---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

यशवन्त कोठारी का व्यंग्य आलेख : गाथा कवि सम्‍मेलनों की

साझा करें:

  पिछले दिनों एक शहर के संयोजक नुमा व्‍यक्‍ति का पत्र आया, प्रियवर! दो वर्षों बाद पत्र दे रहा हूं। पिछले वर्ष हम कवि सम्‍मेलन नहीं कर स...

 

पिछले दिनों एक शहर के संयोजक नुमा व्‍यक्‍ति का पत्र आया,

प्रियवर!

दो वर्षों बाद पत्र दे रहा हूं। पिछले वर्ष हम कवि सम्‍मेलन नहीं कर सके। इस बार हमने एक कवियित्री सम्‍मेलन करना तय किया है। कृपया 8-10 कवयित्रियों के नाम पते भेजें। इनकी शक्‍ल ठीक ठाक हो। कुछ मंच पर लटके-झटके दिखा सकें। कविता रद्‌दी हो तो भी चलेगी। गला और चेहरा बढ़िया होना चाहिए। पारिश्रमिक की चिन्‍ता न करें। स्‍वस्‍थ होंगे। ‘इसे कल्‍पना की उड़ान न समझे।'

तो मेरे प्रिय पाठकों। आज के कवि सम्‍मेलन कितने गिर चुके हैं। देखा आपने। सोचिए․․․․․शायद कोई रास्‍ता बाकी हो जो, इस महत्‍वपूर्ण सांस्‍कृतिक ईकाई को बनाये रख सके। यह अकेला उदाहरण नहीं है। कवियों की राजनीति, राजनीतिज्ञों की कविताएं, अफसरों की मिली भगत, मठाधीश कवियों की दादागीरी, अश्लील लतीफे बाजी, सस्‍ती भोंडी हास्‍यास्‍पद रस की कविताएं और उपर से दूसरों की रचनाओं को अपने नाम से सुनाने वाले कवि और कवियित्रियां।

श्रोताओं, आयोजकों, कवियों और सांस्‍कृतिक कर्मियों ने कवि-सम्‍मेलनों को कहां से कहां तक पहुंचा दिया। आइये, जरा विस्‍तार से चर्चा करें।

प्राचीन काल में राज दरबारों में कवि पाये जाते थे। कालिदास विक्रमादित्‍य की सभा में नवरत्‍न थे। उस काल में अन्‍य कवि भी राज्‍याश्रय में थे। यह परम्‍परा मध्‍य युगीन राज दरबारों में भी बराबर चली आई। विद्यापति मिथिला के राजदरबार में थे। रीतिकाल में अनेक कवि राज्‍याश्रय पर जीवित थे।

भक्‍ति काल में काव्‍यपाठ का क्षेत्र मन्‍दिर बने। अप्‍टछाप के कवियों से हिन्‍दी साहित्‍य के विद्यार्थी सुपरिचित हैं। इसी काल में कविता सन्‍तों की वाणी के माध्‍यम से आम आदमी तक पहुंचने लगी।

धीरे धीरे सामन्‍त शाही और राजदरबार नष्ट हुए, मन्‍दिर साम्‍प्रदायिकता से जकड़ गये, कीर्तनकारों ने संतों की वाणी छीन ली।

काव्‍य पाठ शादी ब्याह तक सीमित हो गया। वर से श्‍लोक सुने जाते या कविता सुनी जाती।

फिर आया उन्‍नीसवीं सदी का समस्‍या पूर्ति का दौर इस दौर में हिन्‍दी भाषियों ने सृजन के प्रति उत्‍साह दिखाया, राष्ट्रभाषा के लिए आन्‍दोलन किया गया। इसी दौरान स्‍थान स्‍थान पर काव्‍य गोष्ठियां होने लगी।

भारतीयों ने इन काव्‍य गोष्ठियां में न केवल अंग्रेजी सरकार का विरोध शुरु किया, वरन वे राष्ट्रीय चेतना का संवाहक बन गयी। लेकिन अभी तक कविता जन साधारण से दूर थी और केवल साधन सम्‍पन्‍न घरों तक पहुंच पाई थी।

