राजीव आनंद का आलेख - झारखंडी चित्रकला

SHARE:

झारखंड़ी चित्रकला ः विलुप्‍ति के कगार पर झारखंड आदिवासी बहुल इलाका होने के कारण लगभग तीस आदिवासी समुदाय राज्‍य के विभिन्‍न जिलों में निवास क...

झारखंड़ी चित्रकला ः विलुप्‍ति के कगार पर

झारखंड आदिवासी बहुल इलाका होने के कारण लगभग तीस आदिवासी समुदाय राज्‍य के विभिन्‍न जिलों में निवास करते है जिनकी जसंख्‍या 2011 जनगणना के अनुसार लगभग 80 लाख है। झारखंड़ में लोक चित्रकला की परम्‍परा सदियों पुरानी है। भारत में मानव सभ्‍यता जिसे सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के नाम से जाना जाता है, में चित्रकला की उत्‍पति सर्वप्रथम हुयी। झारखंड़ जंगलों और पहाड़ों से भरा-पूरा क्षेत्र है इसलिए आदिवासियों का प्रिय क्षेत्र रहा है। असुर, बिरहोर, बिरजिया एवं खड़िया झारखंड़ की प्राचीनतम जनजातियां है जिनमें असुर सबसे प्राचीन या आदिम जनताति है। कोरबा जनजाति भी काफी प्राचीन है। मुंड़ा, हो, उरांव जनजातियां बाद की है। झारखंड़ में क्षेत्रीय राजवंशों को समृद्ध इतिहास मिलता है जैसे छोटानागपूर का नाग वंश, पलामू को रक्‍सेल बंश तथा सिंहभूम का सिंह वंश। क्षेत्रीय राजवंशों के छत्रछाया में कला और संस्‍कृति का विकास ऐतिहासिक रहा है झारखंड़ में।

झारखंड़ में चित्रकला खसकर लोक चित्रकला की समृद्ध परम्‍परा पायी जाती है जिसमें आदिवासी समुदायों की जीवनश्‍ौली, सामाजिक, धार्मिक व सांस्‍कृतिक मान्‍यताएं परिलक्षित होती है। आदिवासियों का प्रकृति प्रेम जगजाहिर है, इनका जन्‍मजात जुड़ाव जल, जंगल और जमीन से रहा है। आदिवासी प्राकृति के सौंदर्य के उपासक माने जाते है इसलिए उनके आस-पास का प्राकृति वातावरण चित्रकला का प्रेरणा स्रोत रहा है। प्रकृति की विविधताओं की तरह झारखंड़ की चित्रकला में काफी विविधता पाया जाता है। उनकी चित्रकला का सहज रूप उनके घरों की सजावट में आज भी देखा जा सकता है। घर की दिवारों को चिकनी मिट्‌टी का लेप और गोबर का लेप लगाकर स्‍त्रियां विश्‍ोषकर अविवाहित लड़कियां वनस्‍पतियों से प्राप्‍त रंगों से विभिन्‍न प्रकार की आकृतियां एवं ज्‍यामितिक कलाकृतियां बनाती है।

