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नवनीत नीरव की कविताएँ

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एक पाती

कभी सोचता हूँ एक पाती लिखूं
सावन की रिमझिम फुहारों के नाम
हर साल मिलने आती हैं मुझसे
कभी भी कहीं भी सुबह हो या शाम
छत के मुंडेरों पर खेतों में अमराई मे
अनजाने सफर में या रस्ता अनजान
कही भी रहूँ अक्सर खोज लेती हैं मुझे
इसे प्यार कहूं या दूं कोई नाम
कुछ कहने में शर्म आती है मुझे
कैसे कहूं अपने मन की विकल तान
इसलिए सोचता हूँ इक पाती लिखूं
सावन की रिमझिम फुहारों के नाम
-नवनीत नीरव –

अकेलापन

अकेलापन सुकून देता है
कुछ लोग बेबाकी से या शायद
प्रभाव बनाने के लिए
सीधे-सीधे कह कर निकल जाते हैं
जब- जब मैंने सोचा अकेले में
अपने लॉन की बेंच पर बैठकर
तब-तब मेरी नाव जिंदगी की
यादों के भंवर में फँस जाती है
शायद अकेलापन मन को रोकता है
अतीत के चित्र दिखने के लिए
पर जिंदगी उसी की ढलानों पर
सरपट दूर निकल जाती है.
-नवनीत नीरव-

हम- तुम

मन की कोई बात बताओ मुझको तुम ,

रहती हो खामोश सदा अक्सर गुमसुम ,

कभी- कभी ही दिख पाती है मुस्कान तुम्हारी

दिल ही दिल मैं क्या बुनती रहती हो हरदम

यही सोचता रहता हूँ मैं कभी तो बातें होंगी

मन को हलकी करने वाली कुछ मुलाकातें होंगी

जज्बातों को काबू करना कोई तो सीखे तुमसे

उम्मीदों को ख्वाब बनाना कोई तो सीखे तुम से

आओ कोई बात करें और साथ चलें हम- तुम

एक नए सफर की शुरुआत करें हम- तुम.

---

-नवनीत नीरव –

 

Section - B

ग्रामीण प्रबन्धन

कीट स्कूल ऑफ़ रुरल मैनेजमेंट

3 टिप्पणियाँ

  1. नमस्कार,
    इसे आप हमारी टिप्पणी समझें या फिर स्वार्थ। यह एक रचनात्मक ब्लाग शब्दकार के लिए किया जा रहा प्रचार है। इस बहाने आपकी लेखन क्षमता से भी परिचित हो सके। हम आपसे आशा करते हैं कि आप इस बात को अन्यथा नहीं लेंगे कि हमने आपकी पोस्ट पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की।
    आपसे अनुरोध है कि आप एक बार रचनात्मक ब्लाग शब्दकार को देखे। यदि आपको ऐसा लगे कि इस ब्लाग में अपनी रचनायें प्रकाशित कर सहयोग प्रदान करना चाहिए तो आप अवश्य ही रचनायें प्रेषित करें। आपके ऐसा करने से हमें असीम प्रसन्नता होगी तथा जो कदम अकेले उठाया है उसे आप सब लोगों का सहयोग मिलने से बल मिलेगा साथ ही हमें भी प्रोत्साहन प्राप्त होगा। रचनायें आप shabdkar@gmail.com पर भेजिएगा।
    सहयोग करने के लिए अग्रिम आभार।
    कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
    शब्दकार
    रायटोक्रेट कुमारेन्द्र

    जवाब देंहटाएं
  2. रचनाकार पर प्रकाशित नवनीत नीरव की कविताएँ
    सुन्दर हैं।

    जवाब देंहटाएं
  3. navnnet niraj ji muje aapki hamtum kavita bahut achhi lagi. agar aapko waqt mile to mere blog par aayen.
    www.salaamzindadili.blogspot

    जवाब देंहटाएं

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