प्रमोद यादव का हास्य-व्यंग्य : चलो दिलदार चलो...

SHARE:

हास्य-व्यंग्य “ चलो दिलदार चलो...” / प्रमोद यादव बचपन में जब कभी किसी रोबदार, मूंछदार थानेदार को देखता तो मन ही मन सोचता- बड़ा होकर ‘थाने...

हास्य-व्यंग्य

“ चलो दिलदार चलो...” / प्रमोद यादव

clip_image002

बचपन में जब कभी किसी रोबदार, मूंछदार थानेदार को देखता तो मन ही मन सोचता- बड़ा होकर ‘थानेदार’ बनूँगा. तब के माँ-बाप बच्चों को आज की तरह इंजीनियर या डाक्टर बनाने की नहीं सोचते थे बल्कि थानेदार बनाने की मंशा रखते. इसके पीछे ‘लाजिक’ थानेदार की कमाई कतई नहीं होता , केवल ‘पद का रौब’ ही ज्यादा काम करता. तब का थानेदार दो सौ रुपल्ली के वेतन में भी हजारों पर भारी पड़ता ( रौब के मामले में ) उन दिनों तो हवलदार का भी काफी जलवा हुआ करता..हमेशा वे हलुवे में होते...

मन बड़ा ही चंचल होता है..और बचपन में तो कुछ ज्यादा ही...पल-पल में उछलता-कूदता बदलता रहता है..कभी शहर- सेठ के ठाटबाट देख भविष्य में ‘मालदार’ बनने की इच्छा पनपती तो कभी स्कूल के किसी दिमागदार विद्यार्थी को पुरस्कार पाते देख जगदीशचंद्र बसु बनने को मन करता..कभी किसी फर्राटेदार दौड़ लगाते किसी खिलाड़ी को देख ‘भाग मिल्खा भाग’ जैसा मन हो जाता.. तो कभी किसी लालबत्ती वाली गाड़ी में लदे मंत्री को देख सिर में टोपी पहनने को दिल करता..

बड़ी ही अजीब बात है कि बचपन में हर चीज कुछ जरुरत से ज्यादा बड़ी दिखती थी ..मसलन कि मेरे मोहल्ले में उन दिनों श्यामलाल गुप्ता की एक छोटी–सी दूकान थी जो काफी बड़ी लगती..जरुरत की हर छोटी-बड़ी चीज मै वहीँ से खरीदता..पेन्सिल,कलम, कापी,रजिस्टर,बिस्कुट,चाकलेट,चना,बेर,मुरकू..आदि-आदि..दिन में कई-कई बार दौड़ लगाता..उसके लंचबॉक्सनुमा गल्ले को देख आँखे फटी की फटी रह जाती..मुंह तक सिक्कों से अटा होता..6x6 के बाथरूमनुमा दुकान में पसरा श्यामलाल हमेशा मुझे धन्ना सेठ लगता..और उसकी दूकान सुपर बाजार.. आज की तारीख में भी वही दुकान है.. वही श्यामलाल है. वही गल्ला है..पर सब कुछ गरीब-गरीब लगता है..उसके गल्ले में जितने सिक्के होते हैं,उससे ज्यादा तो सेक्टर नाईन मंदिर के बाहर बैठे भिखारी के आगे बिछे पंछे में होता है..खैर..विषय पर लौटता हूँ..बातें बचपन की हो रही थी..

