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राजीव आनंद की कविताएँ

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मुस्‍करा दे मोनालिसा की तरह


मोनालिसा की रहस्‍यमय मुस्‍कुराहट
कौन है वह कलाकार जिसने बनाया ?
प्रश्‍न ही निरर्थक है !
किसने बनाया जानना जरूरी नहीं
जानना जरूरी है मानव सभ्‍यता को
कोई औरत कब है मुस्‍कुराती
मोनालिसा की तरह
कहां है इस दुनिया में वह मुस्‍कुराहट
जो चस्‍पां है मोनालिसा के चेहरे पर
क्‍या मोनालिसा के बाद
एक भी औरत ऐसी नहीं हुयी
जो मुस्‍करा दे मोनालिसा की तरह !

 

वकालत


करते रहे वकालत गरीबों की
मसीहा बन गए
कानूनी दांव-पेंच से
मुकदमा जीत गए
संवेदना रहित कानून की
वकालत करते गए
उकता कर संवेदन
साथ छोड़ गए
उम्र जायफी की आई तो
बीमार पड़ गए
कोई नहीं था साथ व्‍यस्‍त
सभी हो गए
कानून की वकालत ने
क्‍या उन्‍हें दिया ?
आखरी समय में खराब
दिमाग हो गया
जिंदगी को क्रोध के
हवाले कर दिया
इजहार-जिरह के चक्‍कर में
बेड़ा गर्क किया
संवेदना जिसने दिखाई
उसे झूठा कह दिया
मस्‍तिष्‍क ही सबकुछ था
हृदय को भूल गए
एपेन्‍डिक्‍स की तरह हृदय
बेकार हो गया
मस्‍तिष्‍क को छोड़कर पूरा शरीर
एपेन्‍डिक्‍स बन गया
मस्‍तिष्‍क कानून की किताब
बन कर रह गया
पन्‍ने-पन्‍ने पर किताब के
जिंदगी बिखर गया !


राजीव आनंद
प्रोफेसर कॉलोनी, न्‍यू बरगंड़ा
गिरिडीह, झारखंड़ 815301
मो. 9471765417                

कविता 3213581123450500395

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