रामप्रताप गुप्ता का आलेख - देश में बुजुर्गों की बढ़ती संख्या और उनकी बढ़ती उपेक्षा

SHARE:

देश में बुजुर्गौं की बढ़ती संख्या और उनकी बढ़ती उपेक्षा —डॉ. रामप्रताप गुप्ता, उज्जैन समय के साथ—साथ चिकित्सा सुविधाओं और पोषण स्तर में बेहतर...

elderly people and their need

देश में बुजुर्गौं की बढ़ती संख्या और उनकी बढ़ती उपेक्षा

—डॉ. रामप्रताप गुप्ता, उज्जैन

समय के साथ—साथ चिकित्सा सुविधाओं और पोषण स्तर में बेहतरी के चलते देश की औसत आयु में वृद्धि होती जा रही है और इसी के साथ देश की आबादी में बुजुर्गौं (६० वर्ष या अधिक आयु वाले लोग) का प्रतिशत और उनकी संख्या भी बढ़ती जा रही है। सन् १९६१ में देश में बुजुर्गों की कुल संख्या २.४ करोड़ थी जो कि सन् १९८१ में ४.५ करोड़ और सन् २००१ में ७.७ करोड़ हो गई थी। इस समय उनकी संख्या १० करोड़ के लगभग होने का अनुमान है। अगर कुल आबादी में बुजुर्गौं के प्रतिशत पर नजर डालें तो यह १९६१ में ५.६३ प्रतिशत था जो कि सन् २००१ में बढ़कर ७.५ प्रतिशत हो गया। अर्थ यह हुआ कि देश की युवा और उत्पादक आबादी पर बुजुर्गौं की देखभाल का भार बढ़ता ही जा रहा है। उम्र के साथ शारीरिक और मानसिक असमर्थताएँ बढ़ती जाने से बुजुर्गौं की विशेष देखभाल की माँग रहती है। स्वास्थ्य संबंधी आँकड़े बताते हैं कि भारतीय बुजुर्गौं के २५—२७ प्रतिशत को दिखाई कम पड़ने लगता है, १२—१४ प्रतिशत को सुनाई कम देने लगता है। अनेक बुजुर्ग के लिए तो बढ़ती उम्र के साथ चलना—फिरना भी असंभव हो जाता है और वे बिस्तर पर पड़े रहने को बाध्य होते हैं। वे सम्पर्कजनित और जीवन शैली से संबंधित दोनों तरह की बीमारियों के भी अधिक शिकार होते हैं। ऐसे में उनकी देखभाल और उन्हें सुरक्षा देने की आवश्यकता बढ़ जाती है।

सन् १९७० तक हमारे यहाँ संयुक्त परिवार प्रणाली के चलते बुजुर्गौं की देखभाल कोई समस्या ही नहीं थी, बल्कि परिवार में उन्हें आदर और सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था। परिवार में उनकी उपस्थिति गौरव पूर्ण मानी जाती थी और उनकी समुचित देखभाल भी होती थी। अब समय के साथ संयुक्त परिवार प्रणाली विघटित होती जा रही है, युवा आबादी नौकरी और व्यवसाय के बेहतर अवसरों के फलस्वरूप शहरों की ओर जा रहे हैं और पीछे बुजुर्ग आबादी अकेले या दोनों पति—पत्नी ही रह जाते हैं। देश की ९० प्रतिशत से अधिक आबादी असंगठित क्षेत्र में कार्य करती है, जिनके रोजगार और आय चक्रीय और मौसमी उतार—चढ़ाव के शिकार होते हैं। ऐसे में ये अपनी वृद्धावस्था के लिए कुछ भी बचा कर नहीं रख पाते हैं। उनको प्राप्त निम्नस्तरीय मजदूरी से तो उनकी वर्तमान आवश्यकताएँ ही मुश्किल से पूरी हो पाती हैं। इस सारी पृष्ठभूमि में जब परिवार के युवा रोजगार की तलाश में शहरों की ओर प्रवास कर जाते हैं और परिवार के बुजुर्गौं के लिए यदाकदा थोड़ी राशि ही भेजते हों तो उस स्थिति में बुजुर्गौं के लिए पेट की आग बुझाने के लिए मजदूरी करना बाध्यता बन जाती है, चाहे उससे उन्हें कितनी ही कम आय प्राप्त क्यों न होती हो। आजकल हर बड़े शहर में २—३ या अधिक स्थानों पर सब्जी, फल आदि के बाजार की तरह ही मजदूरों का बाजार भी लगता है, जहाँ वे रोजगार की तलाश में एकत्रित होते हैं, एकत्रित मजदूरों में बुजुर्गौं का प्रतिशत काफी अधिक होना भी इस बात का प्रमाण है कि देश में हमारे बुजुर्ग कितने असहाय, असुरक्षित हैं। संयुक्त परिवार प्रणाली के नष्ट हो जाने की प्रक्रिया ने उनकी असुरक्षा को और भी बढ़ा दिया है।

