस्मरण * || * साहित्य समाचार * || * कला जगत  *|| * पाक कला * || * हास-परिहास * || * नाटक * || * बाल कथा * || * विज्ञान कथा * |* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4086,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,341,ईबुक,196,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3040,कहानी,2274,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,542,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,104,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,346,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,68,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,29,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,245,लघुकथा,1267,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,19,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,327,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2011,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,712,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,801,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,18,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,89,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,209,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: अश्विनी केशरवानी का आलेख - छत्तीसगढ़ के विस्मृत साहित्यकार: पंडित हीराराम त्रिपाठी
अश्विनी केशरवानी का आलेख - छत्तीसगढ़ के विस्मृत साहित्यकार: पंडित हीराराम त्रिपाठी
http://tbn0.google.com/images?q=tbn:C13pO_GXZu90HM:http://bp1.blogger.com/_qZgknZ7Iz-4/R71eKNN2oyI/AAAAAAAAAEQ/brqbPWdjjQY/S1600-R/Ashwinikesharwani1.gif
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2008/05/blog-post_4454.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2008/05/blog-post_4454.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