चार्ली चैप्लिन की आत्मकथा (17)

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मेरी आत्म कथा चार्ली चैप्लिन   चार्ली चैप्लिन की आत्मकथा -अनुवाद : सूरज प्रकाश ( पिछले अंक 16 से जारी …) सत्ताइस बेव...

मेरी आत्म कथा

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चार्ली चैप्लिन

 

चार्ली चैप्लिन की आत्मकथा

-अनुवाद : सूरज प्रकाश

suraj prakash

(पिछले अंक 16 से जारी…)

सत्ताइस

बेवरली हिल्स वापिस आने के बाद मैं एक बार फिर शैडो एंड सब्सटैंस पर काम करने में जुट गया। ओर्सेन वैलेस मेरे घर पर एक प्रस्ताव ले कर आये। उन्होंने बताया कि वे डॉक्यूमेंटरी फिल्मों की एक श्रृंखला कर रहे हैं। जीवन से ली गयी सच्ची कहानियों को ले कर। इनमें में से एक होगी कुख्यात फ्रांसीसी हत्यारे, औरतों के रसिया लांड्रू पर। उनके ख्याल से ये मेरे करने के लिए एक शानदार ड्रामाई काम होगा।

इसमें मेरी दिलचस्पी जागी क्योंकि ये काम कॉमेडी से थोड़ा-सा हट कर होगा और साथ ही लेखन से, अभिनय करने से और स्वयं निर्देशन करने से थोड़ा बदलाव आयेगा। ये काम मैं बरसों से करता आ रहा था। इसलिए मैंने पटकथा मांगी।

'ओह, वो तो अभी तक लिखी ही नहीं गयी है।' बताया उन्होंने,'लेकिन सबसे बड़ी ज़रूरत यही है कि लांड्रू के मुकदमे से सब कुछ ले लिया जाये और आपका काम बन जायेगा।' उन्होंने आगे कहा,'मेरा तो यही ख्याल था कि आप इसके लेखन में मदद करेंगे ही।'

मैं निराश हो गया। 'अगर मुझे इसके लेखन में मदद करनी है तो इसे करने में मेरी कोई रुचि नहीं है।' मैंने कह दिया और मामला वहीं खत्म हो गया।

लेकिन एक या दो दिन बाद ही मुझे लगा कि लांड्रू वाले विचार को ले कर एक शानदार कॉमेडी बनायी जा सकती है। इसलिए मैंने वैलेस को फोन किया,'देखो, लांड्रू के बारे में डॉक्यूमेंटरी बनाने के आपके विचार ने मुझे एक कॉमेडी के लिए आइडिया दिया है। इसका लांड्रू से कुछ भी लेना देना नहीं है, लेकिन सब कुछ साफ हो, इसलिए मैं आपको पांच हज़ार डॉलर देने के लिए तैयार हूं, सिर्फ इसलिए कि आपके प्रस्ताव ने मुझे इस दिशा में सोचने दिया है।'

वे हुम .. . करने लगे और हिचकिचाये।

'देखिये, लांड्रू आपके साथ या किसी और के साथ कोई असली कहानी नहीं है। ये तो अब जनता की स्मृति में है।'

वे कुछ पल सोचते रहे फिर बोले कि मैं उनके मैनेजर से बात कर लूं। इस तरह से सौदा कर लिया गया: वैलेस को 5000 डॉलर मिलेंगे और मैं सभी दायित्वों से मुक्त रहूंगा। वैलेस ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया लेकिन एक प्रावधान जोड़ने के लिए कहा: कि फिल्म देख लेने के बाद उन्हें ये विशेष अधिकार दिया जाये कि वे स्‍क्रीन क्रेडिट्स में ये वाक्य डलवा सकें: 'आइडिया ओर्सोन वैलेस ने सुझाया।'

मैंने अपने उत्साह में इस अनुरोध पर बहुत कम सोचा। अगर मैंने इस बात का पूर्वानुमान लगा लिया होता कि वे इससे आखिर क्या हासिल करना चाहते हैं तो मैंने इस बात पर ज़ोर दिया होता कि कोई स्‍क्रीन आभार नहीं माना जायेगा।

अब मैंने शैडो एंड सब्सटैंस को एक तरफ रख दिया और मोन्स्योर वेरडौऊ लिखना शुरू कर दिया। मैं इस पटकथा पर पिछले तीन महीने से काम कर रहा था कि अचानक जॉन बैरी ने बेवरली हिल्स पर तूफान खड़ा कर दिया। मेरे बटलर ने बताया कि उसने फोन किया था। मैंने कह दिया कि किसी भी हालत में मैं उससे नहीं मिलूंगा।

इसके बाद जो घटनाएं हुईं, वे न केवल घिनौनी थीं बल्कि व्यथित करने वाली भी थीं। चूंकि मैंने उससे मिलने से मना कर दिया था इसलिए वह जबरदस्ती घर में घुस गयी और खिड़कियां तोड़ डालीं, मेरी जान लेने की धमकी दी और धन की मांग की। आखिर मज़बूरन मुझे पुलिस को बुलवाना पड़ा। ये काम मुझे बहुत पहले ही कर लेना चाहिये था, बेशक इससे प्रेस वालों को लिखने के लिए अच्छा-खासा मसाला मिल जाता। लेकिन पुलिस ने बहुत सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि वे उसके खिलाफ आवारागर्दी के आरोप ठोक देंगे अगर मैं इसे वापिस न्यू यार्क भिजवाने के लिए किराया देने के लिए तैयार हो जाऊं। इसलिए मैंने एक बार फिर उसका किराया दिया। पुलिस ने उसे चेतावनी दी कि अगर वह बेवरली हिल्स के आस पास भी नज़र आयी तो उस पर आवारागर्दी का आरोप ठोक दिया जायेगा।

इस बात को सोच कर तरस ही आता है कि आप कह सकते हैं कि इस घिनौने घटनाक्रम के बाद मेरे जीवन के सबसे सुखद दिन, बस, आने ही चाहिये थे। लेकिन छायाएं रात के अंधेरे में विलीन हो जाती हैं और प्रात: होते ही सूर्य उदित होता है।

कुछ ही महीने बीते होंगे कि एक दिन मिस मिन्ना वालिस, हॉलीवुड में काम करने वाली एक फिल्म एजेंट ने यह कहने के लिए फोन किया कि उसके पास न्यू यार्क से हाल ही में आयी एक कलाकार है जो उनके ख्याल से शैडो एंड सब्सटैंस में ब्रिजेट के प्रमुख पात्र के लिए एकदम सही रहेगी। अब चूंकि मोन्स्योर वेरडाऊ प्रेरित कर पाने के हिसाब से एक मुश्किल कहानी थी, मैं उसे आगे बढ़ाने में मुश्किलें पा रहा था, मैंने मिस वालिस के इस संदेश को एक अच्छे शकुन के रूप में माना कि शायद मैं शैडो एंड सब्सटैंस पर काम करने के बारे में फिर से सोचूं और फिलहाल के लिए मोन्स्योर वेरडाऊ को एक तरफ सरका दूं। इसलिए मैंने और अधिक ब्यौरे जानने की नीयत से उन्हें फोन किया। मिस वालिस ने बताया कि उस लड़की का नाम ऊना ओ'नील है और वह प्रसिद्ध नाटककार यूजीन ओ'नील की बेटी है। मैं यूजीन ओ'नील से कभी नहीं मिला था लेकिन उनके नाटकों की गम्भीरता से मुझे धुंधला सा अहसास था कि उनकी लड़की कैसी होगी। इसलिए मैंने मिस वापिस से दो टूक पूछा,'क्या वह अभिनय कर सकती है?'

'उसे पूरब की तरफ गर्मियों में होने वाले नाटकों में अभिनय करने का थोड़ा बहुत अनुभव है। बेहतर होगा आप उसका स्‍क्रीन टैस्ट ले लें और अपने आप ही देख लें।' कहा उन्होंने, 'या उससे बेहतर ये भी हो सकता है कि यदि आप अपनी तरफ से कोई वचन नहीं देना चाहते तो आप मेरे घर पर डिनर के लिए आइये। मैं उसे वहीं पर बुलवा लूंगी।'

मैं वहां जल्दी पहुंच गया। मैंने वहां पर आग के पास बैठी एक अकेली नवयुवती को पाया। मिस वालिस का इंतज़ार करते हुए मैंने अपना परिचय दिया और कहा कि शायद वो ऊना ओ'नील ही है। वह मुस्कुरायी। मेरी पूर्वधारणा के विपरीत, मैं उसके जगमग करते सौन्दर्य के प्रति सतर्क हो गया। उसमें एक तरह का बांध लेने वाला आकर्षण और विनम्रता थे और ये बातें बेहद अपील करती थीं।

अपनी मेज़बान की राह देखते हुए हम बैठे बातें करते रहे।

आखिरकार मिस वालिस आयीं और हमारा औपचारिक रूप से परिचय कराया गया। डिनर के लिए हम चार ही लोग थे: मिस वालिस, मिस ओ'नील, टिम डुरैंट और मैं। हालांकि हमने कारोबार की बात नहीं की, हम उसके आस पास ही बात करते रहे। मैंने इस बात का ज़िक्र किया कि शैडो एंड सब्सटैंस की लड़की बहुत युवा है। ये सुनते ही मिस वालिस ने ये जुमला उछाल दिया कि मिस ओ'नील की उम्र सत्तरह बरस से थोड़ी सी ही ज्यादा है। मेरा दिल डूब गया। हालांकि उस भूमिका के लिए किसी युवा लड़की की ही ज़रूरत थी, लेकिन चरित्र बेहद जटिल था और इसके लिए थोड़ी बड़ी और अनुभवी अभिनेत्री चाहिये थी। इसलिए मैंने संकोच के साथ उसे अपने दिमाग से निकाल दिया।

लेकिन कुछ ही दिन बीते थे कि मिस वालिस ने फोन करके जानना चाहा कि क्या मैं मिस ओ'नील के बारे में कुछ कर रहा हूं क्योंकि फॉक्स फिल्म वाले उसमें दिलचस्पी ले रहे हैं। ये तभी और वहीं हुआ कि मैंने ओ'नील के साथ करार कर लिया। ये उस संबंध की शुरुआत थी जो अगले बीस बरस तक और मुझे उम्मीद है, कई और बरसों के लिए भी परम प्रसन्नता के बरस बनने के लिए मेरे भाग्य में लिखे थे।

जैसे जैसे मैं ऊना को जानता गया, मैं लगातार उसके हास्य बोध और सहनशक्ति को देख कर हैरान होता रहा; वह हमेशा सामने वाले व्यक्ति के नज़रिये का भी ख्याल रखती थी। यही और कई तरह के दूसरे कारण भी रहे कि मैं ऊना से प्यार करने लगा। अब तक वह अट्ठारह बरस की हो चुकी थी; लेकिन मुझे इस बात का पूरा यकीन था कि वह उस उम्र की तरंग से बंधी हुई नहीं थी - ऊना नियमों से परे थी। हालांकि शुरू शुरू में मैं हम दोनों के बीच के उम्र के फासले को ले कर डरा हुआ था, लेकिन ऊना पक्के फैसले वाली थी, मानो वह किसी सच को हासिल कर चुकी थी। इसलिए हमने शैडो एंड सब्सटैंस फिल्म पूरी कर लेने के बाद शादी करने का फैसला किया।

मैंने पटकथा का पहला ड्राफ्ट पूरा कर लिया था और अब उसके निर्माण का काम शुरू करने की सोच रहा था। अगर मैं उस फिल्म में ऊना में मौजूद आकर्षण की उस दुर्लभ छवि को दिखा पाया तो शैडो एंड सब्सटैंस बेहद सफल फिल्म होगी।

ठीक इसी मौके पर, बैरी ने एक बार फिर शहर पर धावा बोल दिया और बटलर को फोन पर लापरवाही वाले अंदाज़ में बताया कि वह ज़रूरतमंद है और तीन महीने का गर्भ है उसे लेकिन उसने न तो ऐसा आरोप लगाया और न ही संकेत ही दिया कि इसके लिए कौन जिम्मेवार है। बेशक ये मेरे लिए चिंता की बात नहीं थी, इसलिए मैंने बटलर से कह दिया कि अगर वह घर के आसपास किसी तरह की हरकत करती है तो चाहे स्कैंडल हो या न हो, मैं पुलिस को बुलवा लूंगा। लेकिन वह अगले दिन आयी तो बहुत खुश नज़र आ रही थी। उसने घर के और बगीचे के कई चक्कर काटे। इसमें कोई शक नहीं था कि वह योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही थी। ये तो बाद में जा कर पता चला था कि वह प्रेस की आग लगाऊ महिला पत्रकारों के पास गयी थी और उन्हीं लोगों से उसे सलाह दी थी कि वह घर वापिस जाये और अपने आपको गिरफ्तार करवा ले। मैंने उससे खुद बात की और चेतावनी दी कि अगर वह घर से बाहर नहीं जाती है तो मुझे पुलिस को बुलवाना पड़ेगा। लेकिन जवाब में वह सिर्फ हँस दी। ब्लैकमेल करने वाली उसकी इस हरकत की जब सीमा पार हो गयी तो मैंने बटलर से कहा कि पुलिस को फोन करे।

