---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

कुबेर के 3 व्यंग्य

साझा करें:

व्‍यंग्‍य आसुरी शक्‍तियों के निवारणार्थ कुबेर अक्‍सर जैसे होता है, हमारे मुहल्‍ले वाले भी बड़े आस्‍तिक और धर्...

कुबेर

व्‍यंग्‍य

आसुरी शक्‍तियों के निवारणार्थ

कुबेर

अक्‍सर जैसे होता है, हमारे मुहल्‍ले वाले भी बड़े आस्‍तिक और धर्मपरायण हैं। वातावरण में व्‍याप्‍त आसुरी शक्‍तियों का नाश करने और नकारात्‍मक ऊर्जा की जगह सकारात्‍मक ऊर्जा भरने के लिये नित कोई न कोई धार्मिक आयोजन करते रहते हैं।

मुझे तो आज तक अपने अंदर की ही आसुरी शक्‍तियों को नष्‍ट करने में सफलता नहीं मिल पाई है, बाहर वालों से क्‍या खाक लड़ूँ। नकारात्‍मक ऊर्जा और सकारात्‍मक ऊर्जा में भी भेद करना भूल चुका हूँ। इस तरह के किसी कार्य में मैं रूचि नहीं लेता, लिहाजा उनके लिये मैं सर्वथा अस्‍पृश्‍य हो गया हूँ।

मुहल्‍ले वाले मेरे जैसे नहीं हैं। सारे, सकारात्‍मक ऊर्जा से लबालब भरे हुए हैं। उनके अंदर खालिश दैवीय शक्‍तियों का वास है। इनमें संस्‍था के अध्‍यक्ष अगरवाल जी भी शामिल हैं जिसकी नई नवेली बहू पिछले हफ्‍ते चाय बनाते-बनाते झुलस कर मर गई थी और पुलिस जिसकी जांच कर रही है। शर्मा जी भी शामिल हैं, जो रिश्‍वत लेने के आरोप में कई बार सस्‍पैंड हो चुके हैं।

अभी-अभी मुहल्‍ले में आसुरी शक्‍तियों के निवारणार्थ एक प्रोग्राम हुआ। आसुरी शक्‍तियों का काम तमाम करने और वातावरण में सकारात्‍मक ऊर्जा भरने में उत्‍तर वाले माहिर होते हैं; अतः उधर से ही बहुत बड़ा संत बुलाया गया था। सप्‍ताह भर की ध्‍वनि विस्‍तार से मैं अवसाद में जाते-जाते बचा। न चाहते हुए भी उनका प्रवचन सुनना पड़ा। वातावरण में सकारात्‍मक ऊर्जा बढ़ाने वाली उनकी बातों का लोगों ने जमकर रस लिया। मैंने भी खूब रस लिया। कुछ रस आपके लिये भी बचाकर लाया हूँ।

उनके अनुसार, 'कपि श्रेष्‍ठ हनुमान जी प्रभु राम के भक्‍तों में सबसे ऊँचे हैं।' इस वाक्‍य के प्रत्‍येक शब्‍द, प्रत्‍येक अक्षर की विशद्‌ व्‍याख्‍या करते हुए उन्‍होंने कहा- 'कपि'! क माने कष्‍ट, प माने पाप और इ माने इति; अर्थात मनुष्‍य के सारे कष्‍टों और पापों का नाश करने वाला।'

पंडाल बजरंगबली के जयकारी से गूंज उठा। मुझे लगा, पंडाल का वातावरण सकारात्‍मक ऊर्जा से भरने लगा है।

'भक्‍त' शब्‍द को अनावृत्‍त करते हुए उन्‍होंने कहा -' भ माने भागने वाला, क माने कमर कसकर और त माने पूरी ताकत से। अर्थात भगवान के कामों में कमर कसकर पूरी ताकत से भागने वाला।'

(मैं दाँवे के साथ कह सकता हूँ कि वहाँ एक भी भाषा वैज्ञानिक नहीं रहा होगा। होता तो जरूर उन्‍हें हार्ट अटैक आया होता।)

पंडाल एक बार फिर बजरंगबली के जयकारे और तालियों की आवाज से गूंज उठा। मुझे लगा, अब की बार तालियों की चोंट से पंडाल के अंदर मौजूद सारी आसुरी शक्‍तियों का नाश हो गया होगा।

