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मनोहर श्याम जोशी का व्यंग्य : नेताजी कहिन

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नेताजी कहिन   -मनोहर श्याम जोशी   ब्रेकफास्ट के साथ नेताजी ने लठ-मार डिप्लोमेसी शुरू की। मक्खन और जैम दोनों से लिपे हुए एक टोस्ट को ...

नेताजी कहिन

 

-मनोहर श्याम जोशी

 

ब्रेकफास्ट के साथ नेताजी ने लठ-मार डिप्लोमेसी शुरू की। मक्खन और जैम दोनों से लिपे हुए एक टोस्ट को मुँह में पूरा-का-पूरा धकिया लेने और चबाने लगने के बाद उन्होने शहरी बाबू किस्म के एकमात्र 'डिसिडेण्ट' से पूछा, "चिठिया पठाइ आये, लेबर लीडर आसूतोस बाबू ? लयटर डिल्विर एट पी एम. कि नाट?"

"टुमारो। काल का टाइम दिया हाय।"

"टुमारो का एइसा हय," नेताजी ने कहा, "ससुर आता नहीं कभी। इंगलिस का टाप पोयट शक्कूपीर कुछ कहि गया हय टुमारो की बाबत। क्या कहि गया हय कक्का जरा बताया जाय आसूतोस बाबू को।"

आशुतोष बाबू ने तुनुककर सूचना दी कि शेक्सपियर की वह पंक्ति उन्हें भी याद है। उन्होंने जानना चाहा कि नेताजी सी.एम. की ओर से कोई "सालिड प्रपोजल' लाये हैं कि नहीं ?"

"अरे यह कोई चउधरी चरनसिंह राजनारायन वाली राजनीत हय कि प्रपोजल लाते ! डिसपोजल का खेल हय यह तो।"

"ठीके बा, सी. यमो डिसपोज हुइ जाइ।" एक थुलथुले विरोधी ने हँसकर कहा। नेताजी ने ठहाका बलन्द किया। फिर थुलथुले की तोंद को तर्जनी से कोंचते हुए कहा, "हमार सी. यम जब गिरी कूढ़ादान मा, तब तोहरे टाइप के लायल इलिमण्ट पहिले गिराय के गिरी। जमाना भर का भ्रस्ट आचार अउर आहार भकोंसी एइसन तोंदन का गद्दा रही तो सी.यम के गिरे पर जियादा चोट न आयी। बोलो रामसुख बाबू के तोंद के जै।"

नेता बिरादरी के सदस्य इस फब्ती पर अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार हुचहुचाये, हिनहिनाये अथवा जी खोलकर हँसे । फिर नेताजी ने आशुतोष बाबू के कन्धे पर धौल जमाया और कहा, "बहुत स्रम किया हय स्रमिक नेता आसतोस चिठिया ड्राफ्ट करे में। यही न हय डस-डण्ट का अस्पेलिंग जानने वाला डस-डण्ट। बाकी इनके प्रेरना-स्रोत केन्द्री मन्त्रीजी के लिए तो वही बिलैक लय-टर इज इकुअल टू बफैलो हय। का लिखे हो चिठिया में पी.यम के नाम ?" "शे तो सीक्रेट। काल पी.यम को देगा लैटर, तारपोर डिसाइड करेगा प्रेस को दे या न दे। अभी यही कि कारप्शन चार्जेज हय सीरियस सी.एम का खिलाफ आउर अमार नाइण्टी एट एम.एल.ए साइन किया हाय दिस लेटर रिक्वेस्टिंग सी. एम का रिमूवल।" "एक यतीम यम यले.अउर पकड़ लिया होता, निनानबे का फेर हुई जाता पूरा।"