कुछ ही घंटे बीते थे कि अखबार बड़ी बड़ी हैडलाइनों से रंगे हुए थे। मुझे अपमानित किया गया था, मेरी निंदा की गयी थी और मुझ पर हर तरह का कीचड़ उछाला गया था: चैप्लिन, जॉन के अजन्मे बच्चे के पिता ने उसे गिरफ्तार करवाया, उसे बेहाल छोड़ दिया। एक ही हफ्ते बाद मेरे खिलाफ पितृत्व का मामला दाखिल कर दिया गया। इन आरोपों को देखते हुए मैंने अपने वकील लॉयड राइट से सम्पर्क किया और उसे बताया कि जॉन नाम की इस औरत से मेरा दो बरस से कोई नाता नहीं रहा है।

ये जानते हुए कि मैं शैडो एंड सब्सटैंस का निर्माण शुरू करने जा रहा हूं, उन्होंने विनम्रता से सुझाव दिया कि मैं इसे फिलहाल के लिए टाल दूं और कि ऊना ओ'नील वापिस न्यू यार्क लौट जाये। लेकिन हमने उनकी सलाह नहीं मानी। न ही हम बैरी नाम की इस औरत की और न ही प्रेस की हैडलाइनों की धमकियों में ही आयेंगे। अब चूंकि ऊना और मैं शादी करने के बारे में पहले ही बात कर चुके थे, हमने तय किया कि हम तभी और वहीं शादी कर डालें। मेरे दोस्त हैरी क्रॉकर ने सभी शुरुआती तैयारियां कीं। इन दिनों वह हर्स्ट साहब के लिए काम कर रहा था, उसने वादा किया कि वह थोड़ी सी ही तस्वीरें लेगा ताकि हर्स्ट साहब को ही इसकी खास स्टोरी मिल सके और एक मित्र, लौयेला पारसंस शादी के बारे में लिखेगी ताकि हम दूसरे अखबारों के विरोध के शिकार न बनें।

हमने कारपेंटरिया में शादी की। ये सांता बारबारा से पन्द्रह मील की दूरी पर एक छोटा सा गांव था। लेकिन इससे पहले कि हमें शादी का लाइसेंस मिलता, हमें सांता बारबारा के टाउन हॉल में शादी को रजिस्टर करवाना था। अभी सुबह के आठ ही बजे थे और उस वक्त शहर में गहमा गहमी शुरू नहीं हुई थी। जो क्लर्क शादियां रजिस्टर करता था, थोड़ा बदमाश था। अगर शादी करने वाले जोड़े में से कोई एक ख्याति प्राप्त व्यक्ति हो तो वह आम तौर पर अपनी डेस्क के नीचे लगे एक गुप्त बटन को दबा कर प्रेस को खबर कर दिया करता था। इसलिए फोटो आयोजन से बचने के लिए हैरी ने इस बात का इंतज़ाम किया कि जब तक ऊना रजिस्टर में हस्ताक्षर आदि करे, मैं कार्यालय के बाहर ही इंतज़ार करूं। सामान्य किस्म के ब्यौरे, मसलन उसका नाम, उम्र आदि नोट कर लेने के बाद क्लर्क ने कहा,'कहां हैं दूल्हे महाशय?'

जब मैं उसके सामने आया तो उसकी आंखें चौड़ी हो गयीं,'ये तो भई, बहुत बड़ा सरप्राइज़ है!' और हैरी ने उसके हाथ को डेस्क के नीचे गायब होते देख लिया। लेकिन हमने उस पर जल्दी करने के लिए ज़ोर डाला। बहुत देर तक हील हुज्जत करने और जितनी देर वह लगा सकता था, उतनी देर लगाने के बाद उसने संकोच के साथ हमें लाइसेंस दिया। जैसे ही हम इमारत से बाहर निकले और अपनी कारों की तरफ जा ही रहे थे, प्रेस वालों का हुजूम दालान में आ पहुंचा। इसके बाद तो जीवन मरण की दौड़ शुरू हुई। सांता बारबारा की सुनसान गलियों में तेज मोड़ काटते हुए और ब्रेक लगाते हुए कारें दौड़ाने, कभी इस तरफ की गली में मुड़ना तो तभी दूसरी तरफ की गली में से बचते बचाते निकलना। इस तरह से हमने उन्हें छकाया और वापिस कारपेंटरिया पहुंचे। वहां पर ऊना और मैंने बिना शोर शराबे के शादी कर ली।

हमने सांता बारबरा में दो महीने के लिए एक मकान लीज़ पर ले लिया। प्रेस द्वारा उगले जाते ज़हर के बावज़ूद हमने वहां ये वक्त बहुत अच्छी तरह से गुज़ारा, क्योंकि उन्हें मालूम नहीं था कि हम कहां पर हैं। हालांकि जब भी दरवाजे की घंटी बजती, हम उछल जाते।

शाम के वक्त हम गांव की तरफ शांत चहल कदमी के लिए निकल जाते। हम इस बात का ध्यान रखते कि देख न लिये जायें या पहचान न लिये जायें। अक्सर मुझे गहरी हताशा घेर लेती, मैं यह महसूस करता कि मेरे हिस्से में पूरे देश की कड़ुवाहट और नफरत आयी है और मेरा फिल्म कैरियर चौपट हो गया है। ऐसे वक्त में ऊना मुझे ऐसे मूड में से बाहर निकालती और मेरे लिए ट्रिलबाय· के अंश पढ़ कर सुनाती। ये किताब बहुत ही विक्टोरिया कालीन और हँसी मज़ाक से भरी हुई है। खास तौर पर वे अंश जहां पर लेखक पेज दर पेज इस बात की व्याख्याएं देता चलता है कि ट्रिलबाय क्यों अपनी अस्मत लगातार दोनों हाथों से लुटाती रहती है। ऊना आग के पास आराम कुर्सी पर मुड़ी तुड़ी होकर बैठ जाती और मुझे ये अंश पढ़ कर सुनाती। बीच बीच में हताशा के दौर के बावजूद सांता बारबरा में ये दो महीने उदास, रुमानियत से भरे, ईश्वरीय वरदान सरीखे और चिंता और हताशा के बीच गुज़रे।

जब हम लॉस एंजेल्स लौटे तो युनाइटेड स्टेट्स के उच्चतम न्यायालय के मेरे मित्र जस्टिस मर्फी की तरफ से चिंता में डालने वाली खबर मिली। उन्होंने बताया कि प्रभावशाली राजनीतिज्ञों के एक डिनर में एक राजनेता ने ये टिप्पणी की थी कि 'हम चैप्लिन को बाहर निकाल कर ही दम लेंगे।'

जस्टिस मर्फी ने लिखा था,'अगर आप किसी मुसीबत में फंस जाते हैं तो आप किसी छोटे, नामालूम-से वकील की सेवाएं ही लेना और महंगा वकील कत्तई मत करना।'

अलबत्ता, इस बात में थोड़ा समय लग गया कि संघीय सरकार हरकत में आयी। उन्हें गुमनाम प्रेस का समर्थन मिल रहा था। प्रेस की निगाह में मैं सबकी आंख की किरकिरी बना हुआ था।

इस बीच हम पितृत्व वाले मामले की तैयारी कर रहे थे। ये दीवानी मामला था और इसका संघीय सरकार से कुछ लेनादेना नहीं था। पितृत्व वाले मामले के लिए लॉयड राइट ने सुझाव दिया कि मैं अपने खून की जांच करवा लूं। अगर ये जांच मेरे पक्ष में गयी तो ये इस बात का पक्का सबूत होगा कि मैं मोहतरमा जॉन बैरी के बच्चे का पिता नहीं हूं। बाद में वे मेरे पास ये खबर लेकर आये कि उन्होंने जॉन के वकील के साथ एक समझौता किया है। शर्त ये थी कि अगर हम जॉन बैरी को 25000 डॉलर दे दें तो वह अपने और अपनी बच्ची के खून के नमूने जांच के लिए दे देगी और अगर नतीजों से ये सिद्ध हो गया कि मैं बच्ची का पिता नहीं हो सकता तो वह पितृत्व वाला मामला वापिस ले लेगी। मैं प्रस्ताव पर कूद पड़ा। लेकिन ये मेरे खिलाफ चौदह की तुलना में एक वाला मामला था क्योंकि बहुत सारे लोगों का ब्लड ग्रुप एक जैसा ही होता है। उसने समझाया कि अगर बच्चे का ब्लड ग्रुप ऐसा हो जो कि न तो मां का है और न ही आरोपित पिता का ही है तो अवश्य ही ये ब्लड गुप किसी तीसरे व्यक्ति की वजह से आया होना चाहिये।

बैरी जॉन द्वारा बच्ची को जन्म दे दिये जाने के बाद संघीय सरकार ने बहुत बड़े पैमाने पर जांच प़ड़ताल शुरू कर दी और मुझे फंसाने की नीयत से बैरी से सवाल जवाब शुरू कर दिये। किन आधारों पर, मैं इसकी कल्पना नहीं कर पा रहा था। दोस्तों ने मुझे सलाह दी कि मैं प्रख्यात फौजदारी वकील गिस्लर से सम्पर्क करूं और जस्टिस मर्फी की सलाह के खिलाफ मैंने ऐसा ही किया। ये एक बहुत बड़ी गलती थी क्योंकि इससे ऐसा लगा मानो मैं किसी बड़ी मुसीबत में फंस गया हूं। लॉयड राइट ने इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए गिस्लर से मुलाकात की व्यवस्था की कि संघीय सरकार की जूरी मुझ पर किन मामलों पर आरोप लगा सकती है। दोनों ही वकीलों ने ये सुना था कि मेरे खिलाफ मान्न अधिनियम¹ के उल्लंघन का आरोप सिद्ध करना चाहती है।

बीच बीच में संघीय सरकार अपने राजनैतिक विरोधियों को उनकी औकात दिखाने के लिए इस कानूनी ब्लैकमेल का सहारा लिया करती थी। मान्न अधिनियम का मूल आशय ये था कि वेश्वावृत्ति के प्रयोजन से किसी औरत को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने को रोकना था। रेड लाइट इलाकों के समाप्त कर दिये जाने के बाद इसका बहुत ही कम वैध उपयोग रह गया था लेकिन नागरिकों को हैरान परेशान करने के लिए इसे अभी भी इस्तेमाल किया जा रहा था। मान लीजिये, कोई व्यक्ति अपनी तलाकशुदा पत्नी के दूसरे राज्य की सीमा पर ले कर जाता है और वह वहां पर उसके साथ संभोग करता है तो ये माना जायेगा कि उसने मान्न अधिनियम का उल्लंघन किया है और उसे पांच बरस के लिए सींखचों के पीछे डाला जा सकता है। ये कानूनी अवसरवाद का बोगस नमूना था जिसके आधार पर संघीय सरकार मेरे खिलाफ आरोप पत्र लायी थी।

इस दूर की कौड़ी वाले आरोप के अलावा सरकार एक और कानूनी खिच़ड़ी पका रही थी जो एक पुरानी पड़ चुकी कानूनी तकनीकी बात पर आधारित थी। ये बात इतनी वाहियात थी कि आखिर इसे उन्हें वापिस लेना ही पड़ा। राइट और गिस्लर दोनों ही इस बात से सहमत थे कि दोनों ही आरोप वाहियात थे और उन्हें लगा कि अगर मुझ आरोप लगाये जाते हैं तो कोई वजह नहीं कि मैं मामला जीत न सकूं।

और अब महान जूरी की जांच शुरू हो गयी थी। मुझे लग रहा था कि पूरा का पूरा मामला ही गिर जायेगा; ये बात तो थी ही कि मैं समझता था कि बैरी अपनी मां के साथ न्यू यार्क आती जाती रही थी। अलबत्ता, कुछ ही दिन बाद, गिस्लर मुझसे मिलने आये,'आपके खिलाफ सभी मामलों में आरोप लगा दिये गये हैं,' कहा उन्होंने,`हम ब्यौरों वाला पत्र बाद में हासिल कर लेंगे। मैं आपको शुरुआती सुनवाई की तारीखों के बारे में बता दूंगा।'

आगे आने वाले दिन काफ्का की किसी कहानी की तरह थे। मैं पा रहा था कि मेरी आज़ादी दांव पर लगी हुई है और मैं उसे बचाने के लिए एक ऐसी मुहिम में लगा हुआ हूं जिस पर मुझे पूरी तरह से ध्यान देने की ज़रूरत है। अगर सभी मामलों में मेरे खिलाफ आरोप सिद्ध हो जाते तो मुझे बीस बरस की कैद हो सकती थी।

अदालत में शुरुआती सुनवाइयों के बाद तो फोटोग्राफरों और प्रेस वालों की बन आयी। वे मेरे मना करने के बावजूद संघीय मार्शल के दफ्तर में जबरदस्ती घुस आये और जिस वक्त मेरी उंगलियों के निशान लिये जा रहे थे, मेरे फोटोग्राफ लेने लगे।

'क्या उन्हें ऐसा करने का अधिकार है?' पूछा मैंने।

'नहीं,' मार्शल ने कहा,'लेकिन आप इन लोगों पर काबू नहीं पा सकते।' ये बात संघीय सरकार का एक अधिकारी बता रहा था।

