विजेंद्र शर्मा का आलेख - विवादों की जन्मस्थली ....जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल

SHARE:

विवादों की जन्मस्थली ....जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल पिछले दो-तीन सालों से राजस्थान की राजधानी जयपुर में जनवरी माह में होने वाले जयपुर साहित्य ...

विवादों की जन्मस्थली ....जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल

पिछले दो-तीन सालों से राजस्थान की राजधानी जयपुर में जनवरी माह में होने वाले जयपुर साहित्य उत्सव ने सुर्ख़ियों में बने रहने के तमाम रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। गुलाबी नगरी में होने वाला ये आयोजन पहली बार ज़ियादा सुर्ख़ियों में तब आया जब इसके एक सेशन में अंग्रेजी के कुख्यात लेखक सुहेल सेठ मंच पर ही मदिरा सेवन करते हुए देखे गए। इस कु-कृत्य का विरोध होना जायज़ था और हुआ भी ,उत्सव में शाम को सजने वाली शराब से सराबोर महफ़िलों ने भी लोगों का ध्यान बड़ा आकर्षित किया। इस उत्सव के आयोजकों ने जैसे ही इसमें ग्लैमर का तड़का लगाया भीड़ के साथ–साथ प्रायोजक भी कतार में आकर खड़े होने लगे। मात्र दो–चार लाख के मामूली बजट से शुरू हुए इस मेले का बाज़ार आज करोड़ों तक पहुँच गया।

साहित्य के नाम पर होने वाले इस उत्सव को विश्व के नक्शे पर जगह दिलाने के लिए आयोजकों ने बड़ी सोची समझी रणनीति के तहत जानबूझकर गत वर्ष सलमान रुश्दी का नाम उछाला। ये लोग जानते थे कि प्रशासन रुश्दी को यहाँ आने तो नहीं देगा मगर उसके नाम और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में हम इस “जयपुर लिकर उत्सव “को मक़बूल (प्रसिद्ध ) ज़रूर कर देंगे। इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि आयोजक अपनी चाल में क़ामयाब हो गए , दो बेशर्म लेखक बड़ी बेहयाई के साथ सलमान रुश्दी की प्रतिबंधित किताब के अंश पढ़ गए और हमारा लचर निज़ाम लाचार खड़ा रहा। पूरे उत्सव के दौरान खुलेआम सिगरेट का धुंआ तमाम पाबंदियों के बावजूद भी वातावरण को प्रदूषित करता रहा और बहुत सी फ़िल्मी हस्तियों का साहित्य के प्रति दिखावटी लगाव देखने को मिला ख़ासकर “ बाबू जी ज़रा धीरे चलो “ जैसे आइटम गीत पर थिरकने वाली याना गुप्ता का साहित्य प्रेम।

डिग्गी पैलेस में होने वाले साहित्य के महाकुम्भ जैसे विशेषण से चर्चित कर दिए गए इस आयोजन से साहित्य का कोई भला होगा ऐसी उम्मीद इस साल भी नहीं थी। जानबूझकर इस बार भी विवादों के शामियाने डिग्गी पैलेस में लगाए गए। उन निर्लज्ज लेखकों को पुनः बुलाने की क्या ज़रुरत थी जिन्होंने पिछले साल रुश्दी की प्रतिबंधित पुस्तक के अंश पढ़े।

पाक सेना ने हमारे दो जवानो को सरहद पर बर्बरता से शहीद कर देती है और एक जवान का सर तक काट कर वे लोग ले जाते हैं ,पाकिस्तान की हुकूमत इस घिनौने कृत्य पर संवेदना तक प्रकट नहीं करती ,फिर क्या ज़रूरी था कि वहाँ के साहित्यकारों को यहाँ बुलाया जाए।