वास्‍तव में विराट हिन्‍दी कवि सम्‍मेलनों की कल्‍पना उर्दू के मुशायरों की लोकप्रियता देखकर की गई थी। मुशायरों का जन्‍म भी राजदरबारों में हुआ था, लेकिन राजदरबारों के हास के साथ ये जुड़ गये। मजाहिया ‘हास्‍य' के लिए इन मुशायरों में कोई स्‍थान नहीं होता था, इस कार्य हेतु हजल नामक अन्‍य मजलिस होती थी।

इसी दौरान ब्रजभाषा, अवधी और रामस्‍यापूर्ति के कवि सम्‍मेलनों का आयोजन शुरु हुआ। 60-70 वर्ष पूर्व से कवि सम्‍मेलनों का यह सिलसिला चला। जयपुर के स्‍वर्गीय श्री हरि शास्‍त्री ने समस्‍या पूर्ति के क्षेत्र में बड़ा नाम कमाया। वे आशु-कवि के रुप में विख्‍यात हुए। इलाहाबाद इस काल में राजनैतिक जागरण का ही केन्‍द्र नहीं था, वहां पर साहित्‍य से सरोकार भी था। इस काल में ‘1920 से 35-40' समस्‍याओं के रुप में चरखा, खादी,शहीद, कैदी, विधवा आदि विषय दिये जाने लगे।

मुशायरे की परम्‍परा के अनुरुप कवि सम्‍मेलन का अध्‍यक्ष कोई बड़ा कवि या विद्वान होता था, आजकल की तरह कोई नेता या धन्‍ना सेठ नहीं। उस काल में लाला भगवानदीन, श्रीधर पाठक, अयोध्‍या सिंह उपाध्‍याय, जैसे कवि थे। धीरे धीरे समय बदला। समस्‍यापूर्ति के कवि सम्‍मेलन बंद हो गये। ब्रज, अवधी और उर्दू का ह्रास हुआ।

छायावादी युग

कवि सम्‍मेलनों का स्‍वरुप निखरने लगा। छायावाद काल में छायावादी कवियों तथा सुमित्रानन्‍दन पंत, सूर्यकान्‍त त्रिपाठी ‘निराला', महादेवी वर्मा, मैथिलीशरण गुप्‍त, राम कुमार वर्मा, भगवती चरण वर्मा, सुभद्रा कुमारी चौहान, बालकृष्ण चौहान, बाल कृष्ण शर्मा ‘नवीन' जैसे कवि मंच पर आए और छा गये ।इन कवियों के काव्‍य के लघु संस्‍करण भी कम दरों पर बाजार में मिलने लगे। निराला को मंच पर जमने में काफी मेहनत करनी पड़ी। लेकिन उनका दबंग व्‍यक्‍तित्‍व, शारीरिक सौष्ठव, स्‍वर की गंभीरता ने उन्‍हें सफल बनाया। उनकी जूही की कली, राम की शक्‍ति पूजा आदि कविताओं ने खूब वाह वाह लूटी।

राष्ट्रीय भावना का प्रसार

इसी काल में राष्ट्रीय भावनाओं से ओतप्रोत कवि सम्‍मेलनों का शुभारम्‍भ हुआ। राष्ट्रीय जागरण के इस दौर में एक भारतीय आत्‍मा माखन लाल चतुर्वेदी की कविताओं ने कहर बर्पा कर दिया। इसी दौरान रामधारी सिंह दिनकर मंच पर आये और लम्‍बे समय तक गरजते रहे। इसी काल में मधुशाला को लेकर अमर गायक डॉ․ हरिवंश राय बच्‍चन मंच पर आये और तीन दशक तक कवि सम्‍मेलनों में छाये रहे। बच्‍चन के साथ ही नरेन्द्र, सुमित्रा कुमारी और रामेश्‍वर शुक्‍ल ‘ अंचल' भी मंच पर जमें। गिरिजा कुमार माथुर, शिवमंगल सिंह ‘सुमन' और नीरज आये नीरज सर्वाधिक लोकप्रिय हुए। गीत कविता लेकर जब भवानी प्रसाद मिश्र मंच पर चढ़े तो कवि सम्मेलन सफलता के शिखर पर था और रस सिद्ध श्रोता कवि कविता का आनन्‍द खूब समझने लगे थे।

