कहानी संग्रह - आदमखोर - 4 - उर्मि कृष्ण की कहानी : संघर्ष पथ

SHARE:

कहानी संग्रह आदमखोर (दहेज विषयक कहानियाँ) संपादक डॉ0 दिनेश पाठक ‘शशि’ प्रथम संस्करण : 2008 मूल्य : 150 प्रकाशन : जाह्नवी प्रकाशन व...

kahani sangraha aadamkhor dahej vishyak kahaniya dinesh pathak shashi

कहानी संग्रह

आदमखोर

(दहेज विषयक कहानियाँ)

संपादक

डॉ0 दिनेश पाठक ‘शशि’

प्रथम संस्करण : 2008

मूल्य : 150

प्रकाशन : जाह्नवी प्रकाशन

विवेक विहार,

शाहदरा दिल्ली-32

शब्द संयोजन : सागर कम्प्यूटर्स, मथुरा

----

कहानी

संघर्ष पथ

डॉ. उर्मि कृष्ण

घर के पिछवाड़े बहने वाले नाले के जल पर इति की दृष्टि टिक गई, हाथ में था एक पत्र, यह उसका नियुक्ति पत्र था। आज वह सिटी मजिस्ट्रेट नियुक्त हुई थी। काश! आज वह दौड़कर माँ से लिपट सकती। दादी की गोद में मचल सकती, दीदी, भैया सबसे दौड़-दौड़ कर यह शुभ समाचार सुना सकती। इस घर में चौथी कन्या के रूप में जब उसका आगमन हुआ, तब तीन दिन घर में चूल्हा नहीं जला, दादी ने सिर पीट लिया, दादा ने पहले से बुलाकर बैठाए गए बैण्ड बाजे वाले सिर धुन-धुनकर लौटाए। उनके अनुसार भगवान इतनी निर्दयी थोड़े हो सकता है फिर पंडित जी ने पत्र देखकर इस बार बहू को लड़का होने की बात कही थी, नानी, ताई, अड़ोसन-पड़ोसन सबने मातमी सूरत से उसे देखा। ‘‘बेटा बनकर आ जाती,‘‘ ये शब्द उसे कॉलेज में पढ़ने आ गई, तब तक सुनने को मिलते रहे, ये शब्द कान में पड़ने तब बंद हुए, जब बोलने वालों को वह स्वयं झिड़कने लगी। दूध की जगह पानी और फल की जगह सूखी रोटियां खा-खाकर ‘इति’ पलने लगी।

वही भोला बचपन, वही किलकारी, वही ताता-थैया। इति बढ़ने लगी इति की बाल सुलभ चेष्टाओं पर कोई ध्यान नहीं देता। माँ काम में व्यस्त रहती, पिता तो उसे देखते तक नहीं। बस, देवी के आगे बैठे घंटों पाठ करते रहते। एक पुत्र की प्रबल कामना, इस ढलती उम्र में भी बनी हुई थी, पुत्र बिना कैसे होगा जीवन का उद्धार, कैसे होगी बुढ़ापे की नैया पार और कैसे होंगे स्वर्ग के अधिकारी श्राद्ध-तर्पण के बिना हाय री किस्मत! चार बेटियों में एक भी लड़का नहीं, ये किसे बांधे राखी? किसे करें भैया दूज का टीका? किसकी उतारेंगी आरती? कौन उन्हें ससुराल लेने जाएगा? कौन मौसर में उनके यहां खड़ा होगा? उम्र के साथ पिता का दुःख भी बढ़ता जा रहा था। इति ने कमरे की ओर गर्दन घुमाई, पिता का चित्र सामने टंगा था। केवल एक बरस पहले तक पिता इस घर में चलते-फिरते थे। जिस माँ से दो क्षण बात करने का समय नहीं था, उसके बिना दो दिन नहीं निकाल सके। इति फिर स्मृतियों में लौट गई। आखिर दुःख हल्का करने के लिए दादी ने कुटुंब का एक लड़का माता-पिता की गोद में डाल दिया, इस छोटे भाई को देख इति खुश नहीं हुई, ईर्ष्या से भर उठी। जब भैया गोद लिया गया, उस समय इति की उम्र मात्र छः साल थी, इस नन्हीं उम्र में बहुत समझदार होते हुंए भी कई बार वह दुष्ट चेष्टाएं कर जाती, ईर्ष्यावश भैया का दूध चुपके से पी जाती। जब भी उसके नये कपड़े आते, उन्हें फाड़ डालती। कई बार कैंची से वह भैया के टेढ़े-मेढ़े बाल भी काट देती थी। इस तरह की हरकतों पर इति की जमकर पिटाई होती, बेचारी छोटी थी। हर कोई उसे पीट देता। माँ-पिता, दादी, भैया, सबका क्रोध जहाँ ठहरता, इति ही रहती। शरारत करके वह सदा इसी नाले के पास झाड़ी में छिप जाया करती।

