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प्रभुदयाल श्रीवास्तव की रचना - बड़े कदों ऊंची हस्ती के

बड़े कदों ऊंची हस्ती के

बड़े कदों ऊंची हस्ती के रहते हैं कुछ लोग यहां।
भर भर थाली हुस्न इश्क के लगते रहते भोग यहां।

कारों से लकदक सूटों में युवक युवतियां आते हैं
बिना रुकावट अवरोधों के होते हैं संयोग यहां।

शिष्ट और सभ्य भाषा में यहां मसौदे तय होते
कड़ा नियंत्रण द्दढ़ अनुशासन रखता एक आयोग यहां।

इसको बदलो उसको छांटो विनिमय का बाज़ार है ये
नया जमाना होते रहते नये नये नित्य प्रयोग यहां।

नये ज्योतिषी नये फैशन के सी.डी. मोबाइल वाले
ढूंढ़ ढूंढ़ कर मन माफिक घर बैठाते ग्रह योग यहां।

1 टिप्पणियाँ

  1. गोवर्धन यादव12:12 pm

    बहुत अच्छी रचना के लिए साधुवाद.

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