तेजेन्द्र शर्मा विशेष : निखिल कौशिक का संस्मरण - हिन्‍दी साहित्‍य के राज कपूर हैं तेजेन्‍द्र शर्मा !

SHARE:

(तेजेंद्र शर्मा - जिन्होंने हाल ही में अपने जीवन के 60 वर्ष के पड़ाव को सार्थक और अनवरत सृजनशीलता के साथ पार किया है. उन्हें अनेकानेक बधाई...

(तेजेंद्र शर्मा - जिन्होंने हाल ही में अपने जीवन के 60 वर्ष के पड़ाव को सार्थक और अनवरत सृजनशीलता के साथ पार किया है. उन्हें अनेकानेक बधाईयाँ व हार्दिक शुभकामनाएं - सं.)

--

हिन्‍दी साहित्‍य के राज कपूर हैं तेजेन्‍द्र शर्मा !

निखिल कौशिक

मैं इस समय ज़मीन से 36 हज़ार फ़ुट की ऊंचाई पर 464 मील प्रतिघंटे की रफ़्‍तार से उड़ते हुए एमिरेट्‌स के वायुयान की कुर्सी नंबर 27.ई पर बैठा हूं। बाहर का तापमान -74 डिग्री फ़ारेनहाइट है, किन्‍तु मैं और मेरे सहयात्री इस वातानुकूलित यान में बिना स्‍वेटर पहने, बिना रज़ाई ओढ़े, अपने-अपने ख़यालों में खोए हुए हैं। कोई पहली बार हवाई जहाज़ में बैठा और उत्‍साहित है कि वह कुछ ही घंटों में अपने सपनों के देश पहुँच जाएगा। कोई भगवान से प्रार्थना कर रहा है कि इमिग्रेशन वाले उसे परेशान न करें। कोई छुटि्‌टयां मना कर लौट रहा है और उस ठंड के बारे में सोच रहा है जो यूके में उसका इंतज़ार कर रही है।

मैं दो हफ़्‍ते की छुटि्‌टयां बिता कर भारत से लौट रहा हूं और अपने को यूके के जीवन, अपने काम काज से ओरिएन्‍ट करना चाहता हूं। इसलिए मैं पासपोर्ट के साथ सुरक्षित रखे अपने मोबाइल फ़ोन को ऑन करता हूं जिसे पिछले दो हफ़्‍ते से मैंने छुआ नहीं है। छुटि्‌टयों पर जाता हूं तो मोबाइल फ़ोन, ई.मेल जैसे, ऐसे वो सब रास्‍ते बंद कर के जाता हूं, जिनके माध्‍यम से कोई मुझे तलाश कर सकता है। वरना आज के युग में मोबाइल आपकी जेब में हो और कम्‍प्‍यूटर उपलब्‍ध हो तो भला कहां जाइयेगा। ‘जहां जाइएगा हमें पाइएगा'।

भारत गया तो यूके का मोबाइल ऑफ़ और बिन लैपटॉप बिन पासवर्ड लिए। मोबाइल के ‘इन-बॉक्‍स' में 12 संदेश हैं जिनमे से पांच संदेश तेजेन्‍द्र शर्मा के हैं। पांचवां सन्‍देश कहता है' सर, आप संदेश और फ़ोन दोनों का जवाब नहीं देते। ख़ैरियत....‍ तेज।

मैं यह मैसेज पढ़ रहा हूं और उनके कहे शब्‍द ‘सर' का आनंद उठा रहा हूं कि एअर-होस्‍ट आ जाता है, उसके हाथ में एक ट्रे है जिसमें कुछ गिलासों में पानी है, कुछ में जूस। मैं पानी उठाता हूं और उसकी ओर देख मुस्‍कुराता हूं। वो आगे बढ़ जाता है और दूसरे यात्री को देख उसी आत्‍मीयता से मुस्‍कुराता है।

