विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका -  नाका। प्रकाशनार्थ रचनाएँ इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी इस पेज पर [लिंक] देखें.
रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -

पिछले अंक

अशोक गौतम का व्यंग्य : हिंदी लवरों को खुशखबरी

साझा करें:

ये बात नहीं थी कि उनके पास स्वर्ग को पहुंचाने वाला पुत्र नहीं था। था तो सही पर सुपुत्र नहीं था। वह उन्हें अस्पताल ही नहीं ले जाता था तो उ...

ashok gautam

ये बात नहीं थी कि उनके पास स्वर्ग को पहुंचाने वाला पुत्र नहीं था। था तो सही पर सुपुत्र नहीं था। वह उन्हें अस्पताल ही नहीं ले जाता था तो उनको भी पता था कि स्वर्ग क्या ले जाएगा! चिता को अग्नि ही दे दे तो गनीमत।

एक दिन वे बातों ही बातों में वचन ले मरे कि जब वे मरें तो मैं उनका क्रिया कर्म करूं। पूरी ईमानदारी से। मैं डरा भी, यार! यहां साली ईमानदारी तक सुरखाब के पर हो गई है और बंदा है कि पूरी ईमानदारी की बात कर रहा है। इससे पहले किसी का क्रिया कर्म किया नहीं था सो मैंने उनसे साफ साफ कह दिया,‘ देखो , बुरा मत मानना । सच यह है कि मैंने इससे पहले किसी का क्रिया कर्म नहीं किया है। इसलिए मुझे पता नहीं है कि कितना खर्च आता होगा। ऐसे मौकों पर मरते- मरते पंडे- पुजारी भी अजगर सा मुंह खोल देते हैं। कहीं ऐसा न हो कि पहले ही क्रिया कर्म में मुझे घाटा हाथ लगे और मेरी रही सही आस्था भी जाती रहे। कैसा जैसा क्रिया कर्म करना है?’ माल की ओर से भला चंगा होने के बाद जिंदगी भर बीड़ी के टोटों का सिगारी स्वाद लेने वाले से मैंने पूछा। पता नहीं हम ताउम्र किसके लिए तिल तिल जोड़ते रहते हैं?

‘ ऐसा कि जरा दरमयाना सा। लोग ये भी न कहें कि मरने के बाद भी साला कंजूस ही रहा। और ऐसा हाई फॅाई भी नहीं करना कि इनकम टैक्स वाले घरवाली को तंग करने आ जाएं। इसके लिए मैं प्री पेमेंट कर जाऊंगा। प्री पेड का जमाना है न! खर्च से दो चार हजार ज्यादा ही दूंगा। मुझे पता है हर सुबह जब सोकर उठते हैं तो महंगाई चार कदम आगे ही होती है। मरने के बाद मैं कम से कम तुम्हारी जेब को चूना लगाना नहीं चाहता। साथ में तुम्हारे आभार का मेहनताना भी।‘ बंदा खुश! यार ये कैसे दिन आ गए? अब तो समाज में अहसान के भी रेट मिलने लग गए। उस वक्त वे मुझे हद से ऊपरले व्यावहारिक लगे। भगवान मेरे सभी अपनों को ऐसी सद्बुद्धि दे।

और अपने क्रिया कर्म की प्री पेमेंट कर वे मर गए। अब उन्हें स्वर्ग भेजना था तो जरूरी था कि पंडे- पुजारियों को जमकर गालियां देते हुए मरवाया जाता। उनके मरने पर पंडे- पुजारियों को मैंने भी कब्जी करवा दी। ये बात दीगर है कि वे उम्र भर दो चपाती कम ही पेट से रहे। कोई बात नहीं यार! मेरे मेहनताने के पैसे कम हो जाएं तो हो जाएं, पर बंदा चौथे दिन स्वर्ग होना चाहिए बस। पंडों ने एक सौ एक फीसदी आश्वासन दिया तो मैं उनके ऋण से उऋण हुआ। बायगॉड! पहली बार मैं तब जिंदगी में किसी के प्रति वफादार हुआ। पता नहीं क्यों?

