बानो अरशद की कहानी - नन्‍ही परी

SHARE:

बानो अरशद नन्‍ही परी हेड टीचर के कहने पर सरवत ने स्‍कूल के समस्‍त मुस्‍लिम बच्‍चों के लिए नमाज़ पढ़ने के स्‍थान की जिम्‍मेदारी स्‍वीकार ...

image

बानो अरशद

नन्‍ही परी

हेड टीचर के कहने पर सरवत ने स्‍कूल के समस्‍त मुस्‍लिम बच्‍चों के लिए नमाज़ पढ़ने के स्‍थान की जिम्‍मेदारी स्‍वीकार कर ली थी। वैसे उसके स्‍कूल में मुस्‍लिम बच्‍चे आटे में नमक के बराबर थे। परंतु सरवत को अपनी इस्‍लामीं संस्‍कृति, भाषा और जीवन मूल्‍य की हिफ़ाज़त का एहसास था, यद्यपि वह स्‍वयं इतना अधिक इन पाबंदियों को पूरा न कर पाती मगर एक बार जब से वह अपने मुल्‍क से बाहर आई थी एक बात का बहुत ध्‍यान रखती कि वह यहाँ अपने देश की प्रतिनिधि है और अँग्रेजी समाज हर रूप में उसको एक इस्‍लामी एवं पाकिस्‍तानी नागरिक मानता है और उसके प्रत्‍येक कदम पर उस को उसी दृष्‍टि से देखेगा, जैसे चावल दम होने पर एक दाना देखकर राय का़यम की जाती है कि चावल गल गये। न्‍याय-अन्‍याय का उसको बहुत ध्‍यान रहता था। इसीलिए स्‍कूल में अपने परिधान (लिबास), अपनी प्रतिष्‍ठा के कारण बहुत सम्‍मान से देखी जाती । भोजन के समय स्‍कूल के कुछ विद्यार्थी उसके पास भेज दिये जाते जो नमाज़ के पाबंद हुआ करते थे। उन बच्‍चों को वह उस कमरे में भेज दिया करती थी जो उसने स्‍कूल से बहुत प्रयास के बाद उन शिष्‍यों के लिए हासिल किया था। कभी-कभी सरवत भी बल्‍कि रमजान के ज़माने में जाकर उन बच्‍चों के साथ फर्ज़ नमाज़ अदा कर लेती वहीं पर एक सांवली सी लड़की बहुत ही प्रभावित करती, उसके चेहरे की बनावट भी कोई खास तीखे न थे। नमकीन चेहरा लेकिन मोनालिज़ा सा चेहरा पवित्रता से भरपूर और अधखुले होठों पर मुस्‍कान बिखरा रहता। उस खामोश पसंद लड़की पर सरवत की नजर प्रायः पड़ा करती। चूँकि सरवत उसे पढ़ाती नहीं थी तो सरवत उसको ज्‍यादा जानती भी नहीं थी। मगर उसका चंबेली सा बदन सरवत पर एक प्रभाव छोड़ गया था।

सरवत चूँकि स्‍कूल में अत्‍यधिक प्रसिद्ध थी जिसका कारण यह था कि वह बाहर से आए हुए बच्‍चों की समस्‍याओं को हल करने में बहुत रूचि लिया करती। एक प्रकार से वह कॉउन्‍सलिंग भी करती। दो-तीन भाषाओं को जानने के कारण उसकी अहमियत स्‍कूल के विद्यार्थियों में कम न थीं।

