रेखा श्रीवास्तव का आलेख : प्रदीप गुबरेले की रचनात्‍मक कल्‍पनाएं

SHARE:

  क्या कबाड़ में से भी खूबसूरत कलाकृतियाँ निकल सकती हैं? पुराने जमाने के पीतल के बर्तनों, काले, हरे पड़ गए जंग खाए औजारों और ऐसी ही कितनी अ...

 

clip_image002[4]

क्या कबाड़ में से भी खूबसूरत कलाकृतियाँ निकल सकती हैं? पुराने जमाने के पीतल के बर्तनों, काले, हरे पड़ गए जंग खाए औजारों और ऐसी ही कितनी अनुपयोगी चीजों को हम बाजार में कबाड़ी के हवाले कर देते हैं. परंतु कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इन कबाड़ में बड़ी संभावनाएँ देखते हैं और उनके हाथों में कबाड़ का एक टुकड़ा जाते ही जैसे जीवंत हो जाता है बहुमूल्य कलकृति में ढलने को. प्रदीप गुबरेले ऐसे ही कलाकार हैं जिनके हाथों में पहुंच कर भद्दा से भद्दा कबाड़ भी बेहद खूबसूरत, बहुमूल्य और काम की वस्तु या कलाकृति में देखते ही देखते बदल जाती है. ऊपर चित्र में दर्शित खूबसूरत कलाकृति को गुबरेले जी ने तांबे के जंग खाए कबाड़ में फेंक दिए गए पत्तर व ऐसी ही चंद दीगर वस्तुओं से बनाया है.

clip_image004[4]

मध्‍यप्रदेश के खजुराहो क्षेत्र में कार्यरत धातुशिल्‍पियों ने शिल्‍प निर्माण की अपनी भिन्‍न प्रविधि का विकास कर लिया है। परम्‍परागत धातु शिल्‍प की यदि चर्चा करें तो प्राचीन काल से शिल्‍प निर्माण में मोम क्षय विधि के प्रमाण हमें सिन्‍धु सभ्‍यता से ही प्राप्‍त हो जाते हैं। कालान्‍तर में धातु पात्रों, आभूषणों, राज मुद्राओं इत्‍यादि के प्रमाण इतिहास में सहज ही उपलब्‍ध होते हैं। भारत के भिन्‍न भिन्‍न क्षेत्रों में इस प्रविधि विशेष द्वारा शिल्‍प निर्माण के उदाहरण क्षेत्रीय विशिष्‍टताओं के साथ देखे जा सकते है। जिसे क्षेत्रीय आदिवासियों और गैरआदिवासियों द्वारा आज भी जीवंत बनाए हुए हैं। बस्‍तर के घड़वा, बैतूल के भरेवा, टीकमगढ़ के स्‍वर्णकार, रायगढ़ के झारा, सरगुजा के मलार आज तक अपनी परम्‍परा को अक्षुण्‍ण रखा है। इन शल्‍पियों द्वारा सौन्‍दर्यपरक, आनुष्‍ठानिक और उपयोगी कलाकृतियां आंचलिक आवश्‍यकता और सौन्‍दर्यपरक शिल्‍पों के रूप में निर्माण सहज रूप से करते आ रहें हैं।

रचनात्‍मक शिल्‍प निर्माण के इसी क्षेत्र में खजुराहो के श्री प्रदीप गुबरेले का नाम भी वैश्‍विक परिदृश्‍य में उभर रहा है। जिन्‍होंने टूटे शिल्‍पों, अनुपयोगी पात्रों, आनुष्‍ठानिक अनुपयोगी चीजों को अपनी कल्‍पनाओं के अनुरूप साकार रूप प्रदान कर आकर्षक आधुनिक सौन्‍दर्यपरक शिल्‍पों के रूपाकारों का सृजन कर लोगों को आकर्षित करते हैं। वे वेक्‍स लॉस प्रोसेस की परम्‍परागत रचनाप्रकिृया में पारंगत हैं, लेकिन गुबरेले जी ने गढ़ कर सृजन करने वाले शिल्‍पयों से भिन्‍न रचनाप्रकिृया में स्‍वयं को अन्‍य शिल्‍पियों से अलग अपनी पहचान बनाई है। उनकी कल्‍पनाशीलता अद्भुत है, उनकी साकार कल्‍पनाओं को अन्‍य शिल्‍पयों ने अपना कर उसकी नवीन प्रतिकृतियां ढाल कर बनाने लगे हैं। गुबरेले की प्रत्‍येक कृति मौलिक होती है।