इति को बड़ी लापरवाही से छः वर्ष की उम्र में पढ़ने बैठाया गया। लड़की की जात है जमाना बदल रहा है, इतना तो पढ़ा ही दो कि चिट्ठी-पत्री लिख सके, पिता के सारे दोस्त मित्र जब उनकी नाक में दम करने लगे, तब उन्होंने इति को पढ़ने बैठा ही दिया। पढ़ने में वह बहुत तेज थी। कई व्यवधानों के बावजूद वह कॉलेज पहुँच गई। उसकी पढ़ाई के खर्चे का भार वह जिस स्कूल, कॉलेज में पढ़ती वे उठाने को तैयार रहते। कुशाग्र बुद्धि इति कभी-किसी कक्षा में दूसरे नंबर पर तो रही ही नहीं, सदा प्रथम आती थी।

छोटी होने के कारण घर भर उस पर हुक्म चलाता रहता। एक के बाद एक काम उसे निपटाने पड़ते। सबसे ज्यादा क्रोध इति को तब आता, जब उसे पिता के पूजा-पाठ की तैयारी करनी पड़ती या छोटे भाई का काम करना पड़ता। दादी साफ शब्दों में कहती थी।

‘‘भाई तो माँ-बाप को कमाई खिलाएगा। तुम लड़कियां सिवाय भार के और क्या बनोगी?’’

‘‘दादी, ऐसी बात दुबारा जुबान पर न लाना’’ एक दिन क्रोध से भरी इति ने दादी को खूब झिड़का था।

‘‘हाँ, हाँ तू बड़ी लाटसाब बनेगी ना। बड़ी आई दादी को झिड़कने वाली।’’

‘‘दादी, मैं जो कुछ भी बनूंगी, उसे देखने के लिए तू जिंदा रहना।’’ बड़ा गर्व भरा और आहत स्वर था इति का।

आज दादी होती तो वह सबसे पहले उसको यह शुभ समाचार सुनाती। इति की आँखों से दो आँसू टपक पड़े।

परिवार की उपेक्षा ने इति को एक संघर्षशील नारी बना दिया था। अब वह घर-बाहर, सभी से पंगा लेती और जीत कर रहती, वह हर जगह अग्रणी रहती। क्या कॉलेज का चुनाव, क्या सखी-सहेलियों की गोष्ठी, क्या कोई उत्सव-आयोजन, घर में अब उनकी उपेक्षा घटने लगी थी। अपनी पढ़ाई और बाहरी काम के साथ-साथ वह अपनी माँ के काम में पूरा-पूरा हाथ बंटाती थी, माँ के ऊपर घर का जितना बोझ था, उससे वह बहुत दुखी भी रहती थी कई बार बहस करके उसने भाई और पिता से कहा था कि वे माँ को मशीन न समझें। रात-बिरात कभी भी आकर उस पर हुक्म न चलाएं। अपना काम कुछ तो स्वयं भी कर लिया करें।

उसकी इस बात पर भाई तो लड़ने को आ जाता, पर पिता अब कुछ समझने लगे थे। अब उन्हें अपनी इस चौथी कन्या का महत्व समझ में आने लगा था। उसकी कर्मठता, निश्छल-चंचल, मिलनसार स्वभाव, कुशाग्र बुद्धि और रूप से प्रभावित हो कुछ धनवान घरों से रिश्ते उसके लिए आने लगे थे। अपनी तीन बेटियों के लिए धूप-छांव में जूतियां घिस चुके पिता के पास बेटी के लिए रिश्ता आना गर्व की बात थी। इस गर्व से वे अपने बुझे मन को काफी उत्साहित कर चुके थे, वे अपने मन में तो निश्चय कर चुके थे, किंतु बदलती दुनिया और विद्रोही स्वभाव की बेटी के कारण उन्होंने सोचा कि एक बार बेटी इति को यह बता दें।

