विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका -  नाका। प्रकाशनार्थ रचनाएँ इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी इस पेज पर [लिंक] देखें.
रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -

पिछले अंक

शशिकांत सिंह 'शशि' का व्यंग्य - पत्र है न कार है फिर भी पत्रकार हैं

साझा करें:

पत्र है न कार है फिर भी पत्रकार हैं कां टेदार वृक्षों में जो स्‍थान बबूल का है , जानवरों में जो अदब सांड की है ; रिश्‍वतखोरों में जो इज्‍जत ...

पत्र है न कार है फिर भी पत्रकार हैं

कांटेदार वृक्षों में जो स्‍थान बबूल का है , जानवरों में जो अदब सांड की है ; रिश्‍वतखोरों में जो इज्‍जत थानेदार की है; कलमजीवियों में वही महत्‍ता पत्रकार की है। पत्रकार अर्थात एक ऐसा जीव जो निहायत कठजीव किस्‍म का होता है। नमस्‍कार को ही पुरस्‍कार मान कर जीता है। शुभ से अधिक , अशुभ में हाजिर रहता है। कहीं गोली चले ; हत्‍या हो ; छापा पड़े ; भ्रष्‍टाचार हो ,रवि और कवि दोना से पहले ही श्रीमान पत्रकार हाजिर हो जाते हैं। मेहनताने की जगह कभी कभी तो केवल ताने से ही काम चलाना पड़ता है। नेताओं और अधिकारियों का ‘प्रेम‘ तो बना ही रहता है।

दिव्‍य दृष्‍टि से देखने से ज्ञात होता है कि पत्रकार प्रजातियों की चार नस्‍लें पायी जाती हैं। प्रथम प्रजाति उन महापुरुषों की है जिनके पास पत्र तो नहीं है लेकिन कार है। इन की तादाद अधिक है। यह प्रजाति आसानी से महानगरों में सुलभ है। कई- कई कारे नौकर चाकर बंगला और कहने भर के लिये पत्र भी जिनकी सूचना जनता को तो नहीं रहती लेकिन नौकरशाहों को रहती है। कितनी प्रतियां बिकती है इसकी लिखित सूचना पी आर ओ के पास तो जरूर रहती है। कई महापुरुष तो ऐसे हैं जिनके पास ऐसे दर्जनों समाचार पत्र हैं जिनको कभी किसी ने किसी स्‍टाल पर नहीं देखा। किसी भी समाचार से मतलब न रहते हुये भी ये पत्र हैं और बड़े सम्‍मानित पत्र माने जाते हैं। सरकारी विज्ञापनों के लिये बड़े मुफीद माने जाते हैं। हमारे ये महारथी इन विज्ञापनों की कमाई पर ही केवल निर्भर हैं , ऐसी बात नहीं हैं। इनके पास ऐसे पत्रकार भी हैं जिनके पास न तो अपनी कमाई का कोई साधन है और न ही बेचारे मेहनत मजदूरी कर के अपना पेट पाल सकते हैं। वे लोग जो गुनाह के तौर पर पढ़ लिख गये , उनको पत्रकार बनने का चस्का लग जाता है। वैसे उत्‍साही लोगों के लिये इनके दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं। ये लोग हमेशा .खबर खोदने के चक्‍कर में लगे रहते हैं। इनके द्वारा खोदी गयी खबरों में से कभी -कभी ऐसा मसाला भी मिल जाता है जिसके बल पर ये महारथी कुछ अतिरिक्‍त माल बना सकते है। प्रभावी पार्टी इनके साथ मिलकर ही सुखी रह सकती है। इन सब लीलाओं से इनकी ख्‍याति बड़े बड़े महिफिलों में रहती है। कलक्‍टर हों या मिनिस्‍टर इनसे दुआ सलाम जरूर करते हैं। यही कारण है कि इनके पास कार तो रहती है लेकिन पत्र नहीं। पत्रकारिता जगत के ये बुर्जुआ माने जाते हैं मगर ऐसी बात बिल्‍कुल नहीं कि इनकी कोई उपयोगिता नहीं है। इनकी बहुत बड़ी सामाजिक उपयोगिता है। किसी भी विषय पर भाषण देने के लिये आप इनसे सम्‍पर्क कर सकते हैं। बड़े ही भाषण- वीर मनुष्‍य होते हैं। यदि आदर्श बातों का संसार में टोटा हो गया हो तो इनकी सेवाएं ली जा सकती हैं। बातों में आदर्श घोलना इन्‍हें खूब आता है। इनके रहते संसार से आदर्शवाद का अंत नहीं हो सकता। यदि कभी इनका पत्रकार अपने पारिश्रमिक की मांग करे तो उसे भाषण देकर ही शांत किया जाता है। मसलन पत्रकारिता मिशन है कमीशन के चक्‍कर में नहीं पड़ना चाहिये। पत्रकारिता तो समाज की ऐसी सेवा है जिसकी तुलना केवल मुनियों की तपस्‍या से ही की जा सकती है। यह समाज का एक कीर्ति स्तंभ है इसके लिये यदि अपनी जेब से भी कुछ लगाना या गलाना पड़े तो चिन्‍ता नहीं करनी चाहिये। बस भाषण सुनते ही इनके वीर लग जाते हैं मिशन पड़ और ये कमीशन पर।