यह उदाहरण तो एक दिन का, एक प्रसंग मात्र का है। सात दिनों में ऐसे कई प्रसंग आए; अनगिनत जयकारी लगे, सैकड़ों बार तालियाँ बजी। मजाल है कि कोई आसुरी शक्‍ति बच पाई हो।

आज की बात है। बहु को जलाकर मारने के आरोप में अगरवाल जी सपरिवार पकड़ लिये गए हैं। शर्मा जी रिश्‍वत लेने के आरोप में फिर सस्‍पैंड हो गये हैं। नाती-पोते वाला साठ साल का एक आदमी जिन्‍होंने आसुरी शक्‍तियों का निवारण करने वाले कथा-प्रसंगों का सर्वाधिक रसपान किया था, एक नाबालिग की ईज्‍जत लूटते मौके पर पकड़ा गया।

000

व्‍यंग्‍य

तोता रटंत

कुबेर

कानूनी शिकंजे में बुरी तरह जकड़ा और मुक्‍ति हेतु छटपटाता संयोगवश वह ऋषि के आश्रम में पहुँचा। उसका तन ही नहीं मन भी बुरी तरह आहत हो चुका था। उसकी दयनीय हालत देखकर ऋषि का मन करुणा से भर उठा। उसने उसका परिचय पूछा - ''वत्‍स तुम कौन हो?''

''स्‍वामी मैं इस देश का महामंत्री हूँ।'' उसने अपना परिचय दिया।

''तुम्‍हारी ऐसी हालत किसने की?''

''स्‍वामी, इस देश की न्‍याय व्‍यवस्‍था हाथ धोकर मेरे पीछे पड़ी हुई है। कानूनी जाल में मैं बुरी तरह फँसा हुआ हूँ। मुझे जेल की सींखचों से बचाइये।''

''वत्‍स, तुम चिंता न करो। तुम भ्रष्‍ट आचरण के बंधन से बंधे हुए हो। यहाँ कुछ दिन रहकर चित्‍त शुद्ध करो। ज्ञान रूपी प्रकाश से अज्ञान रूपी अँधकार दूर हो जाता है।''

वह आश्रम में रहकर अपना चित्‍त शुद्ध करने लगा। ऋषि उसे रोज उपदेश देता - ''भ्रष्‍ट लोग आते हैं। धन का लालच देते हैं। भ्रष्‍टाचार का जाल फैलाते हैं। लालच में आकर भ्रष्‍टाचार के जाल में नहीं फँसना चाहिये।''

ऋषि का उपदेश उसने कुछ ही दिनों में कंठस्‍थ कर लिया। उसके इस कौशल पर ऋषि बहुत प्रसन्‍न हुआ। उसने सोचा कि इसका हृदय अब परिवर्तित हो चुका है; इसे इसके साथियों के पास भेज देना चाहिये। उसने उसे बुलाकर अंतिम उपदेश दिया - ''वत्‍स, अब तुम अवगुण मुक्‍त हो चुके हो। अपने साथियों के पास राजधानी जाओ। अपने आप को कानून के हवाले करो। कानून जो भी सजा दे उसे स्‍वीकार करो क्‍योंकि अपराधी को सजा देने का अधिकार केवल राजा को होता है। अपने साथियों को भी यह मंत्र सिखाओ और अपने पापों का प्रायश्‍चित करो।''

ऋषि को आत्‍मिक प्रसन्‍नता हूई कि उसने इस देश के मंत्रियों का आचरण शुद्ध करके इस देश को भ्रष्‍टाचार के दलदल में डूबने से बचा लिया है।

कुछ दिनों बाद उसे अपने उपदेशों का सुपरिणाम जानने की इच्‍छा हुई। वह राजधानी गया। राजधानी की हालत देखकर उसे घोर निराशा हुई। उसकी प्रसन्‍नता जाती रही। उसने देखा, वह मंत्री और उसके सभी साथी भ्रष्‍ट लोगों के द्वारा फैलाये जाल में फंसकर फड़फड़ा रहे हैं और उसके द्वारा सिखाये उसी मंत्र का सामूहिक जाप किये जा रहे हैं - 'भ्रष्‍ट लोग आते हैं, धन का लालच देते हैं, भ्रष्‍टाचार का जाल फैलाते हैं, लालच में आकर भ्रष्‍टाचार के जाल में नहीं फंसना चाहिये।'