अब बैरी संतान इतनी बड़ी हो गयी थी कि उसके खून का नमूना लिया जा सके। बैरी के और मेरे वकील की आपसी सहमति से एक क्लिनिक चुना गया और बैरी, उसकी बच्ची और मैंने अपने अपने खून के नमूने जमा कराये।

बाद में मेरे वकील ने फोन किया। उसकी आवाज़ खुशी के मारे कांप रही थी,'चार्ली, आप दोषमुक्त हो गये। ब्लड टेस्ट से पक्के तौर पर ये सिद्ध हो गया है कि चार्ली उस बच्ची के पिता नहीं हो सकते।'

मैंने भावुक हो कर कहा,'ये न्याय है।'

इस खबर से प्रेस में थोड़ी देर के लिए सनसनी छा गयी। एक अखबार ने लिखा: 'चार्ली चैप्लिन दोषमुक्त।' दूसरे ने लिखा: 'रक्त की जांच ने पक्के तौर पर सिद्ध किया कि चार्ली पिता नहीं हो सकते।'

हालांकि रक्त की जांच के नतीजों ने संघीय सरकार को परेशानी में डाल दिया था, वे फिर भी अपने मामले को आगे बढ़ाते रहे। जैसे जैसे मुकदमा नज़दीक आता गया, मुझे लम्बी भयानक शामें गिस्लर के घर पर गुज़ारनी पड़तीं जहां पर मैं ऐसे हताश करने वाले ब्यौरों से जूझता रहता कि मैं जॉन बैरी से कब और कैसे मिला था। सैन फ्रांसिस्को में रहने वाले वाले एक कैथोलिक पादरी से एक महत्त्वपूर्ण पत्र मिला जिसमें उन्होंने ये लिखा था कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि बैरी को एक फासीवादी संगठन इस्तेमाल कर रहा है और कि वे सैन फ्रांसिस्को से लॉस एंजेल्स आ कर इस आशय का बयान देने के लिए तैयार हैं। लेकिन गिस्लर ने इसे अप्रासंगिक कह कर दरकिनार का दिया।

हमारे पास ऐसे बहुत से नुक्सान पहुंचाने वाले सबूत थे जिनसे जॉन के चरित्र और उसके अतीत को उघाड़ा जा सकता था। हम कई हफ्तों से इन कोणों पर विचार कर रहे थे। तभी एक रात, मेरी हैरानी की सीमा न रही जब गिस्लर के अचानक घोषणा कर दी कि चरित्र हनन बहुत पुराना टोटका रहा है और हालांकि ये ऐरॉल फ्लिन केस में सफल रहा था, यहां पर इसकी ज़रूरत नहीं रहेगी। 'हम इस मामले को इस फालतू की चीज़ को इस्तेमाल में लाये बिना आसानी से जीत सकते हैं।' बताया उन्होंने। गिस्तर के लिए ये फालतू की चीज़ हो सकता था लेकिन हमारे पास उसके अतीत के जो सबूत थे, वे मेरे लिए बहुत मायने रखते थे।

मेरे पास बैरी के वे खत भी थे जो उसने मेरे लिए खड़ी की गयी सारी मुसीबतों के लिए माफी मांगते हुए लिखे थे और मेरी दयालुता और उदारता के लिए मेरे प्रति आभार माना था। मैं इन पत्रों को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता था क्योंकि इनसे प्रेस के अमानवीय किस्सों को गलत ठहराया जा सकता था। इसी कारण से मैं खुश था कि स्कैंडल इस हद तक आ गया था कि अब प्रेस को सच छापना ही पड़ेगा और मैं कम से कम अमेरिकी जनता की निगाहों में तो दोष मुक्त माना जाऊंगा - मैं ये सोच कर चल रहा था।

इस मौके मैं जे एडगर हूवर और उनके संगठन के बारे में दो शब्द अवश्य ही कहना चाहूंगा। चूंकि ये एक संघीय मामला था और एफबीआई इस बात में जी जान से जुटी हुई थी कि अभियोजन पक्ष के लिए खूब साक्ष्य जुटाये जायें। मैं मिस्टर हूवर से कई बरस पहले एक डिनर पार्टी में मिला था। जब आप एक तरह से क्रूर चेहरे और टूटी नाक से उबर जाते हैं तो आप को कोई भी अच्छा लगने लगता है। जब मैं उनसे उस वक्त मिला था तो वे मुझसे बहुत उत्साह से मिले थे और अपने सेवा में कानून के विद्यार्थियों सहित, किसी अच्छे व्यक्ति को रखने की बात कर रहे थे।

और अब मुझे फंसाये जाने के कुछ रातों के बाद हूवर चेसन रेस्तरां में बैठे हुए थे। वे एफबीआइ के अपने आदमियों के साथ थे और ऊना और मुझसे मात्र तीन ही मेजें दूर बैठे थे। उसी मेज पर उनके साथ बैठे थे टिप्पी ग्रे जिन्हें मैं 1918 के बाद से बीच बीच में हॉलीवुड में देखता आया था। वे हॉलीवुड की पार्टियों में नज़र आ जाते। वे नेगेटिव, परवाह न करने वाले और लगातार खोखली हँसी हंसते और उन्हें देख कर मुझे कोफ्त होती थी। मैं ये मान कर चला करता था कि वे फिल्मों में या तो प्लेबॉय रहे होंगे या छोटे मोटे रोल करते होंगे। अब मैं इस बात को ले कर हैरान था कि वे हूवर की मेज़ पर क्या कर रहे थे। जब ऊना और मैं चलने के लिए खड़े हुए तो मैंने उसी वक्त मुड़ कर देखा जिस वक्त टिप्पी ने मुड़ कर देखा। एक पल के लिए हमारी निगाहें मिलीं। उन्होंने अचानक खींसें निपोरीं। तभी मैं उस खींसे निपोरने का फालतू का अर्थ समझ पाया था।

आखिर ट्रायल का आखिरी दिन आया। गिस्लर ने कहा कि मैं उनसे दस बजने से ठीक दस मिनट पहले फेडरल बिल्डिंग के बाहर मिलूं ताकि हम अदालत में एक साथ अंदर जा सकें।

अदालत का कमरा दूसरी मंज़िल पर था। जिस वक्त हमने अदालत में प्रवेश किया, हमारी मौजूदगी ने बहुत कम हलचल पैदा की। दरअसल, प्रेस के सदस्यों ने अब मेरी उपेक्षा की। मुझे ऐसा लगा कि अब उन्हें मुकदमे से ही काफी मसाला मिल जाने वाला था। गिस्लर ने मुझे एक कुर्सी में बिठा दिया और अदालत में कई लोगों से बात करते हुए वे इधर उधर घूमने लगे। ऐसा लगा कि ये सब की पार्टी है और उसमें मैं कहीं नहीं हूं।

मैंने फेडरल एटार्नी के तरफ देखा। वे कागज़ात पढ़ रहे थे, प्रविष्टियां कर रहे थे, बातें कर रहे थे और पूरे विश्वास के साथ कई लोगों से बातें करते हुए हँस रहे थे। टिप्पी ग्रे भी वहीं मौजूद थे और बीच बीच में वे मेरी तरफ सरसरी निगाह डालते और बेवजह खींसें निपोरने लगते।

गिस्लर मेज पर एक कागज़ और पेंसिल छोड़ गये थे ताकि मुकदमे के दौरान नोट्स ले सकें। मैं खाली बैठ कर इधर उधर न घूरता रहूं इसलिए मैंने ड्राइंग बनाना शुरू कर दिया। गिस्लर तुरंत लपक कर मेरे पास आये और फुसफुसाए 'ये सब मत करो।' ये कहते हुए उन्होंने मेरे हाथ से कागज़ छीन लिया और फाड़ने लगे,'अगर ये कागज प्रेस के हाथ लग गया तो वे इसका विश्लेषण करवा लेंगे और इससे हर तरह के नतीजे निकाल लेंगे।' मैंने एक नदी और एक पुराने से पुल का जरा सा स्कैच ही बनाया था जैसा कि मैं बचपन में करता था।

आखिरकार, अदालत के कमरे में तनाव फैल गया और हर आदमी अपनी जगह पर पहुंच गया। तब क्लर्क ने अपनी हथौड़ी से तीन बार ठक ठक की और मुकदमा शुरू हो गया। मेरे खिलाफ़ चार आरोप लगाये गये थे: दो आरोप मान्न अधिनियम के लिए और दो आरोप किसी ऐसे अप्रचलित कानून के लिए जिसके बारे में किसी ने गृह युद्ध के बाद सुना ही नहीं था। ये इस आशय के आरोप थे कि मैंने नागरिक के अधिकारों में दखल दिया है। पहले तो गिस्लर ने कोशिश की कि पहले आरोपों को ही रफा दफा कर दिया जाए लेकिन यह एक औपचारिकता मात्र थी: यह मांग कुछ ऐसी ही थी कि आप सर्कस में पैसा देकर अंदर आए दर्शकों को बाहर जाने के लिए कहें।

जूरी के चयन में दो दिन लग गए: वहां पर चौबीस लोगों का पैनल था जिसमें से बारह लोग चुने जाने थे। प्रत्येक पक्ष को उनमें से छह लोग चुनने का अधिकार था ताकि जूरी के बारह सदस्यों का चयन हो सके। दोनों तरफ से जूरी के सदस्यों की खूब प़ड़ताल की जाती है और भयानक जांच की जाती है। तरीका यह है कि जज और अटार्नी मामले में बिना भेदभाव के निर्णय देने के लिए उसकी योग्यता के बारे में इस तरह के सवाल पूछते हैं: क्या उसने कागजात पढ़े हैं, क्या उन्हें पढ़ लेने के बाद वह उनसे प्रभावित हुआ है या उसने कोई पूर्वाग्रह पाला है या वह मामले से जुड़े किसी व्यक्ति को जानता है? यह सनक भरा तरीका था। ऐसा मुझे लगा क्योंकि नब्बे प्रतिशत प्रेस मेरे खिलाफ चौदह महीने से विरोध का माहौल बनाने में लगी हुई थी। संभावित जूरर से प्रश्न पूछने में लगभग आधा घंटा लगता था और इस अवधि के बीच वादी और प्रतिवादी, दोनों अटार्नी अपने जांच कर्ताओं को उसके बारे में जानकारी जुटाने के लिए भेजते थे। जैसे ही प्रत्येक संभावित जूरर को बुलाया जाता था गिस्लर नोट्स बनाते और उन्हें अपने जांच कर्ताओं के हाथ में सरका देते और वे तुरंत गायब हो जाते। दस मिनट बाद जांच कर्ता वापिस आता और सूचना से लैस पर्ची गिस्लर के हाथ में थमा देता: 'जो डोग्स, हाबर डाशरी स्टोअर्स में क्लर्क, पत्नी, दो बच्चे, कभी सिनेमा देखने नहीं जाता।' 'हम उसे फिलहाल के लिए रह लेंगे' गिस्लर फुसफुसाए और इस तरह से चयन चलता रहता, प्रत्येक पक्ष जूरी के सदस्यों को ठुकरा देता या स्वीकार कर लेता, फेडरल अटार्नी अपने जांच कर्ताओं के साथ फुसफुसा कर सलाह लेता: बीच बीच में टिप्पी ग्रे अपनी सामान्य मुस्कुराहट के साथ मेरी तरफ देख लेते।

जब जूरी के आठ सदस्य चुन लिए गये तो जूरी बॉक्स में एक महिला ने प्रवेश किया। गिस्लर ने कहा,'मैं इसे पसन्द नहीं करता।' वे दोहराते रहे, 'मैं इसे पसन्द नहीं करता। इस औरत में कुछ ऐसा है जो मुझे पसन्द नहीं है।' जिस वक्त उस महिला से पूछताछ की जा रही थी तो गिस्लर के जांच कर्ता ने उन्हें एक पर्ची थमाई। 'मैंने ऐसा ही सोचा था।' गिस्लर पर्ची पढ़ कर फुसफुसाए। वह महिला लॉस एंजेल्स टाइम्स में रिपोर्टर रह चुकी थी। 'हमें इससे पीछा छुड़ाना ही होगा। इसके अलावा दूसरे पक्ष ने उसे कितनी जल्दी स्वीकार कर लिया है।' मैंने उस महिला का चेहरा पढ़ने की कोशिश की लेकिन मैं उसे बहुत अच्छी तरह से नहीं देख पाया इसलिए मैंने अपना चश्मा निकालने की कोशिश की। गिस्लर ने तुरंत मेरी बांह थाम ली। 'अपना चश्मा मत लगाओ।' वे फुसफुसाए। मुझे ऐसा आभास हुआ कि वह अपने ख्यालों में खोयी हुई थी लेकिन मेरे चश्मे के बिना सब कुछ धुंधला था। गिस्लर ने कहा,'दुर्भाग्य से हमारे पास दो ही आपत्तियां रह गयी हैं इसलिए फिलहाल यही बेहतर रहेगा कि हम उसे रख लें।' लेकिन चूंकि चयन प्रक्रिया चलती रही इसलिए उन्हें अपने दो अंतिम आपत्तियां ऐसे दो लोगों पर इस्तेमाल करनी पड़ी जो स्पष्ट रूप से मेरे खिलाफ पूर्वाग्रही थे और उन्हें मजबूरन महिला पत्रकार को लेना ही पड़ा।

