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बच्चन पाठक 'सलिल' की कविता

कविता
दलित विमर्श

               -- डॉ बच्चन पाठक 'सलिल'
दलित विमर्श पर राष्ट्रीय सेमिनार
वक्ताओं ने रखे अपने ओजस्वी विचार
वक्ताओं में कुछ दलित थे, कुछ अन्य थे
पर भावाभिव्यक्ति में सभी अनन्य थे
शब्दों के जाल फैलाये गए
घड़ियाली आंसू बहाए गए
तब ख़त्म हुआ मंच का प्रपंच
वक्ता गए प्रेम से लेने लगे लंच
गेट के बहार एक अधनंगा दलित अड़ा था
वह डस्टबिन से जूठन लेने के लिए खड़ा था ।
आदित्यपुर-2
जमशेदपुर -13
फोन 0657/2370892

2 टिप्पणियाँ

  1. असलियत को उजागर करती कविता

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  2. अनुभवी विमर्श आपके स्वस्थ तस्वीर के साथ पढकर बहुत अच्छा लगा |सादर प्रणाम |

    जवाब देंहटाएं

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