मुझे सहसा याद आता है कि तेजेन्‍द्र शर्मा भी किसी समय एअर इण्‍डिया में परसर का काम करते थे। और मुझे समझ आता है कि उन्‍हें भीड़ में घिरे रहने के बावजूद हर किसी को बिल्‍कुल अपना इंडिविजुयल एक्‍सक्‍लूसिव महसूस करवाने की कला कहाँ से आई है। किंतु तेजेन्‍द्र शर्मा से मेरा परिचय किसी फ़्‍लाइट में या किसी रेलगाड़ी में सफ़र करते हुए नहीं हुआ था। उन्‍हें तो मैं इंटरनेट पर उपलब्‍ध पत्रिका अभिव्‍यक्ति के माध्‍यम से जानता हूं। एक अरसे पहले इंटरनेट पर ब्राउज़ करते हुए एक कहानी पढ़ी थी मुझे मार डाल बेटा, जिसमें कहानीकार उस व्‍यक्ति की दुविधा और मर्म को प्रस्‍तुत करता है जो अपनी पत्‍नी के गर्भ में पल रहे जुड़वां बच्‍चों की भ्रूण हत्‍या में भागीदार होता है, क्‍योंकि उन्‍हें शक़ है कि गर्भ में पल रहे वो बच्‍चे डाउन्‍स सिंड्रोम से प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर वो मृत्‍यु-शैया पर पड़े अपने पिता की पीड़ा से मुक्ति की प्रार्थना को अनसुना कर डॉक्‍टर से उनकी आयु को लंबा करने के लिये ऑपरेशन करने की मांग करता है।

एक सरसरी तौर से तब मैंने इस कहानी के लेखक का नाम देखा था. तेजेन्‍द्र शर्मा। फिर मेरी पहचान तेजेन्‍द्र के साथ ऐसी ही हुई थी जैसे किसी भी पाठक की किसी लेखक के संग होती है। कुछ समय बाद लन्‍दन के भारतीय दूतावास में उस समय के हिन्‍दी अधिकारी अनिल शर्मा ने मेरी भेंट एक कवि तेजेन्‍द्र शर्मा से करवाई, जो कवि होने के साथ-साथ लन्‍दन में रेल चलाते हैं। किंतु ये वही कहानीकार हैं जिनकी कहानियाँ मैं इंटरनेट पर पढ़ता रहता हूं। यह बात कहीं जाकर तीसरी या चौथी भेंट में स्‍पष्‍ट हुई। इस प्रकार तेजेन्‍द्र से सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों में मिलने का एक सिलसिला शुरू हुआ और कब हमारी जान पहचान एक मित्रता में परिवर्तित हो गई पता ही नहीं चला। लगभग हर बार उनके किसी नये रूप किसी नई विधा का पता चला, प्‍याज़ के छिलकों की तरह परत दर परत कवि, रेल चालक, कहानीकार, परसर, ब्रॉडकॉस्‍टर, एक्‍टर, बायोग्राफर, एक रोमांटिक आत्‍मा, नाटक कार, और बहुत कुछ।

आज के हिन्‍दी जगत का एक सितारा है तेजेन्‍द्र। साहित्‍य में रुचि रखने वालों के लिए तेजेन्‍द्र शर्मा कोई नया नाम नहीं है। इस पुस्‍तक में प्रकाशित अन्‍य लेखों में आपने जो भी कुछ उनके विषय में पढ़ा है वो उनके किसी न किसी पहलू को उजागर करता है, बताता है कि वे कितने अच्‍छे इन्‍सान हैं। उनकी कहानियों में कितनी संवेदना है कितना दम है। उनके निजी जीवन में कितनी त्रासदी रही है या है। अलग-अलग रूप से अलग-अलग लोगों से उनके बारे में चर्चा हर बार आपको कुछ सोचने कुछ महसूस करने को बाध्‍य करता है।

तेजेन्‍द्र शर्मा किसी का भी दोस्‍त हो सकता है क्‍यूंकि वो किसी को भी प्रोत्‍साहित करने में सक्षम है। वह एक साथ दो तीन नावों पर यात्रा कर सकता है। वह हर क्षेत्र में स्‍वयं को सिद्ध करता है। हर जगह अपनी छाप छोड़ता है। वह हवाई जहाज़ में परसर रहा तो वहां ऐसा कुछ किया कि एअर इन्‍डिया आज भी उनके किसी आयोजन के संग जुड़ने में स्‍पॉन्‍सर करने में गर्व महसूस करती है।

वह लन्‍दन में रेल चालक रहे। 5 साल की सेवा में वो अपने को इतना सिद्ध करते हैं कि रेल विभाग उसे नए रेल चालकों को प्रशिक्षण देने के लिए पुनः नियुक्त करता है।

उसके समाज में उसके आसपास जो होता है उसे वह महसूस करता है आत्‍मसात करता है कागज़ पर कहानी स्‍वरूप उतारता है। उसकी कहानी पाठक को बांध कर रखती है। देह की क़ीमत किसी को बिना छुए नहीं रहती क्‍यूंकि हर पाठक किसी परमजीत कौर को जानता है, उन बहू बेटियों से परिचित है जो अपनी जवानी उस पति की प्रतीक्षा में व्‍यतीत कर देती है जो अपने भविष्‍य की तलाश किसी बेरहम सड़क पर ठिठुरते हुए करता है।