दूसरी प्रजाति उन पत्रकारों की है जिनके पास पत्र तो है पर कार नहीं है। दैनिक ,पाक्षिक ,साप्‍ताहिक आदि नामों से भांति भांति के पत्र निकलते रहते हैं। उसमें लगने वाले सभी लोग पत्रकारिता जगत के सर्वहारा होते हैं। संपादक ; प्रूफरीडर ; सलाहकार संपादक ;कार्यालय संवाददाता ; विशेष संवाददाता आदि नामो से सुशोभित नाना प्रकार के प्राणि इन अखबारों के 'आफिस' में देखे जा सकते हैं। ये आफिस जो होते हैं , इन्‍हें अगर मुर्गी पालन हेतु प्रयोग किया जाये तो भाषा विज्ञानी में उसे दड़बा नाम दे सकता है। चार बाई चार का कमरा जिसमें एक पुराने कम्‍प्‍यूटर के सहारे समाज में क्रांति की लहर दौड़ाने का प्रयास किया जाता है। घर में कर्ज वाले आपके घुसते ही क्रांति मचा सकते हैं मगर आप सारे शहर में अलख जगाते चल रहें हैं। बच्‍चों की स्‍कूल फी बाकी है। राशन वाले का इस महीने का उधारी बाकी है। किसी की शादी में 'न्‍योता' भेजना है। पत्‍नी को सिनेमा ले जाने का वायदा है। बच्‍चों को पिकनिक ले जाना है। मतलब ये कि इतने सारे वायदे हैं और इतने सारे दायित्‍व मगर आपके पास न तो समय हैं न ही पैसा। संवाददाता कभी कभी प्रकाशक के पास अपनी अर्जी लेकर जाते हैं। उन्‍होंने वायदा किया था कि इस जनवरी में 'कुछ न कुछ' बढा देंगे। सबसे बड़ी बात कि आपकी 'कलम' के वे बड़े प्रशंसक भी हैं। उनका मानना है कि आपकी कलम आग उगलती हैं। आप समाज के बहुत बड़े धरोहर हैं। ये सारी बातें तो ठीक है मगर जैसे ही आपने नकद नारायण की बात की उनका रोना चालू हो गया। संसार का सबसे दुखी प्राणि आपके इतने पास था और आपको जानकारी भी नहीं थी। अखबार बिक नहीं रहे। विज्ञापनों का पेमेंट अभी तक नहीं मिला। कितने पेमेंट तो डूब गये। वो तो समाज के लिये कुछ करने का जज्‍बा हैं कि पेपर निकल रहा है नहीं तो कब का बंद हो गया होता। संवाददाता संपादक की ओर देखता है क्‍योंकि जनवरी का वायदा तो उनका भी था। संपादक गर्दन नीची कर लेता है क्‍योंकि अभी थोड़ी देर पहले यही वार्तालाप वह भी प्रकाशक से कर चुका है। कुल किस्‍सा कोताह ये कि वैष्‍णव जन ते तेने कहिये जो पीर परायी जाने रे।

तीसरी श्रेणी उन पत्रकारों की है जिनके बारे में ही शायद किसी महान शायर ने ये पंक्‍तियां फरमायी हैं -