जैसे-जैसे बचपन बीतता गया..मर्ज बढ़ता गया..जिंदगी की हकीकतों के अनेक जादुई दरवाजे ‘सिम-सिम’ कर खुलने लगे..तब मालुम हुआ कि कोई थानेदार,तहसीलदार,जागीरदार,तालुकदार या मालदार यूं ही नहीं बन जाता..उसके पीछे काफी मेहनत-मशक्कत , पढाई-लिखाई और घिसाई होती है..घर से रोज नसीहतें मिलती कि कोई भी ‘दार’ (रसूखदार,दमदार,मालदार,इज्जतदार,थानेदार,जागीरदार,तहसीलदार) बनना हो तो सबसे पहले ईमानदार बनो..रास्ता जरुर कुछ अडचनों भरा , घुमावदार होगा पर ‘मलाईदार’ जाब पाना है तो एक तरह से इसे ‘मस्ट’ समझो....अन्यथा जमादार,चौकीदार या झाड़ूदार बनना तो तय है ही....घरवाले अक्सर एक लाइन का एक मुहावरा ( ताना) सुनाते (मारते) –“ पढोगे लिखोगे बनोगे नवाब,खेलोगे कूदोगे बनोगे खराब” आज की तारीख में सब उल्टा-पुल्टा हो गया है..खेलने-कूदने वाले ‘ भारत-रत्न ‘ झोंक रहे हैं और पढ़े-लिखे लोग भाड़..

पढने-लिखने से ख्याल आया कि पढ़ने-लिखने के दिनों में सबसे बोर काम होता है-पढना-लिखना..इस बात को लगभग सभी बच्चे स्वीकारेंगे.. केवल दो प्रतिशत बच्चे ही माँ की कोख से पाकेट-डिक्शनरी लिए पैदा होते है..पढातू होते हैं..बाकी सारे तो माँ-बाप की तुतारी के डर से ही पढ़ते हैं..पढ़ते क्या हैं,केवल छलते हैं..झूठ क्यूं बोलूं – मैंने भी छला....घरवाले, नातेदार, रिश्तेदार सबने ख़बरदार किया कि पढ़-लिखकर इज्जतदार बनूँ..पर मार्क्स इतने बुरे थे कि सिवा बेइज्जती के कुछ न हुआ ..तब वे मेरे अन्दर एक ‘दुकानदार’ तलाशने लगे..तब ऐसा ही कायदा था..पढने-लिखने से चूके तो दुकानदार

बनना तय..दूकानदार से तात्पर्य ये नहीं कि मेन मार्केट में कांच के चमचमाते दुकान में बैठ टी.वी.-फ्रिज बेचे या किसी मल्टीस्टोरी माल में लिवाइस जींस या कूपन का काउंटर खोलकर बैठे ..तब दूकान का अर्थ केवल ‘किराने की दूकान’ होता था..मेरे विषय में भी यही सोचा गया..पर थर्ड डिवीजन मेट्रिक करने के बाद मैंने कालेज पढने की जिद की तो दो-तीन सालो के लिए मेरा ‘किराना-मर्चेंट’ बनना रद्द हो गया..

कालेज पहुचते ही कलेजे को ठंडक मिली..एक हसीं और संगीन हादसे का शिकार हो गया..एक चाँद जैसे मुखड़े वाली लड़की को दिल दे दिलदार हो गया..वह अंतिम क्षनो तक ( ससुराल जाते तक ) मेरे प्रति वफादार रही और मैं उसके प्रति..आज के लैला-मजनुओं की तरह ना उसने मुझे कभी ‘चीट’ किया ना मैंने उसे..अच्छा हुआ उस दौर में सेलफोन नहीं था नहीं तो हमें भी ( खासकर मुझे ) बेईमान बनने में समय नहीं लगता..आज के युग में लड़कियों के पास कई ‘आप्शन’ होते हैं..थोडा सा भी आपसी तकरार हुआ या आपने गुस्सा दिखाया कि दूसरे दिन ‘हीर’ किसी दूसरे ‘रांझे’ के बाइक के पीछे मुंह लपेटे सरपट भागती दिखेगी..फिर ‘ ढूंढते रह जाओगे’ जैसी स्थिति हो जाती है..हमारे जमाने में ऐसा नहीं था...रूठने-मनाने में ही सबसे बढ़िया टाईम-पास होता.. उन दिनों एक गाना भी काफी लोकप्रिय था - ‘ तुम रूठी रहो,मैं मनाता रहूँ कि इन अदाओं में और प्यार आता है ’ हमारे दौर में किसी के पास कोई ‘आप्शन’ नहीं होता था..’ जीना यहाँ, मरना यहाँ ‘ जैसी स्थिति होती..एक का एक पर ही मर-मिटने का रिवाज था...हालाकि कहने की बातें हैं,मरता-मिटता कोई न था..उम्र होते ही लड़की ब्याह दी जाती..और कभी-कभी ‘अफेयर’ के ‘आम’ हो जाने से कम उम्र में ही ब्याह दी जाती..और दिलदार महोदय दोनों ही स्थितियों-परिस्थितियों में ‘ मैं कहीं कवि ना बन जाऊं तेरे प्यार में ऐ कविता ’ कहते-कहते आगे का रास्ता( जो माता-पिता तय करते )नाप लेते..