तेजेन्‍द्र की क़लम ऐसे विषयों को छूने का साहस करती है जिनके बारे में दबी ज़ुबान से बात करने में भी लोग कठिनाई महसूस करते हैं। मुझे मार डाल बेटा, क़ब्र का मुनाफ़ा, तरकीब, देह की कीमत इस सब का उदाहरण हैं। तेजेन्‍द्र बात की तह तक जाते हैं।

तेजेन्‍द्र विषय को, अपनी बात को, केवल कागज़ पर उतार कर अपने कर्तव्‍य की इतिश्री समझ लें- ऐसा नहीं है। वह निजी जीवन में रिश्‍तों को मान देता है समाज व साहित्‍य के प्रति लेखन से कहीं आगे जाता है। वह अपने माता पिता का ऋण कहीं फूल प्रसाद चढ़ाकर नहीं उतारता। वह अपनी दिवंगत पत्‍नी की याद में एक ताजमहल नहीं बनवाता। वह सीधे-सीधे उन्‍हें साहित्‍य से जोड़कर अमर कर देता है। उन्‍हें अपनी प्रेरणा बनाकर जीता है। पद्मानन्‍द साहित्‍य सम्‍मान व अंतर्राष्‍ट्रीय इन्‍दु शर्मा कथा सम्‍मान इसी बात का प्रमाण हैं। वह इस माध्‍यम से उस साहित्‍य को दुनिया के सामने लाता है जो उत्‍कृष्‍ट है। इस प्रकार हम तेजेन्‍द्र की आयोजन क्षमता का अनुभव करते हैं। वह आयोजित करता है एक सम्‍मान समारोह।

यदि एक व्‍यापक दृष्‍टि से देखें तो भारतीय या किसी और भी देश व परंपरा के लोग जो लन्‍दन जैसे महानगर में बसते हैं, अपने-अपने सांस्‍कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते ही हैं, यह कोई नई या अनोखी बात नहीं है। ऐसे आयोजनों का इतिहास बहुत पुराना है। छोटे मोटे आयोजन कवि गोष्‍ठियां चर्चाएं एक आम बात है। ब्रिटेन के हर छोटे बड़े शहर में यहां का एशियन समुदाय अपने तीज त्‍यौहार, अपने सांस्‍कृतिक कार्यक्रम, कम्‍यूनिटी सेंटर, मस्‍जिद, गुरुद्वारे व मंदिर में आयोजित करता है। इन आयोजनों का एक सामाजिक महत्त्व है परदेस में हमें अपने से जोड़ने का एक आवश्‍यक प्रयास।

तेजेन्‍द्र मानते हैं कि हम जिस देश में रहते हैं वहीं हमारा घर होना चाहिये। हमें अपनी बात जैसी है वैसी ही कहने का अधिकार होना चाहिये। इसलिए वे अपनी भाषा की अभिव्‍यक्ति को किसी छोटे से कम्‍यूनिटी सेन्‍टर या मंदिर तक सीमित नहीं रहने देते। इन सभी सीमाओं को पार करते हुए वे हिन्‍दी को ले जाते हैं सीधे हाउस ऑफ़ लॉड्‌र्स में।

मैं जानता हूं कि यह काम कितना सरल या कठिन है। परन्‍तु तेजेन्‍द्र ही कर पाते हैं यह सब। वे मुझे याद करते हैं, फ़ोन करते हैं कि इस प्रोग्राम का संचालन मैं करूं। मुझे इस योग्‍य मानते हैं कि मैं ऐसे अद्‌भुत कार्यक्रम का हिस्‍सा बनूं ।

हाउस ऑफ लॉड्‌र्स में एक एक कर के लंदन में बसे साहित्‍यकारों का आगमन होता है, कैलाश बुधवार, कृष्‍ण कुमार, अचला शर्मा, तितिक्षा शाह, दिव्‍या माथुर, रवि शर्मा एक के बाद एक सब आते हैं। हॉल में लोग जमा होते हैं। इनमें वो लोग शामिल हैं जिन्‍हें हम रेडियो पर सुनते हैं, जिनकी कविताएँ व लेख पढ़ते हैं और फिर आते हैं लेबर पार्टी की काउंसलर ज़कीया ज़ुबैरी, ब्रिटेन की सरकार के मंत्री टोनी मैक्‍नल्‍टी और स्‍वयं लॉर्ड तरसेम किंग।