झारखंड़ के आदिवासियों द्वारा कपड़ा या कागज के छोटे-छोटे टुकड़े को जोड़कर बनाया जाने वाला चित्रफलक को जादोपटिया चित्रकारी कहते है। चित्रकार यानी जादो तथा कपड़ा या कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों को जोड़कर बनाये गए पटि्‌टयों पर की जाने वाले चित्रकारी को जादोपटिया चित्रकारी कहते है। यह चित्रकारी झारखंड़-बंगाल की सीमा क्षेत्र के संथालों में विशेष रूप से प्रचलित है। प्रत्‍येक पट्‌टी लगभग पंद्रह से बीस फीट तक चौड़ा होता है और एक पट्‌टी पर लगभग दस से पंद्रह चित्र संथाल समाज के मिथकों पर आधारित लोक गथाओं, धार्मिक व सामाजिक रीति-रिवाजों तथा नैतिक मान्‍यताओं को दर्शाया जाता है। जादोपटिया चित्रकला में चित्रकार कपड़े पर सुई-धागे से सिलाई कर लगभग पंद्रह से बीस फीट तक चौड़ा पट तैयार किया जाता है तथा कपड़े पर कागज को बेल के गोंद से चिपकाया जाता है। एक पट में एक प्रचलित मिथकों पर आधारित पांच से दस चित्रों को संयोजित किया जाता है जिसे दिखाने में लगभग आधे घंटे का समय लिया जाता है। प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया जाता है तथा रंगों को भरने के लिए बकरी के पूंछ से लिए गए बालों से बनाए गए कूंची से किया जाता है। प्रत्‍येक पट्‌टी में बार्डर का प्रयोग लगभग अनिवार्य होता है तथा रंगों में प्राय काला, पीला और हरा का प्रयोग किया जाता है। इन चित्रों को चित्रकार घूम-घूम कर दिखाते है तथा दिखाने का तरीका कथा वाचन के रूप में किया जाता है, चित्रकारों का जीवनयापन इसी चित्रकारी द्वारा कथा वाचन से ही चलता है। यद्यपि तेजी से वैश्‍वीकरण और बाजारवाद से आए आदिवासी समाज में बदलाव से जादोपटिया चित्रकला का ह्रास होने लगा है। चित्रकार या जादो अब सिर्फ चित्रकला के माध्‍यम से अपना जीवनयापन नहीं कर पा रहे है, आर्थिक तंगी के कारण दो जून की रोटी भी जुगाड़ने में असमर्थ है और दूसरे पेशों की ओर उम्‍मुख होते नजर आ रहे है। ऐतिहासिक दृष्‍टिकोण से देखा जाए तो पूर्व में चित्रकला का विषय वस्‍तु रामायण, महाभारत, कृष्‍णलीला, यमराज द्वारा दिए जाने वाले दंड़, सिद्‌दू-कान्‍हू, तिलका मांझी, बिरसा मुंड़ा की शौर्य और विद्रोह गाथा से लिया जाता था लेकिन वर्तमान में चित्रकला के विषय कम होते जा रहे है तथा आजकल यमराज द्वारा दिए गए दंड़ तक ही सीमित होकर रह गयी है। जादोपटिया चित्रकारी वर्तमान पीढ़ी को अपने पिछली पीढ़ी से विरासत में मिलती रही है परंतु दुर्भाग्‍य से इस विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी तक ले जाने की प्रवृति में जबरदस्‍त ह्रास हुआ है परिणामस्‍वरूप जादोपटिया विलुप्‍त होने के कगार पर है अगर राज्‍य सरकार जादोपटिया चित्रकारी को संरक्षण देते हुए कला समाज के वृहतर लोगों के साथ जोड़ने एवं अलग से अकादमी बनाने का कार्य नहीं करती है तो जादोपटिया चित्रकला का नामोनिशान मिट जाएगा।