ये सब भी जानबूझ कर किया गया ताकि आयोजन को सुर्ख़ियों में जगह मिलती रहे। अगर भारतीय सेना ने पाक सेना के किसी जवान का यूँ सर काटा होता और ऐसा कोई आयोजन पाकिस्तान में होता तो मैं दावे के साथ कहता हूँ कि वहाँ से हमारे साहित्यकारों का कार्यक्रम में भाग लेना तो दूर उनका वापिस आना तक मुश्किल हो जाता। पंच सितारा होटल में बैठकर अभिवयक्ति की स्वतंत्रता की बात करने वाले लेखक आवाम के दर्द को कहाँ समझ सकते हैं।

अंग्रेजी साहित्य को विशेष तरजीह देने वाले इस उत्सव के आयोजकों ने हिंदी,उर्दू ,और यहाँ की एक-आध ज़ुबान के सेशन रखवा कर थोड़ी मेहरबानी ज़रूर कर दी। अदब के नाम पर होने वाले इस मनोरंजन उत्सव का जब-जब जिस किसी ने विरोध किया उन्हें आयोजकों ने अगली बार आमंत्रित कर लिया या एक आध सेशन में जगह दे दी। जो अख़बार इस मेले की कल तक मुखालफ़त कर रहे थे आज वे ही इसके मीडिया पार्टनर बने हुए हैं। कुछ स्थानीय साहित्यकार और स्वयम्भू साहित्यकार भी पिछले साल खुलेआम इस आयोजन के विरोध में थे मगर इसबार आयोजकों ने बड़ी चतुराई से इन्हें एक –आध सेशन का झुनझुना खेलने के लिए दे दिया और इन अदीबों को ऐसे लग रहा है जैसे इन्हें पदम् विभूषण मिल गया हो।

इस फेस्टिवल का पहला दिन ही एकबार फिर विवादों के साथ शुरू हुआ , आदरणीया महाश्वेता देवी जी ने जमकर नक्सलियों का दर्द लोगों से बांटा ,उन्होंने कहा कि नक्सलियों को सपने देखने का हक़ है काश महाश्वेता देवी जी को नक्सलियों के हाथों शहीद हुए जवानो के सपनों की भी फ़िक्र होती। क्या ज़रूरत थी साहित्य के नाम पर होने वाले उत्सव में इस तरह की बेहूदा बात करने की।

विज्ञापन जगत से फिल्मों में गीतकार हो गए प्रसून जोशी इस मेले के ब्रांड एम्बेसडरों में से एक हैं। प्रसून जी ने पता नहीं क्या सोचकर कहा कि भगवान् कृष्ण भी इव टीजर थे। बड़े अफ़सोस की बात है कि अपने आप को गीतकार कहने वाला कृष्ण के व्यापक दर्शन से ही नावाकिफ़ है समझ में नहीं आता कुछ हटकर बोलने के रौ में ये चमक –धमक वाले लोग इतनी बेतुकी बातें क्यूँ कह जाते हैं। जावेद अख्तर साहब ने भी कुछ हट कर कहने के चक्कर में यहाँ तक कह दिया कि “एक माँ बच्चे के सबसे क़रीब होती है , वही बच्चे को असली तालीम देती है , एक माँ को धर्म से दूर रहना चाहिए ताकि बच्चे को वो सही शिक्षा दे सके।””क्या धर्म किसी माँ को अपने बच्चे को सही तालीम देने से रोकता है ? इस बेतुके बयान का कोई सर पाँव नज़र नहीं आता।

जिस दिन ये मेला शुरू हुआ उस दिन राजस्थान के एक जाने-माने चैनल पर नीचे पट्टी पर ख़बर चल रही थी की प्रसून जोशी जयपुर पहुंचे ..मैरिट होटल में रुकेंगे ....क्या यही मेयार रह गया है ख़बर का ?

