प्रमोद भार्गव का आलेख - भूमि की बिगड़ती सेहत

SHARE:

हमारे देश में रोटी और रोजगार का सबसे बड़ा संसाधन बनी भूमि की गुणवत्ता अथवा उसकी बिगड़ती सेहत को जांचने का अब तक कोई राष्‍ट्रव्‍यापी पैमाना ...

हमारे देश में रोटी और रोजगार का सबसे बड़ा संसाधन बनी भूमि की गुणवत्ता अथवा उसकी बिगड़ती सेहत को जांचने का अब तक कोई राष्‍ट्रव्‍यापी पैमाना नहीं है। जबकि देश की कुल आबादी में से सत्तर फीसदी आबादी कृषि और प्राकृतिक संपदा से रोजी-रोटी जुटाती है। भूमि की उर्वरता और क्षरण को लेकर टुकड़ों में तो आकलन आते रहते हैं लेकिन इस स्‍थिति की वास्‍तविक हालत का खुलासा करने वाला कोई एक मानचित्र देश की जनता के सामने पेश नहीं किया गया। हालांकि अशासकीय स्‍तर पर इस मांग की आपूर्ति अहमदाबाद की संस्‍था ‘स्‍पेस एप्‍लिकेशन सेंटर' ने सत्रह अन्‍य इसी काम से जुड़ी एजेंसियों के साथ मिलकर की है। जमीन की सेहत से जुड़ा यह शोध बताता है कि आधुनिक व औद्योगिक विकास, जल व वायु प्रदूषण और कृषि भूमि में खाद व कीटनाशकों के बढ़ते चलन ने किस तरह से उपयोगी भूमि को रेगिस्‍तान में तब्‍दील करने का सिलसिला जारी रखा हुआ है। यदि जमीन की गुणवत्ता और क्षरण रोकने के उपाय राष्‍ट्रीय स्‍तर पर जल्‍दी एक अभियान के रुप में शुरु नहीं किये गये तो देश की एक बड़ी आबादी आजीविका का संकट के दायरे में तो आएगी ही देश की जैव-विविधता भी खतरे में पड़ जाएगी।

‘स्‍पेस एप्‍लिकेशन सेंटर' द्वारा किए शोध के मुताबिक राजस्‍थान का 21.77 प्रतिशत, जम्‍मू और कश्‍मीर का 12.79 प्रतिशत और गुजरात में 12.72 प्रतिशत क्षेत्र रेगिस्‍तान में बदल चुका है। मध्‍यप्रदेश में चंबल के बीहड़ पिछले 60 साल में 45 प्रतिशत बढ़े हैं। महाराष्‍ट्र में विदर्भ और उत्तरप्रदेश व मध्‍यप्रदेश में बुंदेलखण्‍ड क्षेत्र की कृषि का अनावृष्‍टि के कारण तेजी से क्षरण हो रहा है। वहीं भू-जल के बेतहाशा दोहन और अल्‍पवर्षा के चलते खेतों में दस सेंटीमीटर नीचे एक ऐसी कठोर परत बनती जा रही है जो कालांतर में फसल की उत्‍पादन क्षमता को प्रभावित करेगी।

रेगिस्‍तान के विस्‍तार की तह में अतिवृष्‍टि और अनावृष्‍टि का चक्र तो है ही 1999 के बाद से मानसून की दगाबाजी ने उपजाऊ भूमि को बंजर भूमि में बदल देने का काम किया है। इन्‍हीं वजहों से देश के पश्‍चिमी और उत्तरी क्षेत्र भूमिक्षरण के प्रभाव में आए। जंगलों का विनाश, चरनोई की भूमि को कृषि व आवासीय भूमि में तब्‍दील करना और एक तरह की फसल पैदा करने के बढ़ते चलन से भूमि की सेहत बिगड़ी। कुछ ऐसी ही वजहों के चलते बर्फीली वादियों से लेकर घने वनों वाले क्षेत्र भी फैलते रेगिस्‍तान की गिरफ्त में आ गए।