एक दिन उस लड़की अर्थात्‌ जिस को सरवत मोनालिज़ा के नाम से पुकारती यानी स्‍टाफरूम में अपने स्‍वभाव के कारण वह नाम रख लिया करती थी, वास्‍तव में उस लड़की का नाम तान्‍या था। तान्‍या की क्‍लास टीचर ने कहा सरवत मेरी क्‍लास में तान्‍या जो है बल्‍कि जिस को तुम मोनालीज़ा कहती हो उसके सिलसिले में काफी चिंतित हूँ क्‍या तुम उससे बात कर सकती हो? कभी-कभी वह बहुत दुखी हो जाती है। उसके साथ में वह जो पूनम बैठती है न, वह उसकी गहरी दोस्‍त है। आज उसने बताया कि वह बहुत ही कठोर दुखों से पीड़ित है। सरवत ने कहा कि समय मिलते ही मैं पता लगाऊँगी कि समस्‍या क्‍या है? दूसरे दिन सरवत ने जाकर उस लड़की को क्‍लास से बुलाकर बात की और कहा कि शायद तुम अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्‍यान नहीं दे पा रही हो और होमवर्क भी पूरा नहीं करती हो। मैं तुम्‍हारी सहायता स्‍कूल के बाद कर दिया करूँगी। विशेष रूप से अँग्रेजी में और विज्ञान में, क्‍या विचार है। उसकी मोनालीज़ा वाली उदास मुस्‍कान लौट आई आँखों में चमक आ गई। अरे हाँ मिस मैं तो स्‍वयं आपसे पूछने वाली थी। अब तान्‍या से सरवत धीरे-धीरे निःसंकोच होने लगी। एक दिन सरवत स्‍कूल के बाद उसको अपने कमरे में ले गई, वहाँ मेज पर सरवत के बच्‍चों की तस्‍वीरें मेज पर एक फ्रेम में लगी रखी थी। तान्‍या ने कहा कि मिस ये कौन हैं? “.... ये मेरे बच्‍चे हैं” ये लड़की उसने मेरी बेटी के चेहरे पर हाथ रखकर पूछा, ये कौन है? यह मेरी बेटी है, बस एक ही बेटी है और दो बेटे हैं। “ये तो बिल्‍कुल आपकी शक्‍ल है। आप ऐसी ही होंगी जब इसके बराबर होंगी।” हाँ तान्‍या सामान्‍य रूप से लड़कियाँ अपनी माँ की शक्‍ल की होती हैं। बड़े होकर वह बहुत मिलने लगती हैं चूँकि वह माँ के शरीर का अंश होती है न।

“सच” उसने आश्‍चर्य से पूछा।

अरे तुम साइंस तो पढ़ती हो न। बच्‍चे में माँ-बाप का रूप होता है। सरवत ने लापरवाही से जवाब दिया।

“और, आवाज़....?” उसने बेचैन होकर पूछा।

“आवाज़, आवाज़ तो बहुत मिलती है। विशेष रूप से टेलिफोन पर बिल्‍कुल धोका हो जाता है सब को। जो भी मुझे फोन करता है “हाय अल्‍लाह” उसके मुँह से सहसा निकला। “मेरी ही क्‍या, मेरी तमाम सहेलियों की बेटियों की आवाज़ इसी तरह भ्रम पैदा करती है।” सरवत ने जवाब दिया।

“मिस एक बात और बताइये क्‍या मैं भी अपनी माँ जैसी निकलुंगी। मेरी आवाज़ और मेरा रूप भी वैसा ही होगा” उसने गंभीर भावनाओं के स्‍वर में डूब कर पूछा।

“हाँ भई होना तो चाहिए लेकिन आवश्‍यक नहीं” सरवत ने उत्‍तर दिया।

“मैं अपने पापा की शक्‍ल बिल्‍कुल नहीं हूँ” उसने कहा।

“तुम को कैसे मालूम?” सरवत ने कहा।

“इसलिए कि आईना जो रोज़ देखती हूँ ” वह मुस्‍कुराई तुम्‍हारी अम्‍मी जैसी शक्‍ल होगी फिर।

वह बोली - “मुझे क्‍या पता जब ही तो आप से पूछ रही हूँ।”

“तो तुम्‍हारी अम्‍मी कहाँ हैं?” सरवत ने जानने की इच्‍छा ने अँगड़ाई ली।

“वह..... तो ..... चलिए छोड़िए।”

“नहीं बताओ”

“वह तो बेल्‍जियम में है।”

“तुम किसके साथ रहती हो?”

मैं अपने पापा के साथ।

“और...?”

“पापा की बीवी-बच्‍चों के साथ रहती हूँ।”

“तुम्‍हारी सौतेली माँ?”

“जी”

“वह कैसी हैं तुम्‍हारे साथ?”

“आप ये बात किसी को बताइएगा नहीं।”

“नहीं मैं किसी को नहीं बताऊँगी तुम्‍हारी निजी बात है।”

आप बहुत अच्‍छी है अपने बच्‍चों के साथ रहती हैं उसने सरवत के दुखती रग पर उंगली रख दी।

“मैं तुम्‍हारी बात कर रही हूँ।”

आप को एक बात बताऊँ? ये सब लोग बहुत खराब हैं उसने नज़रें झुका कर बहुत धीमे स्‍वर में कहा। क्‍यों? सरवत को तान्‍या की समस्‍याओं का सिरा मिलना प्रारम्‍भ हुआ।

“वह लोग मुझे पसंद नहीं करते। उसने बुझे हुए अंदाज में उत्‍तर दिया। आप को देखकर मन चाहता है कि काश! आप मेरे पापा से विवाह कर लेतीं।”