नेताजी हिनहिनाये, "बाकी सिक्रेट विक्रेट कुच्छ नही। सी.यम के खिलाफ पी.यम को क्या लिखा जाय इसका हमरे सास्त्रों में विधान हय। कोई सी.यम हो कोई पी.यम, लयटर का ड्राफ्ट एकहि होता हय-अस्टण्ड-अर्ड। पहिला पाइण्ट : सी.यम अपना भाई-भतीजा को आगे बढ़ा रहा हय, जातवाद फइला रहा हय। दुसरा पाइण्ट : पइसा खा गया-अलां घोटाला, फलां घोटाला। तीसरा पाइण्ट: ला एण्ड आडर का बुरा हाल हय-अलां काण्ड फलां काण्ड। चउथा पाइण्ट: बायलेक्सन डिफीट-सी.यम की गलत नीत के कारन अलां बायलेक्सन में हमारा लीड कम हुआ अउर फलां बायलेक्सन में हमें डिफीट मिला। चउथे से पाँचवाँ पाइण्ट आपने कोई लिखा हो तो बताएँ ! होइए नहीं सकता पाँचवाँ पाइण्ट। अच्छा, अब जरा हर पाइण्ट का तोड़ सुन लिया जाय, पाइण्ट-बाइ-पाइण्ट। अपना भाई-भतीजा का नही करे आपके भाई-भतीजा का करे तो भी होगा भाई-भतीजावादे ना ? यह कहाँ लिखा हय कि अपना भाई-भतीजा जोग्य हो तो उसे इस आधार पर कण्डम कर दो कि अपना भाई-भतीजा हय। जिसका भाई-भतीजा होना ही किसी को कण्डम बना दे,वह ससुर खुद कितना कण्डम होगा !

जहाँ तक भाई-भतीजा की जोग्यता का सवाल हय, आप सरीखा पचासियो चमचा सट्टिफिकेट दिये को बइठा हय एवर-रयडी। अब लीजिए भ्रष्टाचार का पाइण्ट।" नेताजी ने झुककर सब विरोधियों के चरण छूने का अभिनय किया और कहा,"आप गुरुजन है। भ्रष्टाचार में आप जो कीर्तमान अस्थापित किये है उनके समच्छ हम का, सी.यमो नतमस्तक है। फाइलें सारी तैयार हैं। सी.यम नहीं चाहिते कि किसी गरीब का टांस्पोट का धन्धा खराब हो, किसी की नय-पाल से अस्मग्लिंग बन्द हुइ जाय, किसी का गैरकानूनी खान पकड़ में आ जाय, किसी के सहकार से निज उद्धार का भण्डाफोड़ हो, किसी का जमीने हड़पने का करतब जग-उजागर हो। तीसरा पाइण्ट ला एण्ड आडर। समझियेगा एक सांइस का बात : ला एण्ड आडर अउर मउसम ये दो किसी के बस का नहीं। मउसम ससुर एक बार बस में आ भी जाये, ला एण्ड आडर आप जइसे महानुभावों के जीते जी किसी के बस का हय नहीं। चउथा पाइण्ट बायलेक्सन डिफीट। तो आसुतोस बाबू आप समझे रहियेगा इसमें आपहि धर लिये जायेंगे।

आप कइसे लेबर लीडर बने, इधर मडण्ल दादा को आमरन अनसन की सूली पर चढ़ा के अउर उधर मानेजमण्ट से मिलकर सो ट्रेड जूनियन के इतिहास में स्वर्न अक्छरो में लिखा ही जा चुका हय। तो लेबर का ओट हमें नहीं मिल पाया इस बार। कांरिटटुअंसी के दिहाती इलाके में ओट मिला हमें, इण्डस्ट्री-एरियाज में चोट खा गये। अगर आप कहिते है कि लेबर पर होल्ड हय आपका तो मामला अउर भी संगीन हो जाता हय। आपने सेबोटाज किया होई। तनि बताया जाय-आपका लेबर लीडरी फुसफुस हय कि आप सेबोटाज किये रहे मामला?" नेताजी ने आशुतोष बाबू के कन्धे पर धौल जमाया और ठहाका बलन्द किया। नेता बिरादरी भी हँसी।

आशुतोष बाबू ने कहा, "जे आपनी कोई सालिड प्रपोजल लाये है तो ठीक। नहीं तो एइसा माफिक फालतू बकबक से तो हम लोग को कुछ असर होगी नहिं।" "अरे तो कउन आपहि की बकबक से सी.यम का बाल बाँका हुइ जायेगा। काल के जब आप हुआँ जायेगा ना दादा,तब आपका वह लयटर लयटरीन में रख दिया जायेगा !फौरिन गेस्ट लोग के लिए। अउर किस काम का हय वह ससुर। पी.यम कहीं भी डसडंस नहीं कहती, प्रयशर में परिवर्तन करना उनका सुभाव नहीं हय। अरे आप इन पत्रकारों से पूछो। बताया जाय कक्का इन्हें।"