सच मानिए, पूरी ईमानदारी से घर से उनके स्वर्ग के सारे रास्ते ओके कर उनकी अस्थियां ले हरिद्वार पहुंचा कि स्वर्ग के आखिरी द्वार को भी उनके नाम कर दूं ताकि दुविधा की कोई गुंजाइश न रहे। मुझे वहां आते देख पता नहीं एकाएक पंडे कहां से गिद्धों की तरह उमड़ पड़े। लगा मुझे खा ही जाएंगे जैसे। सोच में पड़ गया ,यार मैं मार हुआ भैंसा तो नहीं? यार सरकार, झूठ क्यों बोलते हो कि देश में गिद्धों का अस्तित्व संकट में है। मुझसे पूछो तो सच ये है कि घर की देहरी से लेकर तीर्थों तक जनता गिद्धों की चपेट में है। यार भगवान !आप ही इनको थोड़ी सद्बुद्धि दे दो न। नहीं तो देखना एक दिन ऐसा आएगा कि तुम्हें पूछने यहां कोई नहीं आएगा। माना तीर्थ पर इंसान भेड़ हो जाता है पर भेड़ के बाल ही काटो, यार खाल तो न निकालो।

मैं उन गिद्धों से बचने के लिए हाथ पांव मारने लगा कि एक गिद्ध ने मुझे अपने पंजों में जकड़ ही लिया,‘ कहां से आए हो? किसको लाए हो? कब मरा?’

‘थोड़ी सांस लेने दोगे?’

‘ कमाल है यार! यहां लोग सांस छोड़ने की कामना लिए आते हैं और तुम हो कि सांस लेने की बात करते हो! घोर सांसारिक लगते हो। मरने के बाद पांच करोड़ गायत्री करवानी पड़ेगी। तब स्वर्ग का रास्ता क्लीयर होगा।‘

‘पर अभी तो....’ कह मैंने अपनी जेब पकड़ ली। ऐसा न हो कि जाने का किराया भी न छोड़ें। यहां आकर जेबकतरों से उतना नहीं डर लगा जितना रामनेमी धारण करने वालों से लग रहा था,‘मेरे आदरणीय हैं। उन्हें हरि की पौड़ी से स्वर्ग चढ़ाने आया हूं।’

‘ तो रास्ता हम बताते हैं। हम किस लिए हैं यार यहां!! हमारे खनदान के खानदान मर गए आत्माओं का स्वर्ग भेजते- भेजते।’

‘कितने लगेंगे?’

‘कितने साल का था?’

‘अस्सी। पर क्यों?’

‘यार इतना भी नहीं समझते! जवान को तो चार चार सीढ़ियां एक साथ चढ़ाई जा सकती हैं! तो जाहिर है मेहनत कम होगी । बाजार का फंडा है कि मेहनत कम होगी तो मेहनताना भी कम ही होगा। अब यह तो भारी काम है। इसको स्वर्ग भेजने का हजार से कम तो कोई भी नहीं लेगा। विश्वास नहीं तो बाजार में हाथ पांव मारकर देख लो।’ उसने कहा तो चार रूपये आलू में भी मोल भाव करने वाला अपनी पर उतर आया,‘ ज्यादा नहीं हैं क्या! कुछ कम कर दो तो भगवान तुम्हें भी स्वर्ग देगा।’

‘क्यों गाली देते हो! हम स्वर्ग चले गए तो स्वर्ग का रास्ता बताने वाला यहां कौन रहेगा? आत्माएं रहेंगी नरक में गलती सड़ती।’ उधर पोटली में कैद वे स्वर्ग जाने को बराबर बिन सांस लिए फड़ फड़ा रहे थे। मुझसे उनकी फड़ फड़ाहट और न देखी गई सो और मोल भाव बंद कर पोटली गिद्ध के हवाले कर दी। पोटली को बेदर्दी से खंगालते उसने उसमें से अस्थियां निकाल मेरे हाथ में दे दीं और खैनी सड़े दांतों के बीच संस्कृत छोड़ हिंदी घसियाने लगा,‘ हे भगवान! इस आदमी की आत्मा को मैं अपने मार्फत स्वर्ग भेज रहा हूं। मैं हरिद्धार का खानदानी स्वर्ग एजेंट हूं। इस आदमी को स्वर्ग में कहीं भी टिका देना हूं...तो क्या नाम है इसका..’