उसकी पलकों पर आँसू चमक रहे थे।

“अरे कैसी बातें करती हो” सरवत हक्‍का-बक्‍का रह गई उसके भोले भाले अंदाज पर।

“अच्‍छा मैं चलती हूँ।” सरवत ने लज्‍जाते हुए काह।

“मेरी भी क्‍लास है आप नाराज़ तो नहीं हो गईं।” वह बोली नहीं चलो तुम्‍हारी भी क्‍लास है मेरी भी। सरवत ने कमरे की चाभी उठाते हुए कहा।

फिर तान्‍या अकसर सरवत से मदद लेने आ जाया करती। एक दिन तान्‍या और पूनम सरवत के कमरे में आई। पूनम ने सरवत को एक नोट दिया जो उसकी टीचर ने भेजा था, उसमें लिखा था, उसके शरीर पर नील के चिह्‍न है। वैसे भी उस दिन के बाद से सरवत सावधान भी हो गई थी लेकिन लगातार इस बारे में सोच रही थी।

“हाँ तान्‍या आओ” सरवत ने कहा।

“पूनम तुम अपनी क्‍लास में जाओ।”

“आज पापा ने मुझे पाइप से मारा है बहुत। मुझ से चाय की प्‍याली टूट गई।”

“इतनी सी बात पर”

“रात को मैं होमवर्क कर रही थी तो चूल्‍हे पर हंडिया रखी थी। वह जल गई और घर में धुआँ भर गया। अम्‍मी ने रात को उनसे शिकायत कर दी तो सुबह को मुझे डर लग रहा था। पापा ने आवाज़ दी, मैं चाय पी रही थी, मेरे हाथ से प्‍याली गिर गई, हमारे रसोईघर के फर्श पर टाइल्‍स लगे हैं जो भी चीज़ गिरती है, टूट जाती है। बस मेरा दुर्भाग्‍य आ जाता है। अम्‍मी रात को पापा से शिकायत कर देती है।”

“फिर अक्‍सर तुम को मार पड़ती है।”

“कभी भैया शिकायत कर देता है, कभी रफिया”

“तुम को पता है इस देश में मारना-पीटना अपराध है।”

“खुदारा मिस किसी को न बताइएगा। यदि स्‍कूल में रफिया को पता चल गया तो वह घर में बताएगी और मुझे इससे भी ज़्‍यादा मार पड़ेगी।”

“अरे वह रफिया जो बहुत बदतमीज़ लड़की है?”

“जी-जी” उसने हकलाते हुए कहा।

“नहीं यह रहस्‍य की बात है परंतु स्‍कूल के उन सारे लोगों को बताना है जिनका इस बात को जानना आवश्‍यक है।”

“क्‍यों?”

“इसलिए कि यहाँ का कानून है कि शारीरिक दण्‍ड बच्‍चों को माँ-बाप या गुरू नही दे सकते,” कठोर कानून है।

“फिर क्‍या होगा अब?”

आओ तुमको तुम्‍हारी टीचर के पास ले चलूँ।

सोशल वर्कर-हेड टीचर ऑफ डिपार्टमेंट स्‍कूल की मिशनरी सक्रिय हो गई।

तान्‍या के माँ-बाप को वार्निंग दे दी गई।

अब उसको शारीरिक चोट तो नहीं लगाई जाती परंतु तानों के, बुरी-भली बातों के ढेर लगते चले गए। वह कभी-कभार आकर सरवत को बता दिया करती।

वास्‍तव में उसका चेहरा जब भी उदास होता सरवत समझ जाती कि अवश्‍य ही घर में कोई कार्यवाही उसके विरूद्ध हुई है, और वह उसको बुलाकर कॉउन्‍सलिंग करती। एक दिन सरवत के दरवाजे पर दस्‍तक हुई।

“अन्‍दर आ जाओ!”

दरवाजा़ खुला। अन्‍दर आने वाली तान्‍या थी उसके मुख पर विश्‍वास का भाव बिखरा हुआ था जो बहुत गज़ब का था बल्‍कि आश्‍चर्य चकित कर देने वाली सीमा तक। “गुड मार्निंग मिस।” आप से एक बात करना है, समय है।

“हां-हां आओ कापियाँ देख रही थी।” उसने कापियाँ समेटते हुए कहा।

“आप एकदिन क़ानून की बात कर रही थीं। मैं उस घर से जाना चाहती हूँ। क्‍या आप मुझे एडोप्‍ट कर लेंगी?”

“हें - ये क्‍या कर रही हो!”