छायावाद के चढ़ाव के समय हिन्‍दी का काव्‍य मंच पुराने कवियों के साथ में था, और सांध्‍य काल में गीतकार जमने लग गये थे। बच्‍चन,नेपाली,अंचल, सुमन, नीरज आदि कवियों ने छायावाद का माधुर्य, प्रणय गीतों की मादकता, गले की मिठास आदि का ऐसा सम्‍मिश्रण किया कि श्रोता मंत्र मुग्‍ध हो जाते थे।

वीर रस का सैलाब

राष्ट्रीय कविताओं के इस दौर में वीर रस को भी बहुत सुना गया। श्याम नारायण पाण्‍डे की हल्‍दी घाटी, राजस्‍थानी कवि मेघराज मुकुल की सेनानी, दिनकर की ओजस्‍वी कविताएं आदि ने घोर गर्जना का दौर चलाया। सोहन लाल द्विवेदी ने राष्ट्रीय विचारों की गांधी वादी कविताओं के कारण ख्‍याति पाई।

नई कविता और नव गीत

अब आया नई कविता और नव गीत का दौर ठाकुर प्रसाद सिंह वंशी और मादल लेकर मंच पर चढ़े। छायावाद के बाद प्रगतिवाद और फिर नई कविता का समय था यह। बिहार में आरसी प्रसाद सिंह, जानकी वल्‍लभ शास्‍त्री और हंस कुमार तिवारी मंचों पर जम गये थे।

प्रयोगवाद के काल में भवानी प्रसाद मिश्र, नागार्जुन, बालकृष्‍ण राव, केदार नाथ सिंह आदि प्रसिद्ध हुए।

कवि सम्‍मेलनों के विकास को काल क्रमानुसार देखें तो, 1932 से 40 तक का काल आरम्‍भिक काल था। 1940 से 60 तक का काल विकास का काल और 60 के बाद मंचों पर उमाकान्‍त मालवीय, माहेश्‍वर तिवारी, शांति सुमन, बुद्धिनाथ मिश्र, सोम ठाकुर, आत्‍मा प्रकाश शुक्‍ल, बाल कवि बैरागी आदि आए और इनके साथ ही आई हास्‍य-व्यंग्य की एक टोली, जिसने कवि सम्‍मेलनों को हास्‍यास्‍पद रस तक पहुंचा दिया।

हास्‍य व्‍यंग्‍य का बोलवाला

आज की स्‍थिति भिन्‍न है। हास्‍य व्‍यंग्‍य की सतही रचनाओं के कारण कवि सम्‍मेलनों की गिरावट हुई है। कवि सम्‍मेलनों के विकास काल में हास्‍य व्यंग्यकार मर्यादा का ध्‍यान रखते थे, इसी काल में पदमश्री गोपाल प्रसाद व्‍यास और पद्‌मश्री काका मंच पर अवतरित होकर जम गये। लेकिन सन्‌ 60 के बाद वाले दौर में इन हास्‍य कलाकारों की ऐसी बाढ़ आई कि सारी मर्यादाएं, सीमाएं,बह गई, रह गई केवल हास्‍यास्‍पद रस की चाहें। उन दिनों अश्‍लील और भदेस रचनाओं को पढ़ना मुश्‍किल होता था, लेकिन कवि सम्‍मेलनों की बाढ़ में उफन कर ये ही कवि सबसे उपर आये। हास्‍य व्‍यंग्‍य के इन कवियों में शैल चतुर्वेदी, ओम प्रकाश आदित्‍य, माणिक वर्मा, काका हाथरसी, जैमिनी हरियाणवी, अल्‍हड़ बीकानेरी आदि कवि प्रमुख हो गये।

इसी दौर में राजस्‍थानी कविताओं के लिए विश्‍वनाथ शर्मा विमलेश और कन्‍हैयालाल सेठिया को हमेशा याद किया गया। बाद में सुरेन्‍द्र शर्मा भी अपनी चार लाइनों के साथ लाइन में लग गये। रामरिख मनहर लतीफों के बल पर जम गये।

हास्‍य से कुठाराघात

पिछले महायुद्ध के समय कवि सम्‍मेलन युद्धकोष में चंदा करने के लिए हुए थे। बाद में 1962, 65 व 71 की लड़ाई के दौरान भी कवि सम्‍मेलनों का यही प्रयोजन रहा। नगर नगर में क्रांति हो गयी, एक नया धनाढ्‌य वर्ग विकसित हुआ, और यहीं से छपने वाली कविता, मंच की कविता से अलग हो गयी। हिन्‍दी कवि सम्‍मेलनों का विशेष नुकसान हास्‍य रस के कवियों ने किया। कवि कुरूचिपूर्ण और अश्‍लील होने लगे। कवियित्रियों को साथ लाने लगे।