हमारे भतीजाजी ने हमारे लिए यह भूमिका सोच रखी थी। हमने कहा,"पी.एम क्या करेंगी यह कह सकना बहुत मुश्किल है। जो भी वह करेगी अपनी मर्जी से करेगी किसी के जोर देने से नहीं।" "करेक्ट!" नेताजी ने कहा, "जो लोग यह समझे हुए है कि इंगरेजी पेपर मगजीन में उल्टा-सीधा छपवाने से सी. यम बदलवाये जा सकते है उनकी बुद्धि पर तरसे खाया जा सकता हय। क्यों कक्का, होता हय कुच्छ अखबारवालो के कहिने-लिखने से?" हम चुप रहे। भतीजाजी ने कहा, "कुछ नहीं ना।" हम अब झेंपे-झेंपे-से मुस्करा दिये।

भतीजाजी बोले, "मौन मीनिंग आइ एग्री। अउर आसुतोस बाबू आपको सी.यम का इमेज डैमेज करने के लिए यह लिखवाने की का सूझी कि पूजा करिते रहिते है। पूजा करने से इस मुल्क में इमेज बनता है, बिगड़ता नहीं। ठीक हय आप लोग उनसे मिलना चाहिते थे, आपको जवाब मिला कि पूजा में बइठे है, मुलाकात हो नहीं सकी। इसमें कउन आफत आ गयी? हम नेता फुर्सत के समय तीन में से एक जगह बइठा होता है इस देस में-पाखाने में,पिराइवेट में या पूजाघर में। फोन मिला के देख लीजिए चाहे जिसकी कोठी में। हमारे सी.यम को भगवान की दया से कब्ज की सिकायत नहीं। महरारू की सोहबत उन्होंने केन्द्री मन्त्रीजी को मुबारक कर रखी हय, इसलिए पिरइवेट में बइठने की गुंजाइस नहीं। बचा पूजाघर तो बइठते है उसमें ठाठ से। मन्त्र सिद्ध करते हैं आप जइसो को मारने का।"

नेता जी ने ठहाका बलन्द किया। नेता बिरादरी हँसी। आशुतोष बाबू ने कहा, "शे सब बेशी फनी एण्ड आल दैट लेकिन सालिड प्रपोजल नहीं होने से सीरियस नेगोशियेशंस होने नहीं सकता।" नेताजी ने उनके धौल जमाया और कहा, "दादा, तुम सालिड आदमी हय। आप लोग करप्शन चार्ज से डरते नहीं। आप लोगों सें लावल्टी की बात करना बेकार हय। आप में से किसके लिए सी.यम ने कब क्या किया यह बताना फिजूल हय। तो सुनियेगा एक ठो सालिड बात दिहाती कहावत में-हमरे सी.यम का यह कहना हय आपसे कि भाइयो मुझको साँय से फुरसत ना, आप जइसन देवर माँगे चुम्मा! तो साँय यानी केन्द्री मन्त्रीजी की कराइए छुट्टी।

अरे आप उन्हें नेता-नेता कहि रहे हैं तो बिरोधियों से कान्प्रमाइज के नाम पर सी.यम जो भी दे सकते है उन्हें देते है। आप उनसे अलग हो जाइए और सीधे खुद पा जाइए मेवा। केन्द्री मन्त्री होकर वह आपको हद-से-हद फोकट फण्ड में घुमवा सकते है यहाँ-वहाँ। राज्य में सी.यम विरोधियों को जो मन्त्रालय दे सकते थे सो केन्द्री मन्त्रीजी अपने भाई-भतीजा के नाम लिखवाय लिये है। अब एइसा हय आप कल केन्द्री मन्त्रीजी के खिलाफ अस्टेटमेण्ट दें कि डस-डंस भड़काकर राज्य में पा-रटी का इमेज चउपट करि रहे है। इसके बाद सी.यम रिस-फल करेंगे केबिनेट अउर आप लोगो के नुमाइन्दा अकमोडेट करेंगे। कहिए कइसा हय प्रपोजल ?" "करेंगे ओ सब फ्यूचर टेंस, प्रेजण्ट टेंस में बोलने से होगा।" आशुतोष बाबू ने कहा। "फूचर में सालिड प्रपोजल प्रेजेण्ट में लिक्विड कइश! " नेताजी हिनहिनाये, "साला बाबू दिया जाय। बिस-बिस हजार। आधा अभी। आधा अस्टेटमेण्ट आने पर।"