जिस हरित क्रांति के बूते पंजाब को भारत का अनाज भंडार का दर्जा हासिल हुआ, वही पंजाब आज रासायनिक खादों का बेतहाशा उपयोग करने के कारण बड़ी तादाद में अपनी कृषि भूमि बरबाद कर चुका है। देश के कुल कृषि क्षेत्र का 1.5 प्रतिशत भाग पंजाब के हिस्‍से में है जबकि देश में कीटनाशकों की कुल खपत का 18 फीसदी उपयोग पंजाब के किसान करते हैं। इसी तरह पंजाब के मालवा क्षेत्र का कपास क्षेत्र पूरे पंजाब का केवल 15 फीसदी है, जबकि यहां पंजाब के कुल कीटनाशकों की खपत 70 फीसदी है। पंजाब के मालवा का क्षेत्र देश के कुल भू-भाग का मात्र 0.5 भाग है, जबकि यहां देश में कुल खपत होने वाले कीटनाशकों की 10 फीसदी खपत होती है। जिस भांखड़ा नांगल बांध को हम पंजाब की उन्‍नत खेती का आधार मानते हैं, इस बांध से जल रिसाव के चलते पंजाब की अब तक ढ़ाई लाख हेक्‍टेयर कृषि भूमि दलदल में तब्‍दील हो चुकी है।

कृषि के आधुनिकीकरण व यांत्रिकीकरण ने भी भूमि की सेहत को बिगाड़ने का काम किया है। इस बाबत ग्‍वालियर चंबल क्षेत्र में किए गए एक शोध के मुताबिक इस अंचल की भूमि में दो तरह के विकार पैदा हुए हैं। एक कृषि भूमि की सतह में दस सेंटीमीटर नीचे एक कठोर परत (हार्ड-लेयर) बन गई है। दूसरे, भू-गर्भ में करीब एक सौ मीटर की गहराई पर पानी से भरी रहने वाली जगह (पोर-स्‍पेस) रिक्‍त पड़ी है। क्षेत्रीय पर्यावरण में आए ये परिवर्तन भू-गर्भीय अथवा सतह पर भूकंप जैसी हलचल की वजह भी बन सकते हैं। डिस्‍कवरी चैनल द्वारा इस क्षेत्र में किए गए एक अध्‍ययन के प्रस्‍तुतिकरण ने भी दावा किया है कि चंबल व ग्‍वालियर अंचल में तेजी से रेगिस्‍तान का विस्‍तार हो रहा है।

इस अध्‍ययन से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा परंपरागत खेती को नकारने से हुआ। पहले हलों से खेतों की जुताई होती थी लेकिन अब हैरो, कल्‍टीवेटर और प्‍लाऊ जैसे उपकरणों से जुताई हो रही है। ये जमीन को आठ से बारह सेंटीमीटर तक गहरा जोत कर भूमि की उपरी परत को उधेड़ कर पलट देते हैं। नतीजतन मिट्‌टी सूख कर शुष्‍क होती जा रही है और वहीं इसके नीचे की परत कठोर। यह परत अब इतनी कठोर हो गई है कि खेतों की मिट्‌टी का आनुपातिक कुदरती जैविक समीकरण ही गड़बड़ा गया है।

इस अंचल की उस कृषि भूमि में ये लक्षण देखने में आए हैं जो सबसे ज्‍यादा उपजाऊ मानी जाती है। ये इलाके तंवरघार के मैदानी खेत, चंबल के पठारी क्षेत्र और डबरा-भितरवार की उपजाऊ पट्‌टी हैं। इसी क्षेत्र में जल संकट भी बढ़ता जा रहा है। जबकि इस क्षेत्र में नदियों और नहरों का जाल बिछा होने के बावजूद जल संरक्षण नहीं हो पा रहा है। कठोर परत जल को नीचे नहीं उतरने देती। इस कारण अतिरिक्‍त पानी बहकर बरबाद हो जाता है। कुछ ऐसी ही वजहों से भूमि व जल संरक्षण की खेत व तालाब जैसी वैज्ञानिक योजनाएं भी अवैज्ञानिक साबित हो रही हैं। मिट्‌टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है। इसके विपरीत फसल को नुकसान पहुंचाने वाली खरपतवार नष्‍ट नहीं हो रही।

इन हालातों से भी बड़ा संकट इस क्षेत्र में यह उपजा है कि वे स्‍थल जो कुछ समय पहले तक पानी से लबालब भरे रहते थे, वे तीस से एक सौ मीटर तक खाली हो चुके हैं। ये खाली स्‍थान (एक्‍वीफर) अब प्राकृतिक भू-गर्भीय संरचना के लिए संकट बन रहे हैं। वैज्ञानिक तो यहां तक आशंका जता रहे हैं कि ये विकराल स्‍थितियां भूकंप को भी आमंत्रण दे सकती हैं। कठोर परत के वजूद में आ जाने से जलभरण के सभी उपाय खारिज होते चले जा रहे हैं।