गद्य का आगमन

इस बीच मंच पर गद्य पाठ का दौर भी शुरू हुआ है, जो एक शुभ संकेत है। शरद जोशी ने इस दौरान मंचों से नव व्‍यंग्‍य का पाठ करके काफी सफलता पाई है। के․ पी․ सक्‍सेना ने भी गद्य पाठ में जोर आजमाइश की है। कवि-सम्‍मेलनों में अब गद्य पाठ भी शामिल होने लगा है।

मूर्ख, महामूर्ख सम्‍मेलन

हर होली पर मूर्ख, महामूर्ख सम्‍मेलन भी होने लगे हैं, जिनमें हास्‍य व्‍यंग्‍य की कविताओं के अतिरिक्‍त चुटकलेबाजी भी खूब होती है। विशेष रुप से हास्‍य व्‍यंग्‍य का एक गद्य पद्य सम्‍मेलन बंबई में चकल्‍लस के नाम से आयोजित किया जा रहा है। बंबई के एक प्रकाशक विक्रेता ने इस के कैसेट बनाकर बिक्री करने का नया प्रयोग भी शुरु किया है।

आज के कवि-सम्‍मेलनों को देखकर कौन कह सकता है कि ये सरस्‍वती की साधना के समागम हैं। आज किसी सम्‍मेलन में सभी रसों का भाव नहीं है। हास्‍य व्‍यंग्‍य के अलावा श्रोता जीवन से जुड़ने वाली कविता चाहता है, जो उसे नहीं मिल पाती।

कविता शब्‍द ब्रहम्‌ की कला है और नाद सौन्‍दर्य से ओतप्रोत, कवि का मुख उसे वाणी देता है और बस-यदि नाद सौन्‍दर्य है तो कविता रूचिकर होगी ही।

हिन्‍दी के विकास में कवि सम्‍मेलन आज भी बहुत कुछ कर सकते हैं यदि वे दलबन्‍दी, गुटों की राजनीति, छीना झपटी से उपर उठ जायें तो।

आयोजन की अर्थलीला

कवि सम्‍मेलनों के लिए शहर, कस्‍बों में एक नवीन वर्ग में विकसित हुआ है, जो आयोजनकर्ता है। इन आयोजकों में से अधिकांश नव धनाढ्‌य वर्ग से आते हैं। ये वे लोग हैं जो अपनी अंगुली में साहित्‍य का नग भी पहनना चाहते हैं।

आजकल एक कवि सम्‍मेलन का खर्च 20-30 हजार से लगाकर 50-60 हजार तक का होता है। पांच राष्ट्रीय स्‍तर के कवियों तथा 5 स्‍थानीय कवियों का पारिश्रमिक, तीन तारा होटलों का खर्च, शराब आदि का व्‍यय कम से कम 15-20 हजार आता है।

इसके आयोजक चाहे टिकट लगाए या चन्‍दा करें या स्‍मारिका छपाये, इतना धन इकट्‌ठा करना अनिवार्य है। इस एकत्रित धन में से 60-70 प्रतिशत उसी सम्‍मेलन में व्‍यय हो जाता है, शेष से साल भर अपनी संस्‍था, अपनी पत्रिका आदि निकाली जाती है या फिर अपनी अटारी पर एक मंजिल और चढ़ा ली जाती है। कई बार कवियों को पहले से तय राशि के बजाय केवल आश्‍वासन मिलते हैं लेकिन कवि भी सतर्क हो गये हैं, अतः ऐसा कम होता है।

नव धनाढ्‌य वर्ग के आयोजक अध्‍यक्ष,मुख्‍य अतिथि,संरक्षक, स्‍वागत-कर्ता जैसे पदों पर अपने धनाढ्‌य मित्रों को रखकर चन्‍दा प्राप्‍त करते है।