ऋषि दुखी मन आश्रम लौट आये।

000

व्यंग्‍य

बेरोजगारवाद का घोषणा-पत्र

कुबेर

(बेरोजगारवाद का यह घोषणा-पत्र दुनिया के समस्‍त बेरोजगारों को समर्पित है।)

आकुले जी की अकुलाहट आखिर सफल हुई। बेरोजगारी और बेरोजगारों की समस्‍या उसे दिन-रात खाए जा रही थी। वर्षों की मेहनत के बाद अंततः उन्‍हें इसका हल सूझ ही गया। आखिर उन्‍होंने 'बेरोजगारवाद का घोषणा-पत्र' लिख ही लिया। उनके बेरोजगारवाद के इसी घोषणा-पत्र को बेरोजगारों की दुनिया में तहलका मचाने के लिये प्रस्‍तुत किया जा रहा है। बेरोजगारवाद के इस घोषणा-पत्र से दुनिया भर के बेरोजगारों को न सिर्फ जीने का नया मंत्र मिलेगा बल्‍कि कुछ करने के लिये नया मंच भी मिलेगा। रोजगार के नये-नये अवसरों की तलाश और पहचान भी हो सकेगी। बेरोजगारों के लिये यह अत्‍यंत हर्ष का विषय है परंतु सरकार और पूंजीपतियों सहित उन सभी लोगों के लिये चेतावनी है जो बेरोजगारों का शोषण करते हैं।

'बेरोजगारवाद का घोषणा-पत्र' की शुरुआत इस प्रकार होती है - 'दुनिया के बेरोजगारों, एक हो जाओ। तुम्‍हारे पास खोने के लिये कुछ भी नहीं ह,ै सिवाय तुम्‍हारी आलस्‍यता, निकम्‍मापन और आवारागर्दी के; और पाने के लिये है नया जोश, नई उमंग, नया मकसद और दुनिया के समस्‍त देशों की सरकारें। निराशा, हताशा और कुंठाओं को छोड़कर उद्‌देश्‍य प्राप्‍ति के प्रयासों में जुट जाओ। वह दिन अवश्‍य आयेगा, जब दुनिया के तमाम देशों में बेरोजगारों की ही सरकारें होगी।

सरकार बनाने के लिये बहुमत का होना जरूरी है। इस मामले में हम बड़े सौभाग्‍यशाली हैं। अगर हम संगठित हो जायें तो हमारे देश में हमें बहुमत प्राप्‍त करने से कोई नहीं रोक सकता। दुनिया के कुछ पैसे वाले देशों में थोड़ी-बहुत समस्‍याएँ आ सकती हैं। वहाँ के बेरोजगार अल्‍पसंख्‍यक हो सकते हैं, पर उन्‍हें निराश होने की जरूरत नहीं है। ऐसे तमाम देशों में बहुमत प्राप्‍त करने के लिये बड़ी संख्‍या में विशेषज्ञ बेरोजगारों की टीमें भारत से भेजी जायेगी जो वहाँ के बेरोजगारों को न सिर्फ सरकार बनाने में, अपितु सरकार चलाने में भी मदद करेगी।

दुनिया के हे बेरोजगारों, तुम्‍हारे पास क्‍या नहीं है। तुम्‍हारे पास असीमित मात्रा में बोरोजगार शक्‍तियाँ हैं जिनकी क्षमताएँ अपार हैं। तुम्‍हारे पास ढेर सारे (फालतू) समय है। तुम्‍हारे पास तालियों और नारों की शक्‍तियाँ हैं जिसके सामने दुनिया की सारी शक्‍तियाँ फीकी हैं। इस देश में जितनी सरकारें बनी हैं, सब तुम्‍हारी इन्‍हीं शक्‍तियों की बदौलत बनी हैं। अपनी शक्‍तियों को पहचानों। किसी भी चुनावी सभा में तालियाँ बजाने वालों में सर्वाधिक संख्‍या तुम्‍हारी ही होती है। चुनावी रैलियों में नारा लगाने वालों में भी तुम्‍हारी ही संख्‍या सर्वाधिक होती है। कवियों-साहित्‍यकारों के सम्‍मेलनों में तुम्‍हारे अलावा भी भला कोई मौजूद रहता है? तुम तो सर्वव्‍यापी हो। तुम्‍हारी यही मौजूदगी तुम्‍हारी सबसे बड़ी शक्‍ति है। अपनी इन बेरोजगार शक्‍तियों को पहचानों। इनका उचित मूल्‍य प्राप्‍त करना सीखो। यह तुम्‍हारा 'बेरोजगारी का मौलिक अधिकार' है। बेरोजगार एकता जिंदाबाद।

