यशवन्त कोठारी का व्यंग्य : ये मोहल्ले वालियाँ

SHARE:

हमारे यहां एक मोहल्ला है। मोहल्ले में मोहल्लेवालियां रहती है। इनके पति केवल आकर सोते हैं। अब आज ही का उदाहरण लो। शर्माजी के मकान में न...

yashwant kothari new (Mobile)

हमारे यहां एक मोहल्ला है। मोहल्ले में मोहल्लेवालियां रहती है। इनके पति केवल आकर सोते हैं।
अब आज ही का उदाहरण लो। शर्माजी के मकान में नया किरायेदार आ गया। पूरे मोहल्ले ने खिड़कियां खोल-खोल कर आने वालों का मुआयना किया। कुल जमा एक बच्चा और इतना सामान। इतना बड़ा फ्लेट लेकर क्या करेंगे ! मिसेज शर्मा परेशान हैं, इन नये लोगों से। क्या करेंगे ये इन कमरों का ? सोयेंगे, बैठेंगे, पसरेंगे, नाचेंगे, कूदेंगे, फिर भी तीन कमरे ज्यादा पड़ेंगे।

अभी शायद ऊंट पहाड़ के नीचे आया नहीं। उसने सोचा। किराया समय पर दें, तो समझूं। पहले वाला भी साला ऐसा ही था अपने आपको लेखक बताया, एक महीने का किराया मारकर भाग गया।
और ये आज का नया किरायेदार। कहता है, यूनिवसिर्टी में प्रोफेसर हूं। शायद खूब पढ़ा लिखा भी है। चेहरे से ही पढ़ा लिखा लगता है। लेकिन किराया दे, तब न.......पढ़े लिखे होने से क्या होता है - उन्होंने सोचा।
लेकिन अपने वो भी तो सरकारी अफसर है। देखती हूं, कैसे किराया नहीं देगा।

लेकिन इसकी बीबी, राम-राम.....कैसी बणी-ठणी फिरती है। जैसे कल शादी हुई हो। अपने सामने किसी को कुछ समझती ही नहीं। अरे हैं तो कुल मिलाकर किरायेदार ही। मकान मालिक से नहीं दबेगी, डरेगी तो चल जायेगा, लेकिन मकान मालकिन से तो दबना ही पड़ेगा। नहीं तो निकाल बाहर करूंगी साली को। अपने आपको समझती क्या है ? हूं।

चलूं जरा देख आऊं, कैसा घर जमा रहे हैं ?
बहिनजी नमस्ते।
नमस्ते। आइए आइए भाभीजी।
आज भाईसाहब दफ्तर नहीं गये।
नहीं हो आया, आज मेरा एक ही पीरियड था।
अच्छा, तो क्या एक पीरियड के बाद छुट्टी हो जाती है ?
हां, यूनिवर्सिटी में कुछ ऐसा ही होता है।
अरे भगवान। हमारे ये तो सुबह से शाम तक फाइलें जोतते रहते हैं।

हां अपना-अपना भाग्य - किराएदारिन बोल पड़ी और मकान मालकिन को चुप हो जाना पड़ा
उसके जाने के बाद प्रोफेसर साहब ने फरमाया-
अरे बदमाश लगती है। ज्यादा मुंह मत लगाना।
अरे मैं तो मकान मालकिन की छाया से भी बचूंगी जी।
हां यही ठीक है।
प्रिये !
हां
आज दफ्तर से छुट्टी ले लो। पूरा घर ठीक करना है।

ठीक है जी।
आओ सामान सजाएं।
पहले ड्राइंग रूम !
वे दोनों सामान जमाते हैं। किताबें सजाते हैं। एक पेन्टिंग लगाते हैं। ड्राईंग रूम का फर्नीचर ठीक करते है। पति कुछ चिट्टियां लिखता है। पत्नी कहती है-
देखो, पता सही लिखना। नहीं तो सब गड़बड़ हो जायेगा।
क्या गड़बड़ हो जायेगा ? तुम्हारे मायके वाले पत्र पर सही पता लिख दिया है।