‘‘बेटी इति, इधर तो आओ।’’

आज जितने प्यार से इति को उन्होंने बुलाया, इससे इति आश्चर्यचकित थी।

‘‘जी पापा,’’ कहकर वह पिता के सम्मुख आ गई।

‘‘बैठो बेटी’’

इति बैठ गई और आगे किसी पहाड़ के सिर पर टूटे पड़ने-सी मुसीबत का अंदाजा लगा, मौन सिर झुकाए बैठी रही।

‘‘बेटी, लगता है अब हमारे अच्छे दिन फिर आने लगे हैं।’’

‘‘अच्छा! क्या गणेश ने आगे पढ़ाई करने का सोच लिया है?’’

‘‘उसकी बात नहीं है बेटी। बेटा गणेश यदि दसवीं से आगे नहीं पढ़ता तो मैं उसे कुछ-न-कुछ व्यवसाय करवा दूंगा।’’

‘‘किसी भी व्यवसाय को चलाने के लिए अक्ल और उससे भी पहले पैसा चाहिए पापा।’’

‘‘हाँ, सच कहती हो बेटी। अक्ल तो पैसा होने पर और कुछ उम्र बढ़ने पर आ जाती है।’’

‘‘पर पिताजी, पैसा आएगा कहाँ से? मुझसे कुछ छिपा नहीं है। आपकी पास बुक में कभी हजार रुपये नहीं हो पाए। आपकी रिटायरमेंट को केवल कुछ मास बाकी हैं।’’

‘‘यह सब क्या मैं नहीं जानता बेटी?’’

‘‘फिर......?’’ इति पिता का मुँह ताक रही थी। और इस बात पर वह आश्चर्य भी कर रही थी कि पिता के सामने अब इतनी बात करने का उसमें साहस आ गया है।

‘‘बेटी, आज चावल वालों की बुआ आई थी।’’

‘‘किसलिए?’’ पिता की बात आगे सुनने से पहले ही वह बोल पड़ी।

‘‘बेटी इति, आज हमारे भाग्य खुल गए हैं, इतने धनवान घर से तुम्हारे लिए रिश्ता लेकर आई थीं वह।’’

‘‘पर मुझे तो अभी पढ़ाई करनी है पापा।’’

‘‘लड़की के लिए रिश्ता आना बहुत बड़ी बात है बेटी इतने धनवान घर में चली जाओ तो पढ़ाई-लिखाई का क्या करना है।’’

इति बोली कुछ नहीं, क्रोध से तमतमा उठी।

‘‘इति, वे लोग कहते हैं कि तुम्हारे भाई गणेश को भी अपने व्यवसाय में लगा लेंगे।’’

‘‘पापा, मैं पढ़ाई पूरी करुंगी, इसके आगे कुछ नहीं जानती।’’ इति पैर पटकती कमरे में आ गई।

दो दिन बाद माँ ने इति को बड़े प्यार से समझाया था, ‘‘बेटी इति, पिता की बात मान ले। अब हमारे पास कुछ बचा भी नहीं है कैसे करेंगे तेरी शादी?’’

‘‘माँ, तुम तो कुछ सोचकर बोलो।’’

‘‘मैं सोचकर ही बोल रही हूँ बेटी। अपने भैया की सोच, हमारी सोच। बड़े घर में संबंध हो जाएगा तो इज्जत के साथ-साथ घर का दरिद्र भी धुल जाएगा।’’

‘‘माँ, लगता है तुम उल्टा दहेज लोगी? ऐसा क्या है मुझमें, जो वे लोग मुझे माँग रहे हैं?’’

‘‘बेटी, घर संभालने वाली सुशील लड़की चाहते हैं वे, लड़के की माँ छोटी उमर में ही चल बसी थी। घर बरबाद हो रहा है उनका।’’

‘‘उनका घर बचाने के लिए तुम मेरा हवन करना चाहती हो?’’