‘ चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो..’गीत आने के चार साल पहले ही मेरी पारो ‘पार’ हो गई थी..मतलब कि ससुराल चली गई थी..इसलिए चाँद के उस पार क्या है,नहीं जान सका ..अब तो खुद चाँद हो गया हूँ...वह भी दागदार..छह बच्चों का पिता जो बन गया हूँ.. खैर..दिलदार के बाद चंद दिनों के लिए दुकानदार बना..फिर इसके चलते (दुकान के न चलते) कर्जदार भी बना..कईयों से उधार लिया फिर भी उद्धार न हुआ अलबत्ता बहुतों के लिए गद्दार बन गया . अच्छे-बुरे सभी दिनों में मेरा राजदार व सुख-दुःख का हिस्सेदार रही मेरी अभागी , सीधी-सादी पत्नी हर पल मुझे जी-जान से धारदार बनाने की कोशिश की ,.पर होता वही है जो मंजूरे-खुदा होता है..समझदार होते हुए भी जिंदगी में कोई धमाकेदार काम न कर सका..सिवा छह बच्चे पैदा करने के....दमदार,असरदार बनने के चक्कर में दर-दर भटक तार-तार हुआ..

क्या ही अच्छा होता कि किसी सरदार के घर में पैदा होता..ना कोई थानेदार,मालदार,तहसीलदार बनने का चक्कर होता ना ही दिलदार होने का कोई दर्द....सरदार तो जन्मजात रौबदार,पानीदार,वफादार,ईमानदार,इज्जतदार,जानदार,शानदार होते हैं..इन्हें कुछ बनने के लिए कुछ भी बिगाड़ना नहीं पड़ता,,मैंने तो कुछ बनने के फेर में सब कुछ बिगाड़ डाला..जिंदगी को जायकेदार की जगह बदबूदार बना डाला..अब तो केवल उपरवाले के दीदार की तमन्ना है..और उससे विनती है कि अगले जनम में किसी सरदार के घर पैदा कर मुझे आल इन वन बनाए...’दिलदार वाला चेप्टर’ इसी जनम वाला रखे तो आभारी रहूँगा.. बड़ी सोणी लड़की थी वो....जानता हूँ , अगले जनम में भी वो चाँद के उस पार जाने के पहले ही पार हो जायेगी...फिर भी..कोशिश होगी कि अगली बार उसके कानों में गुनगुना सकूँ- ‘ चलो दिलदार चलो ..चाँद के पार चलो..’ तैयार होना न होना उसकी मर्जी.

XXXXXXXXXX

-प्रमोद यादव

दुर्ग, छत्तीसगढ़

मोबाइल- 09993039475

.

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,550,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,141,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,32,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,152,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,23,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,367,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: प्रमोद यादव का हास्य-व्यंग्य : चलो दिलदार चलो...
प्रमोद यादव का हास्य-व्यंग्य : चलो दिलदार चलो...
http://lh3.ggpht.com/-wfKl4zAZEwM/UvscJCpLAbI/AAAAAAAAXcQ/QyqrOWk7-P4/clip_image002_thumb.jpg?imgmax=800
http://lh3.ggpht.com/-wfKl4zAZEwM/UvscJCpLAbI/AAAAAAAAXcQ/QyqrOWk7-P4/s72-c/clip_image002_thumb.jpg?imgmax=800
रचनाकार
https://www.rachanakar.org/2014/02/blog-post_12.html
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/
https://www.rachanakar.org/2014/02/blog-post_12.html
true
15182217
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content