नेता बिरादरी ने भेंट में प्राप्त बटुए खोले और मुँह बनाया। रामसुख बाबू बोले, "इ का करत आहा। आधा देये का मतलब तो इ ना होय कि नोटुवे फाड़-फाड़ के आधा टुकुड़ा देय दिहा।" "जब तूँ लोग अस्टेटमेण्ट दे दइवे तब आधा टुकड़ा उहो मिल जाइ, जोड़ के काम चलाय लिहा।" इस पर ठहाका और धौल-धप्पा हुआ। होटल से लौटते हुए हमने नेताजी को अपना 'अड-टोरियल' सुनाया कि नेता बिरादरी देस को रसातल में पहुँचा रही है। नेताजी बोले, "अरे आपको गोंसाई तुलसीदास से जियादा जानकारी हय दस-काल की? वह कहि गये है कि, कलिजुग में नेता की क्वालिफिकेशन का होनी चाहिए। सुना जाय: चोर चतुर, बटमार नट, प्रभुपिय भंडुआ भण्ड। सब भच्छक परमार्थी कलि सुपन्थ पाषण्ड।"

आप समझे कि इंगरेजी में ट्रांस्लेट करें ? अउर जो आपने यह कहा कि नेता लोग लूट-खसोट न करें तो इस देस में सुअर्ग बसी जाइ, तो कक्का पहिले देस के लोगो से तनि पूछ लिया जाय कि सुअर्गवासी होना चाहिते है कि नाही ?"

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सवन हवंसिन नाइट-डे मोसन

हमारी सूरत और सीरत यों भी खासी रोनी है और जिस घड़ी हम सुबह-सुबह अखबार पढ़ चुके होते है, उस घड़ी तो कुछ न पूछिए! अब आपसे क्या छिपायें। इतने वर्ष पत्रकार रह चुकने के बाद भी समाचारों के प्रति हमारा दृष्टिकोण गुलशन नन्दा को भगवान माननेवाली किशोरी से बेहतर नहीं है।

हम पढ़ते है 'गोलीकाण्ड में चार मरे, पन्द्रह घायल' और सोचने लगते है कि वे कौन चार थे जो मरे? उनके परिवारों पर क्या बीती ? यह भी कि जिस पुलिसकर्मी की गोली से वे मरे क्या बाद में वह इस घटना के बारे में सोचते-सोचते पगला गया ? हम पढ़ते है कि अमुक नेता ने 'प्रशासन को स्वच्छ बनाने की प्रतिज्ञा की है' और उत्साहित हो उठते है। अगले दिन हम पढ़ते है कि 'उसी नेता पर करोड़ों का घोटाला करने का आरोप है' और हम गहन निराशा में डूब जाते है। लोगों को जाड़ो में शीत लहर' से, गर्मियों में 'लू से', बरसात में 'बाढ़ से' और बदलते मौसम में विषाणुजन्य किसी रहस्यमय रोग से मरते देखकर अपने अखबार में, हमारा मूड मातमी होता रहा है।

संक्षेप में यह कि हमारी सोहबत आमतौर से कभी भी और खासतौर से नगर-संस्करण-वाचन-काल में,न करने की सलाह हमारी श्रीमतीजी जैसे विशेषज्ञ देते आये है। हमारे लायक भतीजाजी उर्फ नेताजी अभी उस दिन हमारे मानस के इसी राहु-काल में प्रकट हुए। कन-सुनने कैसेट-प्लेयर से लैस। थिरकते हुए उस विशेष शैली में, जिसमें पाश्चात्य ट्विस्ट, पंजाबी भंगड़ा और हिंजड़ा-ठुमके का मिश्रण हुआ है और जिसे उत्साही बारातियों की कृपा से बहराइच से लेकर बम्बई तक राष्ट्रीय नृत्य का दर्जा मिल चुका है। इस नर्त्तन के साथ उनका गायन भी चल रहा था-कक्का हो,हो,हो। नाचते-थिरकते ही उन्होंने पायलागी की। हमने अनमना-सा आशीर्वाद दिया। अब नेताजी ने हमारे कन्धे पर धौल जमाया और कहा, "यह आपका नक्से बयासी हय ससुर ! बइठक में मार तमाम हइपी नू ईयर कहि मजाये हुए है अउर सूरत रोनी बनाये हुए है। नू ईयर नाइण्टी एट्टि टू, हवाई स्टिल वीपिंग यू ?"