“जी मिस मैं आपके घर का सारा काम कर दिया करूँगी जैसे लोग इस्‍पेअर रख लेते हैं न वैसे ही रख लीजिए” तान्‍या ने हठ किया।

“ये मुमकिन नहीं भई।”

मैं तो खाना भी कम खाती हूँ।

आपका फोन भी इस्‍तेमाल नहीं करूंगी। शावर लेती हूँ रोज़ प्रातःकाल नाश्‍ता में केवल एक कप चाय की प्‍याली।

अरे ये नहीं हो सकता।

मैं फिर सेटर-डे जॉब भी कर लूँगी तो बिलों मैं अपना हिस्‍सा दे दूँगी।

“मेरे पास जगह नहीं है।” मैंने जवाब दिया।

जी मैं अब वहाँ नहीं रह सकती। उसकी आँखों में आँसू झिलमिला रहे थे।

“क्‍यों?”

मेरी सौतेली माँ अपने भाई से मेरा ब्‍याह कराना चाहती है। वह इस देश से बाहर पाकिस्‍तान में है, बस उसको बुलाना चाहती है।

“तुम घर से भागना नहीं” सरवत ने स्‍नेहपूर्वक हाथ रखा।

“मैं ओर एक बात बताऊँ यदि आप किसी से न कहें” उसने रहस्‍यमय ढंग से कहा।

“नहीं कहूंगी बताओ क्‍या बात है?”

रात को भैया ने दराज़ खोली, इसमे उसको Valentine Card मिल गया। उसने तुरंत पापा को दिया तो फिर बस पापा ने कहा अब तुम इसके बाद नहीं पढ़ोगी क्‍योंकि अब तुम सोलह वर्ष की हो गई हो पढ़ाई खत्‍म, और चुपके से वह लोग मुझे झेलम ले जा रहे हैं यानी तैयारी कर रहे हैं, क्‍योंकि मैं ब्रिटिश नेशनल हूँ न।

“उफ्‌ खुदाया” सरवत के मुँह से सहसा निकला। “मैं घर से भागना नहीं चाहती हूँ क्‍योंकि यहाँ पर हमारे समाज की बहुत बदनामी होती है कि पाकिस्‍तानी लड़कियाँ घर से भाग जाती हैं।”

“अब क्‍या करोगी मैं तुम को सलाह नहीं दे सकती” सरवत ने जान छुड़ाना चाही।

“फिर”

“बस अब तुम बड़ी हो गई हो स्‍वयं अच्‍छे बुरे का निर्णय ले सकती हो।” मेरे पास तो अम्‍मी का पता भी नहीं है, वह कभी उपहार भेजती हैं परंतु पापा मुझे उनका पता नहीं देते। एक दिन उन्‍होंने केवल खत दिखाया था, जिसमें लिखा था कि शुक्रिया आप इसका ध्‍यान रखते हैं.... बस। अच्‍छा सुनो पढ़ाई पर ध्‍यान दो, ऐसा नहीं होगा कि वह तुम को ज़बरदस्‍ती ले जाएँ तुम स्‍वयं बहुत बुद्धिमान हो।”

वह मुँह लटका कर चली गई। सरवत ने सारी रिर्पोट लिख कर उसके फाइल में नत्‍थी कर दी।

सरवत रजिस्‍टर लेकर कार्यालय में प्रवेश कर रही थी तो क्‍लर्क ने उसको लिफाफा दिया कि यह हेड टीचर ने आप को आपके Comment के लिए भेजा है। उसे खोला तो वह किसी लड़के की तरफ से तान्‍या के नाम था उस पर लिखा था-

“तान्‍या चिंता मत करो, अब तुम सोलह वर्ष की हो चुकी हो, हम को अब कोई जुदा नहीं कर सकता है। हम सिविल मैरिज कर लेंगे और यह पवित्र आत्‍मा हमारे प्रेम की साक्षी होगी।”

तुम्‍हारा अपना

जावेद

उस पर दो दिल बने थे और क्‍यूपेड का तीर जो एक नन्‍हें बच्‍चे की शक्‍ल में उस पर भोलेपन के साथ थामे हुए था। सरवत के हाथ में कार्ड और उसके चेहरे पर “न निगलते बनता, न उगलते बनता” के हाव-भाव प्रश्‍नवाचक चिह्‍न की तरह बिखर गए। नन्‍हीं परी के मुख पर मोनालीज़ा की मुस्‍कान चकनाचूर होकर रह गई।

--

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: बानो अरशद की कहानी - नन्‍ही परी
बानो अरशद की कहानी - नन्‍ही परी
http://lh3.ggpht.com/-dBoZKvjZIR4/UN7ANXZHPKI/AAAAAAAARlU/VDAtqgchlaQ/image%25255B2%25255D.png?imgmax=800
http://lh3.ggpht.com/-dBoZKvjZIR4/UN7ANXZHPKI/AAAAAAAARlU/VDAtqgchlaQ/s72-c/image%25255B2%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2012/12/blog-post_6956.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2012/12/blog-post_6956.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content