शिल्‍पनिर्माण संबंधी इतिहास के संदर्भ में जब गुबरेले जी से चर्चा की तो उन्‍होने बताया कि शिल्‍प निर्माण पिछले दो-तीन पीढ़ियों से ही प्रारंभ हुआ है। प्रारंभ में तो आभूषणों और आवश्‍यक औजार, संग्रहण पात्र, के रूप में ही धातु की ढलाई की जाती थी। इस हेतु कांसा, ताबां, लोहा, स्‍वर्ण, रजत धातु का प्रयोग किया जाता था। साक्षात्‍कार में गुबरेले जी ने बताया कि संक्रांति के अवसर पर बुआ द्वारा नये जन्‍में बालक या बालिका को उपहार स्‍वरूप बैलगाड़ी, हाथी, घोड़े, झुनझुने, गाय इत्‍यादि दिया जाता था। इस उपहार देने का भी मनोवैज्ञिन कारण था। चूंकि प्रारम्‍भ में परिवहन हेतु इन्‍ही संसाधनों का प्रयोग किया जाता था, यदि ये साधन बालक के पास बचपन से होंगें तो वह इन पशुओं के साथ मित्रवत व्‍यवहार करेगा और उससे स्‍वयं का जुड़ाव भी महसूस कर उसके सुख में सुखी और उसके दुख में दुखी होगा। इसी तरह बालिका गाय की सेवा कर उसके सानिध्‍य से सेवाभाव स्‍वत: ही जागृत हो जायेगा जिसका प्रभाव उसके परिवार में सुख समृद्धि का सूचक होगा। उसके अर्न्‍तमन में इससे सेवाभाव, सुख-दुख की सहभागिता करने की मनोवृत्‍ति सहज ही जागृत होती चली जाती है। वक्‍त के साथ बदलते संसाधनों ने उपहार का स्‍वरूप के रूप में शिल्‍पों ने ले लिया। वर्तमान समय में संस्‍कार तो वही है उपहार के स्‍वरूप में परिवर्तन आ गया। अब जीवंत उपहार ने धातु शिल्‍पों का रूप ग्रहण कर लिया। संक्रांति पर लड़के के खेलने के लिये चक्‍के वाले हाथी या घोड़े और लड़कियों के लिये चक्‍के वाले बैलगाड़ी बनवाई जाने लगी। इस तरह शिल्‍प निर्माण की ओर धातुशिल्‍पीयों का रूझान बढ़ने लगा।

प्राचीन धातुशिल्‍पों में सुप्‍पा(बारूद फोड़ने वाला यंत्र जो तोप की तरह दिखाई देता है), बारूद रखने का पात्र, काजल या सूरमा की डिब्‍बियां, युद्ध में प्रयुक्‍त सैनिक के रक्षा कवच, औजार, कलात्‍मक हुक्‍का, तम्‍बाखू-चूने की डिब्‍बियां, दीपक, दीप स्‍तम्‍भ, चिमनी, कंदिल, पिचकारी, छड़ी की मूठ, दवात-कलम रखने के पात्र, कलात्‍मक नापने वाले पात्र, घी निकलने वाले करछुल, आकर्षक घंटियां इत्‍यादि प्राप्‍त होते हैं। गुबरेले की कलात्‍मक शिल्‍पों में इन्‍ही सब पुराने, टूटे हुए और अधूरे शिल्‍पों से निर्मित नवीन रूपाकारों के दर्शन होते हैं। अपनी कल्‍पनाओं को पूर्ण करने के लिये वे इन सबके अतिरिक्‍त पीतल के पतले-मोटे चादरों का प्रयोग करते हैं। आवश्‍यकतानुसार शिल्‍प के सौन्‍दर्य वृद्धि हेतु छोटे छोटे अंग-प्रत्‍यंगों को ढलाई करते हैं, और उन्‍हें शिल्‍प में जोड़ कर शिल्‍प पूर्ण करते हैं।