दोनों अटार्नियों की कानूनी बहसबाजी सुनने के बाद मुझे ऐसा लगा कि वे दोनों कोई खेल खेल रहे हैं और उसमें मेरा कुछ लेना देना नहीं हैं। आरोपों के वाहियात होने के बावजूद मेरे दिमाग के पिछले हिस्से में यह संभावना कुलबुला रही थी कि मुझे शायद सूली पर चढ़ा दिया जायेगा। लेकिन मैं इसके बारे में कभी पूरी तौर पर यकीन नहीं कर पाया और अक्सर मुझे मेरे कैरियर के भविष्य के बारे में ख्याल आ जाता लेकिन अब सब कुछ हंगामों में खो चुका था और कुछ भी साफ नहीं था। मैंने इन सारी बातों को दिमाग से सरका दिया। मैं एक वक्त में एक ही बात सोच पा रहा था।

जैसा कि सारी मुसीबतों में होता है, व्यक्ति इसके बारे में लगातार गंभीर नहीं हो सकता। मुझे याद है कि एक बार अदालत किसी कानूनी मुद्दे पर चर्चा करने के लिए रुकी हुई थी। जूरी के सदस्य जा चुके थे और अटार्नी तथा न्यायाधीश अपने भीतर वाले कक्ष में जा चुके थे। दर्शक, फोटोग्राफर और मैं ही अदालत के कमरे में रह गये थे। फोटोग्राफर इस बात की ताक में था कि मुझे जरा हटकर किसी पोज़ में पकड़ ले। जैसे ही मैंने पढ़ने के लिए अपना चश्मा निकाला, उसने अपना कैमरा उठा लिया, मैंने तुरंत अपना चश्मा उतार लिया। यह देख कर अदालत के कमरे में बाकी बचे लोगों में हँसी की लहर फैल गयी। जब उसने अपना कैमरा नीचे कर लिया तो मैंने दोबारा चश्मा पहन लिया। इसके बाद तो यह चूहे बिल्ली का खेल हो गया जो बहुत अच्छे मूड में खेला जा रहा था। वह कैमरा ऊपर करता और मैं चश्मा उतार देता। दर्शक इस बात का मज़ा ले रहे थे। जब अदालत फिर से जुटी तो निश्चय ही मैंने अपने चश्मा उतार दिया और अपनी गंभीर मुद्रा बनाकर बैठ गया।

ट्रायल कई दिन तक चलता रहा। चूंकि यह संघीय मुकदमा था, इसलिए जॉन बैरी के मित्र मिस्टर पॉल गेट्टी को मज़बूरन गवाह के रूप में आना पड़ा। उसके साथ ही दो युवा जर्मन और अन्य लोग भी आए। पॉल गेट्टी को अतीत में जॉन बेरी के साथ अपने दोस्ती स्वीकार करनी पड़ी और यह भी मानना पड़ा कि उन्होंने उसे पैसे दिए थे। लेकिन जो बात महत्त्वपूर्ण थी, वह वे पत्र थे जो उसने मुझे सारी तकलीफों के लिए मुझसे माफी मांगते हुए और मेरी दयालुता तथा उदारता के लिए मुझे धन्यवाद देते हुए लिखे थे। हालांकि गिस्लर ने इन पत्रों को साक्ष्य के रूप में पेश किए जाने की कोशिश की लेकिन अदालत ने इस पर आपत्ति की। लेकिन मुझे नहीं लगता कि गिस्लर ने इसके लिए ज्यादा जोर दिया होगा।

ट्रायल में यह साक्ष्य सामने आया कि मेरे घर में घुसने से पहले वाली रातों में से किसी एक रात वह एक युवा जर्मन के अपार्टमेंट में वास्तव में सारी रात सोयी थी और उस जर्मन को गवाहों के कटघरे में इस बात को स्वीकार करना पड़ा।

कमीनगी भरे इन सारे तथ्यों के केंद्रों में होने का मतलब ऐसा ही था मानो आपको सार्वजनिक स्टॉक में डाल दिया गया हो। लेकिन जैसे ही मैं अदालत का कमरा छोड़ता, मैं सब कुछ भुला देता और उसके बाद ऊना के साथ एकांत में डिनर लेने के बाद मैं थकान से चूर होकर बिस्तर पर जा लेटता।

ट्रायल के तनाव और चिंता के अलावा एक और बात यह थी कि सुबह सात बजे उठने की बोरियत भरी रस्म निभानी पड़ती और उसके बाद नाश्ता करते ही तुरंत निकलना पड़ता क्योंकि लॉस एंजेल्स के टैफिक में से एक घंटे की ड्राइव करनी होती ताकि अदालत के खुलने से ठीक दस मिनट पहले वहां पर पहुंच सकें।

आखिर ट्रायल समाप्त हुआ। प्रत्येक अटार्नी इस बात पर सहमत हुआ कि वह ढाई घंटे में अपनी बात कहेगा। मुझे इस बात का रत्ती भर भी ख्याल नहीं था कि वे इतने लम्बे समय तक क्या बात करेंगे। मेरे लिए यह सब कुछ हथेली की लकीरों की तरह साफ था: सरकार का केस गिर चुका था और बेशक अगर मुझे सभी आरोपों का दोषी पाया जाता तो बीस बरस की सजा भुगतने की संभावना कभी भी मेरे दिमाग में नहीं आयी। मेरे ख्याल से न्यायाधीश द्वारा मामले का सार संक्षेप शायद कम अस्पष्ट होता। मैं यह देखना चाहता था कि इसका टाइम्स वाली महिला पर क्या असर होता है। लेकिन उसका चेहरा दूसरी तरफ था। जिस वक्त जूरी को विचार विमर्श के लिए बाहर भेजा गया, वह बिना दायें बायें देखे अदालत से बाहर चली गयी।

जिस वक्त हम अदालत के कमरे से बाहर निकले, गिस्लर हौले से मेरे कानों में फुसफसाये,'आज हम तब तक इमारत से बाहर जा नहीं जा सकते जब तक फैसला सुना नहीं दिया जाता। लेकिन,' उन्होंने आशावादी तरीके से कहा,'हम बाहर रेलिंग पर बैठ कर थोड़ी देर धूप सेंक सकते हैं।' इस संक्षिप्त सूचना ने मुझमें यह अहसास भर दिया कि पापपूर्ण सर्व सत्ता अपना फंदा मेरे गले के चारों ओर कस रही है। इससे मुझे एक पल के लिए याद आया कि मैं कानून की संपत्ति हूं।

अब डेढ़ बजने को था और मैं हैरान हो रहा था कि बहुत होगा तो फैसला बीस मिनट के अंदर आ जाना चाहिये। इसलिए, मैंने सोचा कि ऊना को फोन करने से पहले मैं इंतज़ार कर लेता हूं लेकिन एक और घंटा बीत गया। मैंने उसे फोन करके बताया कि जूरी अभी भी बाहर है और जैसे ही मैं अदालत का फैसला सुनूंगा, उसे खबर कर दूंगा।

एक और घंटा बीत चुका था और अभी तक फैसला नहीं हुआ था! किस वजह से देर हो रही थी? इसमें दस मिनट से ज्यादा नहीं लगना चाहिए था। उन्हें अपराधी नहीं के फैसले पर ही तो पहुंचना था। इस बीच गिस्लर और मैं बाहर रेलिंग पर बैठे रहे। हम दोनों में से कोई भी इस बात पर टिप्पणी नहीं कर रहा था कि देरी क्यों हो रही है। तभी गिस्लर ने मजबूरन अपनी घड़ी देखी। उन्होंने चलताऊ ढंग से कहा,'चार बज गये, मैं हैरान हूं, उन्हें देर क्यों हो रही है?' इससे हम दोनों में शांत खुली बहस छिड़ गयी कि वे कौन से संभावित मुद्दे रहे होंगे जिनकी वजह से देर हुई होगी।

पौने पांच बजे इस आशय की घोषणा करने वाली घंटी बजी कि जूरी फैसले पर पहुंच गयी है। मेरा दिल उछलने लगा। जिस वक्त हम इमारत में प्रवेश कर रहे थे, गिस्लर जल्दी से फुसफुसाए,'कोई भी फैसला हो, अपनी भावनाएं मत दर्शाना।' जब हम जा रहे थे तो हमारे पास से वादी अटार्नी लपकते हुए सीढ़ियां चढ़ने लगे। वे उत्तेजित थे और उनकी सांस फूल रही थी। उनके पीछे पीछे खुशी से दमकते चेहरे लिए उनके सहायक दौड़ रहे थे। टिप्पी ग्रे सबसे आखिर में आए और जब वह हमारे पास से गुज़रे तो उन्होंने अपने कंधे से हमारी तरफ देखा और खींसें निपोरीं।

अदालत का कमरा जल्दी ही भर गया। चारों तरफ तनाव का माहौल हो गया। किसी वजह से मैं शांत बना हुआ था भले ही मेरा दिल उछल कर गले तक आ रहा था।

अदालत के क्लर्क ने तीन बार हथौड़ी बजायी जिस मतलब था, न्यायाधीश महोदय आ रहे है और हम सब खड़े हो गये। जब सभी वापिस बैठ गये तो जूरी ने प्रवेश किया और फोरमैन ने अदालत के क्लर्क को एक दस्तावेज सौंपा। गिस्लर सिर नीचे करके, कर अपने पैरों की तरफ देखते हुए बैठ गये। वे सांस दबा कर, नर्वस होकर बुदबुदा रहे थे: 'अगर इन्हें अपराधी घोषित कर दिया जाता है तो ये मेरी जानकारी में अब तक का न्याय का सबसे बड़ा गर्भपात होगा।' वे यही दोहराते रहे,'अगर इन्हें अपराधी घोषित कर दिया जाता है तो ये मेरी जानकारी में अब तक का न्याय का सबसे बड़ा गर्भपात होगा।'

अदालत के क्लर्क ने अब दस्तावेज पढ़ा। फिर तीन बार हथौड़ी बजायी। सघन सन्नाटे में उसने घोषणा की:

'चार्ल्स चैप्लिन, मामला नम्बर 337068 अपराध - पहला आरोप . . . -' इसके बाद लम्बा विराम - 'अपराधी नहीं!'

दर्शकों में अचानक चीख उभरी। फिर अचानक सन्नाटा पसर गया और लोग क्लर्क की बात पूरी होने के इंतज़ार करने लगे।

'दूसरे आरोप पर . . . - अपराधी नहीं!'

दर्शकों में हो हल्ला मच गया। मुझे नहीं मालूम था कि मेरे इतने सारे दोस्त हैं। कुछ लोग पार्टीशन की रेलिंग तोड़ कर आ गए और मुझे गले लगाने और चूमने लगे। मैंने टिप्पी ग्रे की एक झलक देखी। उनके चेहरे से मुस्कान जा चुकी थी और उनका अब चेहरा भावहीन था।

इसके बाद न्यायाधीश ने मुझसे कुछ शब्द कहे: 'मिस्टर चैप्लिन, अदालत में आपको मौजूद रहने की और ज़रूरत नहीं रहेगी। अब आप आज़ाद हैं।' तब उन्होंने अपनी बेंच से मुझसे हाथ मिलाया और मुझे बधाई दी। वादी अटार्नी ने भी मुझे बधाई दी। तब गिस्लर फुसफुसाए,'जाओ और सबसे हाथ मिला कर आओ।'

जब मैं जूरी के सदस्यों के पास पहुंचा तो उस महिला ने, जिस पर गिस्लर ने अविश्वास किया था, अपना हाथ बढ़ाया और तब मैंने पहली बार उसके चेहरे को नज़दीक से देखा। वह सुंदर, बुद्धिमता से दमकती और समझ रखने वाली महिला थी। जब हमने हाथ मिलाए, उसने मुस्कुराते हुए कहा, 'सब चलता है चार्ली, यह अभी भी आज़ाद देश है।'

मैं आने आप पर विश्वास कर नहीं पाया कि क्या बोलूं: उसके शब्दों ने मुझे तोड़कर रख दिया था। मैं सिर्फ सिर हिलाकर मुस्कुरा ही सका। उसने अपनी बात जारी रखी,'मैं जूरी कक्ष की खिड़की से आपको चहल कदमी करते हुए देख रही थी, इसलिए मैं आपको बताना चाहती थी कि चिंता न करें। सिर्फ एक ही व्यक्ति की वज़ह से हमें देर हो गयी, नहीं तो हम दस मिनट में फैसले पर पहुंच जाते।'

बहुत मुश्किल था उसके शब्दों पर न रोना लेकिन मैं सिर्फ मुस्कुरा भर दिया और उसका आभार माना। इसके बाद मैं धन्यवाद देने के लिए दूसरों की तरफ मुड़ गया। सब लोगों ने खुले दिल से हाथ मिलाए, लेकिन एक ही महिला ने अपने चेहरे पर नफ़रत पोत रखी थी। जब मैं उसके आगे से जाने वाला था तो फोरमैन की आवाज सुनाई दी: 'छोड़ो भी मोहतरमा, अपने चेहरे पर हँसी लाओ और हाथ मिलाओ!' हिचकिचाते हुए उसने मिलाया और मैंने ठंडे तरीके से आभार माना।

