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एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - रहस्य

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रहस्य

रामू और रघुवर साथ-साथ टहल रहे थे। रामू ने कहा “मैं बहुत दिन से सोच रहा हूँ।
लेकिन एक प्रश्न है जिसका समुचित उत्तर नहीं मिल पा रहा है। क्या आप बता सकते हैं” ?
रघुवर ने कहा “प्रश्न तो बताइये। उसके बाद पता चलेगा कि बता पाऊँगा अथवा नहीं”।

रामू बोला “पहले मुर्गी आई या मुर्गा आया अथवा अंडा आया। यही समझ में नहीं आ रहा है”।

रघुवर ने कहा “मैं इस प्रश्न का उत्तर बता दूँगा। बशर्ते तुम मेरे किसी भी प्रश्न का उत्तर दे दो। क्या आप बता सकते हैं कि पहले पेड़ आया अथवा पेड़ का बीज ? जैसे पहले आम, कटहल, सेब..... के पेड़ आए अथवा इनके बीज ? पहले शेर आया अथवा शेरनी ? पहले हाथी आया अथवा हथिनी ? पहले स्त्री आई अथवा पुरुष ? ..... ? हमारे पास ऐसे अनेकों प्रश्न है”।

रामू बोला “सच में मैंने मुर्गी, मुर्गा और अंडे के अलावा इन प्रश्नों के बारे में कभी सोचा ही नहीं”।

रघुवर ने कहा “ ये ऐसे प्रश्न हैं जिन्हें न ही बौद्धिक तर्क से समझा जा सकता है और न ही विज्ञान के द्वारा सिद्ध किया जा सकता है। हाँ कहने को तो कुछ भी कहा जा सकता है कि यह अथवा यही सही है या विज्ञान ऐसा कहता है। लेकिन सच तो यह है कि जहाँ विज्ञान का ज्ञान भी अज्ञान को समुचित रूप से नहीं मिटा पाता। वहीं से अध्यात्म की सीमा शुरू हो जाती है। सबका अपना-अपना दायरा है।

कुछ लोग कहते हैं कि पहले अंडा आया। लेकिन उन्हें ऐसा कहना चाहिए कि एक साथ दो अंडे आए थे। एक से मुर्गी निकली और दूसरे से मुर्गा। क्योंकि एक अंडे के आने से तो काम बनेगा नहीं। क्योंकि अकेले मुर्गी अथवा मुर्गा किस काम का। अंडे कहाँ से आए ? यह दूसरा प्रश्न है”।

रामू बोला “एक प्रश्न और आ गया। लेकिन उत्तर नहीं मिला”।

रघुवर ने कहा “शास्त्र कहते हैं कि प्रकृति बीज रूप है। और बीज से बीज उत्पन्न नहीं होता बल्कि बीज का कारण उत्पन्न होता है। अतः शास्त्र सम्मत उत्तर यही है कि मुर्गी और मुर्गा, शेर और शेरनी, हाथी और हथिनी, स्त्री और पुरुष....... पृथ्वी पर जोड़े में आए”।

यह उत्तर सुनकर रामू संतुष्ट हो गया। क्योंकि उसे बौद्धिक तर्क और विज्ञान से भी न समझी जा सकने वाली सत्ता तथा ऐसे प्रश्नों के रहस्य का भान होने लगा था।
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डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.)।

URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

ब्लॉग: http://www.sriramprabhukripa.blogspot.com/

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