हज़रत बम के घोड़े पर सवार हैं,

पत्र है न कार है फिर भी पत्रकार हैं।

बम का घोड़ा क्‍या है और शायर ने इसका प्रयोग क्‍यों किया है इसे जानना हमारे जैसे कम अक्‍ल मनुष्‍यों का काम नहीं है। हां लेकिन ये महान लोग सवार जरूर रहते हैं। अपनी सायकिल ; स्‍कूटर ; कभी- कभी मोटर सायकिल इत्‍यादि वाहनों पर सवार होकर शहर भर में मंडराते रहते हैं। छपास रोग के सताये हुये ये लोग किसी भी संस्‍थान से पत्रकारिता की डिग्री लेकर टूट पड़ते हैं पत्रकारिता की ओर। बस एक ही मिशन है। शहर भर के लोग जाने कि हम पत्रकार हैं। बमुश्‍किल किसी नवजात पत्र के लिये जुगाड़ भिड़ाकर जा भिड़ेंगे। संपादकों को तो ऐसे ही होनहारों की तलाश होती है। ये खबर तो लायेंगे उल्‍टी सीधी मगर दावा ये कि शहर की सबसे बड़ी खबर है और इसके होने से ही पत्र है। उस न्‍यूज का छपना अनिवार्य है अन्‍यथा श्रीमान नाराज हो जायेंगे। छपने से बेशक दस रुपये ही मिलते हैं मगर है तो 'न्‍यूज'। समाचार छपा नहीं कि लेकर उसे मित्रों और शत्रुओं को दिखाने निकल पड़े। नाते रिश्‍तेदारों में उसकी चर्चा करेंगे ताकि सब लोग जान जायें कि हजरत पत्रकार हैं। अपने खर्चे पर नाचना शायद इसी को कहते हैं। उनको लगता है कि जमाना उन्‍हीं से है। पूरे संसार को सुधारना है। कुछ तो ऐसे भी होनहार और प्रतिभावान मनुष्‍य हैं जो उसी पत्र के सहारे अपनी प्रेमिका को प्रभावित करते हैं। प्रेमिका को क्‍या पता कि उस पत्र को पढने वाले कितने लोग हैं । अपने हीरो को पत्रकार के रुप में देखकर खुश हो जाती है। मगर मामला तब दर्द-ए- नाक हो जाता है जब प्रेमिका किसी होटल में डिनर करना चाहती है। हीरो की जेब में तो नामा होता नहीं है बस तथाकथित नाम होता है। टालमटोल का ही सहारा है। कोई बड़ा आयोजन है। कहीं कोई वीआईपी आने वाला है। कोई गोष्‍ठी होने वाली है। हमारे ये बम के घोड़े पत्रकार जरूर और सबसे पहले पहुंच जायेंगे। कई बार तो ऐसा भी होता है कि उसी आयोजन में पुलिस पकड़कर हजरत को जेल की कोठरी में डाल दे। दिन भर रह कर आ गये तो गनीमत नहीं तो यदि पुलिस लंबी छुट्‌टी पर भेज दे तो घर के लोगों की परेशानी। ऐसा नहीं कि उसके बाद उनकी पत्रकारिता की लत छूट जायेगी। उसके बाद तो इनका बयान और प्रभावी हो जाता है। भई हम तो पत्रकारिता में जेल की हवा भी खा चुके हैं लेकिन हम उन लोगो में से नहीं जो मैदान छोड़ दे , हमारे लिये तो यह एक मिशन है। हम समाज की सेवा के लिये ही पैदा हुये हैं। उसके बाद आप इनके मुंह से आजादी से पहले का कुल किस्‍सा सुन सकते हैं कि कैसे पहले पत्रकार लोग ही आजादी की लड़ाई लड़ते थे। उन दिनों लोगों के लिये पत्रकारिता एक जनसेवा थी अब तो महज धनसेवा है उसके बाद गणेश शंकर विद्यार्थी का नाम तो लेंगे ही लेंगे।