‘मुरारी लाल ।’

‘हां तो मुरारी लाल को मैं स्वर्ग की सीढ़ी पर रख रहा हूं। भगवान आगे आप देख लेना। हां तो रख दो इसकी अस्थियां स्वर्ग की सीढ़ी पर और कामना करो प्रेतात्मा को स्वर्ग मिले।’

‘पर मुझे तो कोई सीढ़ी नहीं दिख रही पंडित जी।’ मैंने ‘शंका जाहिर की तो वह लाला - पीला हो बोला,‘ पांच मिनट में तो घर की सीढ़ियां भी नहीं देख पाओगे सांसारिक! इसके लिए तो हमारी तरह हर बार यहीं जन्म लेना पड़ेगा तब ये सीढ़ियां दिखेंगी। तो लाओ मेरे फीस!’ उसने मेरे हाथ से उनकी अस्थियां छीन वहीं सीढ़ी पर डाल दीं, लो भगवान! स्वर्ग में तुम्हारे पास बंदा भेज रहा हूं। संभाल लेना। देखना, मेरी नाक न कटे।’ मैंने उसे हजार का नोट दिया तो वह उसे बार- बार देखता बोला,‘ असली है न!’

‘तीर्थ पर आकर पापा थोड़े बटोरूंगा पंडित जी। ’

‘ठीक है, ठीक है। रसीद तो नहीं चाहिए?’

‘क्यों?’

‘इसकी घरवाली को बतानी हो कि .....’

हे हिंदी के अस्तित्व के संकट का रोना रोने वालों नरक भीरूओ ! हम यहां नरक ही तो भोग रहे हैं। इससे बड़े नरक की कल्पना कर और क्यों मरते हो? अगर तुम्हारे पास रूमाल नहीं तो लो मेरा रूमाल और पांेछ डालो अपने मगरमच्छी आंसू। बंद कर दो हिंदी पखवाड़ों के नाम पर सरकारी बजट का दुरूपयोग करना। अब बेफिक्रे होकर मजे से हटा दो अपने बच्चों को कान्वेंट स्कूलों से जो मिशन के नाम पर आपको अपनी चांदी बना रहे हैं। अपने आप लूंगी, फटी ‘शमीज में जिंदगी काट बच्चों को पैदा होते ही फालड़ुओं की जगह पेंट, शर्ट पहनाने वालों, बच्चों के साथ अपनी बोली और बेकार हिंदी की तरज पर अंग्रेजी बोलने वालों ये देखो, कल तक जो देवता संस्कृत के बिना दूसरी कोई और भाखा समझते ही नहीं थे, समझने की कोशिश करते ही नहीं थे, आज समय की नजाकत को देख वे भी हिंदी की ओर उन्मुख हो रहे हैं। उन्हें भी पता चल गया है कि हिंदी के बिना अब उनकी भी दाल- रोटी चलने वाली नहीं। हे हिंदी में पाठको की कमी का रोना रोने वाले प्रकाशकों! उठो! जागो!! आगे बढ़ो, देवलोक में पुस्तक मेले की तैयारी करो।

------

अशोक गौतम

गौतम निवास, अप्पर सेरी रोड, सोलन-173212 हि.प्र.

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 4
  1. वाह! वाह! गौतम जी!
    धर्म और आस्था के नाम पर चल रहे गोरखधंधों पर
    आपकी चोट विलक्षण है....इसकी जितनी
    तारीफ़ की जाय कम है।

    जवाब देंहटाएं
  2. बिना मरे स्‍वर्ग भी तो नही मिलता...
    सतीश कुमार चौहान भिलाई
    satishkumarchouhan.blogspot.com
    satishchouhanbhilaicg.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  3. Gautam jee this is fact rather than byang. Some time I became serious and other time burst to laughter, while reading this one.

    जवाब देंहटाएं
रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * || * उपन्यास *|| * हास्य-व्यंग्य * || * कविता  *|| * आलेख * || * लोककथा * || * लघुकथा * || * ग़ज़ल  *|| * संस्मरण * || * साहित्य समाचार * || * कला जगत  *|| * पाक कला * || * हास-परिहास * || * नाटक * || * बाल कथा * || * विज्ञान कथा * |* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4099,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,341,ईबुक,196,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3063,कहानी,2275,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,542,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,112,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,346,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,68,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,29,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,245,लघुकथा,1271,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,19,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,340,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2014,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,714,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,803,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,18,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,92,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,212,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: अशोक गौतम का व्यंग्य : हिंदी लवरों को खुशखबरी
अशोक गौतम का व्यंग्य : हिंदी लवरों को खुशखबरी
http://lh6.ggpht.com/_t-eJZb6SGWU/S-vliVE1ajI/AAAAAAAAH8I/I1fKLIazjLw/ashokgautam_thumb.jpg?imgmax=800
http://lh6.ggpht.com/_t-eJZb6SGWU/S-vliVE1ajI/AAAAAAAAH8I/I1fKLIazjLw/s72-c/ashokgautam_thumb.jpg?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2010/05/blog-post_7855.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2010/05/blog-post_7855.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