ऊना, जिसे चार महीने का गर्भ था, घर पर लॉन में बैठे हुई थी। वह अकेली थी और जिस वक्त उसने रेडियो पर खबर सुनी, वह बेहोश हो गयी।

उस शाम हमने, सिर्फ ऊना और मैंने चुपचाप घर पर ही खाना खाया। हम कोई अखबार, कोई टेलीफोन कॉल नहीं चाहते थे। मैं किसी से बात करना या किसी को देखना नहीं चाहता था। मैं खाली, घायल और अपने चरित्र से वंचित किया गया महसूस कर रहा था। यहां तक कि घरेलू स्टाफ की मौजूदगी भी परेशान कर रही थी। डिनर के बाद ऊना ने एक तेज जिन और टॉनिक बनाया और हम आग के पास बैठ गए और तब मैंने उसे फैसले में देरी की वजह बतायी और उस औरत के बारे में बताया जो यह कह रही थी कि यह अभी भी आज़ाद देश है। कई महीनों के तनाव के बाद यह एन्टी क्लायमेक्स हुआ था। उस रात मैं अपने बिस्तर में इस सुखद ख्याल के साथ सोया कि अगली सुबह मुझे अदालत में हाज़री बजाने के लिए जल्दी नहीं उठना है।

एक या दो दिन बाद लायन फ्यूचवेंगर ने मज़ाक में कहा,'आप थिएटर के एक अकेले ऐसे कलाकार हैं जिनका नाम अमेरिका के इतिहास के पन्नों पर इसलिए लिखा जाएगा कि आपने पूरे राष्ट्र के राजनैतिक विरोध का तूफान खड़ा कर दिया है।

और अब पितृत्व के मामले में, जिसके बारे में मैं मान कर चल रहा था कि खून की जांच के साथ निपट जाएगा, एक बार फिर उठ खड़ा हुआ। स्थानीय राजनीति से प्रभावित हो कर एक और वकील मामले को चतुराई भरा मोड़ दे कर फिर से खोलने में सफल हो गया था। बच्ची के संरक्षण को मां से अदालत के पक्ष में हस्तांतरित करने की उसकी चालबाजी भरी तरकीब से मां के करार का उल्लंघन नहीं हुआ था और वह 25000 डॉलर अपने पास रख सकती थी और अब अदालत संरक्षक के रूप में बच्ची के लालन पालन के लिए मुझ पर मामला दायर कर सकती थी।

पहले ट्रायल में जूरी इस बात से असहमत रही। मेरे वकील जो ये मानकर चल रहे थे कि ये तो जीता जिताया है ये देख कर बहुत निराश हुए। लेकिन दूसरे ट्रायल में खून की जांच के बावजूद, जिसे अब तक पितृत्व के मामले में कैलिफोर्निया स्टेट लॉ द्वारा सकारात्मक सबूत के तौर पर स्वीकार किया जा चुका था, फैसला मेरे विरोध में पलट दिया गया।

एक बात जो ऊना और मैं चाहते थे, ये थी कि हम कैलिफोर्निया से निकल चलें। हमारी शादी को एक बरस हो गया था और तब से हम चक्की में पिस रहे थे और अब हमें आराम की ज़रूरत थी। इसलिए हमने अपनी छोटी काली बिल्ली को साथ लिया और न्यू यार्क जाने वाली गाड़ी में सवार हो गये। वहां से हम न्यैक गये। वहां पर हमने एक मकान किराये पर ले लिया। ये सारी चीज़ों से बहुत दूर था। चारों तरफ पत्थर थे, बंजर ज़मीन थी, इसके बावजूद इसका अपना एक खास आकर्षण था। ये छोटा सा प्यारा सा,1780 में बना हुआ घर था और किराये की एक खास बात ये थी कि साथ में बहुत ही सहानुभूति रखने वाला हाउसकीपर था। वह अद्भुत रसोइया भी था। घर के साथ ही एक प्यारा सा बूढ़ा काला कुत्ता भी मिला जो हमारे साथ महिला के साथी के तरह लग लिया। वह नाश्ते के समय पर नियमित रूप से पोर्च में हाज़िर हो जाता और शराफत से पूंछ हिलाता रहता। फिर बैठ जाता और जब तक हम नाश्ता करते रहते, इंतज़ार करता। जिस वक्त हमारी नन्हीं काली बिल्ली ने उसे देखा तो उस पर गुर्रायी और उस पर थूका लेकिन उसने अपनी थूथनी फर्श पर टिका दी मानो मिलजुल कर रहने के लिए तैयार हो।

उन दिनों न्यैक रमणीय हुआ करता था। हालांकि वहां पर अकेलापन था। न कोई हमसे मिलने आता और न ही हम किसी से मिलने जाते। ये ठीक भी था क्योंकि मैं अब तक ट्रायल की परेशानियों से उबरा नहीं था।

हालांकि इस मशक्कत ने मेरी सृजनात्मकता के पर कतर डाले थे, इसके बावजूद मैं मोन्स्योर वेरडाऊ का काफी काम कर चुका था। अब इसे पूरा करने की मेरी इच्छा होने लगी थी।

हमने पूरब में कम से कम छह महीने तक रहने के बारे में सोचा था। ऊना अपने बच्चे को वहीं जन्म देने वाली थी। लेकिन मैं न्यैक में काम नहीं कर सकता था, इसलिए पांच सप्ताह के बाद हम कैलिफोर्निया लौट आए। शादी के तुरंत बाद ही ऊना ने इच्छा व्यक्त की थी कि फिल्मों या मंच पर अभिनेत्री बनने की उसकी कोई चाह नहीं है। इस खबर से मुझे खुशी हुई। इससे कम से कम मेरी एक बीवी तो होगी और वह कैरियर की चाह रखने वाली लड़की नहीं होगी। तभी मैंने शैडो एंड सब्सटेंस फिल्म छोड़ दी और मोन्स्योर वेरडाऊ पर काम करना शुरू कर दिया। लेकिन तभी सरकार ने बड़ी बेरहमी से खलल डाला। मैं अक्सर सोचा करता हूं कि फिल्मों ने एक बेहतरीन कॉमेडियन को खो दिया क्योंकि ऊना में बहुत ही शानदार हास्य बोध था।

मुझे याद है ट्रायल से एकदम पहले ऊना और मैं बेवरली हिल्स में उसका श्रृंगारदान ठीक कराने के लिए एक आभूषण की दुकान में गये। इंतज़ार करते समय हमने कुछ ब्रेसलेट्स देखने शुरू किये। एक बहुत ही खूबसूरत हीरों और रूबी वाला सेट हमें पसंद आया लेकिन ऊना को लगा कि उसकी कीमत बहुत ज्यादा है, इसलिए मैंने ज्वेलर को बताया कि हम इसके बारे में बाद में सोचेंगे और हम दुकान से चले आये। जैसे ही हम कार में पहुंचे, मैंने नर्वस होकर कहा,'जल्दी करो, फटाफट कार चलाओ।' तभी मैंने अपनी जेब में हाथ डाला और सावधानी से वही ब्रेसलेट बाहर निकाला जिसे उसने पसंद किया था। 'जब हम दूसरे ब्रेसलेट देख रहे थे तो ये ब्रेसलेट मैंने चुपके से जेब में सरका लिया था।' मैंने बताया।

ऊना का चेहरा सफेद पड़ गया,'नहीं, आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था।' वह गाड़ी चलाती रही। तब उसने एक गली में गाड़ी मोड़ी, ब्रेक लगाए और गाड़ी रोक दी। 'हमें इस पर सोचना चाहिए,' उसने कहा और दोहराया,'आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था।'

'ठीक है, मैं इसे वापिस तो नहीं कर सकता' मैंने कहा। लेकिन ये नाटक मैं ज्यादा देर तक नहीं चला पाया। मुझे हँसी आ गयी और मैंने उसे इस मज़ाक के बारे में बताया कि जब वह दूसरी चीज़ें देख रही थी तो मैं सुनार को एक तरफ ले गया था और ब्रेसलेट खरीद लिया था।

मैंने हँसते हुए कहा,'और तुम सोच रही थीं कि मैंने इसे चुराया है।' अपराध के ऊपर एक और अपराध करने के लिए तैयार?'

'दरअसल, मैं नहीं चाहती थी कि आप और मुसीबतों में फंसें।' कहा उसने।

अट्ठाइस

ट्रायल के दौरान हम कई प्रिय दोस्तों से घिरे हुए थे। सबके सब वफादार और सहानुभूति रखने वाले। सालका वीरटेल, क्लिफोर्ड, ओडेत्स दम्पत्ति, हेन्स एस्लर दम्पत्ति, फ्यूशवेंगर दम्पत्ति और कई अन्य।

सालका वीरटेल सांता मोनिका में अपने घर पर बहुत बढ़िया खाने की पार्टियां दिया करती थीं। उनके घर पर कला और साहित्य, दोनों से जुड़े लोग आते। टॉमस मान, ब्रटोल्ट ब्रेख्त, शोनबर्ग, हेन्स एस्लर, लायन फ्यूशवेंगर, स्टीफेन स्पेंडर, सिरियल कोनोले और अन्य कई विभूतियां वहां आतीं। सालका जहां कहीं रहती थीं वहीं पर अपनी खूबसूरत दुनिया बसा लेती थी।

हेन्स एस्लर दम्पत्ति के यहां हमारी मुलाकात ब्रेटोल्ट ब्रेख्त के साथ होती। वे घुटे हुए सिर के साथ बेहद ताकतवर लगते और जहां तक मुझे याद पड़ता है, वे हमेशा सिगार पीते रहते थे। कई महीने बाद मैंने उन्हें मोन्स्योर वेरडाऊ की पटकथा दिखायी थी। उन्होंने इसे पूरा पढ़ा था। उनकी एक ही टिप्पणी थी: 'ओह, आप चीनी शैली में लिखते हैं।'

मैंने लायन फ्यूशवेंगर से पूछा कि वे अमेरिका में राजनैतिक स्थिति के बारे में क्या सोचते हैं। उन्होंने मज़ाक में कहा: 'इस तथ्य में कोई खास बात हो सकती है कि जब मैंने बर्लिन में अपना नया मकान बनाना पूरा किया तो हिटलर सत्ता में आया और मुझे बाहर निकलना पड़ा। जब मैंने पेरिस में अपने फ्लैट की साज सज्जा पूरी की तो नाज़ी चले आये और मैं एक बार फिर वहां से निकला। और अब मैंने अमेरिका में हाल ही में सांता मोनिका में घर खरीदा है।' उन्होंने कंधे उचकाए और एक खास ढंग से मुस्कुराए।

अक्सर हम ऑल्डस हक्सले दम्पत्ति से मिलते। उस समय वे रहस्यवाद के झूले में बहुत अधिक हिचकोले खा रहे थे। मैं उन्हें बीस पच्चीस बरस के सनकी युवा के रूप में ज्यादा पसंद करता था।

एक दिन हमारे मित्र फ्रांक टेलर ने फोन करके बताया कि डायलैंड थॉमस, वेल्श कवि हमसे मिलना चाहेंगे। हमने कहा कि हमें बहुत खुशी होगी। 'दरअसल' फ्रांक ने हिचकिचाते हुए कहा,'अगर वे नशे में न हुए तो मैं उन्हें लेता आऊंगा।' बाद में उस शाम जब घंटी बजी तो मैंने दरवाजा खोला और डायलैन थॉमस सीधे अंदर गिर पड़े। अगर ये नशे में न होना होता है तो तब उनकी हालत क्या होती होगी जब वे सचमुच पिये हुए होते हों। दो एक दिन बाद वे डिनर के लिए आए और बेहतर तरीके से पेश आए। उन्होंने अपनी गहरी आवाज़ में अपनी कोई कविता पढ़ कर सुनायी। मुझे कविता की छवि तो याद नहीं लेकिन एक शब्द 'सेलोफेन' उनकी जादुई आवाज़ से सूर्य की किरणों की तरह परावर्तित हो रहा था।

हमारे मित्रों में थिओडोर ड्रेसर भी थे। मैं उनका बहुत बड़ा प्रशंसक था। वे और उनकी प्यारी सी पत्नी हेलन अक्सर हमारे घर खाना खाते। हालांकि उनके भीतर हमेशा नाराज़गी की भट्टी जलती रहती, वे बहुत विनम्र और दयालु आदमी थे। उनकी मृत्यु पर नाटककार जॉन हॉवर्ड लावसन, जिन्होंने अंतिम संस्कार के समय शोक पत्र पढ़ा था, ने मुझसे पूछा था कि क्या मैं उनकी अर्थी को आगे से कंधा दूंगा और बाद में शोक सभा में ड्रेसर द्वारा लिखी गयी कविता पढ़ूंगा। मैंने ये दोनों काम किये थे।