मेरे मायके का नाम लिया तो ठीक नहीं होगा।
क्या ठीक नहीं होगा ?
मैं कहती हूं, आप स्वयं को सुधारो।
यू शट आप !
यू शट आप !
तुम पुरुष साले अपने आपको समझते क्या हो ? तुमने नारी का शोषण ही शोषण किया है।
और तुम........बकवास बन्द करो।
नहीं करती हूं, बोलो क्या कर लोगे।
क्यों पड़ोसियों को तमाशा दिखा रही हो। नहीं मानती तो ये लो और चटाक से झापड़ रसीद कर देता है।

मारो और मारो, मेरे हर प्रश्न का अन्तिम जवाब यहीं तो है, तुम्हारे पास।
किरायेदारिन रोने लगती है। प्रोफेसर साहब बाहर निकल जाते हैं। मकान मालकिन यह सब देख सुन कर मन ही मन खुश हो रही है। और हे पाठकों, लोक लाज के डर से आकर किरायेदारिन समझाती है-
क्या बात है बहू ?
कुछ नहीं।
देखो ऐसे गुस्सा मत किया करो। मरद है, कहीं पांव बाहर निकल गया तो मुसीबत हो जायेगी।
किरायेदारिन रोने लगती है। मकान मालकिन सांत्वना देती है।
देखो तुम उस मिसेज शर्मा से सावधान रहना। बड़ी चालू चीज है। पहले वाले किरायेदार पर खूब डोरे डाले। बेचारा आधी रात को भागा। आज तक वापस नहीं आया। ये मिसेज वर्मा थी जो किरायेदारिन को आगाह कर रही थी।
अच्छा, अब से सावधान रहूंगी। कल हमारे घर पर आई थीं।

अरे बड़ी बदमाश औरत है। औरत क्या साली कुतिया है। गली-गली सूंघती फिरती है। कहां क्या पक रहा है। शर्माजी के व इसके तो रात दिन झगड़ा चलता रहता है। ये कुतिया की तरह भौंकती है, और वो पिटाई करते हैं।
मिसेज वर्मा ने आगे कहा, ''साली मुझे बदनाम करती है। कहती है, तुम तो राघवन साहब के लगी हुई हो। अरे भाई वो मेरे पति के बॉस हैं, एक ही मोहल्ले में रहते हैं। हंसना बोलना कोई गुनाह है, तुम्हीं बताओ !''
नहीं जी, हंसना तो आवश्यक है। स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है।
हां, नहीं तो क्या। लेकिन इन मूर्खों को क्या समझाऊं।
अच्छा, ऑपरेशन तो अभी नहीं कराया होगा।
नहीं जी, बस ऐसे ही काम चला लेते हैं।
मैंने तो दो बच्चों के बाद ही काम निपटा दिया, सब खैरियत। और इस मिसेज शर्मा को देखो पांचवा है। पता नहीं किसका है। पति तो मरगिल्ला हो रहा है।
होगा जी, अपना क्या।
किसी से ना कहना, बहना।
हां बहना।

