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राजीव आनंद की कविता - इंडिया औ' भारत : गणतंत्र दिवस पर विशेष

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इंडिया औ' भारत : गणतंत्र दिवस पर विशेष

दस करोड़ के बंगले में

कई इंडिया में रहते हैं !

आधी आबादी भारत की

इंदिरा आवास को तरसते हैं !

इंडिया के कई लोग केक औ' दूध

बिठा कर कार में कुत्‍ते को खिलाते हैं !

भारत में रहने वाले लाखों बच्‍चे

चांद को देखकर रोटी-रोटी चिल्‍लाते हैं !


पूरा शहर पी ले इतना पानी इंडिया में

हर रोज होता है बर्बाद रणवास में!

एक परिवार के पीने भर पानी

मयस्‍सर नहीं भारत के इंदिरा आवास में !

हिटरों औ' गिलाफों का ढेर लगा

इंडिया के कई बंगले औ' आवासों में !

फटे बोरों में लिपटकर ठिठुरता

मर रहा भारतीय सपूत फुटपाथों में !

 

हर वर्ष गणतंत्र दिवस

मनाने का है क्‍या अर्थ ?

गर बढ़ती जाती है

असमानता की खाई हर वर्ष !

सही अर्थों में गर मनाना है

भारत में गणतंत्र दिवस !

इंडिया औ' भारत का यह भेद

हर हाल में मिटाने को हम सब हैं विवश !

--

राजीव आनंद

प्रोफेसर कॉलोनी, न्‍यू बरगंड़ा

गिरिडीह, झारखंड़ 815301

मो. 9471765417

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