दूसरी ओर कवि सम्‍मेलनों का संयोजक संचालन हेतु भी कवि विशेषज्ञ के रुप में मिलते है। ये कवि अपने साथ पूरी बारात लेकर चलते है, आप केवल बजट बता दें, कवियों को निमंत्रण से लगाकर बाकी की सब व्‍यवस्‍था ये संचालक कवि कर देंगे। हां, कवयित्रियों के लिए आपको विशेष रुप से लिखना होगा।

सामान्‍य राष्ट्रीय स्‍तर के कवि का पारिश्रमिक 2500 से 10,000 रू․ तक है। अधिकांश कवि प्रथम श्रेणी या हवाई जहाज का किराया, तीन सितारा होटलों में आवास तथा खाना-पीना ‘या पीना-खाना' लेते हैं। बम्‍बई का चकल्‍लस, मध्‍य प्रदेश का टेपा सम्‍मेलन, जयपुर का मूर्ख सम्मेलन व गीत चांदनी आदि प्रमुख आयोजन हैं, जिनका बजट ज्‍यादा रहता है।

हूटिंग हिन्‍दीवाद

कवि- सम्‍मेलनों का सबसे दिलचस्‍प पहलू है ‘हूटिंग' का कार्यक्रम। कई बार पूरी कविता से जितना आनन्‍द, रस प्राप्‍त नहीं होता उससे ज्‍यादा आनन्‍द हूटिंग से आ जाता है। कई लोग कवि-सम्‍मेलनों में मात्र हूटिंग करने के लिए ही जाते हैं। ऐसे ही हूटिंग विशेषज्ञ हैं श्री झपकलाल। ये महिला कवियों के मामले में एक्‍सपर्ट हैं, करना कुछ नहीं पड़ता, ज्‍योंही कवयित्री कविता शुरू करती है, वे कहते हैं-‘किस कवि की है यह कविता' या' अमुक कवि की है और बेचारी कवयित्री टांय-टांय फिस्‍स। लेकिन मंचीय कवियों की मान्‍यता है कि हूटिंग सड़े अण्‍डों, टमाटरों और जूतों-चप्‍पलों से तो बेहतर है।

कई अनुभवी हूटर अपने साथ माइक भी लाते हैं। वास्‍तव में ये अधिकांशतया असफल स्‍थानीय कवि होते है।

ऐसे लोग मूंगफली कुतरते हुए घात में रहते हैं। ज्‍योंही कवि कविता शुरू करता है, हूटर उसे किसी न किसी लोकगीत से जोड़कर और ज्‍यादा जोर से गाना शुरू कर देते है। बस कवि की सिट्‌टी पिट्‌टी गुम !

ज्‍यादा हूटर विश्‍वविद्यालयों में पाये जाते हैं। समानान्‍तर आयेजक हूटर्स को जानबूझकर कवि-सम्‍मेलन में भेजते हैं ताकि कुछ लोगों को उखाड़ सके। इसके विपरीत कई कवि अपने साथी चमचों को श्रोताओं में फैलाकर वाह ! वाह !! कराते हैं या ‘अमुक कविता सुनाओ' का नारा लगवाते हैं।

कुल मिलाकर हूटिंग एक मान्‍यता-प्राप्‍त कार्यक्रम है, जो कवि सम्‍मेलनों में चलता रहता है।

------

यशवन्‍त कोठारी, 86,

लक्ष्‍मी नगर, ब्रह्मपुरी बाहर,

जयपुर - 2,

फोन - 2670596

ykkothari3@gmail.com

मो․․09414461207

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 1
रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4019,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,111,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2984,कहानी,2239,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,534,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,94,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,344,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,66,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,14,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,242,लघुकथा,1244,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2002,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,705,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,790,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,80,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,201,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,75,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: यशवन्त कोठारी का व्यंग्य आलेख : गाथा कवि सम्‍मेलनों की
यशवन्त कोठारी का व्यंग्य आलेख : गाथा कवि सम्‍मेलनों की
http://lh4.ggpht.com/_t-eJZb6SGWU/TRWDmkHQmaI/AAAAAAAAJXI/VM2Ve6HboAU/Image.jpg?imgmax=800
http://lh4.ggpht.com/_t-eJZb6SGWU/TRWDmkHQmaI/AAAAAAAAJXI/VM2Ve6HboAU/s72-c/Image.jpg?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2011/02/blog-post_09.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2011/02/blog-post_09.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