‘‘बेटी, मैं अपना घर पहले बचाना चाहती हूँ।’’

‘‘अपना घर बचाना चाहती हो तो मेरी शादी छोड़, पढ़ाई पूरी करने दो मुझे।’’

‘‘इति, ऐसा घर-बार भाग्य से मिलता है तेरी बड़ी तीन बहनों की शादी के लिए जो कष्ट हमने झेले हैं, हमीं जानते हैं।’’

‘‘माँ, स्कॉलरशिप भी बार-बार नहीं मिलती। मेरा पक्का निर्णय सुन लो। मैं पढ़ाई पूरी करके नौकरी करूँगी। शादी के लिए उसके बाद सोचूंगी।’’

माँ उदास और चुप हो गई। बेटी के आगे आज उसे हार माननी पड़ी।

‘‘इति’’ उसके धीमे शब्द निकल पड़े। ‘‘तेरे भाई का क्या होगा? न पढ़ रहा है, न कुछ काम सीख रहा है।’’

‘‘आपने बेटा इसलिए तो नहीं पाला कि उसकी चिंता में अपना बुढ़ापा गला दो?’’ कुछ क्रोध में बात कहती इति बाहर बरामदे में आ गई। कुछ देर माँ निरुपाय सिर पकड़कर बैठी रही। फिर साहस कर उठी। पति की ओर देखा और उनके इंगित करने पर फिर बेटी के सम्मुख आ खड़ी हुई।

‘‘इति बेटी.......।’’

इति एकटक बाहर देखती रही। मानो उसकी दृष्टि पथरा गई हो।

‘‘बेटी,’’ माँ ने कहना आरंभ किया, ‘‘तू इतनी समझदार है नासमझ मत बन, आज तो लड़के वाले तुझे मांग रहे हैं, स्वयं लड़के ने तुझे पसंद कर लिया है। सोच, हम नहीं रहेंगे, भाई समर्थ नहीं होगा, रिश्ता भी नही हो सकेगा, फिर क्या होगा? यह बदनामी बहुत बड़ी होती है कि लड़की ने रिश्ता ठुकरा दिया.......फिर क्या होगा बेटी?’’ माँ ने सिर पीट लिया और रो पड़ी।

‘‘माँ, बस करो, बंद करो यह भाषण मैं अपना भविष्य स्वयं बनाना चाहती हूँ, मैं ऐसी नारी नहीं बनना चाहती, जो केवल पिता, भाई या परिरक्षिता हो’’ बेटी का निर्णय सुन माँ सन्न रह गई थी।

उसके बाद तो दो वर्षों में क्या-क्या नहीं बीत गया। अर्ध शिक्षित भाई किसी तरह दुबई भेज दिया गया। माँ बेटी के निर्णय की आंधी में टिक नहीं सकी। बेटी और पति के विचारोें के बीच झूलती उस नारी ने गहरी नींद सो जाना ही अच्छा समझा।

दो वर्ष तक कठिन परिश्रम करके इति प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुई और इति सिटी मजिस्ट्रेट नियुक्त हुई।

पर आज वह इस शुभ समाचार को किसे सुनाए? सामने बहते पहाड़ी नाले के जल को देख इति मुस्कुरा दी। यह जल भी तो अपना पथ खोजकर निरंतर आगे बढ़ रहा है। फिर हम क्यों स्थिर हो जाएं? अभी तो पूरे जीवन का संघर्ष पथ आगे पड़ा हुआ है। ’’’

-------------

शुभतारिका,

कहानी लेखन महाविद्यालय,47-ए,

शास्त्री कॉलोनी, अम्बाला छावनी (हरि.)

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: कहानी संग्रह - आदमखोर - 4 - उर्मि कृष्ण की कहानी : संघर्ष पथ
कहानी संग्रह - आदमखोर - 4 - उर्मि कृष्ण की कहानी : संघर्ष पथ
http://lh4.ggpht.com/-Qg4oWQT7a98/TleI0vN-isI/AAAAAAAAKiM/QumBJahlafI/aadamkhor1%25255B2%25255D.jpg?imgmax=800
http://lh4.ggpht.com/-Qg4oWQT7a98/TleI0vN-isI/AAAAAAAAKiM/QumBJahlafI/s72-c/aadamkhor1%25255B2%25255D.jpg?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2011/08/4.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2011/08/4.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content