बेरोजगार साथियों, बेरोजगार शक्‍तियों का उचित मूल्‍य प्राप्‍त करने के लिये दो बातों पर ध्‍यान देना जरूरी है। पहली बात यह कि तुम्‍हारी बेरोजगार शक्‍ति संगठित नहीं है। बेरोजगारों का संगठन बनाना निहायत जरूरी है। गाँव-मोहल्‍ले से लेकर प्रादेशिक, राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर तुम्‍हें संगठित होना है। अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर तुम्‍हारा संगठन 'संयुक्‍त बेरोजगार संघ' के नाम से जाना जयेगा। इस संघ के सभी कार्यालय भारत में ही स्‍थित होंगे। इसका महासचिव संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ के महासचिव से ज्‍यादा पावरफूल होगा। सारे राष्‍ट्राध्‍यक्ष उनकी चमचागिरी करते नजर आयेंगे। बोलो, बेरोजगार एकता.....( जिंदाबाद )।

दूसरी महत्‍वपूर्ण बात है, बेरोजगार शक्‍तियों का मूल्‍य निर्धारण करना। इसे अच्‍छी तरह समझ लेना जरूरी है। तुम्‍हारे पास तीन तरह की दिव्‍य बेरोजगार शक्‍तियाँ हैं - तुम्‍हारी मौजूदगी, तुम्‍हारी तालियाँ और तुम्‍हारे नारे।

तुम्‍हारी मौजूदगी बड़े काम की है। सारे राजनीतिक और अराजनीतिक संगठनों के काम तुम्‍हारी मौजूदगी से ही बनते हैं। इनकी सभा-रैलियों में बिना उचित पारिश्रमिक के उपस्‍थित होना तुम्‍हारे बेरोजगारी के मौलिक अधिकार का घोर हनन है; बेरोजगारों का सबसे बड़ा अपमान है। अतः इन जगहों पर उपस्‍थित होने के लिये अधिकाधिक पारिश्रमिक लिया जाना जरूरी है। पारिश्रमिक तय करते समय विरोधी दल वालों से सतत संपर्क बनाये रखें। ऐसा करना बड़ा मधुर फलदायी होता है। यदि वे चाहें कि आप वहाँ न जायें तो यह और भी अच्‍छी बात है। तब तो आप अपनी अनुपस्‍थिति सुनिश्‍चित करने के लिये डबल पारिश्रमिक या ज्‍यादा के भी हकदार हैं। यह बात तुम अच्‍छी तरह जान लो कि दुनिया में कोई भी सभा या रैली तुम्‍हारी उपेक्षा करके आयोजित हो ही नहीं सकती। बोलो, बेरोजगार एकता.......।

तुम्‍हारी दूसरी शक्‍ति तुम्‍हारी तालियाँ है। ताली बजाना भी एक कला है। प्रत्‍येक बेरोजगार को इसे सीखना अति आवश्‍यक है। इसे सीखने और इसके महत्‍व को रेखांकित करने के लिये प्रशिक्षण संस्‍थानों की बड़ी आवश्‍यकता है। इसके लिये देश भर में जिला स्‍तर पर 'ताली प्रशिक्षण संस्‍थान' खोले जायेंगे। ताली बजाना सीखना किसी साधना से कम नहीं है। अच्‍छी ताली वादक किसी अच्‍छे संगीतकार से कतई कम नहीं होता। संगीत सभाओं की सफलता भी तो आखिर तुम्‍हारी तालियों पर ही निर्भर करती हैं। वह दिन दूर नहीं जब दुनिया के श्रेष्‍ठ कलाकार, संगीतकार, साहित्‍यकार, नेता, मंत्री, सभी, अपने-अपने साथ प्रशिक्षित ताली वादकों की एक टीम लेकर चला करेंगे। इस प्रकार तालीवादन के क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएँ बनने वाली हैं। समाचार पत्रों में जल्‍द ही प्रशिक्षित तालीवादकों की भर्ती हेतु विज्ञापन निकलने की संभावना है। फिर से बोलो, बेरोजगार एकता .........।