नेताजी ने हैड-फोन हमारे कान की ओर बढ़ाये। 'रम्बा हो,हो,हो'-ऐसा कोई बेतुका गाना बज रहा था। हमने सुनने से इन्कार किया। नेताजी बोले, "सुना जाय। कवि हो-हो-हो वादी हय ससुर। ट्रस्टकोन पाजटिव हय उसका। गीता का सन्देस भी यहियै हय। अरे कुछ कीजिए, करने से ही होगा ना। अब अइसे ही हर करम से सरमाइएगा सरकार तब कइसन हुइयै बेड़ा पार ? फजूल की चिन्ता में घबराना ठीक नहीं। सियोर-सौट सायर कहि गया हय-सबन हवंसिन नाइट-डे मोसन, दिसौर दैट इज टु हप्पन, हवाई वरी इन अण्टस्पेसन ? मउज-मस्ती का रखा चाही मुडवा समझे कक्का। आप जो नेचरुवा बनाय लिये है अपना वह अण्टी-सोसल कहा जाता हय। अण्टी सोसल इलमेण्ट्स के साथ आप कहीं धर न लिये जायँ।" नेताजी हिनहिनाये। फिर उन्होंने तय पाया कि कक्का का मूड चैतन्यचूर्ण के अभाव में डाउन है।

उन्होंने नौकर को बुलाकर कार की चाबी दी और उसमें से ब्रीफकेस लाने को कहा। नौकर दो ब्रीफकेस लाया। नेताजी ने उनमें से एक अलग रख दिया, 'अरे यह काहे उठा लाये, इसमें सालिड माल हय ससुर !" फिर जैसे लोभ संवरण न कर पा रहे हों, उन्होंने उसी ब्रीफकेस को उठाया और खोलकर दिखाया। भीतर नोटों की गड्डियाँ भरी हुई थी। बोले, "देख लिया जाय, नाती-पोतों को बतानेवाली चीज हय कबहुँ फुरसत से बुढ़ापे में। सी.यम. के साला बाबू को पहुँचाना हय एक पा-रटी की तरफ से। अपने राम तो पोस्टाफिस है, मनीआडर यहाँ से वहाँ पहुँचा देते है। कमीशन अलबत्ता काट लेते है, दुतरफा।" फिर नेताजी ने दूसरे ब्रीफकेस में से पान मसाले का डिब्बा, तम्बाकू और चूना निकाला। चेतना की खुराक बनायी, आधी हमें खिलायी, आधी खुद खायी। फिर खाली ब्रीफकेस हमारी ओर बढ़ाते हुए बोले, "ग्रहन किया जाय। नू इयर गिफ्ट। भतीजा का उपहार अंक।" हमने कहा, "हमारे पास है।"

नेताजी बोले, "एकहि ना, अरे भतीजा के पास आपकी दया से इस समय दस ठो हय। जो आता हय ससुर एकहि-सा गिफ्ट दे जाता हय। कलेण्डर-डायरी लायवल डेढ़ दुई सउ भगत आया, फूलदान कलमदान लयवल नब्बे, एसट्रे, चाबी गुच्छा, बटुआ लयवल पिचहत्तर, नटराज के मूर्त लयवल पैतीस, लैम्प लयवल पचीस ,पारकर-शेफर पइन- सयट लयवल वाइस अउर क्रफकेस लयवल नउ। एक ससुरी कार्डनेसन कमेटी बिठानी पड़ेगी ताकि हर भगत अलग-अलग माल लाये। रख लिया जाय कक्का ई ब्रीफकेस। अरे कोई नोटुवा भरकर थोड़ो दे रहे है जो भ्रस्टाचार में सुमार हो। आपको जरूरत न हो, किसी को दे दीजियेगा - फिरी का गाहक बहूत हय इण्डया में। रामराज की परकल्पना इण्डयन हइयै यही कि हर माल मिलेगा फोकट पें !"

नेताजी हुचहुचाये और अपनी चिबुक पर बहती लार पोंछने लगे। "लोग गरीब है। अगर मुफ्त की चीज के लिए ललच जाते हो तो उसमें हँसी उड़ाने की क्या बात है।" हमने विरोध किया। नेताजी उठे और पीक वाशवेसिन में थूक आये। आकर बोले, "इस देस में कउनो इतना अमीर नाही कि फिरी फण्ड के माल के लिए नाही कर दे! वह किस्सा सुने हो न कि एक इण्डयन फोरन में गया। मारकिट में पेंसिल लेने पहुँचा। आधा दाम कराने मोल-भाव में जुटा। दुकानदार ने तंग होकर कहा, आप फिरी में रख लीजिए-गिफ्ट ! इण्डयन बोला - फिरी में दो नहीं दोगे गुरु ?"