मिसेज गुप्ता और मिसेज राघवन में नहीं बनती है। बनने का प्रश्न ही नहीं पैदा होता। क्योंकि दोनों के पति एक ही दफ्तर में है और इन दोनों का बॉस भी इसी कॉलोनी में रहता है। बॉस के यहाँ पर गुप्ता दम्पत्ति जाते हैं तो राघवन दम्पत्ति नाराज हो जाते है। राघवन दम्पत्ति जाते हैं, तो गुप्ता दम्पत्ति नाराज। इस शास्त्रीय नाराजगी के अलावा गुप्ता सीनियर है और राघवन जूनियर। लेकिन मिसेज राघवन इस बात को कोई महत्व नहीं देतीं। अक्सर सब्जी, दूध या पानी के बिल जमा कराने के चक्कर में आपस में मुठभेड़ें होती रहती है। दोपहर का समय था। पति लोग दफ्तर में थे। बच्चे स्कूल में थे और मोहल्ले में सब्जी वाला आया हुआ था। यही तो वह समय होता है, जब मोहल्लेदारिनें जमादार हो जाती हैं।
मिसेजे राघवन ने सब्जी वाले को अपने सामने ठहरवा लिया। मिसेज गुप्ता वहां नहीं आई।
मिसेज राघवन ने सब्जी तो बहुत कम ली, मगर ठेले वाले को एक घण्टा रोके रखा। बस मिसेज गुप्ता के लिए यही काफी था।
देखो साली मुटल्ली को, सब्जी वाले से ही आंखें लड़ा रही है।
हाँ बहन। यह मिसेज शर्मा थी, जो मकान मालकिन थीं।
शर्म हया तो कुछ रह ही नहीं गयी है।
अरे जवानी हम पर भी आई थी। हाय क्या दिन थे वो भी, लेकिन कसम ऊपर वाले की, अगर ऐसी कोई ओछी हरकत की हो तो।
हां-हां, अपने जमाने में यह बस कहां था भाई।
अब देखो कैसे दीदे मटका रही है। लेगी पाव भर बैंगन और दुनिया जहान की बातें करेगी। जाते-जाते कुछ मिर्च और धनिया भी मांग लेगी।
साले ये मुए मरद होते ही ऐसे हैं जी।
चल भाई ए सब्जी वाले। मिसेज शर्मा ने आवाज दी।

आया मेम साहब। ठेले वाला भी चिल्लाया।
ये बैंगन क्या भाव हैं ?
पचास पैसे पाव।
वहां तो चालीस के दे आया।
नहीं बीबी जी, चालीस के नहीं दिए।
क्या बात करते हो। हमने देखा है।
वो तो चेन्ज नहीं थी न। इसलिए।

अच्छा चालीस के देगा।
नहीं।
नहीं, कैसे नहीं देगा। एक ही मोहल्ले में दो भाव नहीं चलेंगे। देगा न बोल ?
अच्छा ले लो बेनजी।
बेचारा सब्जी वाला।
मिसेज प्रोफेसर मिसेज खन्ना के पास बैठी है। मिसेज खन्ना मोहल्ले की नाक है और अपनी नाक पर मक्खी नहीं बैठने देतीं। कहने लगी इस शर्मा के बच्चे को चाहिए कि अपनी पत्नी को बांध के रखे। साली पता नहीं कहां-कहां मुंह मारती है। उस दिन मेरी बेबी को बुलाकर पूछ रही थी।
क्यों बेटी, पापा ने दौरे से चिट्टी लिखी या नहीं।

अरे नहीं लिखी तो तेरे बाप का क्या जाता है ? तू क्यों रो रही है, कहे तो तुझे प्रेम पत्र लिखवा दूं। कमीनी औरत हैं।
मिसेज प्रोफेसर नई-नई आई हैं लेकिन दुनियादारी से वाकिफ। ऐसे मौके पर क्या कहना चाहिए, जानती है, बोल पड़ती हैं।
आप से क्या कहूं, भाभीजी, किसी से कहना नहीं। एक रोज खिड़की से मेरे उनको देख-देख कर हँस रही थी। मैंने तो तुरन्त खिड़की बन्द करवा दी।
ठीक किया जी, साली का मुंह नोच लेना था।
सुना है, प्रोफेसर साहब विदेश जा रहे हैं ?
हां, चांस आ गया तो चले ही जायेंगे। पोस्ट डाक्टरल वर्क के लिए जाना पड़ेगा।
चलो फिर तो तुम्हारे मजे ही मजे।
क्यों मैं तो यही रहूंगी।
अरे यही तो मैं कह रही हूं।

