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राजीव श्रीवास्तवा की कविता - आज भी रावण जिंदा है

 

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एक प्रश्न बालक के मन में मचा रहा बवाल,

रावण कौन था?अपने पिता से कर रहा सवाल!

 

जिज्ञासा भरा प्रश्न पिता को बहुत ही भाया,

उन्होने उसे पास अपने बुलाया और प्यार से समझाया!

 

कहा रावण था एक राक्षस किए उसने कई पाप,

अन्याय करता था प्रजा पर, नहीं था कोई इंसाफ़!

 

साधु -संत को मार गिराता और बंदी उन्हें बनाता,

उसके राज्य में पूजा -पाठ नहीं कोई कर पाता!

 

घमंड उसमें भरपूर था ,सब को वो डराता,

बात ना मानने वालों को झट से मार गिरता!

 

खुद को बलशाली कहता,देव को भी धमकाया,

शनि को भी पकड़ कर उसने गुलाम बनाया!

 

एक दिन भेष बदल कर सीता माता से माँगी भीख,

उठा के उन्हें दुष्ट ले गया,माता रही थी चीख!

 

बार -बार समझने पर भी उसकी समझ ना आया,

सीता माँ को बंदी बनाया,विनाश को पास बुलाया!

 

अपने हट के कारण उसने प्रभु से कर ली जंग,

अपनों की बली चढ़ा दी,लंका खून से गयी रंग!

 

आखिरकार मारा गया,टूटा उसका अभिमान,

दुष्ट का अंत हो गया ,निकली उसकी जान!

 

सारी बातें सुन के बेटे ने पिता को बतलाया,

कहा "आज भी रावण जिंदा है" यही समझ में आया!

 

जैसे कर्म रावण करता था, वैसे लोग आज भी करते,

आज के रावण क्यों जिंदा है ये क्यों नही मरते!

 

पिता निरुत्तर हो गये,सोचा कैसे इसे समझाए,

कहा ये कलयुग के रावण है ,ये अमृत पी के आए!

 

कहा जिस दिन एक-एक बच्चा बन जाएगा राम,

ऐसे रावण का भी वध होगा,और होगा काम तमाम!

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rajeev shrivastava

डॉक्टर राजीव श्रीवास्तवा

2 टिप्पणियाँ

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