पुस्तक समीक्षा : बूँद-बूँद अहसास (काव्य संग्रह)

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समीक्षा बूँद – बूँद अहसाह ( काव्य संग़्रह) डॉ. मालिनी गौतम की दिल को छू जाने वाली पुस्तक ‘बूँद-बूँद अहसास’ को देखने का अवसर मिला। इस पुस्...

समीक्षा

बूँद बूँद अहसाह (काव्य संग़्रह)

डॉ. मालिनी गौतम की दिल को छू जाने वाली पुस्तक ‘बूँद-बूँद अहसास’ को देखने का अवसर मिला। इस पुस्तक में चालीस मनमोहक कविताएँ हैं। ये कविताएँ क्या हैं, लगता है जैसे दिल की चालीस धड़कनें हैं, मन के चालीस दृष्टिकोणों का आत्मकथ्य है या फिर बुद्धि की चालीस परतों से निकला सारगर्भित सत्य है। एक हथेली पर रखा हुआ समाज और उसको देखती हुई पारखी आँखें और फिर उन अहसासात को लिखते हाथ-----बस यही है पुस्तक ! यही है कविताओं का सार और यही है विदूषी कवयित्री का दिल को छूने वाला कारनामा !!

जीवन का पक्ष जैसे स्वयं मुखरित है। हर्ष है इसमें, उल्लास है, वेदना है, पीड़ा है, कहीं स्नेह से लबरेज़ अनुभूति है, तो कहीं नयनों से छलकते हर्ष के आँसू हैं तो कहीं वही आँसू पीड़ा की तीव्रता को प्रदर्शित करते नायक बन जाते हैं। समाज को लें, तो समाज की धड़कनें, इन कविताओं में बोलती हैं, आँखें समाज को निहारतीं हैं, ह्रदय समाज के भावों, विचारों या कार्यकलापों को दर्शाता आइना बन जाता है । प्रकृति को लें तो इन कविताओं में शरद की ठंडक है, गर्मी का अहसास है, तो वर्षा का स्नेह भरा चुम्बन है। जीवन की रूपरेखा, इस से बढ़कर और क्या होगी कि पढ़ते जाइये और कविता के हर पक्ष को अपने अंत:करण में उतारते जाइये। सारे काव्यों में कवयित्री कहीं प्रकृति का अंग प्रतीत होती हैं, तो कहीं समाज की सार्थकता का अनूठा अंग ! कहीं मानवता का स्पर्श प्रतीत होती हैं तो कहीं समाज के ह्रदय की धड़कनें । यह श्रेष्ठता उन को बहुत सारे लोगों से आगे ले जाती है। एक बार पुस्तक पढ़ना शुरू कर दीजिये, फिर पढ़ना बन्द करने को दिल ही नहीं करता। पाठक मंत्र मुग्ध सा बस पढ़ते जाता है। कमाल की सृजनात्मकता है । कमाल की निरंतरता है। कहीं भावों तथा विचारों का मिलन है तो कहीं प्रवाह तथा सार्थकता का चरम बिन्दु है।

पुस्तक की पहली कविता, ‘एक पाती जीवनदात्री के नाम’ में विदूषी कवयित्री जैसे माँ की स्वयं श्वास बन जाना चाहती है, उसकी धड़कन बन जाना चाहती है और जैसे अंतर की ध्वनी फूट पड़ती है :-

तुम फिर क्यों नहीं बुला लेतीं

मुझे अपने पास........?

कवयित्री जीवन से भी मुंह नहीं मोड़ती और जीवन के हर मोड़ को अपनाना चाहती है। वह न अंधकार से डरती है ,न प्रकाश से रोमांचित होती है। वह तो जीवन का हर पक्ष निहारना चाहती है और उसी का अंश बन जाना चाहती है। कभी वह जिन्दगी को ‘गर्म तवे पर छन्न से गिरती पानी की बूँद’ की तरह महसूस करती है तो कभी ‘किसी परदानशीं’ की आँखें बन जाना चाहती है। शायद किसी किनारे की तलाश हो, शायद प्रेम तथा स्नेह की प्रतीक्षा हो:- और शायद यही कारण है कि वह अपनी याद को पुकार उठती है:-- याद/चली आती है/बिन बुलाये मेहमान की तरह !

चाहे कितना ही आगे बढ ले, कवयित्री समाज को भूल नहीं पाती। कभी बचपन, गरीबी तथा असमर्थता को दर्शाती है तो कभी ‘नकाब’ के नाम से समाज के कोमल अंग को याद कर लेती है। यह कोमल अंग आधुनिकता की धरती पर खड़ा है। यह पौराणिक चेष्टा नहीं है। यही कारण है कि स्वयं सब कुछ जानते हुए कवयित्री के साहस की प्रशंसा में सिर झुक जाता है:-

कि नही चलेगी वह/किसी राम के बताये हुए पथ पर

या फिर:-

कर लिया है उसने निश्चय/कि वह स्वयं ही मारेगी/अपने हिस्से के स्वर्ण मृग को !

कवयित्री स्वयं सोचते-सोचते जब भावुक हो जाती है तो उसे लगता है जैसे वह जिस से बात करना चाहती है, वह सामने हो कर भी सामने नहीं है। एक निष्ठुरता सी दिखती है वहाँ :

प्रीत का हर पल था मेरे लिये/एक इबादत!/तुम आगे बढ़ते गये/उसे अपने पैरों तले रौंद....