हालांकि बीच बीच में मेरे कैरियर को लेकर शक के मौके आते लेकिन मैं अपने इस विश्वास से कभी नहीं डिगा कि एक अच्छी कॉमेडी मेरी सारी तकलीफों को सुलझा देगी। इसी दृढ़ निश्चय वाली भावना के साथ मैंने मोन्स्योर वेरडाऊ फिल्म पूरी की। इसमें दो साल की मेहनत लग गयी क्योंकि इसके लिए प्रेरणा पाना मुश्किल काम था, लेकिन इसकी वास्तविक शूटिंग बारह हफ्ते में ही पूरी हो गयी। ये मेरे लिए रिकार्ड समय था। तब मैंने इसकी पटकथा सेंसरशिप के लिए ब्रीन ऑफिस में भेजी। जल्दी ही मुझे उनकी तरफ से ख़त मिला कि इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जा रहा है।

ब्रीन ऑफिस लीज़न ऑफ डीसेंसी की एक शाखा है जो मोशन पिक्चर एसोसिएशन द्वारा स्वघोषित सेंसरशिप करती है। मैं सहमत हूं कि सेंसरशिप ज़रूरी है लेकिन इसे लागू करना मुश्किल होता है। मुझे सिर्फ यही सुझाव देना है कि इसके नियम लचीले होने चाहिए न कि पत्थर की लकीर और इस पर विषय वस्तु के आधार पर निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए बल्कि अच्छी रुचि, बौद्धिकता और संवेदनशील निर्वाह पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

नैतिक दृष्टि से देखें तो मेरा विचार है कि कामुक सैक्स दृश्य की तरह शारीरिक हिंसा और झूठे दर्शन भी उतनी ही हानि पहुंचाते हैं। बर्नार्ड शॉ ने कहा था कि किसी खलनायक के जबड़े पर घूंसा मारना ज़िंदगी की समस्याओं को सुलझाने का बहुत आसान तरीका है।

मोन्स्योर वेरडाऊ की सेंसरशिप पर बहस करने से पहले यह ज़रूरी है कि कथा की ख़ास ख़ास बातों का उल्लेख कर दिया जाए। मोन्स्योर वेरडाऊ एक स्‍त्रीघाती नायक, नामालूम सा बैंक क्लर्क है जिसकी नौकरी मंदी के कारण चली गयी है। वह एक योजना बनाता है और बूढ़ी कुवांरी औरतों के साथ शादी रचा के उनके धन को लूट कर उनकी हत्या कर देता है। उसकी वैध पत्नी अपंग है जो गांव में अपने छोटे बेटे के साथ रहती है। लेकिन उसे अपने पति की आपराधिक हरकतों का पता नहीं है। किसी शिकार की हत्या कर देने के बाद वह वैसे ही घर लौटता है जैसे कोई बुर्जुआ पति दिन भर की मेहनत करने के बाद घर लौटता है। वह अच्छाई और बुराई का विरोधाभास है: एक ऐसा व्यक्ति जो अपनी गुलाब की झाड़ियां संवारता है, इल्ली पर पैर रखने से भी बचता है जबकि उसके बगीचे के आखिर में उसकी एक शिकार को भट्टी में भूना जा रहा है। इस कहानी में क्रूर हास्य, कड़वा व्यंग्य और सामाजिक आलोचना है।

सेंसरबोर्ड ने मुझे एक लंबा पत्र भेजा और बताया कि वे फिल्म को क्यों पूरी तरह से बैन कर रहे हैं। मैं यहां पर उनके पत्र का ये हिस्सा दे रहा हूं:

हम उन तत्वों की बात करेंगे जो अपनी संकल्पना में और महत्ता में असामाजिक लगते हैं। कहानी में ऐसे अंश हैं जहां वेरडाऊ सिस्टम पर उंगली उठाता है और आज के दिन के सामाजिक ढांचे पर आरोप लगाता करता है। इसके बजाये, हम आपका ध्यान उस ओर दिलाना चाहते हैं जो कि और भी अधिक खतरनाक है और संहिता के अंतर्गत बाकायादा न्याय विचार किया जाना मांगता है।

वेरडाऊ का यह बनावटी दावा कि उसकी ज्यादतियों की सीमा से दंग रह जाना बेवकूफी है, कि वे युद्ध के कानूनी आधार पर बड़े पैमाने पर कत्लेआम की तुलना में तो कत्लों की कॉमेडी मात्र हैं जिन्हें हम सिस्टम द्वारा सोने के पतरे मढ़ कर गुणगान करते हैं। इस बात पर किसी बहस में उलझे बिना कि युद्ध बड़े पैमाने पर कत्लेआम या न्यायोचित रूप से मारना है या नहीं, इस बहस में उलझे बिना ये तथ्य अभी भी अपनी जगह पर है कि वेरडाऊ अपने भाषणों के दौरान अपने अपराधों की नैतिक गुणवत्ता का मूल्यांकन करने की गम्भीर कोशिश करता है।

इस कहानी को स्वीकार न किये जाने के पीछे दूसरा मूल कारण ये है कि हम अधिक संक्षेप में अपनी बात कर सकते हैं। ये इस तथ्य में निहित है कि ये बहुत कहें तो ये एक ऐसे विश्वास से भरे आदमी की कहानी है जो कई औरतों को अपने प्रेम जाल में फंसाता है ताकि उनकी दौलत उसके कब्जे में आ जाये और इसके लिए वह उन्हें एक के बाद एक नकली शादियों के झांसे में फंसाता चलता है। कहानी के इस अंश में अवैध संबंधों का कुरुचिपूर्ण मज़ा लिया गया है जो कि हमारे निर्णय के अनुसार उचित नहीं है।

इस स्थल तक आ कर उन्होंने अपनी आपत्तियों की एक लम्बी फेहरिस्त दी थी। उनके कुछ नमूने देने से पहले मैं अपनी पटकथा में से वे कुछ पन्ने यहां डालना चाहूंगा जो लिडिया, वेरडाऊ की अवैध पत्नियों में से एक है, से संबंध रखते हैं। वह एक बूढ़ी औरत है जिसका वह आज रात कत्ल करने वाला है।

लीडिया कम रौशनी वाले हॉल में आती है और बत्ती बंद करती है और अपने बेडरूम में चली जाती हैं जहां से एक बत्ती जलती है और रौशनी की एक फांक अंधियारे गलियारे में फैल जाती है। अब वेरडाऊ धीरे धीरे आता है। हॉल के आखिर में एक बड़ी सी खिड़की है जिसमें से पूर्णिमा का चांद चमक रहा है। मोहित सा वह उस तरफ बढ़ता है।

वेरडाऊ : (दबी आवाज़ में) कितना सुंदर .. ये पीला, एंडिमियन· का समय ...

लिडिया की आवाज़: (बेडरूम में से) आप किसके बारे में बात कर रहे हैं?

वेरडाऊ: (तंद्रा में) एंडिमियन माय डीयर, . .. चांद द्वारा मोहित एक खूबसूरत नौजवान।

लीडिया की आवाज़: ठीक है, भूल जाओ उसके बारे में और बिस्तर पर चले आओ।

वेरडाऊ: हां, माय डीयर, हमारे पैर फूलों से नाज़ुक थे।

वह लिडिया के बेडरूम में चला जाता है और हॉल को अर्ध अंधेरे में छोड़ जाता है। वहां पर चांद की रौशनी ही रह जाती है।

वेरडाऊ की आवाज: (लीडिया के बेडरूम में से) चांद की तरफ देखो ज़रा, मैंने आज तक इसे इतना चमकीला नहीं देखा। बदजात चंद्रमा।

लीडिया की आवाज़: बदजात चंद्रमा?? आप भी कितने मूरख हैं? हा हा हा बदजात चंद्रमा!!

संगीत की लहरियां बहुत ऊंचे सुर तक ऊपर उठती हैं और तब दृश्य डिजाल्व हो कर सुबह में बदल जाता है। ये वही हॉल वाला रास्ता है लेकिन अब वहां पर सूर्य की रौशनी आ रही है। वेरडाऊ लीडिया के बेडरूम में से गुनगुनाता हुआ आता है।

इस दृश्य के बारे में सेंसरबोर्ड की आपत्ति इस तरह से थी:

कृपया लीडिया के इस वाक्यांश को बदलें: 'उसे भूल जाओ और बिस्तर में आ जाओ।' इसके बजाये कहें,'सो जाओ।' हम ये मान कर चल रहे हैं कि ये पूरा का पूरा दृश्य इस तरह से फिल्माया जायेगा कि कहीं भी ये आभास न दे कि वेरडाऊ और लीडिया अब शादी के बाद वाले आनंद में उतरने वाले हैं। दोबारा आये शब्द 'बदजात चंद्रमा' को भी हटा दें। अगली सुबह वेरडाऊ के लीडिया के बेडरूम से गुनगुनाते हुए आने के दृश्य को भी हटा दें।

अगली आपत्ति उस संवाद को ले कर थी जो वेरडाऊ उस लड़की से करता है जिससे वह देर रात को मिलता है। उनका कहना था कि लड़की का चरित्र जिस तरह से बताया गया है, उससे साफ-साफ लगता है कि वह लड़की वेश्या है। इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

स्वाभाविक है कि मेरी कहानी में लड़की एक सड़क छाप है और ये सोचना ही वाहियात होगा कि वह वेरडाऊ के अपार्टमेंट में उसकी पेंटिंग देखने आती है। लेकिन इस मामले में वह उसे इसलिए ले कर आता है ताकि वह उस पर वह तीखा ज़हर आजमा सके जिसका कोई सबूत बाकी नहीं रहता। लेकिन वह उसके अपार्टमेंट से जाने के एक ही घंटे के बाद वह मर जायेगी। ये दृश्य कुछ भी हो सकता है लेकिन कम से कम अश्लीलता या कामुकता जगाने वाला तो कत्तई नहीं है।

मेरी पटकथा में ये इस तरह से है:

वेरडाऊ: तुम्हें बिल्लियां अच्छी लगती हैं ऐय?

लड़की: ऐसी तो कोई खास बात नहीं है, लेकिन बाहर बहुत ठंड है और सब गीला है। मुझे नहीं लगता कि आपके पास इसे देने के लिए थोड़ा सा दूध होगा?

वेरडाऊ: इसके विपरीत, दूध है मेरे पास। देखो तो, हालात इतने खराब नहीं हैं जितने लगते हैं।

लड़की: क्या मैं इतनी निराशावादी लगती हूं?

वेरडाऊ: लगती तो हो लेकिन मुझे नहीं लगता कि तुम निराशावादी हो।

लड़की: क्यों?

वेरडाऊ: रात को इस तरह से बाहर निकलना, इसके लिए तो तुम्हें आशावादी होना ही चाहिये।

लड़की: मैं आशावादी छोड़ कर सब कुछ हूं।

वेरडाऊ: इसके खिलाफ हुंअ!!

लड़की: (ताना मारते हुए) पता लगाने का तो आप में गज़ब का गुण है!!

वेरडाऊ: तुम इस धंधे में कब से हो?

लड़की: तीन महीने से।

वेरडाऊ: मुझे यकीन नहीं होता!

लड़की: क्यों?

वेरडाऊ: तुम जैसी आकर्षक लड़की को कुछ और करना चाहिये था।

लड़की:(ताना मारते हुए) धन्यवाद।

वेरडाऊ: अब मुझे सच-सच बता दो। तुम अभी-अभी या तो अस्पताल से आयी हो या जेल से। बोलो कहां से आयी हो?

लड़की: (अच्छे मूड में लेकिन चुनौती देते हुए) आप ये किस लिये जानना चाहते हैं?

वरडाउ: क्योंकि मैं तुम्हारी मदद करना चाहता हूं।

लड़की: मानवतावादी हुं!!

वेरडाऊ: (विनम्रता से) एक दम सही ... और मैं बदले में कुछ भी नहीं मांगता।

लड़की: (उसे परखते हुए) क्या है ये? साल्वेशन आर्मी?

वेरडाऊ: अच्छी बात है, अगर तुम इसी तरह से महसूस करती हो तो तुम अपनी राह पर जाने के लिए आज़ाद हो।

लड़की: (दो टूक) मैं अभी अभी जेल से छूट कर आ रही हूं।

वेरडाऊ: तुम्हें अंदर क्यों किया गया था?

लड़की: (कंधे उचकाती है) क्या फर्क पड़ता है? छोटी मोटी हेराफेरी। वे इसे यही कहते हैं। किराये के टाइपराइटर को गिरवी रख देना।

वेरडाऊ: ओ मेरी प्यारी लड़की। तुम्हें इससे बेहतर करने के लिए कुछ नहीं मिला क्या? कितनी सज़ा मिली तुम्हें इसके लिए?

लड़की: तीन महीने।

वेरडाऊ: तो इसका मतलब, ये तुम्हारा जेल से बाहर पहला दिन है?

लड़की : हां।

वेरडाऊ: भूख लगी है क्या?

(वह सिर हिलाती है और यूं ही मुस्कुराती है)

वेरडाऊ: अच्छी बात है। जब तक मैं अपनी पाक कला के हुनर का प्रदर्शन करूं, तुम एक काम करो। रसोई में मुझे कुछ चीजें थमा दो। आओ।

वे रसोई में चले जाते हैं। वह अंडों की बुर्जी बनाना शुरू करता है और खाने पीने की चीजें तश्तरी में रखने में लड़की की मदद करता है। लड़की तश्तरी ले कर बैठक में जाती है। जिस वक्त वह रसोई में से निकलती है, वह सतर्क हो कर उसे पीछे से देखता है, तब जल्दी से एक अल्मारी खोलता है, वहां से ज़हर निकालता है और रेड वाइन की एक बोतल में डालता है। तब बोतल का कार्क बंद करता है, दो गिलासों के साथ तश्तरी में रखता है और दूसरे कमरे में चला जाता है।

वेरडाऊ: मुझे नहीं पता कि ये खाना तुम्हारी खुराक के हिसाब से है या नहीं, अंडों की भुर्जी, टोस्ट और थोड़ी सी रेड वाइन?