यहीं होगी तभी तो, साजन घर नहीं, मुझको किसी का डर नहीं।
आप तो भाभीजी बस.........और मिसेज प्रोफसर शरमा कर उठ जाती हैं।
कॉलोनी में शोर मच गया है। प्रोफेसर साहब विदेश जा रहे हैं। हर घरवाला उनसे अपने नाजुक और महत्वपूर्ण संबंधों की घोषणा कर रहा है। मिसेज शर्मा बोल पड़ी -
मेरा मकान बड़ा शुभ है जी, देखो आते ही विदेश जाने का चांस मिल गया।
अरे ऐसा था तो तुम ही क्यों नहीं चली गई, इतने वर्षों से इसी मकान में हो। यह तमाचा मिसेज गुप्ता का था। मिसेज शर्मा कब चुप रहने वाली थीं -
तुम्हारे रहते मैं कैसे जाती ? तुम्हें पहले भेजूंगी, तब जाऊंगी।

कहां भेजोगी ?
स्वर्ग में।
तब तो अपन नहीं मिल सकेंगी, क्योंकि तुम तो वहाँ भी नरक में रहोगी।
मिसेज प्रोफेसर बेचारा हैरान, परेशान। प्रोफेसर साहब के जाने के बाद हमारी देखभाल कौन करेगा ?
शर्माजी ने कहा.........आप चिन्ता मत करिए। मैं किसलिए हूं। आप निश्चिंत रहिए, मैं पीछे से सब देखभाल कर लूंगा।
और प्रोफेसर साहब विदेश चले गये।

शर्माजी, सुबह शाम मिसेज प्रोफेसर के फ्लैट के चक्कर लगाने लगे।
पड़ोसिन को नया मौका मिला।
अरे देखो साला यह शर्मा हर समय यहीं घुसा रहता है।
अपना क्या है।
अरे यह तो मुहल्ले की इज्जत का सवाल है - मिसेज गुप्ता बोलीं।
अरे भाई जब मियां बीबी राजी को क्या करेगा काजी।
वो तो ठीक है, लेकिन ये मुआँ तो रात को भी यहीं रहता है।

दिन में तो मौका नहीं मिलता होगा।
साला बुड्ढा हुआ, पर जरा भी शऊर नहीं। बेटी ब्याहने लायक है।
अरे तुमने नहीं सुना क्या ?
क्या........? आश्चर्य से सभी की आंखें खुली रह गयीं।
यही, उस दिन रात को बेबी मन्दिर गयी तो दूसरे दिन सबेरे आई। बस तब से ही मिसेज शर्मा की बोली बन्द है।

होगा जी किस-किस को रोएं। लंका में सब बावन गज के।
हां, सो तो है।
अब हमारे ये तो बिल्कुल गऊ है जी, बूढ़ा बेचारा कहीं मुंह नहीं मारता।
और मेरे वो, नीचे नजर करके आते हैं और नीची नजर करके जाते हैं।
हां-हां, मैं देखती नहीं। एक रोज बाजार में मिल गए, तो पहचाना भी नहीं, वो तो मैंने ही बताया।

हां जी, आदमी को ऐसा ही होना चाहिए।
0    0    0
तुम इतनी रात यहां क्या कर रहे हो ?
देखो तुम भी देखो इश्क का चमत्कार। सालों ने लाइट बुझा रखी है और ऐश कर रहे हैं।
अरे तो तुम्हें क्या करना है ?
उसका पति उसे उसी को सौंप गया है, तुम चाहो तो भी वह तुम्हें हाथ नहीं धरने देगी।
मुझे क्या करना है जी उसका, मगर यह शरीफों का मोहल्ला है। वह अन्दर चली जाती है और पति महोदय फिर दरवाजे पर पहरा देने लग जाते हैं।

0    0    0
टूटी-फूटी खाट ठीक...........करवा लो।
मोहल्ले में खाती, मोची, सब्जी वाला सभी आते और मिसेज खन्ना की आया उन्हें फ्रिज का ठण्डा पानी पिलाती। आंख मारती, मुस्कराती और कुछ न कुछ प्राप्त कर लेती। सब्जी वाले से कहती-
तुम तो गोभी का फूल हो।
नहीं, मैं तो तेरे प्यार में अप्रेल फूल हूं। और आया शरमा जाती या शरमाने का अभिनय करती। एक नींबू उठाती और अन्दर भाग जाती।
सेठी साहब भी इस आया से दुःखी थे। मिसेज सेठी, सेठीसाहब से दुःखी थी। दोनों का दुःख दूर किया इस सब्जी वाले ने, उसने आया को फांसा और सेठी साहब टापते रह गये।
इधर मिसेज सेठी को अंग्रेजी पढ़ने का शौक चर्राया। रेपिडेक्स ले आई और अंग्रेजी में माई हेड इज राउण्डिंग करने लगी।