यही हमारा समाज है। प्रत्येक क़दम सोच समझ कर रखते हैं परंतु फिर भी हम जो चाहते हैं, वह नहीं मिलता। समाज तथा मानव-मन की यह तस्वीर ही कवयित्री को श्रेष्ठता प्रदान करती है। ‘तलाश’ में कितना बड़ा सत्य दिखलाया गया है:

मैं तुम्हे ढूँढती रही/ताजमहल के गुम्बदों में/अजंता की गुफाओं में/साँची के स्तूपों में

कवयित्री स्त्री का यथार्थ भी सामने रखती हैं:

क्योंकि देवियाँ भी क्या कभी बोलती हैं?/वे तो त्याग, समर्पण, प्रेम/

और सहनशीलता की मूर्ति होतीं हैं!

स्त्री का चित्रण आगे और भी निखर कर आया है। ‘लड़की” नामक कविता में जैसे स्त्री के मन में उठते भाव, दबे या दबते भाव, पत्थर सी बनी भावनाएँ, सिमटती सी संवेदनाएँ बार-बार पाठक को उद्वेलित कर जाती हैं। स्त्री का चित्रण कभी स्त्री के कंधों पर रखा गया है, कभी ‘लड़की’ की नाजुक हथेलियों पर तो कभी माँ के स्नेह भरे आँचल पर ! कवयित्री हर जगह सफल रही हैं । स्वयं स्त्री होते हुए, उनने स्त्री को जागरुकता का सन्देश बार-बार दिया है। स्त्री का प्रेम, उसकी ममता, उसके रिश्ते ,उसका स्नेह तथा स्त्री का प्रेम, उसकी ममता, उसके रिश्ते ,उसका स्नेह तथा आदर, साजन से मिलने की आशा, वेदना-पीड़ा तथा सपनों की हक़ीक़त को दर्शाने में कवयित्री ने कहीं भी शब्दों की कंजूसी नहीं की है । यही कारण है कि वह कितने विश्वास से कह गई हैं:-

जब-जब गहराई में दबे बीज को/मिलेगी हवा, मिट्टी, पानी और/

अनुकूल वातावरण/हरी कोंपलें फिर से फूटेगीं...........

पुस्तक की सारी कविताएँ ह्रदय से निकली संवेदनाएँ प्रतीत होती हैं। बादल की तरह कभी दर्द, वेदना या टीस उमड़-घुमड कर आती है तो कभी बादलों में प्रकाश की किरण भी दिखती है शर्माती सी, मगर बादलों में घिरी, बादलों में डरी सी----- परंतु फिर भी कवयित्री का प्रयास प्रशंसा का अधिकारी है। यह उनके अहसास का मजमूआँ है जो बूँद-बूँद कर एकत्रित हुआ है और हर पाठक को प्रभावित करता है। पूरी काव्य कृति में उपमुक्ता, सरसता, स्वाभाविकता, सजीवता के गुण एक साथ मिलते हैं। कठिन शब्दों से बचा गया है। भाषा में प्रवाह है। व्याकरण के प्रति निष्ठा दिखाई गई है। कविताएँ समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं । इसलिये उनमें हर्ष-विषाद, जन्म-मृत्यु, हिताहित, उत्कंठा आदि तत्व जागरूक हैं। जिजीविषा की प्रबल अभिलाषा ही जैसे उनके मूल आधार में है। उपयोगितावाद, नैतिकतावाद तथा सौन्दर्यवाद स्थान स्थान पर दृष्टिगोचर होता है। लक्ष्यार्थ, व्यंग्यार्थ तथा मुख्यार्थ साक्षात वैचारिकता का धरातल प्रस्तुत करते हैं। हमारी शुभकामनाएँ कवयित्री के साथ हैं आशा है भविष्य में भी हमें उनसे श्रेष्ठ तथा लाभप्रद साहित्यिक कृतियाँ मिलती रहेगीं ।

बैकुठंनाथ

 

पुस्तक का नाम- बूँद-बूँद अहसास (काव्य-संग्रह)

लेखिका- डॉ. मालिनी गौतम

प्रकाशन-अयन प्रकाशन, दिल्ली

मूल्य-70 रूपये

प्रथम संस्करण-2014

 

समीक्षक

बैकुठंनाथ

 

बोपल, अहमदाबाद-380058

गुजरात

मो.09725602734

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आत्मकथा,1,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,4290,आलोक कुमार,3,आलोक कुमार सातपुते,1,आवश्यक सूचना!,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,374,ईबुक,231,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,269,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,113,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,3240,कहानी,2361,कहानी संग्रह,247,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद 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तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,2,बाल उपन्यास,6,बाल कथा,356,बाल कलम,26,बाल दिवस,4,बालकथा,80,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,20,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,31,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,288,लघुकथा,1340,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,241,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,20,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,378,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,79,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,2075,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,730,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,847,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,21,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,98,साहित्यम्,6,साहित्यिक गतिविधियाँ,216,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,59,हास्य-व्यंग्य,78,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi 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रचनाकार: पुस्तक समीक्षा : बूँद-बूँद अहसास (काव्य संग्रह)
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