कार्यक्रम शुरू होता है- सम्‍मान देने का सिलसिला, अभिनंदन के शाल दुशाले, मैं एक के बाद एक को बुलाते हुए परिचय करवाता हूं। वो सब बोलते हैं पद्मानंद साहित्‍य सम्‍मान के बारे में, इंदु शर्मा कथा सम्‍मान के बारे में, हिन्‍दी साहित्‍य की सम्‍मानित रचनाओं पर चर्चा होती है। लेखक, साहित्‍यकार अपनी-अपनी बात कहते हैं। हां, उस हाउस ऑफ लॉड्‌र्स में हिन्‍दी गूँजती है, जो कि अंग्रेज़ी भाषा का मूल गढ़ है। वहाँ साहित्‍य के महत्त्व पर चर्चा होती है।

टोनी मैक्‍नल्‍टी बताते हैं कि राजा-महाराजा, मंत्री-प्रधानमंत्री सब आते जाते हैं भुला दिए जाते हैं, बस रह जाते हैं तो साहित्‍यकार, जीवित रहता है तो साहित्‍य शेक्‍सपीयर, कालिदास, तुलसीदास।

तेजेन्‍द्र हिन्‍दी साहित्‍य का वृक्ष वहाँ लगा रहे हैं जहाँ उसे वो सम्‍मान दिया जाएगा कि वो सदैव पनपेगा विकसित होगा। एक अदभुत कार्य कर रहे हैं तेजेन्‍द्र। सब नहीं कर सकते यह सब।

कार्यक्रम समाप्‍त होता है। एक-एक कर के सभी मेहमान विदा होते हैं, हाउस ऑफ लॉड्‌र्स के भव्‍य प्रांगण में तस्‍वीरें खींचते खिंचवाते हैं। तेजेन्‍द्र सब से अनुरोध करता है कि वापसी सफ़र के लिए प्‍लीज़ समोसे और पकौड़े ले कर जाएँ, मेहमानों के लिए यहाँ तक सोचता है वो। कम न पड़ जाएं इसलिए उसने फ़ालतू पैकेट्‌स बनवाये हैं। तेजेन्‍द्र व आयोजक मंडल के करीबी मित्र बचे हुए सामान को, बैनर्स को लेकर हाउस ऑफ़ लॉड्‌र्स से विदा लेते हैं। तेजेन्‍द्र द्वार पर ड्‌यूटी पर तैनात संतरियों की तरफ़ देखता है मुस्‍कुराता है और उन्‍हें समोसों के पैकेट पकड़ाता है। 6 फुट लम्‍बे जवान मुस्‍कुरा कर समोसे देखते हैं, हँस कर कहते हैं- अच्‍छी बीतेगी रात की यह शिफ़्‍ट।

ज़रा ज़रा सी बातों का ध्‍यान रखता है तेजेन्‍द्र। किसी को भी अपना बनाने में सक्षम यूं ही नहीं हो जाता कोई। हाउस ऑफ़ लॉड्‌र्स में यह सब कुछ-कुछ वैसा ही है जैसे राज कपूर द्वारा राष्‍ट्रपति भवन में संगम फ़िल्‍म के गानों को पिक्‍चराइज़ कर पाना। याद आती है राजेन्‍द्र कुमार की वो बात कि सबने कोशिश की मुग़ल गार्डन में शूटिंग कर सकें, मगर भाई राजसाहब राजसाहब हैं। यूं ही नहीं बनता कोई राज कपूर... और हिन्‍दी साहित्‍य के राज कपूर हैं तेजेन्‍द्र शर्मा।

--

साभार-

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: तेजेन्द्र शर्मा विशेष : निखिल कौशिक का संस्मरण - हिन्‍दी साहित्‍य के राज कपूर हैं तेजेन्‍द्र शर्मा !
तेजेन्द्र शर्मा विशेष : निखिल कौशिक का संस्मरण - हिन्‍दी साहित्‍य के राज कपूर हैं तेजेन्‍द्र शर्मा !
http://lh5.ggpht.com/-XKz90EcBX8s/UITvAWsrbzI/AAAAAAAAPdg/1s5Pf1AO_kY/image%25255B2%25255D.png?imgmax=800
http://lh5.ggpht.com/-XKz90EcBX8s/UITvAWsrbzI/AAAAAAAAPdg/1s5Pf1AO_kY/s72-c/image%25255B2%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2012/10/blog-post_447.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2012/10/blog-post_447.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content