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एस. के. पाण्डेय की गणतंत्र दिवस विशेष बाल कविता - हमारा भारत

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हमारा भारत 

अपना भारत प्यारा भारत अपनी आँखों का तारा है ।
भारत में जो रहने वाले उन लोगों का नारा है ।
हम भारत के भारत मेरा भारत देश हमारा है ।।
सच्चे भारतवासी को भारत प्राणों से प्यारा है ।

दुनिया में हैं देश अनेकों सब देशों से न्यारा है ।
धरा गगन का अपना भारत सूरज जैसा तारा है ।।
ज्ञान विज्ञान का जिसके फैला दुनिया में उजियारा है ।
गौरवशाली गाथा इसकी सबने सुना पुकारा है ।।


गिरवर को किरीट सरीखा इसने सिर पे धारा है ।
सागर इसके पैरों को होकर मन  मुदित पखारा है ।
राम कृष्ण की पावन धरती देवों को भी प्यारा है ।
हम भारत के भारत मेरा भारत देश हमारा है ।


भारत माता ने जब-जब रक्षा हेतु पुकारा है ।
वीर सपूतों ने तब-तब अपना तन मन सब वारा है ।।
रहा हो दुश्मन कोई कैसा हमने उसको ललकारा है ।
चढ़-चढ़ कर उसकी छाती पर हम लोगों ने मारा है ।

सभ्यता-संस्कृति की जोड़ न इसके अद्भुत भरा पिटारा है ।।
दुनिया की क्या बात कहें हम देवों ने भी उचारा है ।
गंगा, यमुना सरयू आदिक की बहती अविरल धारा है  ।
धन्य है भारत देश निराला वेद ग्रंथ का नारा है ।।


गद्दारों की बढ़ती टोली जिनका मन ही कारा है ।
चुन-चुन उनको देश निकालों भारत देश हमारा है ।।
उसका क्या है काम यहाँ जिसको न भारत प्यारा है ।
सच्चे भारतवासी को भारत प्राणों से प्यारा है ।।
दुनिया में हैं देश अनेकों सब देशों से न्यारा है ।
हम भारत के भारत मेरा भारत देश हमारा है ।।
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डॉ. एस. के. पाण्डेय,
समशापुर (उ.प्र.) ।
ब्लॉग: श्रीराम प्रभु कृपा: मानो या न मानो
URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/
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