इस सारी पृष्ठभूमि में कल्याणकारी राजकीय व्यवस्था स्थापित करने का दावा करने वाली सरकार से देश के बुजुर्गों की सामाजिक सुरक्षा की अपेक्षा स्वाभाविक ही कही जावेगी परन्तु सरकार आजादी के पाँच दशक गुजर जाने के पश्चात ही राष्ट्रीय बुजुर्ग नीति की घोषणा कर सकी है। इस नीति के अंतर्गत बुजुर्गौं की सभी प्रकार की आवश्यकताओं को समाहित कर एक स्पष्ट कार्य योजना बनाई गई है। इस नीति के अंतर्गत बुजुर्गौं की देखभाल, उनके लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, उनकी वित्तीय सुरक्षा आदि सरकार का दायित्व माना गया है। इतना सब होते हुए भी जमीनी स्तर पर ठोस कदमों की अपेक्षा आज भी अपेक्षा ही बनी हुई है। राज्य सरकारों ने गरीबी की रेखा के नीचे स्थित बुजुर्गौं के लिए तो वृद्धावस्था पेंशन की व्यवस्था तो की है, परन्तु अलग—अलग राज्यों में पेंशन की राशि भी अलग—अलग है। अपेक्षा है कि इस हेतु केन्द्र सरकार से जिस दर से पेंशन राशि प्राप्त होती है, राज्य सरकारें भी उतनी ही राशि उसमें मिलाकर वृद्धों को पेंशन देगी, परन्तु अनेक राज्य सरकारें केवल केन्द्र सरकार से प्राप्त पेंशन की राशि ही देती है, अन्य उसमें अलग—अलग दरों से राशि मिलाती हैं। इस वजह से देश के विभिन्न राज्यों में गरीबी की रेखा के नीचे स्थित बुजुर्गों को अलग—अलग दर से वृद्धावस्था पेंशन दी जा रही है। मध्यप्रदेश भी उन राज्यों में से एक है जो वृद्ध लोगों को केवल केन्द्र सरकार से प्राप्त राशि के बराबर ही पेंशन देता है। सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि अनेक गरीब बुजुर्ग तो गरीबी रेखा के नीचे स्थित लोगों की सूची में शामिल ही नहीं हो पाते हैं जबकि अन्य बेहतर आर्थिक स्थिति वाले लोग भी उसमें शामिल कर लिए जाते हैं। अतः देश के आर्थिक सुरक्षा की आवश्यकता वाले बुजुर्गौं को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर दी गई है, यह नहीं कहा जा सकता है।

आर्थिक सुरक्षा के पश्चात बुजुर्गौं की सबसे बड़ी आवश्यकता समुचित, पर्याप्त और सहज पहुँच वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की है। सन् २००१ के सर्वे के अनुसार देश के दो—तिहाई बुजुर्ग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, उनमें से अधिकांश अशिक्षित हैं और उनमें से ९० प्रतिशत से अधिक के असंगठित क्षेत्र में कार्यरत रहने से वृद्धावस्था में किसी तरह की पेंशन आदि भी नहीं मिलती है और उन्हें पर्याप्त, संतुलित पोषण भी नहीं मिल पाता है। ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के लगभग पूर्ण अभाव होने तथा आर्थिक संसाधनों के अभाव में इनके लिए महँगी, पहुँच से दूर आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएँ प्राप्त करना भी संभव नहीं होता है। राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के परिणाम बताते हैं कि १८—२० प्रतिशत वृद्ध तो ऐसे होते हैं जिन्हें अपने आखरी समय में समुचित चिकित्सा सुविधाएँ भी प्राप्त नहीं हो पाती हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं से सर्वाधिक वंचितों की तलाश की जाए तो बुजुर्गौं का, विशेषकर बुजुर्ग महिलाओं का नाम सबसे ऊपर होगा। स्वास्थ्य बीमा भी अभी तक बुजुर्ग महिलाओं एवं पुरुषों से दूर ही रहा है।