लाखों रुपये प्रसून जोशी , जावेद अख्तर , शबाना आज़मी और गुलज़ार साहब को आयोजकों ने शिरकत करने के दियें होंगे और सुना है कि गुलज़ार तो इस बार सिर्फ़ श्रोता का किरदार अदा करने आयें हैं ,यक़ीनन गुलज़ार साहब को श्रोता बनने की भी काफ़ी मोटी रकम मिली होगी।

एक तरफ़ एक सच्चा क़लमकार पैसों के अभाव में अपनी रचनाओं का अपनी डायरी में ही क़त्ल कर देता है दूसरी तरफ़ साहित्य के नाम पर होने वाले इस आयोजन में करोड़ों रुपये सिर्फ़ कुछ स्वयम्भू अदीबों के ठहरने और इनके आने की फीस में उड़ा दिए जाते है ये दुर्भाग्य नहीं तो और क्या है।

मुझे तो क्या क़लम से सच्ची मुहब्बत करने वाला हर शख्स जयपुर के इस साहित्य उत्सव को अब यही समझने लगा है :--

जहां अदब के नाम पर , मौज मस्तियाँ जाम।

जयपुर में साहित्य का , कैसा है ये धाम।!

दो साल पहले जयपुर के एक प्रतिष्ठित साहित्यिक प्रकाशक ने दस साहित्यिक किताबों का मूल्य मात्र सौ रुपये रखा , साहित्य के क्षेत्र में ये एक क्रांतिकारी पहल थी , दस लेखकों का क़लाम बहुत से लोगों तक पहुंचा। अदब की दुनिया में ये क़दम एक साहसिक क़दम था और इसकी पज़ीराई भी बहुत हुई। उस वक़्त फेसबुक की वाल पर कुछ दोगले किस्म के अपने आप को अदीब कहने वाले लोगों ने बहुत कुछ लिखा। लेखक के हित का मुद्दा उन्होंने बड़े ज़ोर-शोर से उठाया मगर इस आयोजन के एक सेशन में जगह भर मिल जाने से यही लोग फूले नहीं समा रहें हैं। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में लेखनी के साथ होता हुआ भद्दा मज़ाक क्या इन्हें अब नज़र नहीं आता ? क़लम के इन नकली सिपाहियों को ये सब नज़र तो आता है मगर सुर्ख़ियों में बने रहने की चाह ने इन्हें शब्द के साधक से शब्द का सौदागर बना दिया है।

विवाद का कोई भी मौका ये फेस्टिवल अपने हाथ से जाने ही नहीं देता ,मेले के तीसरे दिन साहित्य के मंच पर ज़ात-पात पे उतर आये समाज शास्त्री आशीष नंदी को अचानक क्या हुआ कि उन्होंने यहाँ तक कह डाला की दलित और पिछड़े ज़ियादा भ्रष्टाचारी है। मीडिया की बदौलत जब ये बात फैली तो दस मिनट के अन्दर – अन्दर नंदी की गन्दी ज़ुबान एक दम पलट गयी वे अपने दिए बयान पर सफाई देने लगे। क्या पूरे मुल्क ने सुना नहीं वो बयान , पहले कहना फिर मुकर जाना ये सब क्या है :--

पहले बोले जोश में , गए बाद में नाट।

सरेआम नंदी गए , अपना थूका चाट।!

किसी साहित्यिक मंच पे ऐसी बहस का सबब समझ से परे है या फिर ये है कि लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का सारा ठेका “जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल” के आयोजकों ने ले रखा है।

ऐसे बयान के बाद प्रशासन को चाहिए था की नंदी और आयोजकों को तुरंत गिरफ़्तार करते मगर इनके खिलाफ़ मुकद्दमा भी लोगों के दवाब के बाद दर्ज किया गया।

भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा एक युवा लेखक की कहानी को ये कहकर लौटा दिया गया था की आप के अफ़साने में अश्लीलता बहुत है , साहित्य में ऐसी कहानी का कोई स्थान नहीं हो सकता और इधर जयपुर साहित्य उत्सव के आयोजकों ने उस अश्लील कथाकार गौरव सोलंकी को बाकायदा आने का न्योता दिया है। ऐसा लेखक नई नस्ल को क्या सिखाएगा , ज़हनी तौर से बीमार इस तरह के लेखकों का एहतराम करके आयोजक क्या साबित करना चाहते है।