मिसेज सेठी की इस हरकत से परेशान कॉलोनी की सभी औरतों ने अंग्रेजी पढ़ना शुरू किया। लेकिन बातचीत साड़ी, ब्लाऊज से आगे नहीं बढ़ सकी।
मोहल्ले में मणिहारा आया। साड़ी वाला आया। नाक में लोंग और चूड़ियों वाला आया। सभी आये और गये, लेकिन मोहल्ले में कोई नया परिवर्तन नहीं कर पाये। आखिर यह बीड़ा मिसेज सेठी ने उठाया।
उसने मोहल्लेदारिनों को अपने यहां चाय पर बुलाया और मोहल्ले के साहित्य में व्याप्त सन्नाटे पर चर्चा की। परिचर्चा आयोजन का भार मेजबान के नाते स्वयं उठाया। मगर बात ज्यादा नहीं बनी, इस कारण वार्तालाप इस तरह हुआ-
चाय । केवल चाय
लेकिन तुमने तो कभी चाय भी नहीं पिलाई।

क्या.....क्या। दस बार तुम मेरे फ्रिज से बर्फ ले गयी हो।
दो बार तुम काफी पी चुकी हो।
फ्रीज की बर्फ के पचास पैसे नकद रख दो फिर बात करो।
कॉफी के दो रुपयों में से पचास पैसे काट लो।
बदजात कहीं की।
बदतमीज कहीं की।

तुम चुप रहो।
तुम चुप रहो।
तुम्हारे यहां शर्मा आता है।
और तुम्हारे यहां वर्मा रात को क्या करता है।
तुम्हारी लड़की ड्राइवर के पास क्या करने गई थी।
और तुम्हारी ननद गैराज में माली के साथ क्या कर रही थी।
तुम चुडैल।
तुम डायन।
तू वेश्या।
साली को रगड़ के रख दूंगी।
अरे जा....जा........।

हे पाठकों, पनघट पर पुराने जमाने में पूरे गांव चौपाल के समाचार मिलते थे। पनघट बंद हुए, नल के बम्बे लग गए, कॉलोनियां बन गईं, मोहल्ले और मोहल्लेदारियां खत्म हो गई। लेकिन हम वाटरगेटी जनम-जनम के इससे उबर न सके। ये मोहल्ले वालियां आज भी लड़ रही हैं, अचानक मुझे शहर छोड़ना पड़ा। आगे की कहानी फिर कभी लिखूंगा। आमीन।

0    0    0

यशवन्त कोठारी
    86, लक्ष्मी नगर, ब्रह्मपुरी बाहर,
जयपुर-302002 फोनः-2670596
   ykkothari3@yahoo.com

COMMENTS

BLOGGER: 2
रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: यशवन्त कोठारी का व्यंग्य : ये मोहल्ले वालियाँ
यशवन्त कोठारी का व्यंग्य : ये मोहल्ले वालियाँ
http://lh3.ggpht.com/_t-eJZb6SGWU/S7VkqtTXQ1I/AAAAAAAAHqg/7GULpFWVWd4/yashwant%20kothari%20new%20%28Mobile%29_thumb%5B1%5D.jpg?imgmax=800
http://lh3.ggpht.com/_t-eJZb6SGWU/S7VkqtTXQ1I/AAAAAAAAHqg/7GULpFWVWd4/s72-c/yashwant%20kothari%20new%20%28Mobile%29_thumb%5B1%5D.jpg?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2010/04/blog-post_02.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2010/04/blog-post_02.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content