कलात्‍मक डिब्‍बियों में हाथी के युग्‍म को आकर्षक रूप से जोड़ कर उपयोगी स्‍क्रबर की कल्‍पना रोमांचित करती है। डिब्‍बी के नीचली सतह खुरदुरी कर हाथी का हैंडल लगा ऐसे शिल्‍प का निर्माण जो न केवल उपयोगी वरन स्‍नानागार की शोभा भी बढ़ाये एक रचनात्‍मक कल्‍पना ही है। इसी तरह

imageपुराने हुक्‍के से दीपमाला बरबस ही कला प्रेमियों को आकर्षित करती है। हुक्‍का बेस में पीतल धातु की मोटी चादर से दीप समूह बनाकर तथा पुरानी घंटी को उल्‍टा जोड़कर दीपमाला का शीर्ष बनाया गया है जिस पर मोर वेल्‍ड कर शिल्‍प के सौंदर्य में वृद्धि की गई है। शिल्‍प के कलात्‍मक हैण्‍डल और उस पर हाथी का छोटा शिल्‍प सम्‍पूर्ण शिल्‍प को रोमांचक बना देते हैं। चित्र में दिखाया गये शिल्‍प में अभी सिर्फ पुरानी नई चीजों को जोड़कर पूर्ण किया गया है इसके बाद शुरू होती है शिल्‍प की सफाई और आवश्‍यकतानुसार नक्‍काशी की जो शिल्‍प के सौंदर्य को तो बढ़ाती है साथ ही मूल्‍य वृद्धि में भी सहायक होती है।

clip_image008[4]

एक अन्‍य शिल्‍प में छोटी घंटी को उल्‍टा रख कर उस के आधार पर पीतल की चादर से किनारा बनाने के लिये एक इंच चौड़ी पट्टी का आघार जोड़ा गया उस पर कलात्‍मक डिब्‍बी को एक मध्‍यम आकार की छड़ से जोड़ कर घंटी के साथ जोड़ दिया गया, उस पर आनुष्‍ठानिक भाव को समृद्ध करने हेतु गणेश की छोटी मूर्ति ढालकर जोड़ दिया गया। अब पतले धातु की चादर से 16 दीपक अलग अलग तैयार कर डिब्‍बी के चारों ओर वेल्‍ड कर अच्‍छी तरह जोड़ दिया गया।

clip_image010[4]

इसी प्रकार पैजन, श्रृंगार पेटी, घंटी, चिड़िया से धूपदानी की कल्‍पना भी अनोखी है। इस शिल्‍प में पैजन को हैण्‍डल के रूप में प्रयोग शिल्‍प की मौलिक सृजनात्‍मकता को दर्शाती है। धातु के पतले एवं मोटे चादरों को फोल्‍ड कर, उकेरकर, इनग्रेव कर पेपेरवेट के रूप में चिड़िया न केवल उपयोगी अपितु आकर्षक शोपीस भी बन जाता है। गुबरेले जी ने न जाने कितनी कल्‍पनाओं को इसी तरह उपयोगी और खूबसूरत शिल्‍पों में साकार किया है।

clip_image012[4]

