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अरुणा राय की कविताएँ

arunarai19

१)यह बेकली ही हृदय की छाया है  

कैसे बता सकती हूँ
कि क्या होता है हृदय
हालाँकि उसे दिखला देना चाहती हूँ
सामने वाले को
पर शब्द इसमें जरा सहायक नहीं होते

बस मेरी आंखों में उठे सवाल ही
बता सकते हैं कुछ
कि क्या तुम महसूस कर रहे हो
मेरा हृदय
कि मेरी यह बेकली
हृदय की छाया है यह
यह अकुलाहट
और क्या
क्या ...

नहीं वह सीने में नहीं
वजूद में धड़कता है पूरे

समा जाना चाहता है

एक दूजे में
त्वचा को विदीर्ण कर
पर असफल रहता है
और व्याकुल
कि यह असफलता ही हृदय का होना है
कि उसके बारे में
ठीक ठीक न बता पाने की मजबूरी ही
उसके होने का प्रमाण है ...

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२) मौन

पुकारने पर
प्रति-उत्तर ना मिले
तो बाहर नहीं भटकूंगी अब
बल्कि लौटूंगी
भीतर ही

हृदयांधकार में बैठा
जहाँ
जल रह होगा तू
वहीं
तेरी मद्धिम आँच में बैठ
गहूंगी
तेरे मौन का हाथ।

15 टिप्पणियाँ

  1. अरुणा जी की हर नज़्म सोचने को विवश करती है और हर बार एक संदेश देती है और यही उनके लेखन का चमत्कार है।
    कल (2/8/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत ख़ूब !

    "मौन' ...... ख़ूबसूरत !!

    जवाब देंहटाएं
  3. हृदयांधकार में बैठा
    जहाँ
    जल रह होगा तू
    वहीं
    तेरी मद्धिम आँच में बैठ
    गहूंगी
    तेरे मौन का हाथ।
    ....sundar manobhon se paripurn rachna ke liye haardik shubhkamnayne...

    जवाब देंहटाएं
  4. bahut hee sundar
    hriday ko chhune vaalee kavitaen. badhaaee. main dev naagaree men likhana chahata hoon pat tareeka pata naheen hai !

    जवाब देंहटाएं
  5. नहीं वह सीने में नहीं
    वजूद में धड़कता है पूरे
    कमाल है...बहुत सुन्दर कविताएं.आभार.

    जवाब देंहटाएं
  6. ह्रदय की गहराई से निकले यह शब्‍द मनभावक है । बधाई हो ।

    जवाब देंहटाएं
  7. prati-uttar na mil to
    baahar nahi bhatakoongi ab

    bahoot sargarvit kavita.thanks

    जवाब देंहटाएं
  8. बेनामी6:53 am

    बढ़िया!
    पर "ह्रदयांधकार" विषम शब्द लगा कुछ हद तक,
    मंद मंद ही सही पर जो जलेगा वह प्रकाश तो देगा ही|

    जवाब देंहटाएं
  9. क्या आपने हिंदी ब्लॉग संकलन के नए अवतार हमारीवाणी पर अपना ब्लॉग पंजीकृत करा लिया है?

    इसके लिए आपको यहाँ चटका (click) लगा कर अपनी ID बनानी पड़ेगी, उसके उपरान्त प्रष्ट में सबसे ऊपर, बाएँ ओर लिखे विकल्प "लोगिन" पर चटका लगा कर अपनी ID और कूटशब्द (Password) भरना है. लोगिन होने के उपरान्त "मेरी प्रोफाइल" नमक कालम में अथवा प्रष्ट के एकदम नीचे दिए गए लिंक "मेरी प्रोफाइल" पर चटका (click) लगा कर अपने ब्लॉग का पता भरना है.

    हमारे सदस्य "मेरी प्रोफाइल" में जाकर अपनी फोटो भी अपलोड कर सकते हैं अथवा अगर आपके पास "वेब केमरा" है तो तुरंत खींच भी सकते हैं.

    http://hamarivani.blogspot.com

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  10. बेहतरीन रचनाएँ

    जवाब देंहटाएं
  11. बेनामी12:57 pm

    already bahut tarif meri bhiadd kare pls

    जवाब देंहटाएं
  12. anubhuti aur kthan ka dwandwa. lekin anubhuti kai guna bada hai - kathan se, shabd se, vichaar se, kathan me chahe jitne chune shabd kyon n hon we anubhuti ko pura bayaan nahi kr sakte. shabdon ki seem hoti hai, usase bada sanket hota hai aur maun, are wahi to vyakhya hai ek sashakt udghosh hai. Ek bahut achhi rachna . Badhai...

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति। बधाई।

    जवाब देंहटाएं

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