अंत में हमें हमारे बुजुर्गौं को भार स्वरूप लेने के स्थान पर उन्हें अनुभवों के खजाने के रूप में लेना होगा। उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने तथा परिवार के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जैसे—जैसे वे अपने जीवन के संध्याकाल की दिशा में बढ़ते जाते हैं, उनकी आय अर्जित करने की क्षमता कम होती जाती है, उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ जाती हैं। शारीरिक असमर्थताएँ बढ़ती जाती हैं और वे परिवार के सदस्यों पर दिनोंदिन अधिक निर्भर होते जाते हैं। तमाम तरह की असमर्थताओं को जन्म देने वाली उनकी वृद्धावस्था परिवार एवं समाज को ऐसा अवसर प्रदान करती है कि समाज उनके ऋण को वापिस चुका सकता है। जहाँ परिवार को उनकी समुचित देखभाल करना ही चाहिए, उन्हें बोझ ना समझते हुए उनके अनुभवों का लाभ लेना चाहिए एवं समाज को उनके लिए समुचित स्वास्थ्य सुविधाओं को उपलब्ध कराना चाहिए। अनेक वृद्ध बढ़ती आयु के साथ स्मृति विनाश पार्किन्संस बीमारी जिसमें वे अपने शरीर पर नियंत्रण खो देते हैं, जैसी गंभीर बीमारियों के शिकार हो जाते हैं और उन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है जो कुछ परिवारों के लिए प्रदान करना संभव नहीं होता है। सरकार को ऐसे बुजुर्गों के लिए देखभाल की विशेष व्यवस्था करना चाहिए। बदलती सामाजिक परिस्थितियों में बुजुर्गौं की आर्थिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की पूर्ति जैसे कार्यों को सरकारों को अपने मूलभूत दायित्वों में शामिल करना होगा। हर वर्ष हम २१ सितम्बर को ‘एल्जाइमर्स’ डे स्मृति विनाश रोगियों के दिवस के रूप में मनाते हैं, इसको हमें विस्तृत स्वरूप देकर बुजुर्ग दिवस के रूप में मनाना चाहिए, बुजुर्गौं के लिए चिकित्सा शिविरों का आयोजन करना चाहिए, इस तरह के शिविर ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से आयोजित करना चाहिए, इनमें महिला बुजुर्गौं की उपस्थिति अधिक से अधिक हो सके, इस हेतु प्रयास करना चाहिए, क्योंकि अनेक सर्वेक्षणों के माध्यम से यह ज्ञात हुआ है कि महिला बुजुर्गौं की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं की अधिक उपेक्षा होती है।

--

साभार - साप्ताहिक उपग्रह - रतलाम, दीपावली विशेषांक 2010.

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: रामप्रताप गुप्ता का आलेख - देश में बुजुर्गों की बढ़ती संख्या और उनकी बढ़ती उपेक्षा
रामप्रताप गुप्ता का आलेख - देश में बुजुर्गों की बढ़ती संख्या और उनकी बढ़ती उपेक्षा
http://lh6.ggpht.com/_t-eJZb6SGWU/TRGMxgNCdMI/AAAAAAAAJWo/L2OdvMi7gIQ/elderly%20people%20and%20their%20need%5B2%5D.jpg?imgmax=800
http://lh6.ggpht.com/_t-eJZb6SGWU/TRGMxgNCdMI/AAAAAAAAJWo/L2OdvMi7gIQ/s72-c/elderly%20people%20and%20their%20need%5B2%5D.jpg?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2010/12/blog-post_22.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2010/12/blog-post_22.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content