इधर चंबल क्षेत्र में भूमि के लगातार बिगड़ रहे पर्यावरण ने बीहड़ों के विस्‍तार का ऐसा भयावह सिलसिला जारी रखा हुआ है जो गांव के गांव लीलता जा रहा है। इस अंचल के भिण्‍ड, मुरैना और श्‍योपुर जिलों में हर साल पन्‍द्रह सौ एकड़ भूमि बीहड़ में तब्‍दील हो रही है। इन जिलों की कुल भूमि का 25 फीसदी हिस्‍सा बीहड़ों का है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक चंबल नदी घाटी क्षेत्र में 3000 वर्ग किलोमीटर इलाके में बीहड़ों का विस्‍तार है। इन तीनों जिलों के क्षेत्र में जितनी भी छोटी-बड़ी नदियां बहती हैं, वे जैसे बीहड़ों के निर्माण के लिए अभिशप्‍त हैं। चंबल में 80 हजार, कुआंरी में 75, आसन में 2036, सीप में 1100, बैसाली में 1000, कूनों में 8072, पार्वती में 700, सांक में 2122 और सिंध में 2032 हेक्‍टेयर बीहड़ हैं। बीते आठ सालों में करीब 45 प्रतिशत बीहड़ों में वृद्धि दर्ज की गई है। इन बीहड़ों का जिस गति से विस्‍तार हो रहा है, उसके मुताबिक 2050 तक 55 हजार हेक्‍टेयर कृषि भूमि बीहड़ों में तब्‍दील हो जाएगी। नतीजतन करीब दो हजार आबाद गांव बीहड़ लील लेंगे। इन बीहड़ों का विस्‍तार एक बड़ी आबादी के लिए विस्‍थापन का संकट पैदा करेगा।

जमीन की सेहत अब प्राकृतिक कारणों की तुलना में मानव उत्‍सर्जित कारणों से ज्‍यादा बिगड़ रही है। पहले भूमि का उपयोग रहवास और कृषि कार्यों के लिए होता था, लेकिन अब औद्योगीकरण, शहरीकरण बड़े बांध और बढ़ती आबादी के दबाव भी भूमि को संकट में डाल रहे हैं। जमीन का खनन करके जहां उसे छलनी बनाया जा रहा है, वहीं जंगलों का विनाश करके जमीन को बंजर बनाए जाने का सिलसिला जारी है। जमीन की सतह पर ज्‍यादा फसल उपजाने का दबाव है तो भू-गर्भ से जल, तेल व गैसों के अंधाधुंध दोहन के हालात भी भूमि पर नकारात्‍मक प्रभाव डाल रहे हैं। पंजाब और हरियाणा में सिंचाईं के जो आधुनिक संसाधन हरित क्रांति के उपाय साबित हुए थे, वही उपाय खेतों में पानी ज्‍यादा मात्रा में छोड़े जाने के कारण कृषि भूमि को क्षारीय भूमि में बदलने के कारक सिद्ध हो रहे हैं। दरअसल अलग-अलग क्षेत्रों में भूमि की सेहत अलग-अलग कारणों से प्रभावित हो रही है। जिसकी देशव्‍यापी पड़ताल अब तक नहीं हुई है। धरती की बिगड़ती इस सेहत को मानचित्र पर लाना जरुरी है। जिससे आजीविका के संकट से जूझने जा रही आबादी को बचाने के माकूल उपाय तलाशे जा सकें ?

---

प्रमोद भार्गव

शब्‍दार्थ 49,श्रीराम कॉलोनी

शिवपुरी म.प्र.

pramodsvp997@rediffmail.com

लेखक प्रिंट और इलेक्‍ट्रोनिक मीडिया से जुड़े वरिष्‍ठ पत्रकार है ।

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: प्रमोद भार्गव का आलेख - भूमि की बिगड़ती सेहत
प्रमोद भार्गव का आलेख - भूमि की बिगड़ती सेहत
http://lh3.ggpht.com/_t-eJZb6SGWU/TMO8uTqaeLI/AAAAAAAAJMY/PF1Jol8ipro/pramodbhargav2.jpg?imgmax=800
http://lh3.ggpht.com/_t-eJZb6SGWU/TMO8uTqaeLI/AAAAAAAAJMY/PF1Jol8ipro/s72-c/pramodbhargav2.jpg?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2010/12/blog-post_25.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2010/12/blog-post_25.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content