लड़की: वाह शानदार!!

वेरडाऊ: मुझे लग रहा है कि तुम थकी हुई हो। इसलिए खाना खाने के तुरंत बाद मैं तुम्हें तुम्हारे होटल में छोड़ आऊंगा।

वह बोतल का कार्क खोलता है।

लड़की: (उसे ध्यान से देखते हुए): आप बहुत दयालु हैं। मैं समझ नहीं पा रही कि आप ये सब मेरे लिए क्यों कर रहे हैं?

वेरडाऊ: क्यों नहीं, (उसके गिलास में ज़हर डालते हुए) क्या थोड़ी सी दयालुता दुर्लभ हो गयी है आजकल?

लड़की: मुझे तो लगने लगा था, है ये दुर्लभ।

वह अपने गिलास में भी थोड़ी सी शराब डालने वाला है लेकिन बहाना बना देता है।

वेरडाऊ: ओह टोस्ट!

वह बोतल ले कर रसोई में गायब हो जाता है। वहां जा कर वह तेजी से उस बोतल की जगह पर दूसरी बोतल ले लेता है, टोस्ट जमाता है और वापिस कमरे की तरफ आता है। वह कमरे में आता है और टोस्ट रखता है। (चीयर्स) और वह बदली हुई बोतल में से अपने लिए गिलास भरता है।

लड़की: आप अजीब आदमी हैं!

वेरडाऊ: मैं, क्यों?

लड़की: मुझे नहीं पता।

वेरडाऊ: फिर भी, तुम्हें बहुत भूख लगी है इसलिए शुरू करो।

(जैसे ही वह खाना शुरू करती है, वह मेज पर पड़ी किताब देखता है।)

वेरडाऊ: क्या पढ़ रही हो तुम ?

लड़की: शॉपेनआवर!

वेरडाऊ: अच्छा लगता है तुम्हें?

लड़की: ठीक ठीक है!

वेरडाऊ: क्या तुमने आत्महत्या पर उनकी किताब ट्रिटाइस पढ़ी है?

लड़की: मुझे जमीं नहीं।

वेरडाऊ: (सम्मोहित सा) अगर अंत सरल होता तब भी नहीं? मान लो, उदाहरण के लिए, तुम सोने के लिए जाती हो, और मौत के ख्याल के बिना ही, अचानक सब कुछ थम जाता है। क्या तुम इसे इस घिसटती ज़िंदगी की तुलना में ज्यादा पसंद नहीं करोगी?

लड़की: मैं कह नहीं सकती।

वरडाउ: दरअसल, ये मौत का नज़रिया होता है जो डराता है।

लड़की: (ध्यान मग्न हो कर) मेरा तो ये ख्याल है कि अगर बिन जन्मे को भी ज़िदंगी के नज़रिये के बारे में पता हो तो वह भी उतना ही डरा हुआ होगा।

वेरडाऊ इस बात को स्वीकार करते हुए सिर हिलाता है और अपनी वाइन पीता है। लड़की अपनी ज़हरीली शराब उठाती है और उसे पीने ही वाली है कि रुक जाती है।

लड़की: (सोचते हुए) इसके बावजूद ज़िंदगी खूबसूरत है।

वेरडाऊ: क्या है खूबसूरत ज़िंदगी में?

लड़की: सब कुछ। वसंत की कोई सुबह, गर्मी की रात, संगीत, कला, प्यार।

वेरडाऊ :(हैरानी से) प्यार?

लड़की: (थोड़ी चुनौती देती सी) ये भी तो होता ही है।

वेरडाऊ: तुम्हें कैसे मालूम?

लड़की: मुझे प्यार हो गया था।

वेरडाऊ: मेरा मतलब है कि तुम किसी के शारीरिक आकर्षण में पड़ गयी थी?

लड़की (पहेलियां बुझाते हुए) आपको औरतें अच्छी लगती हैं! नहीं क्या?

वेरडाऊ: इसके विपरीत, मुझे औरतें अच्छी लगती हैं लेकिन मैं उनकी तारीफ नहीं करता।

लड़की: क्यों?

वेरडाऊ: वे ज़मीनी होती हैं, यथार्थवादी, शारीरिक तथ्यों का बोझ रहता है उन पर।

लड़की : (हिकारत से) क्या बेवकूफी है?

वेरडाऊ: जब कोई औरत किसी आदमी को धोखा देती है तो वह उसे छोड़ देती है। आदमी की अच्छाइयों और हैसियत के बावजूद वह उसके स्थान पर किसी दीन हीन आदमी को स्वीकार कर लेगी। अगर कोई दूसरा आदमी शारीरिक रूप से ज्यादा आकर्षक है।

लड़की: आप महिलाओं के बारे में कितना कम जानते हैं?

वेरडाऊ: तुम्हें हैरानी होगी?

लड़की: ये प्यार नहीं है!

वेरडाऊ: तो क्या है प्यार?

लड़की: देना, त्याग, वही भावना जो एक मां अपने बच्चे के लिए महसूस करती है।

वेरडाऊ: क्या तुमने इस तरीके से प्यार किया था?

लड़की: हां।

वेरडाऊ: किसे?

लड़की: अपने पति को।

वेरडाऊ: (हैरानी से) तुम शादीशुदा हो?

लड़की: मैं थी, जब मैं जेल में थी तब वह मर गया।

वेरडाऊ: ओह, तो ये बात है, मुझे उसके बारे में बताओ।

लड़की: लम्बी कहानी है ये (रुकती है) वह स्पानी गृह युद्ध में घायल हो गया था। उम्मीद से परे अपंग।

वेरडाऊ: (आगे झुकता है) अपंग?

लड़की: (सिर हिलाती है) इसीलिए मैं उससे प्यार करती थी। उसे मेरी ज़रूरत थी। वह मुझ पर निर्भर था। वह बच्चे की तरह था। लेकिन वह मेरे लिए बच्चे से ज्यादा था। वह धर्म की तरह था। वह मेरे लिए सांस की तरह था। मैंने उसके लिए किसी की जान ले ली होती।

(वह अपने आंसू पीती है और ज़हरीली शराब पीने ही वाली है।)

वेरडाऊ: एक मिनट रुको, मेरा ख्याल है तुम्हारी शराब में कार्क का टुकड़ा आ गया है। मैं तुम्हारे लिए दूसरा गिलास लाता हूं।

(वह लड़की का गिलास लेता है और उसे एक तरफ रख देता है, फिर वह एक साफ गिलास लेता है और अपनी बोतल में से शुद्ध शराब भरता है। एक पल के लिए वे चुपचाप पीते रहते हैं। वेरडाऊ तब कुर्सी से उठता है)

वेरडाऊ: अब बहुत देर हो चुकी है। और तुम थकी भी हुई हो। ये ले लो। (उसे कुछ पैसे देता है) इससे तुम्हारा एक आध दिन का गुज़ारा हो जायेगा। .. गुडलक।

वह पैसों की तरफ देखती है।

लड़की: ओह, ये तो बहुत ज्यादा हैं। मैं इतनी उम्मीद नहीं करती थी। (अपना चेहरा अपने हाथों में छुपा लेती है और रोती है) पागल ... इस तरह से ज़िंदगी जीते हुए . मेरा तो हर चीज़ से विश्वास ही उठने लगा था। और तभी ये होता है कि आप फिर से सब कुछ पर विश्वास करना चाहते हैं।

वेरडाऊ: बहुत ज्यादा भरोसा मत करो। ये दुनिया बहुत खराब है।

लड़की: (अपना हाथ हिलाती है) ये सच नहीं है। ये दुनिया गलतियों का पुतला है और बहुत उदास है ये दुनिया। इसके बावजूद थोड़ी सी दयालुता इसे खूबसूरत बना देती है।

वेरडाऊ: इससे पहले कि तुम्हारे दर्शन से मेरी नीयत डोले, बेहतर हो कि तुम चली जाओ।

लड़की दरवाजे तक जाती है, मुड़ती है, उसकी तरफ देख कर मुस्कुराती है और गुड नाइट कहते हुए चली जाती है।

ऊपर वाले सीन पर सेंसर बोर्ड को जो आपत्ति‍यां थीं, मैं उनमें से कुछ गिनाता हूं:

वेरडाऊ और लड़की में ये संवाद कि : 'इस वक्त रात को बाहर रहने का मतलब तुम बहुत ज्यादा आशावादी हो,' और साथ ही ये संवाद, 'तुम इस धंधे में कब से हो,' और, 'तुम्हारे जैसी आकर्षक लड़की कुछ बेहतर काम कर सकती थी,' बदले जाने चाहिये।

हम यहां पर इस बात का उल्लेख करना चाहेंगे कि हमारी राय में साल्वेशन आर्मी का इस तरह से उल्लेख उस गुप की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है।

मेरी पटकथा के समापन से पहले, वेरडाऊ कई रोमांचकारी घटनाओं के बाद लड़की से दोबारा मिलता है। वेरडाऊ फटेहाल है और लड़की अमीर हो चुकी है। सेंसर बोर्ड को उसकी अमीरी पर आपत्ति थी। दृश्य इस तरह से है:

कैफे के बाहरी हिस्से में फेड होता है। वेरडाऊ मेज पर बैठा अखबार पढ़ रहा है और यूरोप में संभावित युद्ध के बारे में पढ़ रहा है। वह बिल अदा करता है और बाहर आता है। जिस वक्त वह सड़क पार करने ही वाला है कि अचानक एक स्मार्ट लिमोजिन से टकराते टकराते बचता है। कार के ब्रेक लगते हैं। शोफर गाड़ी रोकता है और हॉर्न बजाता है। लिमोजिन की खिड़की से दस्ताना पहने हुए एक हाथ उसकी तरफ हिलता है। और हैरान हो कर वह देखता है कि ये उसकी लड़की का हाथ है जिससे कभी उसकी दोस्ती हुई थी। वह वेरडाऊ को देख कर मुस्कुराती है। लड़की ने बहुत ही अच्छे कपड़े पहने हुए हैं।

लड़की: कैसे हो, मानवतावादी?

वेरडाऊ चकरा जाता है।

लड़की: (अपनी बात जारी रखते हुए) मेरी याद नहीं है क्या? आप मुझे अपने अपार्टमेंट में ले गये थे बरसात की एक रात थी!

वेरडाऊ: (हैरानी से) क्या सचमुच?

लड़की: मुझे खाना खिलाने और पैसे देने के बाद आपने मुझे एक अच्छी लड़की की तरह घर वापिस भेज दिया था।

वेरडाऊ: (हँसते हुए) ज़रूर ही मैं मूरख रहा होउँगा!

लड़की:(ईमानदारी से) नहीं, आप बहुत अच्छे थे। कहां जा रहे हैं आप?

वेरडाऊ: कहीं नहीं!

लड़की: आ जाओ!

(वेरडाऊ कार में घुसता है।)

(कार की भीतरी हिस्सा)

लड़की: (शोफर से) कैफे लाफार्जे चलो ... मुझे अभी भी लग रहा है कि आप मुझे नहीं पहचानते। आप पहचानेंगे भी क्यों?

वेरडाऊ: (उसकी तरफ तारीफ भरी निगाहों से देखते हुए) इस बात के स्पष्ट कारण हैं कि मैं तुम्हें याद रखूं।

लड़की: (मुस्कुराती है) आपको याद नहीं उस रात हम मिले थे। मैं उसी वक्त जेल से बाहर आयी थी।

(वेरडाऊ अपने होंठ पर उंगली रखता है)

वेरडाऊ: शी .. (वह शोफर की तरफ इशारा करता है, तब कांच को महसूस करता है) ये ठीक है ...खिड़की ऊपर है। (वह लड़की की तरफ हैरानी से देखता है) लेकिन ये सब तुम .. (कार की तरफ इशारा करते हुए) हुआ क्या?

लड़की: वही पुरानी कहानी ... झोपड़ी से महल तक .. जब मैं आपसे मिली तो मेरी तो किस्मत ही बदल गयी। मैं एक बहुत ही अमीर आदमी से मिली। युद्ध सामग्री बनाने वाले से।

वेरडाऊ: यही तो वह कारोबार है जो मैं करना चाहता था। किस किस्म का आदमी है वह?

लड़की: बहुत दयालु और उदार। लेकिन अपने कारोबार में वह बहुत बेरहम है।

वेरडाऊ: कारोबार बेरहम काम ही होता है। माय डीयर, क्या तुम उसे प्यार करती हो?

