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सीताराम गुप्ता की कविता - लड़की की पीड़ा की अभिव्यक्ति

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लड़की की पीड़ा की अभिव्यक्ति
सुनकर
पत्थर तक
द्रवीभूत हो गए
उस लड़की की पीड़ा
एक ने
रची एक कविता
उसकी पीड़ा को शब्द दिये
और दूसरे ने
ताना-बाना
बुना कथा का उस पर
उस कविता और कथा
दोनों पर
अदबी हल्क़ों में
ख़ूब हुईं चर्चाएँ
मिली प्रशंसाएँ और पुरस्कार
दोनों, दोनों को
और इससे होकर प्रभावित
होकर थोड़ा-सा उत्साहित
एक युवक ने
खोज-बीन कर
गले-सड़े इस सिस्टम को
केंद्र में लेकर
उस लड़की पर
फिल्म बनाई
और
फिल्म ने
दूर विदेशों तक में
ख्याति पाई
एक बुततराश ने
लड़की की पीड़ा को
पत्थर में हूबहू ख़ूब तराशा है
एक रंगकार
उसकी भी ख़्वाहिश है
इस लड़की के ज़रिये
कैनवास पर रंगों को आजमाए
अपनी पहचान बनाए
और ये लड़की भी
अब थोड़ा ख़ुद को
महसूस कर रही है महफूज़
क्योंकि
न जाने कितने और कलाकारों को
अब उसकी सख़्त ज़रूरत है
हर इक कलाकार ने
चुन रखा है
अपने हिस्से की
एक-एक उपेक्षित शोषित-पीड़ित को
अभिव्यक्ति के लिए उसकी पीड़ा की
शेष पर
सिलसिला शोषण का
पीड़ा का जारी है
आख़िर
हरेक की पीड़ा को
ध्वनि, रंग-रूप, प्रकाश
आकार-प्रकार दे दें जो
इतने शिल्पी, इतने कलाकार
कहाँ से आएँ?
मिट सकती है
शेष सभी की पीड़ा भी
कलाकार गर कोई
थोड़ा बड़ा हो जाए
एक-एक की नहीं
सभी की पीड़ा को
एक साथ दिखलाए
या फिर
हर पत्थर
इंसाँ हो जाए
और हर इंसाँ
इक कलाकार बन जाए

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सीताराम गुप्ता
ए.डी.-106-सी, पीतमपुरा,
दिल्ली-110034
फोन नं. 011-27313679/9555622323
srgupta54@yahoo.co.in

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