चौथी किस्‍म के जीव वे हैं जो अत्‍यंत दुर्लभ हैं। आप उनकी गणना डायनासेार जैसे जीवों के साथ भी कर सकते हैं। ये श्रेणी है उन महान पत्रकारों की जिनके पास पत्र भी है और कार भी। यानी पत्रकारिता जगत के कर्त्‍ता , धरता ,संहारकर्त्‍ता। इस श्रेणी के ज्‍यादातर प्राणी अब प्रिंट मीडिया को तिलांजलि देकर इलैक्‍ट्रानिक मीडिया में जा घुसे और उनकी वहां भी ठाठ हैं। इन जीवों के पास हुनर और दौलत दोनों हैं। बाप दादों की दौलत तो पहले से थी उपर से सोने पर सोहागा की तरह पत्रकारिता का शौक हो गया। तो साहब कार इनके पिताजी या दादाजी की है मगर पत्र अपना है। इनमें से अधिकांश लोग कुछ दिनों तक पत्रकार रह चुकने के बाद संपादक बन जाते हैं फिर प्रकाशक भी। इनका प्रकाशत्‍व स्‍थायी होता है। संपादकत्‍व क्षणिक। संवाददाता की इनको जब जरूरत पड़ती है तो दो चार कहीं से पकड़ लाते हैं। इन महापुरुषों की अलग किस्‍म की धाक है। यदि ये कभी भूल कर या पत्रकार पकड़ने के लिये दूसरी प्रजातियों मे जा घुसे तो हड़कंप मच जाता है मानो गन्‍ने के खेत में हाथी घुस गया हो। कोई हाथ मिला रहा है तो कोई अपनी बारी के इंतजार में हैं। कोई इनसे अपनी रिश्‍तेदारी साबित करने में लगा है। बता रहा है कि उसकी दादीजी और इन साहबान की दादी जी एक ही गांव की थी यही नहीं इनकी सरकार में भी चलती है। सब लोगों की अपनी अपनी राजनीतिक खिड़की है दरवाजा नहीं क्‍योंकि वहां खड़े होकर तो ये राजनीति का विरोध करते हैं। जितना बड़़ा पत्रकार उतना बड़ा सरोकार । किसी की कांग्रेस से यारी है , तो किसी की भाजपा से दोस्‍ती , कोई सी पी आई का शुभचिन्‍तक है तो कोई इन सब के अलावा किसी तीसरी पार्टी की ओट में है और इन तक पहुंचने का रास्‍ता तलाश रहा है। जब तक ये लोग कलम के लिये बूढ़े और राजनीति के लिये जवान होते हैं तब तक कहीं न कहीं खिचड़ी पक के तैयार रहती है। तुरंत इन्‍हें राजसभा में प्रवेश मिल जाता है। वहां से मंत्री बनकर अपनी यात्रा पूरी करते हैं। जीवन भर आदर्श की बातें तो ये लोग भी करते हैं मगर इनकी बातें लोग गौर से सुनते हैं आखिर ये महानुभाव मंत्री जो बन जाते हैं।

इस प्रकार पत्रकारिता जगत में नाना प्रकार के जीव एक ही जीवमंडल में परस्‍पर शांति और सहिष्‍णुता बना कर अमन से जीते हैं। इनमें भी बड़ी मछली और छोटी मछली का सिद्धांत लागू होता है। ये खाते तो हैं मगर प्‍यार से। छोटी मछली खुद ही बड़ी के पास जाती है और पूरे अदब के साथ कहती है - 'लो दादा मैं आ गया मुझे खा ला। जितनी मर्जी समाचार बेगार में मंगा लो। बस कृपा दृष्‍टि बनाये रखना।' बड़ी मछली खुश हो जाती है। भला कृपादृष्‍टि के कौन से पैसे लगते हैं। खूब बनाये रखते हैं और मजा लेकर भक्षण भी करते हैं। बेगार में पत्रकारिता कराने के बाद जब सामने वाला अपनी कीमत मांगने की हिम्‍मत करे उसे बाहर का रास्‍ता दिखा देते हैं। इसी पर टिका है पूरी पत्रकारिता का 'इकोसिस्‍टम'।

शशिकांत सिंह 'शशि'

जवाहर नवोदय विद्यालय

शंकरनगर, नांदेड़ 7387311701

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर: 4
रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

---प्रायोजक---

---***---

---प्रायोजक---

---***---

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1$h=100

प्रायोजक

--***--

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच कर पढ़ें : ~

|* कहानी * || * उपन्यास *|| * हास्य-व्यंग्य * || * कविता  *|| * आलेख * || * लोककथा * || * लघुकथा * || * ग़ज़ल  *|| * संस्मरण * || * साहित्य समाचार * || * कला जगत  *|| * पाक कला * || * हास-परिहास * || * नाटक * || * बाल कथा * || * विज्ञान कथा * |* समीक्षा * |

---***---



---प्रायोजक---

---***---

|आपको ये रचनाएँ भी पसंद आएंगी-_$type=three$count=6$src=random$page=1$va=0$au=0$h=110$d=0

प्रायोजक

----****----

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4099,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,341,ईबुक,196,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,262,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,112,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3063,कहानी,2275,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,542,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,31,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,111,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,346,बाल कलम,25,बाल दिवस,4,बालकथा,68,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,16,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,29,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,245,लघुकथा,1271,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,19,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,340,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,68,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2014,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,714,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,803,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,18,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,92,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,212,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: शशिकांत सिंह 'शशि' का व्यंग्य - पत्र है न कार है फिर भी पत्रकार हैं
शशिकांत सिंह 'शशि' का व्यंग्य - पत्र है न कार है फिर भी पत्रकार हैं
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2013/08/blog-post_7082.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2013/08/blog-post_7082.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