ताली प्रशिक्षण संस्‍थानों में इसकी बारीकियों यथा, तालियों की आवृत्‍ति, आवर्तकाल, अंतराल या बारंबारता तथा इसके प्रकार के बारे में समझाया जायेगा। उचित-अनुचित अवसर का ज्ञान कराया जायेगा जिससे सही अवसर पर सही तालियाँ बजाई जा सके। वक्‍ता महोदय की भावभंगिमाओं, इशारों, और आवश्‍यकताओं से संबंधित मनोविज्ञान का भी अध्‍ययन कराया जायेगा। तालियों का रेट तय करते वक्‍त कई बातों का ध्‍यान रखा जायेगा। उचित अवसर पर उचित लय-ताल की तालियों की कीमत उचित ही लिये जायेंगे। परंतु उचित अवसर पर तालियाँ न बजाने या अनुचित तालियां बजाने और अनुचित अवसर पर, जैसे- आरंभ में समापन की या समापन से पहले ही समापन की तालियाँ बजाने के लिये डबल कीमत लिये जायेंगे। समर्थन की तालियों की जगह विरोध की तालियों के लिये तीन गुने तथा साथ में सड़े-अंडे और टमाटर फेंकने के लिये पाँच गुने कीमत लिये जायेंगे। इस तरह के अनुबंध करते समय आयोजकों के विरोधी दलों से आपकी मित्रता परम आवश्‍यक है। एकबार फिर बोलो, बेरोजगार एकता .........।

तुम्‍हारी तीसरी श‍क्‍ति नारे और हूटिंग्‍स हैं। हूटिंग एक तरह का प्रति-नारा होता है, जैसे मैटर या द्रव्‍य का एन्‍टीमैटर या प्रतिद्रव्‍य होता है और जो द्रव्‍य से लाखों गुना श्‍क्‍तिशाली होता है। नारा समर्थन का वज्रास्‍त्र है तो हूटिंग विरोध का ब्रह्मास्‍त्र। नारे और हूटिंग्‍स आपके विशेष अस्‍त्र-शस्‍त्र हैं इसलिये इसके लिये विशेष मूल्‍य प्राप्‍त करना आपका विशेष आधिकार है। यह शक्‍ति सरकार बनाने और गिराने के काम आती है अतः इसका प्रयोग आप संभालकर करें।

प्रथम दो शक्‍तियों का इस्‍तेमाल करने में यदि आप दक्ष हो जाते हैं तो तीसरी शक्‍ति की कलाओं का इस्‍तेमाल करना आप स्‍वतः सीख जायेंगे।

आशा है, बेरोजगारवाद के इस घोषणा-पत्र से दुनिया भर के बेरोजगार, एकता के सूत्र में बंधकर, बेरोजगारवाद की जड़ों को मजबूत करेंगे। अंत में एकबार फिर जोर लगाकर बोलिये, बेरोजगार एकता, जिंदाबाद...।'

000

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 4
  1. akhilesh Chandra Srivastava8:08 am

    ACH CHI rachnao ke liye


    badhaiee

    जवाब देंहटाएं
  2. शायद ध्वनि विस्तारक यंत्र की ध्वनि आशूरीशक्तियों तक नहीं पहुँच पाई एक उच्च श्रेणी का व्यंग

    जवाब देंहटाएं
रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * |

| * उपन्यास *|

| * हास्य-व्यंग्य * |

| * कविता  *|

| * आलेख * |

| * लोककथा * |

| * लघुकथा * |

| * ग़ज़ल  *|

| * संस्मरण * |

| * साहित्य समाचार * |

| * कला जगत  *|

| * पाक कला * |

| * हास-परिहास * |

| * नाटक * |

| * बाल कथा * |

| * विज्ञान कथा * |

* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4041,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,338,ईबुक,193,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3005,कहानी,2255,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,541,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,96,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,345,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,67,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,28,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,242,लघुकथा,1249,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2006,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,709,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,794,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,17,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,84,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,205,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,77,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: कुबेर के 3 व्यंग्य
कुबेर के 3 व्यंग्य
http://lh4.ggpht.com/-Z7K0DxOOQ8Y/UgTk6WkKFRI/AAAAAAAAVdQ/rW21yZpL6jE/clip_image002%25255B8%25255D.jpg?imgmax=800
http://lh4.ggpht.com/-Z7K0DxOOQ8Y/UgTk6WkKFRI/AAAAAAAAVdQ/rW21yZpL6jE/s72-c/clip_image002%25255B8%25255D.jpg?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2013/08/3.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2013/08/3.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