नेताजी ने अब ठहाका बलन्द किया और नौकर को बुलाकर ब्रेकफास्ट के लिए आदेश दिया। वह बोले, "मामला क्या हय, आप आज खुस ही नहीं हो रहे हैं ।" "खुश होने की बात क्या है ?" हमने पूछा। "अरे कोई एक बात हय ! अखबारवालो के मनिस्टर साठे टी.वी. में जहाँगीर बास्सा बनकर झलक दिखा गये आपको तो इसी से खुस हो जाने चाहिए था। टी.वी. पर "पुकार" फिल्म भी दिखवा दी कि आपको याद आ जाय जहाँगीर क्या चीज था। अब आपको कोई दुख हो तो साठेजी के यहाँ जाय के फरियादी घण्टा बजा दीजिए। रोनी सूरत बनाये काहे बइठे हैं।" "आप नेता लोग कभी गम्भीर भी होते हैं।" हमने झिड़ककर कहा, "जब देखो तब कहकहे लगाते दिखते हो। देश जल रहा है और ये सारंगी बजा रहे हैं !" "अरे कक्का, आपके सामने तो हम भतीजावतार में प्रकट भये हैं। नेतावतार में हम बहुत सिरयस हैं। पालटक्स कोई हँसी-ठट्ठा नहीं ! बाकी यह बताया जाय कि देस कहाँ जल रहा हय।"

हमने अखबार उठाकर नेताजी की नाक पर दे मारा कि पढ़िए। बोले, "इसमें तो आगजनी की कउनो खबर नहीं हय। अउर कक्का, जरा पाइण्ट नोट किया जाय-अगर देस जलहि रहा होता तो हम कक्का-भतीजा का भुरता न बन गया होता ! जल-उल कुछ नहीं रहा हय - मस्त हय बिल्कुल फिट, एक अउर हंगामा नक्से बयासी की प्रतीच्छा में।" "तुमने वह नहीं पढ़ा जो जिला मैनपुरी में होता रहा है इधर !" "अरे पढ़ लिया हय कक्का। बगैर अखबार पढ़े नेता को हाजत नहीं होती सुबह, समझे ! बाकी वहाँ कोई देस जला नहीं हय । डाकू आकर दुइ-चार हरिजन मारि गये है। अउर सारगी कोई बजा नहीं रहा हय ससुर। आपके अटलजी महाराज पद-यात्रा जरूर कर रहे है। सो बेलवी में मयडम गजयात्रा किये रहीं। अपने-अपने अस्टण्डर्ड की बात हय। वइसे अटलजी पइदल चल रहे हैं तो ठीक कर रहे हैं; विदेस मन्त्री को बइंक्वट बहूत खाना पड़ता हय। इससे अटलजी को कुछ चर्बी चढ़ गयी रही। अब चलिहे पइदल तो बिनोबा के जइसे रूप निखरि आई।"

हम शायद थोड़ा-सा मुस्करा दिये। नेताजी उत्साहित हुए, "देखिए कक्का ! दो में से एक बात पर हाँ कीजियेगा। या तो यह देस ससुर अनाट काल से जलि रहा हय। धधकना इसका सयकण्ड नेचुरुवा हय। आप जउन टाइप का बुरा समाचार आज की तारीख में हमें दिखाइयेगा, हम खोजकर बरसों पहिले का वइसा समाचार प्रस्तुत कर देंगे सेवा में। या फिर एइसा हय कि देस जल-उल कुछ नहीं रहा हय, देस जल रहा हय एइसा भी नक्शेवाजी हय। कहिए कउन बात जँचती हय आपको ?" "इससे यही प्रकट होता हय कि देश में वास्तविक और बुनियादी परिवर्तन नहीं हो पाया है। यह भी कि नेता-बिरादरी ढोंगी है।" "अब यहाँ जइसी हय सो सेवा में हाजिर हय" नेताजी हुचहुचाये, "कहिए इम्पोट करायें ? कुछ नहीं आप अखबारवाले सनिकल है खुद अउर सनि-सज्म फइला रहे है पब्लिक में। सनि-सज्म रास्ट्र के लिए ससुर सनिग्रह से ज्यादा घातक है।" "अनास्था, पत्रकार नहीं, नेता जगा रहे है!" हमने भतीजाजी को झिड़का।

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(टीडीआईएल के हिन्दी कार्पोरा से साभार)

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नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3979,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,110,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2948,कहानी,2216,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद 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इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,240,लघुकथा,1197,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1992,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,697,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,772,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,75,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,196,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,75,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
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रचनाकार: मनोहर श्याम जोशी का व्यंग्य : नेताजी कहिन
मनोहर श्याम जोशी का व्यंग्य : नेताजी कहिन
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