अभी तक हुई इस मेले की तमाम कारगुजारियों को देखते हुए कहीं से भी नहीं लगता कि इस उत्सव में अदब का भला किसी भी ज़ाविये से हुआ है। अब तो ये सवाल उठता है कि इस आयोजन के साथ साहित्य का नाम क्यूँ चस्पा किया जा रहा है। भविष्य में अगर ये आयोजन हो तो “ जयपुर साहित्य उत्सव “ के नाम की जगह इसका नाम “जयपुर मनोरंजन महोत्सव “ कर देना चाहिए।

राजस्थान के साथ –साथ हिन्दोस्तान के तमाम अदीबों से मेरी गुज़ारिश है कि

अदब के नाम पर जयपुर में हर साल होने वाली इस नौटंकी पे लगाम लगनी चाहिए क़लम के सही मायने में पुजारियों को इस आयोजन का बहिष्कार करना चाहिए। सात से आठ करोड़ के बजट वाले इस आयोजन से आख़िर कुछ विवादों और आयोजकों की जेबों के भराव के अलावा क्या निकल कर आता है।

ऐसे आयोजन से अच्छी तो हमारी ग़रीब साहित्य अकादमियां हैं जो तंग-हालत में भी कम से कम सौ-दो सौ किताबों को छपवाने के लिए लेखकों को आर्थिक सहयोग देती हैं। हमारी अपनी तहज़ीब को मिटाने पे तुले इस “लिटरेचर उत्सव” में जगह पाकर धन्य हुए हिंदी, उर्दू ,राजस्थानी या अन्य हिन्दुस्तानी ज़ुबान के क़लमकार कभी ये क्यूँ नहीं सोचते कि अना नाम की भी कोई शैय होती है। जहां इनकी भाषा के साथ दोयम दर्जे का बर्ताव हो वहाँ बैठकर ये लोग सांस कैसे ले लेते हैं।

इस नौटंकी के प्रायोजकों का जहां तक सवाल है उन्हें भी अपने फैसले पे एकबार फिर से गौर करना चाहिए। अगर कोई साहित्यिक संस्था इन लोगों के पास थोड़ी इमदाद के लिए जाती है तो इनकी नाक ,भोंहें सिकुड़ने लगती हैं मगर जयपुर की पवित्र धरा पर होने वाले इस मौज़-मस्ती के मेले के लिए लाखों रुपये देने के लिए इन प्रायोजकों में होड़ लगी रहती है।

साहित्य की आत्मा को चोट पहुंचाने के सिवाय इस उत्सव ने अगर किसी का भला किया है तो वो है जयपुर के होटल व्यवसाय का , बड़े- बड़े कारोबारियों का और आयोजकों का , ईश्वर करे जयपुर का नाम विश्व मान-चित्र में छाया रहे ,यहाँ का कारोबार फले-फूले मगर साहित्य के नाम का दुरूपयोग करके नहीं।

इसी विश्वास और उम्मीद के साथ कि आने वाले साल में अगर ये उत्सव हो तो विशुद्ध साहित्य का हो, अगर फिर इसी तरह का मेला लगना है तो इसके आयोजक मुस्तक़बिल में अदब के कांधों पे बन्दूकसाज़ी ना करें।

कविता है ज़ख़्मी यहाँ ,ग़ज़ल रही है कूक।

कांधे पर साहित्य के , चला रहे बन्दूक।!

विजेंद्र शर्मा

Vijendra.vijen@gmail.com

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: विजेंद्र शर्मा का आलेख - विवादों की जन्मस्थली ....जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल
विजेंद्र शर्मा का आलेख - विवादों की जन्मस्थली ....जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल
http://lh5.ggpht.com/-VAkr8m0z5qY/UBepOBpFdhI/AAAAAAAANGk/Yne99K_jkXU/image%25255B3%25255D.png?imgmax=800
http://lh5.ggpht.com/-VAkr8m0z5qY/UBepOBpFdhI/AAAAAAAANGk/Yne99K_jkXU/s72-c/image%25255B3%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2013/01/blog-post_5783.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2013/01/blog-post_5783.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content