इस सम्‍पूर्ण प्रक्रिया हेतु गुबरेले जी सर्वप्रथम पुराने शिल्‍पों का संग्रहण करते हैं। उन पुराने अनुपयोगी संग्रहित अवशेषों में नवीन शिल्‍प रचना हेतु मनन करते है और कल्‍पनानुसार शिल्‍प सृजन में जुट जाते हैं। पुराने टुकड़ों को जोड़कर, धातु की चादरों से आवश्‍यक रूपाकारों का सृजन कर जोड़कर नवीन रूप देते हैं, इसके दूसरे चरण में उसकी अच्‍छी तरह घिसाई कर अतिरिक्‍त धातु के अवशेषों को निकाल कर सम्‍पूर्ण शिल्‍प को तेजाब से आक्‍सीडाइज की प्रक्रिया कर या तो उसे वैसे ही छोड़ देते है या उस पर नक्‍काशी कर उसके सौन्‍दर्य में चार चांद लगा देते हैं। इस तरह निर्मित उनका प्रत्‍येक शिल्‍प मौलिक हो जाता है।

सर्वेक्षण दौरान मैने यह महसूस किया कि इस क्षेत्र के शिल्‍पियों का पारम्‍परिक शिल्‍प प्रविधि में परिवर्तन का कारण मुख्‍य रूप से खजुराहों का पर्यटन स्‍थल के रूप में वैश्‍विक परिदृश्‍य में प्रसिद्धि हो सकता है। यहां चंदेल राजाओं द्वारा निर्मित विश्‍व प्रसिद्ध महादेव मंदिर समूह का होना ही पर्याप्‍त है जो अपने आकर्षक पाषाण शिल्‍पों के लिये जाना जाता है। यहां विदेशी पर्यटको को आनाजाना वर्ष भर जारी होता है। अत: स्‍थानीय शिल्‍पियों का उनके सम्‍पर्क में आना स्‍वाभाविक है। ये शिल्‍पी उनकी रूचियों, कम वजन के शिल्‍पों, और यथोचित मूल्‍यों के शिल्‍प निर्माण हेतु इस तरह प्रविधि विशेष में परिवर्तन कर आजीविका के रूप में अपनाने लगे हैं। वही टीकमगढ़ क्षेत्र के शिल्‍पियों ने अभी भी परम्‍परागत शिल्‍प प्रविधि में ही अपनी कल्‍पनाओं को साकार रूप दे रहे हैं। इसके अतिरिक्‍त मध्‍यप्रदेश हस्‍त शिल्‍प विकास निगम के प्रयासों से स्‍थानीय शिल्‍पियों को भारत के विभिन्‍न स्‍थानों पर आयोजित मेलों प्रदर्शिनियों में शिरकत करने का अवसर प्राप्‍त हो रहा है जिससे इन शिल्‍पियों का सम्‍पर्क महानगरों के कलाप्रेमियों और कलाओं से होने लगा है। शिल्‍पियों का उनकी प्रविधि, संसाधनों, से परिचय होना लाजमी है, साथ ही प्रभावित और प्रेरित भी हुए है। परिणामस्‍वरूप उन्‍होंने अपने शिल्‍प निर्माण में परिवर्तन कर स्‍वयं को मध्‍यप्रदेश के शिल्‍पियों से भिन्‍न पहचान बनाई है।

---

डॉ. रेखा श्रीवास्तव

सहायक प्राध्यापक चित्रकला

शास. कन्या म.ल.बा. महाविद्यालय, भोपाल मप्र

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: रेखा श्रीवास्तव का आलेख : प्रदीप गुबरेले की रचनात्‍मक कल्‍पनाएं
रेखा श्रीवास्तव का आलेख : प्रदीप गुबरेले की रचनात्‍मक कल्‍पनाएं
http://lh5.ggpht.com/-A37iBwehqhA/Tt3WGRfOQQI/AAAAAAAAK5E/DEO_pTojGWg/clip_image002%25255B4%25255D%25255B2%25255D.jpg?imgmax=800
http://lh5.ggpht.com/-A37iBwehqhA/Tt3WGRfOQQI/AAAAAAAAK5E/DEO_pTojGWg/s72-c/clip_image002%25255B4%25255D%25255B2%25255D.jpg?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2011/12/blog-post_06.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2011/12/blog-post_06.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content