लड़की: नहीं, लेकिन यही बात उसकी दिलचस्पी बनाये रखती है।

ऊपरवाले दृश्य पर सेंसर बोर्ड को इस तरह की आपत्तियां थीं:

कृपया नीचे दिये गये संवादों को बदलें: 'आपने मुझे एक अच्छी लड़की की तरह मेरे रास्ते पर भेज दिया था। और इसका जवाब, 'मैं जरूर मूरख रहा होऊंगा,' ये इसलिए कि इस संवाद की मौजूदा संकेतात्मक को हटाया जाये। और कृपया संवाद में युद्ध सामग्री के निर्माता के बारे में लड़की के प्रेमी के रूप में कुछ और संदर्भ डालें ताकि इस तरह का कोई संकेत न मिले कि लड़की उस आदमी की रखैल है।

दूसरी आपत्तियां दूसरे दृश्यों को ले कर और थोड़ा बहुत हंसी मज़ाक को ले कर थीं।

मैं उन्हें यहां दे रहा हूं:

अधेड़ उम्र की औरत के मामले में आगे और पीछे के मस्त कटाव के बारे में कोई अश्लील जुमला नहीं होगा।

शो करने वाली लड़कियों के रुटीन डांस या कॉस्ट्यूम में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं होना चाहिये।

खास तौर पर गार्टर के ऊपर लड़कियों की टांगें नहीं दिखनी चाहिये।

पिछवाड़े को खुजाने वाला लतीफा हटा दिया जाये।

बाथरूम में टायलेट नहीं दिखाये जाचे चाहिये।

वेरडाऊ के भाषण में से कृपया कामुक शब्द हटा दें

पत्र इस बात का उल्लेख करते हुए समाप्त किया गया था कि उन्हें मामले पर चर्चा करने के लिए मुझसे मिलने पर अपार खुशी होगी और कि फिल्म के मनोरंजन मूल्य को गंभीर रूप से चोट पहुंचाये बिना निर्माण संहिता की अपेक्षाओं के भीतर कहानी को ला पाना संभव होगा। इसलिए मैं खुद ब्रीन ऑफिस में हाजिर हो गया और मुझे मिस्टर ब्रीन के सामने ले जाया गया। एक ही पल बाद मिस्टर ब्रीन का कोई सहायक एक लम्बा, कठोर चेहरे वाला युवा कमरे में आया। उसकी टोन में ज़रा सा भी मैत्री भाव नहीं था।

'आप के मन में कैथोलिक चर्च के खिलाफ क्या है?' उसने पूछा।

'आप ये क्यों पूछ रहे हैं?' मैंने पूछा।

'यहां' उसने मेरी पटकथा की प्रति मेज पर पटकते हुए और उसके पन्ने पलटते हुए कहा: 'काल कोठरी में जहां अपराधी पादरी से कहता है, का दृश्य: 'मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं भले आदमी?'

'आप ही बताइये, क्या वह भला आदमी नहीं है?'

'यह बेहूदगी है,' उसने नाराज़गी से हाथ हिलाते हुए कहा।

'मैं किसी व्यक्ति को अच्छा कहे जाने में कुछ भी बेहूदा नहीं पाता।' मैंने जवाब दिया।

और इस तरह से हमारी बहस चलती रही। मुझे लगा कि मैं उसके साथ बर्नार्ड शॉ के संवादों का अभिनय कर रहा हूं।

'आप पादरी को एक अच्छा आदमी मत कहिये। आप उसे फादर कहिए।'

'बहुत अच्छी बात है, हम उन्हें फादर कहेंगे।' मैंने जवाब दिया।

'और ये लाइन' उसने एक और पेज की तरफ इशारा करते हुए कहा। 'आपने पादरी से कहलवाया है: `मैं तुमसे यह कहने आया हूं कि ईश्वर के साथ शांति स्थापित कर लो।' और वेरडाऊ जवाब देता है: `ईश्वर के साथ मैं शांतिपूर्वक हूं। मेरा संघर्ष व्यक्ति के साथ है।' आप जानते हैं ये धर्मविरुद्ध है।"

'आपको अपनी राय रखने का अधिकार है,' मैंने अपनी बात जारी रखी,'और मुझे भी यह अधिकार है।'

'और ये' उसने पटकथा को पढ़ते हुए टोका,'पादरी कहता है: `क्या तुम्हें अपने पापों के लिए कोई प्रायश्चित नहीं है?' और वेरडाऊ जवाब देता है: `कौन जानता है कि पाप क्या है। जैसे कोई स्वर्ग से पैदा हुआ हो। ईश्वर के गिरे हुए देवदूत से, कौन जानता है किससे कौन सी रहस्यमय नियती का काम बनता है?' '

'मेरा विश्वास है कि पाप भी अच्छाई की तरह महान रहस्य है।' मैंने जवाब दिया।

'ये बहुत छद्म दर्शन बघारना है।' उसने हिकारत से कहा।

'और तब आपका वेरडाऊ पादरी की तरफ देखता और कहता है: 'आप बिना पाप के क्या करेंगे?'

'मैं मानता हूं कि ये लाइन थोड़ी विवादास्पद है लेकिन आखिर ये विडंबनापूर्ण हास्य

ही तो है और ये पादरी को अनादर के तरीके से संबोधित नहीं किया जायेगा।'

'लेकिन आपका वेरडाऊ पादरी का लगातार मज़ाक उड़ाता रहता है।'

'तो आप क्या चाहते हैं कि पादरी कॉमेडी भूमिका अदा करे?'

'बिल्कुल नहीं, लेकिन आप उसे कोई अच्छा सा जवाब क्यों नहीं देते।'

'देखिए' मैंने कहा, 'अपराधी मरने जा रहा है और बहादुरी दिखाने के चक्कर में है। पादरी लगातार सभ्य बने रहते हैं और ये लाइनें बिल्कुल ठीक हैं। फिर भी मैं सोचूंगा कि पादरी के उत्तर के लिए कुछ अच्छी लाइनें लिखूं।'

'और ये लाइन' वह बोलता रहा,`ईश्वर आपकी आत्मा पर रहम खाये' और वेरडाऊ जवाब देता है: 'क्यों नहीं? आखिर ये तो उसी से नाता रखती है' '

'इसमें गलत क्या है?' मैंने पूछा

उसने संक्षेप में कहा: '`क्यों नहीं!' आप पादरी से इस तरह बात नहीं करते।'

'यह लाइन अपने आपसे कही गयी है। आपको फिल्म देखने तक का इंतज़ार करना चाहिए।' मैंने कहा।

'आप समाज और पूरे देश की तौहीन कर रहे हैं।' उसने कहा।

'अच्छी बात है। आखिर समाज और राष्ट्र दूध के धुले हुए नहीं हैं और उनकी आलोचना की मनाही भी नहीं हैं। नहीं क्या?'

एक या दो अन्य मामूली परिर्वतनों के बाद आखिरकार पटकथा को पास कर दिया गया। मिस्टर ब्रीन के प्रति पूरी तरह न्याय करते हुए कहूं तो उनकी अधिकतर आलोचना सकारात्मक थी। उन्होंने सोचते हुए कहा,'लड़की को एक और वेश्या मत बनाइए। हॉलीवुड की हर पटकथा में एक वेश्या होती है'

मुझे ये मानना ही होगा कि मुझे खराब लगा। अलबत्ता, मैंने वादा किया कि इस तथ्य पर ज्यादा ज़ोर नहीं दूंगा।

जब फिल्म पूरी हो गयी तो इसे लीज़न ऑफ डिसेंसी के बीस या तीस सदस्यों, सेंसर तथा विभिन्न हैसियत के धार्मिक समूहों के प्रतिनिधियों को दिखाया गया। मैंने अपने आप को कभी भी इतना अकेला महसूस नहीं किया जितना उस मौके पर कर रहा था। अलबत्ता, जब फिल्म पूरी हो गयी और बत्तियां जल गयी तो मिस्टर ब्रीन बाकी लोगों की तरफ मुड़े:

मेरा ख्याल है ये ठीक है। आइये चले' उन्होंने अचानक कहा।

वहां मौन छा गया: तभी किसी ने कहा,'मेरे साथ तो यह ठीक है। कुछ भी छुपाया गया नहीं है।' बाकी चुप रह गए।

ब्रीन शुष्क चेहरे के साथ दूसरों की तरफ उचटती सी निगाह डालते हुए बोले, 'ठीक है, ठीक है, हम इसे पास कर सकते हैं हं?'

बहुत कम प्रतिक्रिया हुई। कुछ लोगों ने हिचकते हुए सिर हिलाया। ब्रीन ने ऐसी सभी आपत्तियों को दर किनार कर दिया जो वे पूछ सकते थे और मेरी पीठ पर धौल जमाते हुए बोले,'ठीक है चार्ली, आगे काम करो और इसके प्रिंट निकलवाओ।'

मैं फिल्म को उनके द्वारा स्वीकार किये जाने को लेकर थोड़ा हैरान था और यह सोच रहा था कि शुरू में तो वे फिल्म को पूरी तरह से बैन करने पर तुले हुए थे। मैं उनके इस शानदार अनुमोदन को लेकर शक में पड़ गया। क्या वो और कोई रास्ता अपनाएंगे?

जब मैं वेरडाऊ का दूसरी बार सम्पादन कर रहा था तो मुझे युनाइटेड स्टेट्स मार्शल से इस आशय का टेलीफोन संदेश मिला कि मेरे नाम अमेरिकी विरोधी गतिविधियों पर समिति के समक्ष वॉशिंगटन में हाज़िर होने का सम्मन है। कुल उन्नीस लोगों को सम्मन भेजे गये थे।

फ्लोरिडा के सीनेटर पैप्पर उस समय लॉस एंजेल्स में थे और ये सुझाव दिया गया कि हम सलाह के लिए सीनेटर से मिल लें। मैं नहीं गया क्योंकि मेरी स्थिति थोड़ी अलग थी। मैं अमेरिकी नागरिक नहीं था। उस बैठक में हर व्यक्ति इस बात के लिए सहमत हुआ कि वे वॉशिंगटन में बुलाए जाने पर अपने सांविधिक अधिकारों पर टिके रहेंगे (जिन्होंने उनकी जमानत दी उन्हें अदालत की अवमानना के जुर्म में एक वर्ष की सज़ा सुनायी गयी।)

सम्मन में यह ज़िक्र किया गया था कि मुझे वाशिंगटन में मेरे वास्तव में हाज़िर होने के बारे में दस दिन के भीतर बता दिया जाएगा: लेकिन तुरंत एक तार आया कि मेरी हाज़िरी को दस दिन के लिए टाल दिया गया है।

तीसरी बार तारीख बदले जाने के बाद मैंने उन्हें यह उल्लेख करते हुए एक तार भेजा कि मेरी वजह से एक बहुत बड़ा संस्थान अधर में लटका हुआ है और मुझे बहुत हानि हो रही है और चूंकि उनकी समिति हाल ही में मेरे दोस्त हेन्स एस्लर से पूछताछ करने के लिए हॉलीवुड आयी थी, वे उसी समय मुझसे भी पूछताछ कर सकते थे और जनता का पैसा बचा सकते थे। 'अलबत्ता,' मैंने आगे लिखा: 'मैं आपकी सुविधा के लिए यह बताना चाहता हूं कि आप क्या जानना चाहते हैं। मैं कम्यूनिस्ट नहीं हूं और मैं अपने जीवन में न कभी किसी राजनैतिक पार्टी या संगठन ही में शामिल हुआ हूं। आप मुझे शांतिदूत कह सकते हैं। मुझे उम्मीद हैं कि इससे आपकी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचेगी। इसलिए कृपया पक्के तौर पर बताइए कि मुझे वॉशिंगटन कब बुलाया जाना है।

आपका,

'चार्ल्स चैप्लिन।'

मुझे हैरानी हुई कि जब मुझे इस आशय का बेहद विनम्रता भरा खत मिला कि मेरे मौजूद रहने की ज़रूरत नहीं हैं और मैं इस मामले को समाप्त समझूं।


· जी दू मुरियर का उपन्यास (1894)

¹ अमेरिकी कांग्रेस ने इंटरस्टेट वाणिज्य को नियमित करने के मकसद से मान्न अधिनियम पारित किया था ताकि वेश्यावृत्ति और आम तौर पर अवैध संबंधों पर रोक लगायी जा सके।

तीसरे चौथे दशक के अत्यंत प्रसिद्ध अभिनेता की ख्याति परदे की वजह से उतनी नहीं थी जितनी परदे के बाहर की गतिविधियों की वजह से थी। सुरा और सुंदरी का साथ और अपनी शर्तें पर जिंदगी जीने के ढंग के कारण वे हमेशा सुर्खियों में रहे। चौथे दशक के शुरू में दो अलग अलग मामलों में उन पर नाबालिग लड़कियों के साथ बलात्कार के आरोप लगे। उन पर बेहद चर्चित मुकदमे चले और उन्हें दोषमुक्त पाया गया। इन आरोपों से उनके कैरियर पर आंच आने के बजाये उनकी ख्याति और बढ़ी। अनु.

· ग्रीक पुराणों का एक खूबसूरत नौजवान जिसे सेलेन ने प्यार किया था और जिसकी जवानी को अंदरूनी नींद ने सुरक्षित रखा था।

(क्रमशः अगले अंकों में जारी…)

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फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi 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रचनाकार: चार्ली चैप्लिन की आत्मकथा (17)
चार्ली चैप्लिन की आत्मकथा (17)
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