आदिवासी समाज में प्रचलित दूसरी प्रसिद्ध चित्रकला है सेहराय चित्रकला। सोहराय का त्‍योहार दिपावली के एक दिन बाद पशुओं को श्रद्धा अर्पित करने के लिए मनाया जाता है तथा सोहराय चित्रकारी वर्षा ऋतु के बाद घरों की लिपाई पुताई से आरंभ होता है। आदिवासी महिलाओं के परम्‍परागत हुनर के कारण ही सोहराय चित्रकारी आज भी अस्‍तित्‍व में है। कोहबर चित्रकारी की तरह सोहराय चित्रकारी भी आदिवासी महिलाओं द्वारा फरवरी से जून महीने तक कतिपय प्रतीकों को अपने घरों में चित्रित किया जाता है। प्रतीक चयन ही दोनों चित्रकला यथा सोहराय और कोहबर में अंतर स्‍थापित करता है। कोहबर चित्रकारी में आदिवासियों के धार्मिक देवी अर्थात सिकी को चित्रित किया जाता है जबकि सोहराय चित्रकारी में कला के देवता पशुपति या प्रजापति को चित्रित किया जाता है। कोहबर चित्रकारी में सबसे प्रचलित चित्रकारी है पशुपति को सांढ़ की पीठ पर खड़ा चित्रित करना। कोहबर चित्रकारी में जहां स्‍त्री-पुरूष संबंधों के विभिन्‍न आयामों को चित्रित किया जाता है वहीं सोहराय चित्रकारी में पेड़-पौधे, जीव-जंतुओं एवं पशु-पक्षियों को चित्रकारी किया जाता है। चित्रण शैली के दृष्‍टिकोण से सोहराय चित्रकला की दो प्रमुख शैलियां यथा मंझू सोहराय एवं कुर्मी सोहराय प्रचलित है। चित्रों को प्राय सखुआ पेड़ की टहनी से बनाए गए दातुन के आकार के कूची से रंग भरने का कार्य किया जाता है। कोहबर शब्‍द की उत्‍पति फारसी भाषा के शब्‍द ‘कोह' अर्थात गुफा तथा हिन्‍दी भाषा के शब्‍द ‘वर' अर्थात दुल्‍हा या विवाहित जोड़ा से हुआ है सिका अर्थ हुआ ‘गुफा में विवाहित जोड़ा'। प्रत्‍येक विवाहित महिला अपने पति के घर कोहबर कला का चित्रण विवाह के मौसम जनवरी से जून महीने तक करती है। इसमें घर-आंगन में विभिन्‍न ज्‍यामितीय आकृतियों में फूल-पती, पेड़-पौधे एवं स्‍त्री-पुरूष प्रतीकों की चित्रकारी की जाती है। कोहबर चित्रकला शैली बिरहोर जनजाति में विशेष रूप से प्रचलित है जो अपने कुम्‍बास यानी घरों की दीवारों पर मिट्‌टी का लेप चढ़ाकर कोहबर चित्रकारी करते है। आज भी हजारीबाग व गिरिडीह जिला के बगोदर प्रखंड़ एवं अन्‍य आस-पास के क्षेत्रों में निवास कर रहे बिरहोर जनजाति के घरों में कोहबर चित्रकारी को देखा जा सकता है। यद्यपि बिरहोर जनजाति ही विलुप्‍ति के कगार पर है तो उनका चित्रकारी की दशा का अंदाजा भतिभंति लगाया जा सकता है।

बिडम्‍बना यह है कि संस्‍कृति के आधार पर बिहार से अलग हुआ झारखंड़ राज्‍य आज आदिवासी संस्‍कृति के पतन का कारण बन गया है क्‍योंकि पिछले बारह वर्षों में राज्‍य की आठ सरकारें अपने ही राज्‍य के लोकरंग एवं लोकसंस्‍कृति से बेखबर बाजारवादी शक्‍तियों की चाकरी करने में व्‍यस्‍त रही। बाजारबाद अपनी तथाकथित आधुनिक संस्‍कृति के द्वारा झारखंड़ की लोक संस्‍कृति को नष्‍ट करने पर उतारू है, अगर संस्‍कृति नष्‍ट हो गयी तो अस्‍तित्‍व ही खत्‍म हो जाएगा इसलिए समय आ गया है कि राज्‍य के कलाप्रेमी एक हो जाएं और सरकार को कोसने के बजाए एक बृहद सांस्‍कृतिक क्रांति की तैयारी करें, एक मंच का निर्माण करें और उस मंच पर एकत्रित होकर संस्‍कृतिक चेतना को जगाएं तभी हमारी संस्‍कृति, लोककलाएं, अस्‍मिता बचेगी और जब ये बचेंगी तभी हमलोगों का अस्‍तित्‍व बचेगा।

राजीव आनंद

COMMENTS

BLOGGER
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4288,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3239,कहानी,2360,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,1,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: राजीव आनंद का आलेख - झारखंडी चित्रकला
राजीव आनंद का आलेख - झारखंडी चित्रकला
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2013/02/blog-post_8532.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2013/02/blog-post_8532.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content